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अब्दुल सलाम: बीजेपी के मुसलमान उम्मीदवार जो पीएम मोदी पर हैं मंत्रमुग्ध
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, बेंगलुरु से
केरल की कालीकट यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर और मृदा प्रबंधन विशेषज्ञ अब्दुल सलाम ने बीजेपी से साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारी हासिल करके एक रिकॉर्ड तोड़ दिया है.
अब्दुल सलाम को टिकट मिलना काफ़ी अहम है क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने एक भी मुसलमान उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया था.
इस वजह से बीजेपी को तमाम आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था.
इन आलोचनाओं पर बीजेपी का कहना था कि उसे मुसलमान समुदाय की ओर से वोट नहीं मिलता है, इस वजह से मुसलमान उम्मीदवारों को मैदान में उतारना उचित नहीं समझा गया.
बीजेपी ने बदली नीति
साल 2021 में बीजेपी ने मल्लपुरम सीट के उप-चुनाव में एपी अब्दुल्लाकुट्टी को टिकट देकर अपनी नीति में परिवर्तन किया.
इस चुनाव में अब्दुल्लाकुट्टी को 69,935 वोट मिले. बीजेपी ने इससे पहले साल 2016 में तिरूर विधानसभा सीट से सलाम को मैदान में उतारा था. तब सलाम को मात्र 9097 (5.33 फीसद) वोट मिले थे.
बीजेपी ने अब्दुल सलाम को केरल की जिस सीट से टिकट दिया है, वहां मुसलमान मतदाता बहुसंख्यक हैं.
ऐसे में इसे बीजेपी की ओर से कांग्रेस, उसके नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के घटक दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और लेफ़्ट डेमोक्रेटिक फ़्रंट को चुनौती देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
बीजेपी ने अब्दुल सलाम के नाम की घोषणा अपनी पहली सूची में की है.
बीबीसी ने सलाम से उन्हें चुने जाने की वजह पूछी तो उनका कहना था, “मैं आपको उनके नंबर देता हूं. आप बीएल संतोष (बीजेपी के संगठन सचिव), नरेंद्र मोदीजी और जेपी नड्डाजी को फोन करके पूछिए. उन्होंने मुझमें कुछ देखा होगा. या शायद चुनाव जीतने वाला फैक्टर हो.”
71 वर्षीय अब्दुल सलाम एक ग़रीब पृष्ठभूमि से आते हैं. उनकी एक बहन और नौ भाई हैं.
मृदा प्रबंधन के क्षेत्र में परा-स्नातक करने से पहले तक वह स्कूल जाने के लिए हर रोज़ नौ किलोमीटर का सफर तय किया करते थे.
फसलों के पोषण और काजू की फसल पर शोध करने के बाद उन्होंने अध्यापन की दिशा में कदम बढ़ाए.
इसके बाद उन्होंने विभागाध्यक्ष से लेकर एसोसिएट डीन जैसे पदों पर काम किया.
उन्होंने कुवैत और सूरिनाम में विज़िटिंग प्रोफेसर के रूप में भी काम किया है.
इसके साथ ही उन्होंने 153 पेपर्स और 13 किताबें प्रकाशित की हैं. और वह साल 2011 से 2015 तक कालीकट यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर थे.
‘मोदी ने मुझे मंत्रमुग्ध किया’
लेकिन सलाम एक ऐसे शख़्स हैं जो पीएम मोदी की तारीफ़ करते नहीं थकते.
वह कहते हैं, “वह एक ऐसे शख़्स हैं जिन्होंने मुझे मंत्रमुग्ध कर दिया है.”
इसकी वजह बताते हुए वह कहते हैं, “पूरी दुनिया मोदी जी के आसपास घूम रही है. ये उनकी शख़्सियत, उनकी सोच, उनका मिशन और उनके काम की ताक़त है. उनके मन में सबको साथ लेकर चलने का भाव है. वह पूरे देश को एक नज़र से देखते हैं. आप ऐसे किसी दूसरे नेता का नाम लीजिए, मैं उनके साथ खड़ा हो जाऊंगा. मैंने पिछले 21 सालों से उन्हें गुजरात से लेकर दिल्ली तक पहुंचते देखा है.”
मोदी की कथित मुसलमान विरोधी छवि पर सलाम कहते हैं, “ये मोदी विरोधी लोगों की ओर से गढ़ा नैरेटिव है. असलियत ये है कि ये सब फर्जी है. वह कभी भी किसी घटना के लिए सीधे तौर पर ज़िम्मेदार नहीं थे. ये सब मनगढ़ंत नैरेटिव है. आप उन लोगों से बात कीजिए जो एक तरफ़ झुके हुए नहीं हैं और तथ्यों को ध्यान में रखते हुए विश्लेषण करिए.”
सलाम कहते हैं कि मल्लपुरम के लोग कालीकट यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के रूप में उनकी उपलब्धियों और आईयूएमएल की कमियों से अवगत हैं.
वह कहते हैं, “मदरसों में जो पढ़ाया जाता है, उसने लोगों का दिमाग़ ख़राब कर दिया है. मां-बाप को जन्नत भेजने से लेकर तमाम दूसरी बातों के ज़रिए दिमाग़ में ज़हर भरा जाता है. इसके चलते कई लोगों ने आतंकवाद का रास्ता चुन लिया है. मेरा काम ये दिखाना है कि मैं निष्पक्ष हूं.”
“अब मेरा काम ग़रीबों के दिमाग़ में उनके नेताओं की ओर से भरा गया अंधेरा दूर करके मोदी प्रकाश भरना है. धीरे-धीरे मैं वो बताऊंगा जो पवित्र क़ुरान में लिखा है कि हम सभी को अल्लाह ने बनाया है. उनकी इबादत करो. उस पर भरोसा रखो. हज जाओ, रोज़ा रखो और इस्लाम के सिद्धांत पर चलो. ये सभी चीज़ें वैश्विक मानवता और सभी लोगों को अपना मानना की सीख देती हैं.”
सलाम स्थानीय मौलवियों की निंदा करते हैं.
वह कहते हैं, “स्थानीय मुल्लाओं की बातों पर ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है कि ये काफ़िर या वो. काफ़िर होता क्या है? जब तक आपने इस्लाम स्वीकार नहीं किया था तब तक आप भी काफ़िर थे. उन्हें काफ़िर रहने दें. मेरा असल काम मोदी के प्रकाश में ये सब अज्ञान ख़त्म करना है. मेरा मंत्र ये है कि अल्लाह, क़ुरान, बाइबिल और भगवद्गीता में विश्वास करिए. सभी धार्मिक ग्रंथों को देखें तो आपको दिखा कि हर जगह मानवता, प्यार और ख़्याल रखने की सीख दी गयी है. मोदी भी इसी में यकीन करते हैं.”
उन्होंने कहा, “मैंने मोदी से अच्छा इंसान नहीं देखा है. वह हिंदू होंगे. लेकिन ये उनकी अयोग्यता नहीं है. वह सनातन धर्म में यकीन रखते हैं. आप देखिए कि क़ुरान में भी ये सब चीज़ें हैं. कुछ मुल्लाओं ने मूल क़ुरान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है और नौजवानों को भरमा दिया है.”
पीएम मोदी के साथ अपनी मुलाक़ात के बारे में बताते हुए सलाम कहते हैं, “वह मुस्कुराए नहीं लेकिन उन्होंने मुझसे हाथ मिलाया. मैं अब भी उनकी हथेली की कोमलता महसूस कर सकता हूं. मुझे एक ऊष्मा से भरा हुआ अनुभव हुआ.”
सलाम ये जानते हैं कि आईयूएमएल के गढ़ मल्लपुरम में उसे चुनौती देना काफ़ी मुश्किल होगा.
वह कहते हैं, “आप एक दिन अचानक जाकर बरगद के पेड़ से लड़ सकते हैं. आपको धीरे-धीरे विकास का मॉडल दिखाते हुए उसे उखाड़ने की ज़रूरत होती है.''
आईयूएमएल के सांसद मोहम्मद बशीर ने बीबीसी हिंदी को बताया, "इस पर चुप रहना ही बेहतर है.”
बीजेपी के पास खोने को कुछ नहीं
राजनीतिक टिप्पणीकार और केरल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफ़ेसर जे प्रभाष बीबीसी हिंदी से कहते हैं, "सलाम की उम्मीदवारी प्रतीकात्मक है क्योंकि पार्टी के पास खोने के लिए कुछ नहीं है. अगर पार्टी बिहार या गुजरात में किसी को मैदान में उतारती है तो यह कहना संभव होता कि वह जीतने के लिए ऐसा कर रही है. लेकिन यहां वह एक तीर से तीन निशाने लगाने की कोशिश कर रही है.”
वह कहते हैं, “बीजेपी इसके ज़रिए मुसलमान उम्मीदवार न उतारने की आलोचना से पार पाना चाहती है. दूसरी बात ये है कि ये उम्मीदवार किसी भी सूरत में जीतने नहीं जा रहा है, ऐसे में इससे भविष्य में कोई समस्या नहीं होगी. वहीं, वे मुसलमान मतदाताओं का मन पढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. पार्टी एक दीर्घकालिक प्रयोग करके देख सकती है कि उसे ये फायदा पहुंचाता है या नहीं."
"ये स्पष्ट है कि पार्टी अपनी मुस्लिम विरोधी होने की छवि को ग़लत ठहराना चाहती है. लेकिन असल मुद्दा ये है कि हम जैसे शिक्षाविदों की कोई राजनीतिक छवि नहीं है.”
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