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जस्टिन ट्रूडो के आरोप पर क्या कह रहा है पंजाबी मीडिया
- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
- पदनाम, ख़बरों की रिपोर्टिंग और विश्लेषण
कनाडा के नागरिक और खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा के रिश्तों में कड़वाहट आ गई है.
खालिस्तान मुद्दे पर भारत-कनाडा संबंधों में आई इस गिरावट के लिए पंजाबी मीडिया ने कनाडा के पीएम ट्रूडो की आलोचना की है.
इसी हफ़्ते, 18 सितंबर को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने देश की संसद में निज्जर की हत्या में भारत के संभावित एजेंटों की भूमिका बताई थी.
हालांकि भारत सरकार ने इन आरोपों का पूरी तरह से ख़ारिज कर दिया है. इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनातनी और तेज़ हो गई है.
भारत को संदेह था कि देश में हुई कई हिंसक घटनाओं के तार निज्जर से जुड़े हुए हैं. भारत सरकार ने उन्हें साल 2020 में आतंकवादी घोषित कर दिया था.
कनाडा सरकार ने ओटावा में भारतीय मिशन में तैनात एक भारतीय राजनयिक को निष्कासित कर दिया है. वहीं जवाबी कार्रवाई करते हुए भारत सरकार ने भी कनाडा के एक वरिष्ठ राजनयिक को भारत छोड़ने का आदेश दिया था.
इससे पहले जब जी20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने कनाडा के पीएम ट्रूडो भारत आए थे, तब भी दोनों देशों के बीच तल्खी देखने को मिली थी
चढ़दी कला ने क्या लिखा
प्रमुख पंजाबी अख़बारों ने अपनी कवरेज और संपादकीय में दोनों देशों को बातचीत के ज़रिए सुलह करने की सलाह दी है.
पंजाब स्थित अंग्रेजी भाषा के अखबार द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के बाद सबसे अधिक सिख जनसंख्या कनाडा में रहती है, जो करीब 2.1 प्रतिशत है.
पंजाबी अख़बार चढ़दी कला ने 21 सितंबर को अपने संपादकीय में पंजाबी समुदाय की चिंताओं को बताया है.
अख़बार ने लिखा है, “कनाडा और पंजाब में रहने वाले पंजाबी भारत और कनाडा के बीच बिगड़ते रिश्तों से परेशान हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि पंजाब से क़रीब 1 लाख 60 हजार छात्र पढ़ाई के लिए कनाडा गए हैं और यह सिलसिला लगातार जारी है. एक तरह से पंजाबी, कनाडा को अपना घर मानते हैं. कनाडा को मिनी पंजाब भी कहा जाता है.”
अख़बार का कहना है कि कनाडा की सरकार ने निज्जर की मौत के लिए भारत पर आरोप लगाए हैं, लेकिन उन्होंने जांच पूरी करने में पहले कभी इतनी तेज़ी नहीं दिखाई है.
संपादकीय में लिखा गया है, “ऐसा लगता है कि ये बयान प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सिख वोट पाने के लिए दिए थे. यह कहा जा सकता है कि यह अच्छे संकेत नहीं हैं. इससे न सिर्फ दोनों देशों को नुकसान होगा, बल्कि पंजाब और पंजाबियों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.”
जगबानी ने की कनाडाई सरकार की आलोचना
अलगाववाद का विरोध करने वाले अख़बार जगबानी ने 21 सितंबर को अपनी रिपोर्ट में कनाडा में पढ़ रहे छात्रों के दर्द के बारे में लिखा है.
अख़बार लिखता है, “अगर दोनों देशों के बीच दरार गहरी हुई, तो इसका असर कनाडा जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या ज़रूर पड़ेगा और कनाडा में कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या भी घट सकती है.”
जगबानी के मुताबिक, “साल 2022 में तीन लाख 19 हज़ार भारतीय छात्र कनाडा में स्टडी वीजा लेकर पढ़ाई कर रहे थे. भारत और कनाडा के बीच पैदा हुए इस तनाव का सीधा असर न सिर्फ़ भारतीय छात्रों पर पड़ेगा, बल्कि कनाडा के विश्वविद्यालयों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा.”
पंजाबी ट्रिब्यून ने क्या कहा
इसी तरह पंजाबी ट्रिब्यून अख़बार ने 20 सितंबर के संपादकीय में कनाडाई सरकार की आलोचना की थी और कहा ता कि 1985 में जब खालिस्तानियों ने एयर इंडिया के एक विमान को हवा में उड़ा दिया था, तो कनाडा की सरकार ने कोई तत्परता नहीं दिखाई थी.
इस विमान हादसे में 329 यात्रियों की मौत हो गई थी.
अख़बार ने लिखा, “अगर कनाडा सरकार के पास निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की संलिप्तता के सबूत हैं, तो उन्हें तुरंत भारत सरकार के साथ साझा किया जाना चाहिए.”
पंजाबी ट्रिब्यून का कहना था कि भारत सरकार ने कनाडा के वरिष्ठ राजनयिक को देश से निष्कासित कर सही क़दम उठाया है.
20 सितंबर को पंजाबी भाषा के अजीत वेब टीवी पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा गया है कि हाल की घटनाओं से भविष्य में मुश्किल होगी.
रिपोर्ट में कहा गया है, “हमें लगता है कि निकट भविष्य में यह मुद्दा बड़ा रूप लेगा, क्योंकि इसकी गूंज ब्रिटिश संसद में भी सुनाई दी है.”
दिल्ली से मांगा गया स्पष्टीकरण
पंजाबी ट्रिब्यून अखबार ने 21 सितंबर को कुछ सिख संगठनों का पक्ष प्रकाशित किया है.
इन संगठनों ने कनाडा के आरोपों को लेकर भारत सरकार से अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है.
अकाल तख्त के जत्थेदार रघुबीर सिंह ने भारत सरकार से दुनिया भर में रह रहे सिखों की जान-माल की रक्षा की मांग की है.
उन्होंने कहा, “अगर कनाडा में रहने वाले एक सिख नेता की हत्या में भारतीय एजेंसियां शामिल हैं, तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है.”
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