उत्तर प्रदेश: कांवड़ यात्रा पर कविता को लेकर शिक्षक पर एफ़आईआर, पूरा मामला जानिए

रजनीश गंगवार

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इमेज कैप्शन, शिक्षक रजनीश गंगवार के ख़िलाफ़ पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज की है
    • Author, सैयद मोज़िज इमाम
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

उत्तर प्रदेश में बरेली ज़िले के बहेड़ी कस्बे में एक शिक्षक की 'कांवड कविता' को लेकर विवाद हो गया है. पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

एमजीएम इंटर कॉलेज, बहेड़ी में हिंदी के शिक्षक रजनीश गंगवार पर आरोप है कि उन्होंने स्कूल की प्रार्थना सभा में 'कांवड़ यात्रा पर नहीं जाने' की कविता सुनाई थी.

वीडियो वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों ने कार्रवाई की मांग की है. बहेड़ी के सीओ अरुण कुमार ने कहा कि तहरीर मिल गई है. बीएनएस की धाराओं में मुक़दमा दर्ज किया गया है और आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है.

प्रदेश में कांवड़ यात्रा सावन के महीने में होती है. इस बार यह यात्रा 11 जुलाई से शुरू हुई है.

क्या है पूरा मामला?

रजनीश गंगवार महात्मा गांधी मेमोरियल इंटर कॉलेज, बहेड़ी में हिंदी के शिक्षक हैं.

रजनीश ने इस पूरे विवाद पर एक वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा है. उनका दावा किया है कि वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी बहेड़ी के नगर अध्यक्ष हैं और कई अन्य संस्थाओं से भी जुड़े हुए हैं.

कॉलेज की प्रार्थना सभा में उन्होंने एक कविता पढ़ी, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वो कांवड़ यात्रा के विरोध में है.

हालांकि शिक्षक रजनीश का कहना है कि उन्होंने यह कविता छोटे बच्चों के लिए पढ़ी थी.

वीडियो में उन्होंने अपनी सफाई में कहा, ''मेरे द्वारा जो कविता सुनाई गई थी वो छोटे बच्चों को लेकर थी. ख़ासकर जो बच्चे कांवड़ में जाते हैं, कहीं कोई दुर्घटना घट जाती है, मारपीट हो जाती है. वो सब न्यूज़ में देख रहे होंगे.''

रजनीश गंगवार ने आगे कहा, ''मेरा उद्देश्य कोई दूसरा नहीं था. मैं उनको शिक्षा का महत्व बता रहा था. बच्चे बड़े हो जाएं तो अपनी भावनाओं के अनुसार काम करें, हम तो उन्हें घर पर नहीं रोकने जा रहे हैं. मैं तो छोटे बच्चों के लिए कह रहा था, क्योंकि मैं अध्यापक हूँ.''

बरेली

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समाप्त

शिक्षक रजनीश ने कहा, ''जिन हिंदू संगठनों की भावनाएं मेरी कविता से आहत हुई हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूँ कि आप अपने मंत्री जी राजभर के ख़िलाफ़ मुक़दमा क्यों नहीं लिखवा रहे हैं. उन्होंने भी कांवड़ के ख़िलाफ़ सार्वजनिक मंच से कहा है. मैं शिक्षक हूँ, इसलिए मेरे ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज करा दिया गया.''

रजनीश गंगवार बहेड़ी में एनएसएस और स्वच्छ भारत मिशन से भी जुड़े हैं. वो महात्मा गांधी मेमोरियल इंटर कॉलेज में पिछले दस सालों से अध्यापन कर रहे हैं.

कॉलेज के प्रिंसिपल अशोक कुमार ने कहा, ''जिस दिन ये घटना हुई, मैं अवकाश पर था. हालांकि बच्चों को समझाने के लिए कहा गया था, लेकिन और रिफाइंड तरीके से कहा जा सकता था.''

उन्होंने कहा, ''मैं इसको गलत मानता हूँ. इसे नहीं कहना चाहिए था ताकि किसी की धार्मिक भावना को ठेस न पहुँचे. हालांकि स्कूल की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है.''

इस स्कूल में 1808 बच्चे पढ़ते हैं. प्रिंसिपल ने बताया कि स्कूल में बच्चे ज़्यादा अनुपस्थित हो रहे थे. इस संदर्भ में कविता पाठ किया गया था. लेकिन एक लाइन छोड़ दी जाती तो बेहतर रहता.

महात्मा गांधी मेमोरियल इंटर कॉलेज का कैंपस

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हिंदू संगठनों की आपत्ति

एफआईआर

हालांकि कविता में आगे शिक्षा के महत्व को भी समझाया गया है, लेकिन हिंदू संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है.

कस्बे की महाकाल सेवा समिति के पदाधिकारियों ने इस मामले में तहरीर दी है. तहरीर में कहा गया है कि यह टिप्पणी अशोभनीय है.

तहरीर में लिखा है, ''कॉलेज के छात्र-छात्राओं को इकट्ठा करके कांवड़ यात्रा के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी की जा रही है. इससे शिव भक्त कांवड़ियों की भावनाएं आहत हुई हैं. यह शिक्षक महोदय अपनी कुंठित मानसिकता से समाज में ज़हर घोल रहे हैं.''

समिति के अध्यक्ष शक्ति गुप्ता ने कहा, ''ऐसा नहीं कहना चाहिए.''

उन्होंने आगे कहा, ''इंटर कॉलेज के बच्चे बड़े हैं, समझदार हैं. किसी के पूजा-पाठ पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए. हम चाहते हैं कि पुलिस भी कार्रवाई करे और स्कूल प्रशासन इन्हें कॉलेज से हटाए.''

शक्ति गुप्ता का आरोप है कि शिक्षक पहले भी पार्टी (बीजेपी) के ख़िलाफ़ टिप्पणी कर चुके हैं.

तहरीर के मुताबिक, बीएनएस की धारा 353(2) के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई है. इस धारा का इस्तेमाल सामाजिक वैमनस्यता फैलाने वाले अपराधों के ख़िलाफ़ किया जाता है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एडवोकेट सायमा ख़ान बताती हैं, ''यह ग़ैर ज़मानती अपराध है. इसमें पांच साल तक की सज़ा का प्रावधान है.''

प्रदेश में कांवड़ यात्रा सावन के महीने में होती है. इस बार यह यात्रा 11 जुलाई से शुरू हुई है.

सावन के महीने अथवा श्रावण मास में भोलेनाथ के भक्त गंगा तट पर जाते हैं. वहां स्नान करने के बाद कलश में गंगा जल भरते हैं. फिर कांवड़ पर उसे बांध कर और अपने कंधे पर लटका कर अपने-अपने इलाके के शिवालय में लाते हैं और शिवलिंग पर अर्पित करते हैं.

कांवड़ को लेकर सरकार ने सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम किए हैं.

प्रदेश सरकार इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रशासनिक अमले को तैनात कर चुकी है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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