लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण पर पीएम मोदी के जवाब को कैसे देखा जा रहा है?

नरेंद्र मोदी

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दो जुलाई को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपना भाषण दिया.

दो घंटे से भी ज़्यादा देर तक चले पीएम के भाषण के दौरान विपक्षी सांसद लगातार मणिपुर और नीट जैसे मुद्दे उठाते रहे. विपक्षी सांसद लगातार 'मणिपुर को न्याय दो' और 'वी वॉन्ट जस्टिस' जैसे नारे लगाते रहे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने, विपक्ष के नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना ही उनपर निशाना साधा और उनके भाषण को लेकर बोले, "कल जो हुआ उसको देशवासी सदियों तक माफ़ नहीं करेंगे."

इसके अलावा पीएम ने 131 साल पहले शिकागो में स्वामी विवेकानंद के भाषण का ज़िक्र करते हुए कहा कि हिंदू सहनशील हैं, अपनत्व को लेकर जीने वाला समूह है, आज हिंदुओं पर आरोप लगाने की साज़िश हो रही है.

राहुल गांधी को पीएम मोदी का जवाब

सोमवार को संसद में राहुल गांधी के अलग-अलग धर्मों का ज़िक्र करने के बयान पर पीएम मोदी ने कहा कि निजी राजनीतिक स्वार्थों के लिए ऐसा खेल ये देश कैसे माफ़ कर सकता है.

राहुल गांधी के अग्निवीरों पर दिए गए बयान पर भी पीएम मोदी बोले. उन्होंने कहा कि देश की सेना को आधुनिक बनाने का काम चल रहा है और कांग्रेस झूठ फैलाने का काम कर रही है.

पीएम मोदी ने कहा कि भ्रष्टाचार के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की जो नीति रही उसकी वजह से जनता ने उनकी सरकार को तीसरी बार चुना है. हमारा एकमात्र लक्ष्य नेशन फ़र्स्ट है. हम तुष्टीकरण नहीं बल्कि संतुष्टीकरण की राजनीति पर चले.

उन्होंने अनुच्छेद 370 को हटाने की बात की. उन्होंने कहा कि इससे लोकतंत्र की ताक़त बढ़ी. जम्मू-कश्मीर के लोग बढ़ चढ़कर मतदान करने के लिए आगे आ रहे हैं.

पीएम मोदी ने कहा, ''तीसरे टर्म में हम तीन गुना काम करेंगे और देशवासियों को तीन गुना परिणाम लाकर देंगे. पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस के इतिहास में ये तीसरी सबसे बड़ी हार है. हिंदुस्तान के नागरिकों के मन में ये भरने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्होंने हमें हरा दिया है.''

राहुल गांधी पर तीखे वार

विपक्ष के नेता राहुल गांधी

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नरेंद्र मोदी ने कहा, ''बच्चे का मन बहलाने का काम चल रहा है. बालक बुद्धि को कुछ समझ नहीं आता है.'' इस तरह की बात पीएम मोदी ने सीधा किसी का नाम लिए बिना कही लेकिन इनका इशारा सीधे तौर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तरफ़ था.

पीएम मोदी ने बार-बार 'बालक बुद्धि' का शब्द क्यों इस्तेमाल किया? इस सवाल पर वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक संजीव श्रीवास्तव ने बीबीसी संवाददाता मोहम्मद शाहिद से बातचीत में कहा, "मोदी जी को ये समझना होगा कि उनकी पार्टी के लोग, जिसे पप्पू कहते थे वो अब बड़ा हो गया है."

"राहुल गांधी को अब कोई पप्पू और बच्चा नहीं मानता है. उन्होंने भारतीय राजनीति में अपनी जगह बना ली है. इस समय वो प्रतिपक्ष के नेता हैं.''

''मंगलवार का भाषण फिर एक बात का संकेत था कि उनमें परिपक्वता है क्योंकि कभी-कभी कोई भी फिसल सकता है. इसके भी कई नुक़सान हैं, जितना राहुल गांधी का आप मज़ाक उड़ाओगे,उतना ख़ुद का ही नुक़सान करोगे."

'आर्थिक अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही है कांग्रेस'

राहुल गांधी

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पीएम ने अपने भाषण में कहा, ''कांग्रेस देश में आर्थिक अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही है, जहाँ कांग्रेस का शासन है, वहां के राज्य देश पर आर्थिक बोझ बनने की कोशिश कर रहे हैं.''

''सीएए को लेकर अराजकता फैलाई गई, पूरा ईको सिस्टम इस बात को बल देता रहा ताकि उनके राजनीतिक मक़सद पूरे हों. दंगों में झोंकने के भी कुत्सित प्रयास देश ने देखे हैं.''

संसद में दिए गए राहुल गांधी के भाषण पर जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ''देश ने सदन में बचकानी हरकतें देखी हैं. यहाँ बालक बुद्धि का विलाप चल रहा था. सहानुभूति हासिल करने के लिए यह ड्रामा चला गया है. देश जानता है कि हज़ारों करोड़ों के हेरफेर मामले में ज़मानत पर बाहर हैं.''

पीएम ने कहा, ''बालक बुद्धि में न बोलने का ठिकाना होता है और न व्यवहार का कोई ठिकाना होता है.जब ये बालक बुद्धि सवार हो जाती है तो सदन में भी किसी के गले पड़ जाते हैं.''

2018 में राहुल गांधी ने लोकसभा में अपनी सीट से उठकर नरेंद्र मोदी को अचानक गले लगा लिया था. तब पीएम मोदी अपनी सीट पर बैठे थे और वह भी राहुल के इस रुख़ से हैरान रह गए थे.

पीएम मोदी ने कहा, ''अग्निवीर को लेकर झूठ बोला गया, एमएसपी को लेकर यही किया जा रहा है. संविधान की गरिमा से खिलवाड़ हुआ है. डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर ने कांग्रेस के दलित विरोधी होने के कारण कैबिनेट से इस्तीफ़ा दिया था. नेहरू ने भी दलितों पिछड़ों के साथ अन्याय किया.''

कांग्रेस पर भी किए तीखे हमले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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एक दिन पहले विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा, "कल जो हुआ है वो गंभीरता से लिए बिना संसदीय लोकतंत्र को संरक्षित नहीं कर पाएंगे. इन हरकतों को बालकबुद्धि कहकर और मानकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. क्योंकि इसके पीछे इरादे नेक नहीं गंभीर ख़तरे के हैं."

उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा, "कांग्रेस देश में आर्थिक अराजकता फैलाने की सोची समझी चाल चल रही है. मंचों से साफ़-साफ़ घोषणा की गई कि अगर इनके मन मुताबिक़ परिणाम नहीं आया तो चार जून को आग लगा दी जाएगी. इसका अधिकृत रूप से आह्वान किया गया."

"दुनिया के सबसे बड़े चुनावी अभियान में जनता ने हमें चुना है. मैं कुछ लोगों की पीड़ा समझ सकता हूं कि लगातार झूठ चलाने के बावजूद भी उनकी घोर पराजय हुई."

पीएम मोदी ने अपनी सरकार के ट्रैक रिकॉर्ड का ज़िक्र किया और कहा कि इसे देख कर ही जनता ने उन्हें जीत दिलाई है.

उन्होंने अपने पहले कार्यकाल का ज़िक्र करते हुए कहा कि 'भ्रष्टाचार के प्रति ज़ीरो टालेरेंस की वजह से ही जनता ने आशीर्वाद दिया. मोदी ने अपने भाषण में इमरजेंसी के 50वें वर्षगांठ का ज़िक्र किया और इंदिरा गांधी के तत्कालीन शासन पर निशाना साधा.

बीबीसी
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राहुल गांधी

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पीएम मोदी बनाम राहुल गांधी

सोमवार को राहुल गांधी के भाषण और मंगलवार को पीएम मोदी के भाषण में कौन किस पर भारी रहा? इस सवाल पर संजीव श्रीवास्तव कहते हैं कि राहुल गांधी बहुत अच्छा बोले इसमें एक सरप्राइज़ का फ़ैक्टर रह सकता है क्योंकि उनका इतना लंबा और संजीदा भाषण संसद में कम हुआ है.

संजीव श्रीवास्तव के मुताबिक़, "हिंदू वाले मुद्दे को छोड़कर उन्होंने नेता प्रतिपक्ष की भूमिका बख़ूबी निभाई क्योंकि हिंदू वाले मुद्दे पर वो फंस सकते थे. उसी तरह से प्रधानमंत्री ने सदन के नेता की भूमिका में 45-50 मिनट के बाद अच्छी भूमिका निभाई और अच्छे जवाब देने की कोशिश की."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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लेकिन पीएम मोदी के दो घंटे के भाषण का क्या निचोड़ था, इस सवाल के जवाब में संजीव श्रीवास्तव ने कहा, ''दो घंटे का भाषण था. प्रधानमंत्री ने एक बात तीन बार बोली .स्पीकर की तरफ़ देख कर बोले बड़ा आनंद आया.''

''पहले एक घंटे के भाषण में कुछ नया नहीं था और कई पुरानी बातें थीं. 2014 से पहले की कहानी थी. लेकिन एक घंटे के बाद, भाषण राजनीतिक रूप से परवान चढ़ा. उनका विश्वास लौट आया.''

श्रीवास्तव कहते हैं, ''पीएम ने हिंदुत्व की राजनीति पर राहुल गांधी को घेरा. ये बात सही है, कि इस चुनाव में हिंदुत्व की राजनीति को धक्का लगा है, हिंदुत्व की राजनीति को पीछे धकेला गया. हालांकि ये एक संवेदनाशील मुद्दा है.''

संजीव श्रीवास्तव कहते हैं, ''राहुल गांधी को ध्यान रखना चाहिए कि ये एक ऐसा 'जिन्न' है जो बोतल से कभी भी बाहर आ सकता है. राहुल गांधी हिंदुओं की बुराई नहीं कर रहे हैं, लेकिन मौका क्यों देना चाहते हैं. राहुल गांधी को ध्यान रखना चाहिए कि ऐसा संदेश न जाए कि हिंदुओं का अपमान हो रहा है. ध्यान देना चाहिए कि कुछ बोलकर बिना वजह कोई मुद्दा ना बन जाए.''

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