जी-20 के 'लोगो' में कमल क्यों, कांग्रेस ने कहा- मोदी और बीजेपी की बेशर्मी

    • Author, इक़बाल अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारत की जी-20 की अध्यक्षता के लोगो में कमल को शामिल करने पर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने आपत्ति जताई है.

पार्टी महासचिव और मीडिया प्रभारी जयराम रमेश ने एक ट्वीट कर कहा, “70 साल पहले नेहरू (भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू) ने कांग्रेस के झंडे को भारत का झंडा बनाने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था.

आज बीजेपी का चुनाव चिन्ह भारत की जी-20 की अध्यक्षता का आधिकारिक लोगो बन गया है. यह चौंकाने वाला ज़रूर है, लेकिन अब हमलोग यह जान गए हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी बेशर्मी से ख़ुद का प्रचार करने का कोई भी मौक़ा नहीं गंवाएगी.”

पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने ट्वीट कर कांग्रेस का जवाब दिया.

शहज़ाद पूनावाला ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करने के लिए राष्ट्रीय प्रतीकों और फूल का विरोध क्यों?”

उन्होंने कांग्रेस के नेताओं पर हमलावर होते हुए पूछा, “आगे क्या कमलनाथ (मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री) अपने नाम के कमल हटा देंगे और राजीव शुक्ला (पूर्व केंद्रीय मंत्री) अपने नाम से राजीव शब्द हटा देंगे?”

मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ़्रेन्स के ज़रिए भारत की जी-20 की अध्यक्षता के लोगो, थीम और वेबसाइट का अनावरण किया था.

इस लोगो में कमल का फूल भी शामिल है.

मोदी ने लोगो के बारे में कहा, “जी-20 का ये लोगो केवल एक प्रतीक चिन्ह नहीं है. यह एक संदेश है, यह एक भावना है, जो हमारी रगों में है. यह एक संकल्प है जो हमारी सोच में शामिल रहा है. इस लोगो और थीम के ज़रिए हमने एक संदेश दिया है.”

मोदी ने आगे कहा, “युद्ध से मुक्ति के लिए बुद्ध के जो संदेश हैं, हिंसा के प्रतिरोध में महात्मा गांधी के जो समाधान हैं. जी-20 के ज़रिए भारत उनकी वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊर्जा दे रहा है.”

उन्होंने कमल को भारत की पौराणिक धरोहर क़रार देते हुए कहा, “इस लोगो में कमल का फूल, भारत की पौराणिक धरोहर, हमारी आस्था, हमारी बौद्धिकता को चित्रित कर रहा है.”

मोदी ने कहा कि कमल का प्रतीक आशा का प्रतिनिधित्व करता है. उन्होंने कहा, “इस समय दुनिया विनाशकारी महामारी (सदी में एक बार होने वाली), संघर्ष और बहुत सारी आर्थिक अनिश्चितता के बाद के प्रभावों से गुज़र रही है. जी-20 के लोगो में कमल का प्रतीक इस समय में आशा का प्रतिनिधित्व करता है.”

मोदी ने कमल के ज़रिए पूरी दुनिया को संबोधित करते हुए कहा, “कमल पर सात पंखुड़ियां, विश्व के सात महाद्वीपों और संगीत के सात स्वरों का प्रतिनिधित्व करती हैं. जी-20 का यह लोगो दुनिया में सद्भाव लाएगा.”

जी-20 के लोगो में ‘कमल’ का विरोध

मोदी और बीजेपी चाहे कमल के बारे में जो भी कहें, लेकिन जी-20 के लोगो के अनावरण के बाद से ही सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा शुरू हो गई थी. जाने माने लेखक सलील त्रिपाठी ने सवाल उठाते हुए ट्वीट किया, “किसी राजनीतिक पार्टी का चुनाव चिन्ह (कमल) जी-20 बैठक का लोगो कैसे हो सकता है. क्या जी-20 में शामिल बाक़ी के 19 देश मोदी का अनुमोदन कर रहे हैं अगर हां तो साफ़ कहें और अगर नहीं तो वो भी कहें.”

पत्रकार पामेला फ़िलिपोस ने भी लोगो में कमल के फूल को शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई.

उन्होंने ट्वीट किया, “प्रधानमंत्री हमेशा चुनावी मोड में होते हैं. इसलिए मुझे कोई हैरानी नहीं हुई जब उन्होंने जी-20 के लोगो का अनावरण किया जिसमें खिलता हुआ कमल प्रमुखता से दिखा.”

भारत को मिलेगी जी-20 की अध्यक्षता

जी-20 दुनिया के प्रमुख विकसित और विकासशील देशों का समूह है.

जी-20 का गठन वर्ष 1999 के दशक के अंत के वित्तीय संकट की पृष्ठभूमि में किया गया था, जिसने विशेष रूप से पूर्वी एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को प्रभावित किया था.

उस समय इसका उद्देश्य मध्यम आय वाले देशों को शामिल करके वैश्विक वित्तीय स्थिरता को सुरक्षित करना था.

जी-20 दुनिया की 60 फ़ीसद आबादी, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 85 प्रतिशत, वैश्विक व्यापार का 75 प्रतिशत से अधिक और विश्व की लगभग दो-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करता है.

भारत शुरू से इसका सदस्य रहा है.

जी-20 समूह में भारत के अलावा अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, कनाडा, चीन, फ़्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ़्रीका, तुर्की, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) शामिल हैं.

इंडोनेशिया जी-20 का मौजूदा अध्यक्ष है.

इंडोनेशिया के बाली में 15-16 नवंबर को जी-20 शिखर सम्मेलन होगा जिसमें मोदी समेत समूह के शीर्ष नेता शामिल होंगे.

इस सम्मेलन के बाद भारत एक दिसंबर से जी-20 की अध्यक्षता का पदभार ग्रहण करेगा. भारत 30 नवंबर, 2023 तक इसकी अध्यक्षता करेगा और इसीलिए 2023 में होने वाले शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की ज़िम्मेदारी भारत की होगी.

भारत ने 2023 का जी-20 शिखर सम्मेलन भारत प्रशासित कश्मीर में कराने का फ़ैसला किया था और इसके लिए जम्मू-कश्मीर सरकार ने जून में एक पाँच सदस्यीय समिति का गठन भी किया था.

लेकिन इसको लेकर विवाद पैदा हो गया था.

पाकिस्तान, चीन, तुर्की और सऊदी अरब ने इसको लेकर आपत्ति जताई थी. बाद में भारत ने इसे दिल्ली में कराने का फ़ैसला किया है.

भारत, जी-20 अध्यक्ष के तौर पर बांग्लादेश, मिस्र, मॉरीशस, नीदरलैंड्स, नाइजीरिया, ओमान, सिंगापुर, स्पेन और संयुक्त अरब अमीरात को मेहमान देशों के रूप में दावत देगा.

जी-20 का कोई स्थायी सचिवालय नहीं है.

एजेंडा और कार्य का समन्वय जी-20 देशों के प्रतिनिधि करते हैं जिन्हें 'शेरपा' कहा जाता है.

शेरपा वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर के साथ मिलकर काम करते हैं.

भारत को मिलेगी अहम ज़िम्मेदारियां

जी-20 की अध्यक्षता के अलावा भारत के पास शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की अध्यक्षता भी आ गई है और अगले साल भारत में इसका शिखर सम्मेलन होगा.

दिसंबर 2022 में भारत सुरक्षा परिषद की भी अध्यक्षता करेगा. भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फ़िलहाल अस्थायी सदस्य है.

यह भी कहा जा रहा है कि भारत को जी-7 में शामिल किया जा सकता है.

जी-7 आर्थिक रूप से दुनिया के सात ताक़तवर देशों का संगठन है.

इस साल जून महीने में जर्मनी में हुई जी-7 की शिखर बैठक में भारत ने इसमें मेहमान देश की भूमिका निभाई थी.

जी-7 में जर्मनी ने भारत को अतिथि देश के तौर पर बुलाया था.

सितंबर के महीने में भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़ दुनिया की पाँचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया था.

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