कोविड डेटा लीक: सरकार बोली आधारहीन है दावा, सुरक्षित है सारी जानकारी

को विन

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भारत में कोविड वैक्सिन के लिए रजिस्ट्रेशन करने वाले लाखों लोगों का डेटा कथित तौर पर लीक हो गया है.

ऐसा दावा किया जा रहा है कि राजनेताओं समेत कई मशहूर लोगों के पासपोर्ट, आईडी कार्ड के नंबर, जन्मदिन और फ़ोन नंबर जैसी जानकारियां टेलीग्राम एप पर उपलब्ध हैं.

दावा किया जा रहा है कि टेलीग्राम एप पर किसी का नंबर डालकर उनसे जुड़ी जानकारियां हासिल की जा सकती हैं.

ट्विटर पर कई लोगों ने टेलीग्राम एप के स्क्रीनशॉट शेयर कर दावा किया है कि वो कई मशहूर लोगों की जानकारियां देख सकते हैं.

लेकिन भारत सरकार ने इन ख़बरों को आधारहीन बताया है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कोविन प्लैटफ़ॉर्म पूरी तरह से सुरक्षित है. उनके मुताबिक, "ये रिपोर्ट बिना किसी आधार के हैं, और गलत प्रवृति के हैं."

डेटा लीक का दावा

स्वास्थ्य

तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता साकेत गोखले ने कई स्क्रीन शॉट शेयर कर दावा किया है कि राज्यसभा सांसद डेरिक ओ ब्रायन, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम, कांग्रेस नेता जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल, राज्यसभा के डिप्टी स्पीकर हरिवंश नारायण सिंह, राज्यसभा सांसद सुश्मित देव, अभिषेक मनु सिंघवी और संजय राउत जैसे नेताओं के डेटा मुफ्त में मौजूद हैं.

इसके अलावा उन्होंने दावा किया है कि पत्रकार राजदीप सरदेसाई, बरखा दत्त, धन्या राजेंद्रन और राहुल शिवशंकर की निजी जानकारियां भी उपलब्ध है.

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उन्होंने सरकार से सवाल उठाते हुए लिखा, "गृह मंत्रालय समेत मोदी सरकार को क्या इस डेटा ब्रीच के बारे में जानकारी नहीं है?"

"मोदी सरकार ने अहम निजी जानकारियां जिनमें आधार और पासपोर्ट नंबर हैं, किसे लीक की है, जिसके कारण ये लीक हुआ है."

उन्होंने लिखा, "ये एक राष्ट्रीय चिंता का विषय है."

उन्होंने मंत्री अश्विनी वैष्णव की काबिलियत पर सवाल उठाते हुए लिखा, "पीएम मोदी कब तक अश्विनी वैष्णव की अक्षमता को छुपाते रहेंगे."

टेलीग्राम

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विपक्ष उठा रहा है सवाल

सीपीआईएम नेता सीताराम येचुरी ने सरकार से कहा है कि डेटा लीक के पीछे जिन लोगों का हाथ हैं, उनके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाए.

उन्होंने कहा कि ये सीधे सीधे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है जिसमें निजता को मौलिक अधिकार माना गया है.

पार्टी की तरफ़ से जारी एक बयान में कहा गया है, "स्वास्थ्य मंत्रालय ने जून 2021 में ऐसे ही आरोपों से इनकार किया था, हालांकि कोविन सिस्टम के कथित लीक पर कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉंस टीम को जांच के आदेश दिए थे. इस जांच की जानकारी लोगों को अभी तक नहीं दी गई है."

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वहीं एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने सरकार से इस पर स्पष्टता मांगी है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "अगर ये सभी रिपोर्ट सही हैं, तो सरकार को तुरंत सफ़ाई देनी चाहिए और ब्रीच के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए."

उन्होंने लिखा, "नागरिकों के रूप में, हम अपना डेटा विभिन्न सरकारी पोर्टलों पर देते हैं, और ये ज़रूरी है कि सरकार हमारी जानकारी की सुरक्षा की गारंटी के लिए ज़रूरी कदम उठाए, जिससे हमारी निजता की सुरक्षा पर संदेह न हो."

"समय आ गया है कि सरकार कदम उठाए और मज़बूत डेटा संरक्षण कानून बनाए जो स्पष्ट रूप से हमारी गोपनीयता को बनाए रखता है. हम कार्रवाई, पारदर्शिता और आश्वासन की मांग करते हैं कि हमारे व्यक्तिगत डेटा को आगे किसी भी उल्लंघन से बचाया जाएगा."

सरकार ने कहा कोई डेटा लीक नहीं

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सरकार की तरफ़ से जारी एक बयान में दावा किया गया है कि को-विन पोर्टल पूरी तरह से सुरक्षित है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, "डेटा गोपनीयता के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपायों के साथ स्वास्थ्य मंत्रालय का को-विन पोर्टल पूरी तरह से सुरक्षित है. इसके अलावा, वेब एप्लिकेशन फ़ायरवॉल, एंटी-डीडीओएस, एसएसएल/टीएलएस, नियमित मूल्यांकन, पहचान और एक्सेस प्रबंधन आदि के साथ को-विन पोर्टल पर सुरक्षा उपाय मौजूद हैं. डेटा का केवल ओटीपी-आधारित एक्सेस प्रदान किया जाता है. को-विन पोर्टल में डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाए गए हैं और उठाए जा रहे हैं."

"बिना ओटीपी वैक्सीन लेने वालों का डेटा नहीं शेयर किया जा सकता. व्यस्क टीकाकरण में सिर्फ़ जन्म का साल रिकॉर्ड किया जाता है, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बॉट जन्म की तारीख़ बता रहा. टीका लेने वालों से उनके पते की जानकारी नहीं ली गई है.

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पहले भी कोविन डेटा सुरक्षा पर उठे सवाल

इससे पहले भी साल 2021 में दावा किया गया था कि को-विन पोर्टल के करोड़ों लोगों का डेटा लीक होने का दावा किया गया था.

साल 2022 में भी दावा किया या था कि कोविड का टीका ले चुके लोगों को डेटा लीक हुआ है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक रेड फ़ोरम वेबसाइट पर एक साइबर क्रिमिनल ने दावा किया था कि उनके पास 20 हज़ार से ज़्यादा लोगों का डेटा है.

जनवरी 2022 में नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के सीईओे आरएस शर्मा ने कहा था, "को-विन अत्याधुनिक सुरक्षा ढांचा है और इसे कभी भी सिक्युरिटी ब्रीच का सामना नहीं करना पड़ा है. कोविन पर हमारे नागरिकों का डेटा बिल्कुल सुरक्षित है. कोविन से डेटा लीक के बारे में किसी भी खबर में कोई दम नहीं है.

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