ओडिशा के मुख्यमंत्री बनने जा रहे मोहन चरण माझी को जानिए, कैसे बने बीजेपी की पसंद

मोहन चरण माझी

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    • Author, संदीप साहू
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए, भुवनेश्वर से

मंगलवार शाम लगभग डेढ़ घंटे तक चली बीजेपी विधायकों की बैठक के बाद केंद्रीय रक्षा मंत्री और बीजेपी के केंद्रीय पर्यवेक्षक राजनाथ सिंह ने घोषणा की थी कि मोहन चरण माझी को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया है.

साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की थी कि राज्य की पहली बीजेपी सरकार में दो उपमुख्यमंत्री होंगे.

ये दो उपमुख्यमंत्री हैं- पश्चिम ओडिशा के वरिष्ठ बीजेपी नेता और पटनागढ़ के विधायक कनक वर्धन सिंहदेव और निमापड़ा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार चुनकर आईं प्रभाती परिड़ा.

उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव बलांगीर के राज परिवार से ताल्लुक रखते हैं और छठी बार विधायक बने हैं. वहीं दूसरी उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिड़ा राज्य भाजपा के महिला मोर्चा की अध्यक्ष रह चुकी हैं. उनकी छवि एक जुझारू महिला नेता की है लेकिन वो पहली बार विधायक बनी हैं.

विधायक दल के नेता चुने जाने के तत्काल बाद मोहन माझी वरिष्ठ भाजपा नेताओं के साथ राजभवन गए और राज्यपाल रघुबर दास से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया.

147 सदस्यों की विधानसभा में बीजेपी के 78 विधायकों के अलावा उन्हें तीन निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है.

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बुधवार को होगा शपथ ग्रहण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी के कई राष्ट्रीय नेता और बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति में नया मंत्रिमंडल भुवनेश्वर के जनता मैदान में शाम पाँच बजे शपथ लेगा.

शपथ ग्रहण समारोह में क़रीब 35 हज़ार लोगों के होने की उम्मीद जताई जा रही है और इसके लिए पुलिस की ओर से सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.

कैसे सबको पीछे छोड़ आगे बढ़े माझी

धर्मेंद्र प्रधान और राजनाथ सिंह के साथ मोहन चरण माझी

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बीजेपी विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए 52 वर्षीय मोहन माझी ने कहा, "मैं चुनाव प्रचार के दौरान ओडिशा को देश का नंबर एक राज्य बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किए वादे को पूरा करने के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम करूंगा."

पिछले साल मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की तरह ओडिशा में भी मुख्यमंत्री पद के लिए चयन में भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने सबको चकित कर दिया है.

हालांकि मुख्यमंत्री पद के लिए कई नेताओं के साथ मोहन माझी के नाम की भी चर्चा हो रही थी, लेकिन विश्लेषकों को उम्मीद नहीं थी कि आख़िर में उन्हीं के नाम पर मुहर लगेगी.

विधानसभा चुनाव में मोहन माझी उत्तरी ओडिशा के केऊँझर (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र से बीजू जनता दल (बीजेडी) की प्रत्याशी मीना माझी को 11,577 वोटों से हरा कर चौथी बार विधायक चुने गए.

इससे पहले उन्होंने इसी चुनाव क्षेत्र से 2000, 2004 और 2019 में भी चुनाव जीता था. साल 2019 से 2024 के बीच वो विधानसभा में बीजेपी विधायक दल के चीफ़ व्हिप भी रहे थे.

राजनीतिक सफ़र

ग्रामीणों से मुलाक़ात करते मोहन चरण माझी

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समाप्त

मोहन माझी ने 90 के दशक में सरस्वती शिशु मंदिर में शिक्षक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी.

1997 में वो सरपंच बने और 2000 में भाजपा के टिकट पर केऊँझर से पहली बार विधायक बने.

2004 में वो दूसरी बार विधायक चुने गए. 2009 और 2014 में अगले दो विधानसभा चुनाव में हारने के बाद वो 2019 में तीसरी बार विधानसभा के लिए चुने गए और भाजपा विधायक दल के चीफ व्हिप बने.

इस दौरान नवीन पटनायक की बीजेडी सरकार पर निशाना साधने में वो हमेशा मुखर रहे. इन सबके बीच माना जा रहा है कि मोहन माझी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक मुखर कार्यकर्ता रहे हैं और शायद यही बात मुख्यमंत्री के चयन में उनके पक्ष में गई.

सितंबर, 2022 में उन्होंने आस्ट्रेलियाई पादरी ग्रैहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे बजरंग दल के कार्यकर्ता रवींद्र कुमार पाल उर्फ "दारा सिंह" की रिहाई के लिए अभियान चलाया था.

21 सितंबर 2022 को माझी दारा सिंह से मिलने क्योंझर ज़िला जेल पहुंचे, जहां वे अपने सजा काट रहे हैं. लेकिन शांति भंग होने की आशंका से जेल अधिकारियों ने उन्हें दारा से मिलने की इजाजत नहीं दी थी, तब माझी जेल के बाहर धरने पर बैठ गए थे.

वैसे चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए कई नामों की चर्चा हो रही थी.

सबसे अधिक चर्चा देश के पूर्व महालेखाकार (सीएजी) डॉक्टर गिरीश चंद्र मुर्मू के नाम की थी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के क़रीबी माने जाते हैं और गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी के कार्यकाल में उनके प्रमुख सचिव, उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद केंद्र सरकार में सचिव और जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल रह चुके हैं.

वो आदिवासी हैं और ओडिशा के मयूरभंज जिले के निवासी हैं. मयूरभंज मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का भी जन्मस्थान है.

मुर्मू के अलावा जिन नामों की चर्चा थी वे थे केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत जय पंडा, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल, पूर्व अध्यक्ष सुरेश पुजारी.

इसके अलावा पूर्व अध्यक्ष और पूर्व मंत्री और छह बार विधायक बने कनक वर्धन सिंहदेव, पिछले विधानसभा में विपक्ष के नेता रह चुके संबलपुर के विधायक जयनारायण मिश्र और भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी का नाम भी चर्चा में था.

माझी के नाम पर ऐसे बनी सहमति

बीजेपी दफ्तर

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भाजपा के सूत्रों के अनुसार, पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व राज्य में बनने जा रही अपनी पहली सरकार में विधायक दल के बाहर से किसी को मुख्यमंत्री पद के लिए चुनकर लोगों को एक ग़लत संदेश देना नहीं चाहता था.

यही कारण है कि गिरीश मुर्मू, धर्मेंद्र प्रधान और बैजयंत पंडा को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया.

मनमोहन सामल मुख्यमंत्री पद के लिए एक प्रबल दावेदार थे क्योंकि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने ही बीजेडी के साथ गठबंधन बनाने का कड़ा विरोध किया था और पार्टी के शीर्ष नेताओं को अपनी बात मानने के लिए राज़ी किया था.

लेकिन जो एक बात उनके ख़िलाफ़ गई वह ये थी कि वो ख़ुद चुनाव हार गए. चांदबाली सीट पर वो बीजेडी के ब्योमकेश रे से मात्र 1916 वोटों से हार गए थे.

पर्यवेक्षकों के अनुसार, मोहन माझी के मुख्यमंत्री चुने जाने के पीछे उनके आदिवासी होने की बड़ी भूमिका रही.

ग़ौरतलब है कि ओडिशा में आदिवासियों की संख्या करीब 23 प्रतिशत है. मोहन माझी के पक्ष में एक बात यह भी थी कि वो एक ग़रीब आदिवासी परिवार से आते हैं और अपनी मेहनत और लगन से राजनीति में बढ़ते रहे हैं.

उन्हें भाजपा के एक समर्पित कार्यकर्ता और विवादों से परे नेता के रूप में जाना जाता है. जानकार मानते हैं कि कार्यकर्ताओं के प्रति उनका अच्छा बर्ताव और सादगी भरा जीवन उन्हें लोकप्रिय बनाता है.

हालांकि उन्हें पार्टी के किसी बड़े राष्ट्रीय नेता का समर्थन प्राप्त नहीं था, लेकिन माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री रेस से बाहर होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस पद के लिए मोहन माझी को समर्थन दिया.

क्यों बनाए गए दो उपमुख्यमंत्री?

कनक वर्धन सिंहदेव

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बाक़ी बचे नेताओं में सबसे अधिक चर्चा भाजपा के दो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष- सुरेश पुजारी और कनक वर्धन सिंहदेव को लेकर थी.

साथ ही पिछले विधानसभा में विपक्ष के नेता रह चुके संबलपुर के विधायक जयनारायण मिश्र का नाम भी चर्चा में था. लेकिन ये तीनों पश्चिमी ओडिशा से हैं, जो भाजपा का गढ़ माना जाता है.

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इनमें से किसी को मुख्यमंत्री न बनाने का निर्णय शायद इसलिए लिया कि इनमें से किसी को मुख्यमंत्री बनाने से पश्चिम ओडिशा में गुटबाज़ी शुरू होने और पार्टी का संतुलन बिगड़ने का ख़तरा था.

हालांकि पार्टी के वफ़ादार समर्थकों को ख़ुश रखने के लिए और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए पश्चिमी ओडिशा से किसी को ऊंचा ओहदा देना ज़रूरी था, यही कारण है कि मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चा में रहे कनक वर्धन सिंहदेव को आख़िरकार उप मुख्यमंत्री बनाया गया. कनक की पत्नी संगीता सिंहदेव बलांगीर से सांसद चुनी गई हैं.

प्रभाती परिड़ा

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इसी तरह तटीय ओडिशा को भी इस बार तवज्जो देना ज़रूरी था क्योंकि इस चुनाव में पहली बार बीजेडी के इस गढ़ में भाजपा सेंध लगाने में सफल हुई है और इस इलाक़े की सभी लोकसभा सीटों के अलावा कई विधानसभा क्षेत्रों में भी जीत हासिल की है.

इसी प्रक्रिया में तटीय ओडिशा में बीजेडी के कई कद्दावर नेता इस बार धराशायी हो गए. यही कारण है कि पहली बार विधायक बनीं प्रभाती परिड़ा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया.

हालांकि वो पहली बार विधायक बनीं हैं. लेकिन वो भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष रह चुकीं हैं और महिलाओं से जुड़े मुद्दे उठाने में मुखर रही हैं.

ओडिशा में औरतें, बीजेडी का सबसे बड़ा वोट बैंक रही हैं और परिडा को एक ऊंचा पद देकर बीजेपी ने इस वोट बैंक को तोड़ने की मंशा ज़ाहिर की है.

उन्हें उपमुख्यमंत्री चुनने के पीछे एक कारण यह भी था कि वे पिछड़े वर्ग से आतीं हैं. इस तरह उन्हें चुनकर बीजेपी ने क्षेत्र, लिंग और जाति तीनों का संतुलन बनाने की कोशिश की है.

वीडियो कैप्शन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नया मंत्रिमंडल कितना मज़बूत दिखता है

पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नए मुख्यमंत्री के रूप में मोहन माझी को चुने जाने का स्वागत किया है.

सूत्रों के अनुसार, विधायक दल की बैठक में किसी ने उनका विरोध नहीं किया. हालांकि सुरमा पाढ़ी की बजाय प्रभाती परिड़ा को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर पार्टी का एक गुट संतुष्ट नहीं है.

इसी तरह दूसरे उपमुख्यमंत्री पद के लिए कनक वर्धन सिंहदेव को चुने जाने को लेकर भी पश्चिम ओडिशा में पार्टी के कार्यकर्ताओं में कुछ असंतोष की खबरें आ रहीं हैं.

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