You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
बलूचिस्तान में चरमपंथियों के कई हमले, अब तक 39 लोग मारे गए
- Author, फ़रहत जावेद
- पदनाम, बीबीसी उर्दू संवाददाता
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में पिछले 24 घंटे में 39 लोगों की हत्या हो चुकी है. इनमें 22 मुसाफ़िर भी शामिल हैं.
इसके अलावा कलात ज़िले में 11 लोगों की हत्या हुई है, जिनमें 5 पुलिसवाले शामिल हैं. जबकि एक अन्य ज़िले से 6 शवों को बरामद किया गया है.
दक्षिण पश्चिम पाकिस्तान में बलूचिस्तान के मूसाखेल ज़िले में बंदूकधारियों ने कम से कम 22 लोगों की हत्या कर दी है.
अधिकारियों के मुताबिक़ बंदूकधारियों ने लोगों को उनकी गाड़ियों से उतारकर पहचान पता करने के बाद उनकी हत्या की है.
पिछले 24 घंटों में बीएलए ने पूरे इलाक़े में पुलिस थानों, सुरक्षा बलों के शिविरों और कई सरकारी ठिकानों पर हमले किए हैं.
यह हमला शनिवार से रविवार के बीच रात के समय में बलूचिस्तान प्रांत में एक राजमार्ग पर हुआ है. यहाँ सुरक्षा बल सांप्रदायिक, जातीय और अलगाववादी हिंसा का लगातार सामना कर रहे हैं.
अधिकारियों ने बताया है कि हथियारबंद लोगों ने पहचान के दस्तावेज़ों की जांच की. उन्होंने कथित तौर पर गोली मारने से पहले पंजाब के लोगों की पहचान की और उनके वाहनों में भी आग लगा दी.
चरमपंथी समूह बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने कहा है कि ‘मूसाखेल’ ज़िले में हुए हमलों के पीछे उसका हाथ है.
ये हमले बलूचिस्तान के लोकप्रिय राजनीतिक नेता नवाब अकबर बुगती की 18वीं बरसी के मौक़े पर किए गए हैं इस ऑपरेशन को प्रतिबंधित संगठन बीएलए ने 'ऑपरेशन हीरोफ' नाम दिया है.
मूसाखेल ज़िला बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा से क़रीब साढ़े चार सौ किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हैं.
यहाँ की ज़्यादातर आबादी पश्तूनों की मूसाखेल जनजाति की है.
क्वेटा में मौजूद बीबीसी उर्दू संवाददाता मोहम्मद काज़िम के मुताबिक़ बीती रात चरमपंथी हमले में सबसे ज़्यादा नुक़सान मूसाखेल, लासबेला, कलात और मस्तुंग के अलग अलग इलाक़ों में हुआ है.
बीती रात के बड़े हमले
इनमें सबसे ज़्यादा नुकसान मूसाखेल में हुआ है, जहां बंदूकधारियों ने पंजाब और बलूचिस्तान के बीच सफर करने वाले कई वाहनों को रोका और लोगों की पहचान करने के बाद उन्हें गोली मार दी.
मूसाखेल के पुलिस प्रमुख मोहम्मद अयूब अचकजई का कहना है कि ''रारा हाशिम इलाक़े में हुए इस हमले में 22 लोग मारे गए हैं.''
उनका कहना है कि मृतकों और घायलों की पहचान करने की प्रक्रिया जारी है.
उन्होंने कहा कि हथियारबंद लोगों ने इलाक़े में 18 वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया, जिनमें यात्री बसें, ट्रक और अन्य वाहन शामिल हैं. उन्होंने कहा है कि गाड़ियों पर गोली चलाने के अलावा कुछ में आग भी लगा दी गई.
मूसाखेल के सहायक आयुक्त नजीबुल्लाह ने बीबीसी को बताया, "पंजाब और बलूचिस्तान के बीच चलने वाले विभिन्न वाहनों में यात्रा कर रहे लोगों के पहचान पत्र देखने के बाद बंदूकधारियों ने कई लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी."
उनके मुताबिक़ मूसाखेल के हमले में क़रीब 30 से 40 चरमपंथी शामिल थे.
इस फायरिंग में पांच लोग घायल हुए हैं, जिनमें से एक की हालत गंभीर है. घायलों को शुरुआती चिकित्सा देने के बाद इलाज के लिए डेरा गाजी खान में स्थानांतरित कर दिया गया.
इस हमले के ख़िलाफ़ सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 12 चरमपंथियों के मारे जाने का दावा किया जा रहा है.
पाकिस्तान में सरकारी मीडिया पर प्रसारित ख़बरों के मुताबिक़ इस कार्रवाई में कई चरमपंथी घायल भी हुए हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ बीएलए ने कहा है कि वह आम लोगों की वेशभूषा में यात्रा करने वाले सैन्य कर्मियों को निशाना बना रहा है.
हमले से पहले बीएलए ने बलूच जनता को राजमार्ग से दूर रहने की चेतावनी दी थी और कहा था कि उनकी "लड़ाई कब्ज़ा करने वाली पाकिस्तानी सेना के खिलाफ है."
इसमें कहा गया है, "हमने बलूचिस्तान के सभी प्रमुख राजमार्गों पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया है और उन्हें पूरी तरह से बंद कर दिया है."
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है. लेकिन अन्य प्रांतों की तुलना में ज़्यादा संसाधन होने के बावजूद यह सबसे कम विकसित इलाक़ा है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने मूसाखेल में हुई घटना की निंदा की है और घटना की तुरंत जांच करने का निर्देश दिया है.
प्रधानमंत्री ने कहा है कि घटना के लिए ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा दी जाएगी.
बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री मीर सरफ़राज़ बुगती ने भी मूसाखेल घटना पर रिपोर्ट मांगी है और सूबे की कानून व्यवस्था पर आपात बैठक भी बुलाई है.
बलूचिस्तान प्रांत में कई चरमपंथी समूह सक्रिय हैं. लेकिन इनमें से दो सबसे ज़्यादा सक्रिय हैं. ये हैं बीएलएफ और बीएलए. बीएलए पाकिस्तान की सत्ता को सबसे अधिक चुनौती देने वाला चरमपंथी संगठन है.
आरोप लगाया जाता है कि ये समूह पाकिस्तानी ज़मीन पर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ काम करते हैं. हालाँकि पाकिस्तान का दावा है कि ये दोनों संगठन ईरान और कभी-कभी अफ़ग़ानिस्तान में भी अपने ठिकाने बनाते हैं.
पाकिस्तान ईरान सरकार पर इन समूहों के नेताओं और चरमपंथियों को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है, हालांकि ईरान इससे इनकार करता है.
बलूचिस्तान के सक्रिय चरमपंथी संगठन
पाकिस्तान ये आरोप भी लगाता है कि भारत बलूचिस्तान में कुछ गुटों की आर्थिक मदद करता है. हालाँकि भारत इन आरोपों से इनकार करता है.
बीते दो साल में पाकिस्तान सरकार ने बीएलए और पाकिस्तानी तालिबान (टीटीपी) के संयुक्त हमलों की ख़बरों पर बड़ी चिंता जताई है.
बीएलए और अन्य बलूच अलगाववादियों ने इलाक़े में विदेशी ऊर्जा कंपनियों को भी निशाना बनाया है, जिन पर उनका आरोप है कि वो मुनाफ़े में हिस्सेदारी साझा किए बिना इस क्षेत्र का शोषण कर रही हैं.
इसी साल अप्रैल में ऐसी एक घटना में बलूचिस्तान में एक बस से नौ यात्रियों को उतारकर उनके पहचान-पत्रों की जांच के बाद उन्हें गोली मार दी गई थी.
ब्रिटेन और अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों ने बीएलए को वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित किया है.
टीटीपी अफ़ग़ान-पाकिस्तान सीमा पर सक्रिय सशस्त्र इस्लामी चरमपंथी समूहों का एक अंब्रेला आर्गेनाइजेशन हैं.
बीएलए साल 2011 से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, विदेशी मज़दूरों, सरकारी सहयोगियों और पत्रकारों पर हमले कर रहा है.
बीएलएफ की स्थापना 1964 में सीरिया में हुई थी. शुरू में यह ईरानी बलूच विद्रोह में शामिल था. यह ईरानी सरकार के ख़िलाफ़ बलूच समूहों का विद्रोह था.
पांच साल के संघर्ष के बाद बीएलएफ़ ने ईरान के शाह के ख़िलाफ़ लड़ाई ख़त्म करने के लिए बातचीत की.
इसके बाद बीएलएफ और अन्य बलूच संगठन 1970 के दशक में पाकिस्तान सरकार के ख़िलाफ़ हो गए.
बलूचिस्तान की अहमियत
पाकिस्तान का बलूचिस्तान देश की कुल ज़मीन का क़रीब 44 फ़ीसदी हिस्से में फैला हुआ है. लेकिन यहाँ पाकिस्तान की क़रीब 6 फ़ीसदी आबादी ही बसी हुई है.
बलूचिस्तान का इतिहास चरमपंथ और मानवाधिकारों के उल्लंघन से भरा हुआ है.
बलूचिस्तान की ईरान और तालिबान के नियंत्रण वाले अफ़ग़ानिस्तान के साथ एक अस्थिर सीमा है. अरब सागर का एक विशाल समुद्र तट भी इसके हिस्से में आता है.
बलूचिस्तान का नाम बलूच नाम की जनजाति से पड़ा है. यह सदियों से इस इलाक़े में रहती आई है.
बलूच सबसे बड़ा जातीय समूह है, उसके बाद यहाँ पश्तून आबादी है. बलूच पाकिस्तान के पड़ोसी ईरानी प्रांत सिस्तान-बलूचिस्तान के साथ-साथ अफ़ग़ानिस्तान में भी रहते हैं.
बलूचिस्तान गैस, खनिजों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के मामले में पाकिस्तान के सबसे अमीर प्रांत के रूप में जाना जाता है.
चीन की ओर से वित्त पोषित अरबों की परियोजना चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) का एक बड़ा हिस्सा यहीं है.
यह परियोजना चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 'बेल्ट एंड रोड' पहल का हिस्सा है. इसमें ओमान की खाड़ी के पास ग्वादर शहर में बने बंदरगाह को एक महत्वपूर्ण प्वाइंट के रूप में देखा जाता है.
चीन इस इलाके में खनन परियोजनाओं और ग्वादर में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण से भी जुड़ा हुआ है. इसका पाकिस्तान के चरमपंथी समूह बढ़-चढ़कर विरोध करते हैं.
पाकिस्तान और ईरान के बीच तनाव
इसी साल 16 जनवरी को पाकिस्तान पर ईरान की ओर से किए गए हमले के बाद से उनके बीच तनाव बढ़ गया था.
पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में ईरानी क्षेत्र के अंदर मिसाइल हमला किया. ईरान का कहना है कि इस हमले में नौ लोगों की मौत हो गई.
ईरान का दावा है कि वह चरमपंथी समूह 'जैश अल-अद्ल' को निशाना बना रहा था, जो उसके खिलाफ सक्रिय है.
वहीं पाकिस्तान का कहना है कि उसका लक्ष्य ईरान के दो 'आतंकवादी' समूहों, 'बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी' (बीएलए) और 'बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट' (बीएलएफ) के ठिकानों को निशाना बनाना था.
पाकिस्तान का हमला 1980 के दशक के बाद से ईरान पर किसी दूसरे देश का पहला ज़मीनी हमला था.
पाकिस्तान ने यह हमला तब किया है जब ग़ज़ा युद्ध तेज़ होने से मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ गया है. ईरान ने उसी हफ़्ते इराक़ और सीरिया में भी हमले किए, जिस हफ़्ते उसने पाकिस्तान पर हमला किया था.
ब्रिटिश साम्राज्य से आज़ादी के बाद बलूचों के लिए एक अलग देश की मांग को लेकर 1948 से ही चरमपंथी विद्रोह की शुरुआत हो गई थी.
यह विद्रोह 1950, 1960 और 1970 के दशक तक कई चरणों में हुआ. लेकिन सैन्य शासक जनरल परवेज़ मुशर्रफ के कार्यकाल में 2003 से विद्रोही गतिविधियां काफी बढ़ गईं. उन्होंने बलूचिस्तान में चरमपंथ के खिलाफ कई अभियान चलाए.
सबसे विवादास्पद अभियानों में से एक में मशहूर बलूच नेता नवाब अकबर खान बुगती की हत्या कर दी गई.
इस इलाके में पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों के खूनी उग्रवाद विरोधी अभियानों और कार्रवाई में कथित तौर पर हज़ारों लोग लापता हो गए.
कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने 'इन लोगों को उठाया और टॉर्चर करने के बाद उन्हें मार दिया.' हालांकि पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है.
वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स (वीबीएमपी) के मुताबिक, बलूचिस्तान से 7,000 से ज़्यादा लोग लापता हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)