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पाकिस्तान पर हमला कर क्या ईरान ने अपनी मुश्किलें और बढ़ा ली हैं?
- Author, मोहम्मद शराफ़त वज़ीरी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, फारसी सेवा
ईरान और पाकिस्तान दोनों ही मुल्कों के बलूचिस्तान के हिस्से में कई कारणों से सरकार विरोधी भावना सक्रिय है और दोनों ही यहाँ अपने-अपने हिस्से में मुश्किल चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.
दोनों के लिए अफ़ग़ानिस्तान से सटी अपनी-अपनी सीमा पर भी मुश्किलें कम नहीं हैं, जहाँ दो साल पहले तालिबान एक बार फिर सत्ता में लौटा है.
इतना ही नहीं जहां ईरान, इराक़ से सटी अपनी पश्चिमी सीमा पर भी लगातार मुश्किलों का सामना कर रहा है, वहीं पाकिस्तान के लिए भी अपनी पूर्वी सीमा पर चुनौतियां कम नहीं हैं. पाकिस्तान के पूरब की तरफ़ की सीमा भारत से सटती है.
देखा जाए तो पाकिस्तान और ईरान दोनों ही कई और क्षेत्रों में भी गंभीर मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, ऐसे में सिस्तान और बलूचिस्तान इलाक़े में सीमा पर तनाव जारी रहने के बावजूद दोनों पड़ोसियों ने रणनीतिक तौर पर तनाव बढ़ाने से बचने की ही कोशिश की है.
लेकिन हाल के सालों में सीमा पर तनाव के बावजूद दोनों ने बुधवार रात लिए गए क़दम जैसा कुछ पहले कभी क्यों नहीं किया था, आइए ये समझने की कोशिश करते हैं.
दोनों की साझा चुनौतियां
सबसे पहले इस हमले के लिए चुने गए वक़्त को देखे जाने की ज़रूरत है. ये हमला ऐसे वक़्त हुआ है, जब दोनों मुल्कों के वरिष्ठ राजनयिक आपस में मुलाक़ात कर रहे थे, बैठकें कर रह थे.
इस हमले के एक दिन पहले ईरानी राष्ट्रपति के विशेष दूत और अफ़ग़ानिस्तान के लिए ईरान के राजदूत हसन काज़ेमी-कोमी ने इस्लामाबाद के अपने आधिकारिक दौरे में पाकिस्तान के अधिकारियों से मुलाक़ात की थी. इस दौरान दोनों पक्षों में सहमति बनी कि वो अफ़ग़ानिस्तान में शांति और स्थिरता के लिए एक "रीजनल कॉन्टैक्ट ग्रुप" बनाएंगे.
जिस वक़्त ईरान के मीडिया में "पाकिस्तान के भीतर अतिवादी गुट जैश-अल-अद्ल के ठिकानों पर ईरान के मिसाइल हमलों" की ख़बर आ रही थी, कुछ उसी वक़्त ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियान पाकिस्तान के केयरटेकर प्रधानमंत्री अनवर उल-हक़ काकड़ से मुलाक़ात कर रहे थे. ये मुलाक़ात यूरोप के स्वित्ज़रलैंड में दावोस में हो रहे सालाना वर्ल्ड इकोनॉमिस फ़ोरम कार्यक्रम में हुई.
आईएसएनए समाचार एजेंसी के अनुसार, इस बैठक में ईरानी विदेश मंत्री ने "आतंकवाद से मुक़ाबले" को दोनों मुल्कों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा बताया और इस सिलसिले में दोनों के बीच पहले से हुए समझौतों पर अमल करने की बात पर ज़ोर दिया.
कथित तौर पर पाकिस्तान के केयरटेकर प्रधानमंत्री ने इस इलाक़े में दोनों मुल्कों के सामने मौजूद एक जैसी चुनौतियों की बात स्वीकार की और "आतंक की समस्या से निपटने के लिए दोनों के बीच सहयोग और साझा कोशिशों की ज़रूरत" पर ज़ोर दिया.
सीमा पर तनाव ईरान के लिए बड़ी परेशानी
इधर ईरान सरकार से जुड़ी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने मंगलवार रात ये ख़बर दी थी की होर्मूज़ की खाड़ी और फारस की खाड़ी में ईरान और पाकिस्तान की नौसेना का साझा युद्दाभ्यास हुआ है.
इन सभी कारकों को देखते हुए, दोनों मुल्कों के बीच गंभीर कूटनीतिक तनाव का कारण बनने वाले इस हमले के प्राथमिक कारणों का पता लगाना बेहद मुश्किल है.
हालांकि, ये अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है कि सिस्तान और बलूचिस्तान के इलाक़े में लगातार जारी सरकार विरोधी संगठनों की कार्रवाई और हाल में ईरान में हुआ आत्मघाती हमला इसके पीछे बड़ा कारण हो सकता है. इन संगठनों के हमलों ने ईरान की सेना को बहुत नुक़सान पहुँचाया है.
ईरान के दक्षिण में बसे केयरमान में रिवॉल्युशनरी गार्ड्स के जनरल रहे क़ासिम सुलेमानी की हत्या की चौथी बरसी पर हो रहे कार्यक्रम के दौरान बम धमाका हुआ था, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी.
इस हमले की ज़िम्मेदारी चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट ने ली थी, लेकिन ईरान इन हमलों के पीछे इसराइल को मुख्य ताक़त मानता है. ईरान के कुछ अधिकारियों का कहना है कि ये गुट देश की सीमा से सटे इलाक़ों में सक्रिय है.
ये जानना ज़रूरी है कि ईरान अपने सीमावर्ती इलाक़ों में सैनिकों की तैनाती "इस्लामिक रिपब्लिक के लॉ एन्फोर्समेन्ट फोर्सेस" के तहत करता है.
लेकिन साल 2014 से पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान से सटी अपनी सीमा का एक बड़ा हिस्सा, जो सिस्तान और बलूचिस्तान में पड़ता है, उसकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी उसने इस्लामिक रिवॉल्युशनरी गार्ड्स को सौंपी है. सीमा के क़रीब 300 किलोमीटर लंबे इस हिस्से को वो बेहद संवेदनशील मानता है.
ये हिस्सा ईरान को पड़ोसी पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान से जोड़ता है.
एक और नज़रिए से देखा जाए तो पाकिस्तान पर हुआ हमला, वहां की सरकार के उद्देश्यों को भी पूरा करता दिखता है.
- पाकिस्तान की पूर्वी सीमा ईरान से सटती है. दोनों लगभग 900 किलोमीटर (559 मील) लंबी सीमा साझा करते हैं.
- ईरान के पूर्वी सीमा में सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत है जो पाकिस्तान के पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत से जुड़ा है. सीमा के पास के इन इलाक़ों में कम ही अबादी है.
क्या उद्देश्य होगा पूरा?
इन हमलों के बारे में एक और महत्वपूर्ण बात ये है कि ईरान ने जिस वक़्त पाकिस्तान पर हमला किया उससे पहले उसने सीरिया और इराक़ पर भी मिसाइल हमले किए थे.
ईरान और उसकी सेना के लिए ये हमले 'ताक़त' और संभावित नतीजों की परवाह किए बग़ैर इस तरह के अभियानों को अंजाम देने की उसकी 'क्षमता' का प्रदर्शन हैं.
इन हमलों को लेकर होने वाली प्रतिक्रिया या उसके नतीजों का असर इस पूरे क्षेत्र में ईरान की भूमिका और उसकी कूटनीतिक कोशिशों पर पड़ सकता है. इससे ईरान के लिए और मुश्किल चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं, ख़ासकर पश्चिमी मुल्कों के साथ उसके रिश्तों को लेकर. पश्चिमी मुल्क मानते हैं कि ईरान इस क्षेत्र को "अस्थिर" करने की कोशिश कर रहा है.
पाकिस्तान के भीतर किए गए इन मिसाइल हमलों ने इलाक़े में जारी तनाव को एक बार फिर बढ़ा दिया है और ख़तरनाक मोड़ पर ला दिया है.
हो सकता है कि ये हमले अपने तय उद्देश्यों को पूरा न कर पाएं और ईरान के लिए प्रांतीय स्तर पर और कूटनीतिक स्तर पर मुश्किलें और बढ़ा हैं. ये भी हो सकता है कि ईरान के लिए इन मुश्किलों का समाधान तलाशना अपने आप में चुनौती बन जाए.
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