इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने टाला भारत का दौरा, क्या हो रही है चर्चा

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- Author, रजनीश कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने मंगलवार को कहा कि "भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसराइल का संबंध बहुत मज़बूत है."
नेतन्याहू के ऑफिस ने एक्स पर एक बयान जारी कर कहा, "नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सुरक्षा पर इसराइली प्रधानमंत्री को पूरा भरोसा है और उनकी टीम भारत दौरे को लेकर नई तारीख़ पर पहले से ही बातचीत कर रही है."
यानी इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि नेतन्याहू ने अपना हालिया भारत दौरा टाल दिया है और नई तारीख़ अभी तय नहीं हुई है.
नेतन्याहू ने अपना भारत दौरा उस वक़्त टाला है, जब अगले महीने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुँचने वाले हैं.
दरअसल, गुरुवार को हिब्रू भाषा की न्यूज़ वेबसाइट आई24 न्यूज़ ने ख़बर प्रकाशित की थी कि नेतन्याहू ने 'सुरक्षा कारणों' से भारत दौरा रद्द कर दिया है. हालांकि आधिकारिक तौर पर कहीं भी सुरक्षा कारणों का हवाला नहीं दिया गया है.
आई24 न्यूज़ के कूटनीतिक संवाददाता गुय अज़रिएल ने लिखा है, ''दो महीने पहले नेतन्याहू की नई दिल्ली यात्रा की हमारी रिपोर्ट के बाद, कूटनीतिक सूत्रों ने आई24 न्यूज़ से पुष्टि की है कि यह यात्रा अब सुरक्षा कारणों से टाल दी गई है.''
''दो सप्ताह पहले भारत की राजधानी नई दिल्ली में हुआ घातक आतंकवादी हमला, जो एक दशक से अधिक समय में सबसे भयानक था, जिसमें 10 लोगों की मौत हुई और दर्जनों घायल हुए थे. नेतन्याहू ने आख़िरी बार 2018 में भारत का दौरा किया था और प्रधानमंत्री मोदी से मुलाक़ात के लिए फिर से आने वाले थे. अब सुरक्षा मूल्यांकन के आधार पर अगले वर्ष किसी नई तारीख़ के तय होने की उम्मीद की जा रही है.''

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'सुरक्षा चिंता को कारण बताना भारत के लिए शर्मनाक'
आई24 न्यूज़ की इस रिपोर्ट के हवाले से मंगलवार को भारतीय मीडिया में ख़बर चलने लगी कि इसराइली प्रधानमंत्री ने सुरक्षा चिंता के कारण भारत का दौरा टाल दिया है. ऐसे में शाम होते-होते इसराइली प्रधानमंत्री के कार्यालय को सफ़ाई देनी पड़ी.
इसराइली प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान जारी करने पर गुय अज़रिएल ने लिखा है, ''दिसंबर में पीएम नेतन्याहू का भारत दौरा सुरक्षा कारणों से टलने की हमारी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट पर प्रधानमंत्री ऑफिस ने असामान्य बयान जारी किया है. इस बयान में दोनों देशों के संबंधों में मज़बूती और दौरे के लिए नई तारीख़ की बात कही गई है.''
भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 20 नवंबर को इसराइल गए थे और उनकी मुलाक़ात इसराइली प्रधानमंत्री से भी हुई थी.
इस मुलाक़ात के बाद इसराइली प्रधानमंत्री ने 23 नवंबर को एक्स पर लिखा था, ''आज मेरी मुलाक़ात भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से हुई. भारत और इसराइल अपनी रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत कर रहे हैं.''
क्या नेतन्याहू ने भारत का दौरा सुरक्षा कारणों से टाला है? इस सवाल के जवाब में सऊदी अरब में भारत के राजदूत रहे तलमीज़ अहम कहते हैं कि दौरा टालने के लिए सुरक्षा का हवाला देना भारत के लिए शर्मनाक है.
तलमीज़ कहते हैं, ''इसराइल के प्रधानमंत्री ने भले इस पर सफ़ाई दी कि उन्हें भारत में सुरक्षा पर पूरा भरोसा है लेकिन वहाँ के मीडिया में इतनी बड़ी बात नेतन्याहू सरकार के बिना ब्रीफिंग के नहीं छपी होगी. मुझे पता है कि नेतन्याहू कई मोर्चों पर घर में घिरे हुए हैं और इस समय भारत का दौरा उनके लिए मुश्किल है.''
''उन्हें असली बात बतानी चाहिए थी. लेकिन कथित सुरक्षा चिंताओं को दौरा टालने की वजह बताना भारत के लिए अपमानजनक है. वो भी तब जब अगले महीने पुतिन भारत के दौरे पर आने वाले हैं.''
तलमीज़ अहमद कहते हैं, ''भारत और इसराइल में प्रतीकात्मक रूप से बहुत कुछ देखने को मिलता है. इसके बावजूद नेतन्याहू ने दौरा टालकर भारत को अच्छा संदेश नहीं दिया है. भारत उन्हें तब साथ दे रहा था जब उनके साथ अमेरिका के अलावा कोई खड़ा नहीं था.''

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इसराइली मीडिया में सुरक्षा चिंता का हवाला
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पश्चिम एशिया अध्ययन केंद्र के प्रोफ़ेसर रहे एके पाशा मानते हैं कि नेतन्याहू का भारत दौरा टलने के पीछे सुरक्षा चिंता बताना बहुत तार्किक नहीं है.
एके पाशा कहते हैं, ''नेतन्याहू भारत से ज़्यादा उम्मीद कर रहे हैं और भारत एक हद से आगे जा नहीं सकता है. नेतन्याहू को लगता है कि भारत कभी फ़लस्तीनियों के साथ हो जाता है, कभी इसराइल के समर्थन में आ जाता है. ट्रंप के आने के बाद भारत और अमेरिका के संबंध ख़राब हुए हैं और यह भारत इसराइल संबंधों के लिए किसी भी लिहाज से अच्छा नहीं है.''
प्रोफ़ेसर पाशा कहते हैं, ''ऐसे में नेतन्याहू चाहते थे कि वह इस मामले में मध्यस्थता करें लेकिन भारत ने इसे स्वीकार नहीं किया. भारत को पता है कि चाहे जो भी मध्यस्थता करे ट्रंप अपने हित साधने के अलावा कुछ सुनेंगे नहीं. भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव होता है तो इसराइल की प्रासंगिकता बढ़ जाती है क्योंकि इसराइल पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को अपने लिए ख़तरा मानता है.''
एके पाशा कहते हैं कि अमेरिका से भारत का संबंध ख़राब रहेगा तो इसराइल से भी बहुत अच्छा नहीं रहेगा. ट्रंप ने जब भारत पर टैरिफ़ दोगुना करते हुए 50 फ़ीसदी करने की घोषणा की थी तब इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा था कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप उनके शानदार दोस्त हैं.
नेतन्याहू ने कहा था कि वह ट्रंप से डील करने के लिए पीएम मोदी को कुछ सुझाव देंगे लेकिन सार्वजनिक रूप से नहीं.
भारतीय पत्रकारों के एक समूह से सात अगस्त को नेतन्याहू ने कहा था, ''भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में एक बुनियादी समझ है. दोनों देशों के रिश्ते की बुनियाद बहुत मज़बूत है."
उनका कहना था, "यह भारत और अमेरिका के हित में होगा कि दोनों देश एक सहमति पर पहुँचें और टैरिफ़ का मुद्दा सुलझाएं. यह हमारे हक़ में भी होगा क्योंकि दोनों देश हमारे अच्छे दोस्त हैं.''

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इसराइल और भारत का साथ कितना अहम
29 अगस्त को अमेरिकन जूइश कमिटी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा था, ''भारत पर अमेरिकी अधिकारियों के हमले से हम चिंतित हैं. व्हाइट हाउस के सलाहकार ने यूक्रेन पर रूस के क्रूर हमले को 'मोदी वॉर' कहा है."
"रूस पर ऊर्जा के मामले में भारत की बढ़ती निर्भरता दुखद है लेकिन पुतिन के युद्ध अपराध के लिए भारत ज़िम्मेदार नहीं है.''
''भारत एक लोकतांत्रिक देश है और अमेरिका के रणनीतिक पार्टनर के रूप में ख़ास अहमियत रखता है. भारत दुनिया की महाशक्तियों की आपसी प्रतिस्पर्धा में काफ़ी महत्वपूर्ण है. अब समय आ गया है कि भारत से संबंध को पटरी पर लाया जाए.''
इसराइल की पूर्व सांसद और मध्य-पूर्व मामलों की एक्सपर्ट सेनिया स्वेतलोवा ने यरुशलम पोस्ट में इसी साल फ़रवरी महीने में ट्रंप के साथ मोदी की मुलाक़ात से पहले 'व्हाई इसराइल शुड केयर अबाउट द मोदी-ट्रंप मीटिंग' शीर्षक से आर्टिकल लिखा था.
सेनिया स्वेतलोवा ने लिखा था, ''भारत और अमेरिका में अच्छा संबंध इंडिया मिडल-ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) के लिए बहुत ज़रूरी है."
2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद इसराइल के साथ संबंधों में गर्मजोशी बढ़ी है. नरेंद्र मोदी पहले प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने इसराइल का दौरा किया था. भारत और पाकिस्तान के संघर्ष में जब दुनिया के लगभग सभी देश तटस्थ दिखने की कोशिश कर रहे थे तब इसराइल भारत के साथ खुलकर समर्थन में था.
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में 2003 में किसी भी इसराइली प्रधानमंत्री का पहला भारत दौरा हुआ. तब एरियल शेरोन भारत आए थे. नरेंद्र मोदी के रूप में पहले भारतीय प्रधानमंत्री का दौरा इसराइल का हुआ.
2008 में भारतीय रक्षा सचिव विजय सिंह इसराइल के दौरे पर गए थे. इस दौरे को लेकर इसराइल के उदारवादी अख़बार हैरेत्ज़ ने दोनों देशों के संबंधों का मूल्यांकन किया था.
इस अख़बार ने अपने विश्लेषण में लिखा था, ''भारत और इसराइल के बीच संबंध मजबूत तब होते हैं, जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता है या फिर भारत की राजनीति में दक्षिणपंथ का उभार होता है या वहां के नेतृत्व में मुस्लिम विरोधी भावना बढ़ती है.''
इसराइली अख़बार ने अपने इसी विश्लेषण में लिखा था, ''1999 में कारगिल को लेकर भारत और पाकिस्तान भिड़े तो भारत ने इसराइल से राजनयिक संबंधों को और मज़बूत किया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उस वक़्त इसराइल के रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक अमोस यारोन हथियारों की एक आपातकालीन खेप के साथ भारत पहुंचे थे.''
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.












