कनाडा में जगमीत सिंह ने जस्टिन ट्रूडो को दिया झटका, अब क्या होगा?

जस्टिन ट्रूडो

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इमेज कैप्शन, जगमीत सिंह के समर्थन वापस लेने के बाद जस्टिन ट्रूडो की मुश्किलें बढ़ गई हैं
    • Author, होल्ली होन्ड्रिच
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

कनाडा में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रही हैं.

कनाडा की लेफ्ट विंग न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी यानी एनडीपी ने ट्रूडो सरकार को दिया अपना समर्थन वापस ले लिया है.

एनडीपी ने बीते ढाई साल से ट्रूडो सरकार को समर्थन दिया हुआ था. इस कारण ट्रूडो सत्ता में बने हुए थे.

एनडीपी नेता जगमीत सिंह ने चार सितंबर को सोशल मीडिया पर साझा किए वीडियो में कहा, ''हमने प्रधानमंत्री को अपने फ़ैसले के बारे में बता दिया है. लिबरल पार्टी के लोग इतने कमज़ोर और स्वार्थी हो गए थे कि वो कनाडा के लोगों के लिए लड़ नहीं सकते.''

एनडीपी और ट्रूडो की लिबरल पार्टी के बीच हुआ समझौता ''सप्लाई एंड कॉन्फिडेंस'' कहलाता था. इसके तहत एनडीपी विश्वासमत में लिबरल पार्टी का समर्थन किया करती थी.

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इस फ़ैसले से ट्रूडो के लिए क्या बदलेगा

जगमीत सिंह के किए एलान का मतलब ये नहीं है कि अब चुनाव होंगे. हालांकि संभव है कि कनाडा में तय वक़्त से पहले चुनाव हो जाए.

कनाडा में अक्तूबर 2025 में चुनाव होने हैं.

जगमीत सिंह ने कहा कि पूरे विश्वास के साथ हम अविश्वास प्रस्ताव को लाएंगे.

संसद में अगर सरकार विश्वास मत हासिल करने से चूकती है तो आम चुनाव हो सकते हैं.

जगमीत सिंह ने कहा- एनडीपी चुनाव के लिए तैयार है.

ट्रूडो और जगमीत के बीच मार्च 2022 में हुए समझौते के तहत लिबरल पार्टी ने एनडीपी को संसद के अंदर अहम मुद्दों पर समर्थन देने की बात कही थी.

ये समझौता वैसा नहीं था, जिसके तहत पार्टियां सत्ता साझा करती हैं.

इसी कारण बीते दो चुनावों से बहुमत हासिल नहीं कर पाई ट्रूडो की पार्टी सत्ता में बनी रही. एनडीपी का आश्वासन था कि वो विश्वासमत के मामले में लिबरल पार्टी का समर्थन करेगी.

बदले में जगमीत सिंह की पार्टी की प्राथमिकताओं को पूरा करने में ट्रूडो को मदद करनी थी. जैसे- कम आय वाले परिवारों के लिए दंत चिकित्सा से जुड़ी सुविधाएं देना, बर्थ कंट्रोल और इंसुलिन के तहत एक राष्ट्रीय कार्यक्रम.

ये अपने तरह का पहला और एक अलग समझौता था.

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इमेज कैप्शन, साल 2018 में जस्टिन ट्रूडो भारत के दौरे पर आए थे. इस दौरान अपने परिवार के साथ वो अमृतसर के स्वर्ण मंदिर भी गए थे

दिक़्क़त कहां से शुरू हुई और ट्रूडो क्या बोले

इस बसंत यानी अप्रैल- मई तक सब ठीक चल रहा था. जगमीत सिंह और उनकी पार्टी के नेता इस समझौते को लेकर सार्वजनिक तौर पर प्रतिबद्ध दिखे.

मगर ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि बीते महीने से एनडीपी नेतृत्व ने इस समझौते पर फिर से विचार करना शुरू कर दिया था.

ये पहल ट्रूडो सरकार के उस फ़ैसले के बाद हुई थी, जिसके तहत कनाडा के दो बड़े रेलवे के काम बंद करने पर कैबिनेट ने सख़्ती बरती थी.

ट्रूडो से राहें अलग करते हुए जगमीत सिंह ने एलान किया- लिबरल पार्टी ने लोगों को नीचा दिखाया और वो कनाडा के लोगों से दूसरा मौक़ा मिलने लायक़ नहीं हैं.

ट्रूडो ने न्यूफाउंडलैंड में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए रिपोर्टर्स से कहा- मुझे विश्वास है कि संसद चलती रहेगी और कनाडा के लोगों के लिए काम जारी रहेगा.

ट्रूडो ने कहा- दूसरे लोग राजनीति करते रहें.

ट्रूडो ने उम्मीद जताई कि चुनाव जल्दी नहीं होंगे ताकि उनकी सरकार को अपने एजेंडे पर काम करने का वक़्त मिले.

जगमीत सिंह और जस्टिन ट्रूडो

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कनाडा के मतदाताओं का रुख़

बीते सालों में कनाडा के मतदाताओं के बीच महंगाई, आवास से जुड़े मुद्दों को लेकर निराशा बढ़ी है.

चुनावों में इसकी झलक भी देखने को मिली. ट्रूडो की लिबरल पार्टी नीचे की ओर जाती दिख रही है.

नेशनल ओपिनियन सर्वे का अनुमान है कि लिबरल पार्टी विरोधी कंज़र्वेटिव पार्टी से 18 पॉइंट पीछे है.

कंज़र्वेटिव पार्टी के नेता पिएरे पोलिविएयर ने जगमीत सिंह की आलोचना करते हुए कहा- अविश्वास प्रस्ताव का वादा नहीं किया गया, उनका एलान महज़ एक स्टंट है.

बीते हफ़्ते पिएरे ने जगमीत सिंह को एक खुला ख़त लिखा था और लिबरल पार्टी से समझौता तोड़ने की बात कही थी.

ख़त में लिखा गया था- आपको वोट इसलिए नहीं दिए गए थे कि आप ट्रूडो को सत्ता में बनाए रखें. आपके पास इतना बहुमत नहीं है कि आप इस सरकार को एक साल और खींचें.

जस्टिन ट्रूडो 2015 से सत्ता में बने हुए हैं. 2019 और 2021 में ट्रूडो की पार्टी बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी और वो दूसरी पार्टी के समर्थन से सरकार में हैं.

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जस्टिन ट्रूडो, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और जगमीत सिंह

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जगमीत सिंह और भारत का रुख़

जगमीत सिंह के साथ सरकार चलाने को भारत भी अच्छी नज़र से नहीं देखता है.

बीते वक़्त में कनाडा और भारत के बीच दूरियां आई हैं. अलगाववादी सिख नेता हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में हत्या के पीछे ट्रूडो ने भारतीय एजेंटों का हाथ होने की बात कही थी.

भारत ने ऐसे आरोपों को ख़ारिज करते हुए सबूत देने के लिए कहा था.

कुछ लोगों का ये भी मानना था कि जगमीत सिंह और सिख वोट बैंक को देखते हुए ट्रूडो भारत के ख़िलाफ़ इतना खुलकर बोले थे.

भारतीय मूल के जगमीत सिंह की पार्टी ने बीते आम चुनावों में 24 सीटें जीती थीं और वो किंगमेकर की भूमिका में थे.

जगमीत सिंह भारत की कई मौक़ों पर आलोचना करते रहे हैं.

अप्रैल 2022 में जगमीत सिंह ने कहा था, ''भारत में मुस्लिमों को निशाना बनाकर हो रही हिंसा की तस्वीरें, वीडियो देखकर मैं चिंतित हूँ. मोदी सरकार को मुस्लिम-विरोधी भावनाओं को उकसाने से रोकना चाहिए. मानवाधिकारों की रक्षा होनी चाहिए.''

जगमीत सिंह

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जगमीत सिंह कौन हैं

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जगमीत सिंह की जड़ें पंजाब के बरनाला ज़िले में ठिकरिवाल गांव से जुड़ी हैं.

उनका परिवार 1993 में कनाडा चला गया था.

भारत में 1984 में सिख विरोधी दंगे को लेकर जगमीत हमेशा से मुखर रहे हैं. कनाडा में इसे लेकर निकाली गई कई झांकियों पर भारत ने विरोध जताया था. इसमें इंदिरा गांधी के पुतले को गोली मारते दिखाने वाली झांकियां भी शामिल हैं.

दिसंबर 2013 में जगमीत सिंह को अमृतसर आने के लिए भारत ने वीज़ा नहीं दिया था.

2013 में जब भारत सरकार ने उन्हें वीज़ा देने से इनकार किया था तो टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ''मैं 1984 के दंगा पीड़ितों को इंसाफ़ दिलाने की बात करता हूँ इसलिए भारत सरकार मुझसे ख़फ़ा रहती है. 1984 का दंगा दो समुदायों के बीच का दंगा नहीं था बल्कि राज्य प्रायोजित जनसंहार था.''

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक़, जगमीत सिंह पार्टी के नेता बनने से पहले खालिस्तान की रैलियों में शामिल होते थे.

क्षेत्रफल के मामले में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े देश कनाडा में भारतीय मूल के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं.

कनाडा की आबादी में सिख 2.1 फ़ीसदी हिस्सेदारी रखते हैं. पिछले 20 सालों में कनाडा के सिखों की आबादी दोगुनी हुई है. इनमें से अधिकांश भारत के पंजाब से शिक्षा, करियर, नौकरी जैसे कारणों से ही कनाडा पहुंचे हैं.

वैनकुवर, टोरंटो, कलगैरी सहित पूरे कनाडा में गुरुद्वारों का एक बड़ा नेटवर्क है.

सिखों की अहमियत इस बात से भी लगा सकते हैं कि जस्टिन ट्रूडो ने जब अपने पहले कार्यकाल में कैबिनेट का गठन किया तो उसमें चार सिख मंत्रियों को शामिल किया.

सिखों के प्रति उदारता के कारण कनाडाई पीएम को मज़ाक में जस्टिन 'सिंह' ट्रूडो भी कहा जाता है.

2015 में जस्टिन ट्रूडो ने कहा था कि उन्होंने जितने सिखों को अपनी कैबिनेट में जगह दी है, उतनी जगह भारत की कैबिनेट में भी नहीं है.

- टीम बीबीसी हिंदी के इनपुट के साथ.

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