कनाडा: सांसद चंद्रा आर्या ने क्यों कहा 'कनाडा को दूषित कर रहे हैं ख़ालिस्तानी'

चंद्रा आर्या

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इमेज कैप्शन, चंद्रा आर्या कनाडा में नेपियन से हाउस ऑफ कॉमन्स के सदस्य हैं.

कनाडा में भारतीय मूल के सांसद चंद्रा आर्या को ख़ालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू की तरफ़ से एक वीडियो संदेश जारी कर धमकी दी गई है.

इससे पहले चंद्रा आर्या ने कनाडा में एक हिंदू मंदिर को नुकसान पहुँचाए जाने की घटना की आलोचना की थी.

सांसद चंद्रा आर्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में इसकी जानकारी देते हुए कहा है, “सिख्स फॉर जस्टिस के अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो जारी करके मुझे और मेरे कनाडाई दोस्तों को भारत चले जाने के लिए कहा है.”

अपनी पोस्ट में चंद्रा आर्या ने कहा है, “हमारे देश को ख़ालिस्तानी अतिवादी दूषित कर रहे हैं. ये कनाडाई चार्टर ऑफ राइट्स के तहत मिली आज़ादी की गारंटी का ‘दुरुपयोग’ कर रहे हैं.”

गौरतलब है कि सोमवार को कनाडा के एडमोंटोन में बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर की दीवारों पर भारतीय प्रधानमंत्री और चंद्रा आर्या के ख़िलाफ़ नारे लिखे गए थे.

उस घटना का हवाला देते हुए आर्या ने ख़ालिस्तान समर्थकों की ओर से अन्य जगहों पर घृणा और हिंसा का ज़िक्र करते हुए लिखा है, “हम हिंदू दुनिया के हर हिस्से से इस अद्भुत देश में आए हैं. हम दक्षिण एशिया के हर देश से, अफ्रीका और कैरीबिया के कई देशों से और दुनिया के कई हिस्सों से यहां आए हैं. कनाडा हमारी धरती है. हमने कनाडा के सामाजिक-आर्थिक विकास में अथक योगदान दिया है. हिंदू संस्कृति और विरासत के अपने लंबे इतिहास के साथ, हमने कनाडा के बहु-सांस्कृतिक ढांचे को और बेहतर बनाया है.”

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मंदिर की घटना पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल

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इमेज कैप्शन, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कनाडा की घटना पर चिंता जताई है.

गुरुवार को अपनी साप्ताहिक ब्रीफ़िंग के दौरान, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने कनाडा के अधिकारियों के साथ मंदिर को नुकसान पहुँचाए जाने का मुद्दा उठाया है.

जायसवाल ने कहा, “हम स्वामीनारायण मंदिर में लिखे गए नारों की आलोचना करते हैं और उम्मीद करते हैं कि स्थानीय अधिकारी इस घटना के लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करेगी. हाल के दिनों में कनाडा में इस तरह की कई घटनाएं हुई हैं और ऐसा करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं हुई है.”

उधर हिंदू फोरम कनाडा ने सांसद चंद्रा आर्या के ख़िलाफ़ गुरपतवंत सिंह पन्नू के बयान की आलोचना की है.

हिंदू फोरम कनाडा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा है, “सांसद आर्या ने स्वामीनारायण मंदिर और घृणा की अन्य घटनाओं की बिल्कुल सही आलोचना की है. ये किसी के लिए भी बर्दाश्त से बाहर है कि कनाडा में जो लोग घृणा और धमकी के ख़िलाफ़ खड़े होकर शांति की पैरवी कर रहे हैं, उनसे कहा जाए कि अपने देश लौट जाओ.”

संस्था ने कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो को संबोधित करते हुए लिखा है, “ ये हालात, कनाडा के एक निर्वाचित सांसद के लिए सीधा ख़तरा है. कनाडा में घृणा, हिंसा और भेदभाव के मुद्दे पर रुख़ को देखते हुए, आपकी लगातार ख़ामोशी चिंताजनक है.”

कौन हैं चंद्रा आर्या?

कनाडा में भारतीय मूल के सांसद चंद्रा आर्या को मंदिर में तोड़फोड़ की घटना के बाद ख़ालिस्तानी चरमपंथियों की तरफ़ से धमकी मिली है.

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इमेज कैप्शन, कनाडा में सांसद चंद्रा आर्या को मंदिर में तोड़फोड़ की घटना के बाद ख़ालिस्तानी चरमपंथियों की तरफ़ से धमकी मिली.

चंद्रा आर्या कनाडा में नेपियन से हाउस ऑफ कॉमन्स के सदस्य हैं. उन्होंने इंजीनियरिंग में बैचलर की डिग्री और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर की डिग्री ली है.

राजनीति में आने से पहले, वे हाई-टेक्नोलॉजी सेक्टर में एक्ज़ीक्यूटिव के तौर पर काम कर रहे थे. चंद्रा आर्या नेपियन में अपनी पत्नी संगीता के साथ रहते हैं, जो ओटावा कैथोलिक स्कूल बोर्ड में काम करती हैं.

उनका एक बेटा है जिसका नाम सिड है, जो पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं.

गुरपतवंत सिंह पन्नू और उनकी अलगाववादी संस्था

भारत में गुरपतवंत सिंह पन्नू से जुड़ी संपत्तियां ज़ब्त की जा चुकी हैं.

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पेशे से वकील पन्नू का परिवार पहले पंजाब के नाथू चक गांव में रहता था, जो बाद में अमृतसर के पास खानकोट में बस गया. पन्नू के पिता महिंदर सिंह पंजाब मार्केटिंग बोर्ड के सचिव थे.

पन्नू की शुरुआती शिक्षा लुधियाना में हुई और 1990 के दशक में पंजाब यूनिवर्सिटी से क़ानून की पढ़ाई की. कॉलेज के दिनों से ही पन्नू छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए थे. बाद में वे पढ़ने के लिए अमेरिका चले गए. वहाँ पढ़ाई के बाद वॉल स्ट्रीट में काम किया और राजनीति में सक्रिय हो गए.

एक जुलाई 2020 को गृह मंत्रालय ने गैरक़ानूनी गतिविधियां (निषेध) अधिनियम 1967 (2019 में संशोधित) के तहत नौ लोगों को आतंकवादी घोषित किया था. इस लिस्ट में सातवें नंबर पर गुरपतवंत सिंह पन्नू का नाम भी शामिल है. गृह मंत्रालय के मुताबिक़, अमेरिका के रहने वाले पन्नू ग़ैरक़ानूनी संस्था ‘सिख फ़ॉर जस्टिस’ के प्रमुख सदस्य हैं.

साल 2007 में पन्नू ने सिख फ़ॉर जस्टिस नाम की संस्था की स्थापना की थी. अपने अलगाववाद के एजेंडे के तहत इस संस्था ने ‘रेफरेंडम-2020’ अभियान शुरू किया था. यह संगठन ख़ुद को मानवाधिकार संगठन बनाता है लेकिन भारत इसे ‘आतंकवादी’ संगठन घोषित कर चुका है.

भारत-कनाडा रिश्तों में तनाव

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ़ाइल फोटो

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भारत के आज़ाद होने के साथ ही कनाडा से राजनयिक संबंध स्थापित हो गए थे. लेकिन पिछले 75 वर्षों के दौरान दोनों के रिश्ते उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं.

पिछले साल कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिस ट्रूडो जी-20 सम्मेलन के लिए भारत आए थे.

तब नई दिल्ली में द्विपक्षीय बातचीत में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिस ट्रूडो के समक्ष इस बात पर नाराज़गी ज़ाहिर की थी कि कनाडा में ख़ालिस्तानी समर्थक तत्वों की गतिविधियों पर नकेल नहीं कसी जा रही है.

कनाडा लौटते ही जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा की संसद में सिख नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार की संलिप्तता की आशंका जताई थी.

ख़ालिस्तान के हिमायती हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में जून 2023 में हत्या कर दी गई थी.

इसके बाद कनाडा की विदेश मंत्री मेलेनी जोली ने शीर्ष भारतीय राजनयिक पवन कुमार राय को कनाडा से निकालने का एलान कर दिया था. इसके जवाब में भारत ने भी कनाडा के एक शीर्ष राजयनिक को निकाल दिया था.

हाल के वर्षों में दोनों देशों में तनाव की बड़ी वजह सिख अलगाववादियों की ओर से कनाडा की सरज़मीन पर कथित भारत विरोधी अभियान को बताया जाता है.

कनाडा की राजनीति में सिख समुदाय का काफ़ी दख़ल है. जस्टिन ट्रूडो ने जब अपने पहले कार्यकाल में कैबिनेट का गठन किया तो उसमें चार सिख सांसदों को मंत्री पद दिया गया था.

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