बांग्लादेश किस हद तक भारत पर निर्भर, संबंध और बिगड़े तो किसका होगा ज़्यादा नुक़सान

बांग्लादेश

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, बांग्लादेश को 'इंडिया लॉक्ड' मुल्क कहा जाता है क्योंकि वो लगभग चारों तरफ़ से भारत से घिरा है

भारत में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के नेता कह रहे हैं कि अगर भारत ने बांग्लादेश में ज़रूरी आपूर्ति रोक दी तो इसका बहुत गहरा असर पड़ेगा.

बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने सोमवार को कहा कि बांग्लादेश में एक छोटा तबका भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल है और इससे भारत के हित प्रभावित नहीं होंगे.

दिलीप घोष ने कहा कि अगर भारत ने बांग्लादेश में आलू, प्याज, दवाई, पानी और कॉटन जैसी ज़रूरी आपूर्ति रोक दी तो बांग्लादेश पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा.

घोष ने कहा, ''भारत ने बांग्लादेश से संबंध इसलिए नहीं तोड़े हैं क्योंकि दोनों देशों का ऐतिहासिक रिश्ता रहा है. अगर बांग्लादेश में इसी तरह से अत्याचार जारी रहा तो अंततः बांग्लादेश की स्थिरता और पूरी अर्थव्यवस्था को नुक़सान होगा.''

बांग्लादेश की जैसी भौगोलिक स्थिति है, उसमें भारत के साथ उसके संबंध काफ़ी अहम हो जाते हैं.

लाल रेखा

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

लाल रेखा

बांग्लादेश को 'इंडिया लॉक्ड' मुल्क कहा जाता है. दरसअल, बांग्लादेश की 94 प्रतिशत सीमा भारत से लगती है. भारत और बांग्लादेश के बीच 4,367 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है और यह उसकी अंतरराष्ट्रीय सीमा का 94 फ़ीसदी है. यानी बांग्लादेश लगभग चारों तरफ़ से भारत से घिरा हुआ है.

ऐसे में बांग्लादेश सुरक्षा और व्यापार के मामले में भारत पर निर्भर है. वहीं बांग्लादेश से भारत को पूर्वोत्तर के राज्यों में सस्ता और सुलभ संपर्क में मदद मिलती है. पूर्वोत्तर के राज्यों से बाक़ी भारत को जोड़ने में बांग्लादेश की अहम भूमिका है.

बांग्लादेश

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, बांग्लादेश कई मामलों में भारत पर निर्भर है. मुमकिन है कि बढ़ते तनाव का असर वहां की अर्थव्यवस्था पर भी पड़े.

किस हद तक निर्भरता

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

बांग्लादेश और भारत के बीच पानी की साझेदारी, सीमा से होने वाले कारोबार और शरणार्थियों के मुद्दे अहम रहे हैं.

साझी भौगोलिक स्थिति के कारण दोनों देशों के साथ ये मुद्दे जुड़े रहेंगे. बांग्लादेश चावल, गेहूँ, प्याज, लहसुन, चीनी, कॉटन, अनाज, रिफाइंड पेट्रोलियम, इलेक्ट्रिक उपकरण, प्लास्टिक और इस्पात के लिए भारत पर निर्भर है.

कोविड महामारी से पहले बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था मज़बूत स्थिति में थी और इसमें सबसे बड़ा योगदान पश्चिम के देशों में बांग्लादेश से कपड़ों का निर्यात का था.

बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग भारत से जाने वाले कच्चे माल पर निर्भर है. दिलीप घोष को यह बात पता है और वह इसी का हवाला दे रहे हैं.

अगर भारत से बांग्लादेश का संबंध और बिगड़ता है तो उसका निर्यात प्रभावित होगा. इसका असर जीडीपी पर पड़ेगा और फिर महंगाई के साथ बेरोज़गारी बढ़ेगी. बांग्लादेश के लिए भारत से संबंध ख़राब होने की क़ीमत चुकाना आसान नहीं होगा.

बांग्लादेश दक्षिण एशिया में भारत का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है और भारत एशिया में बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है.

बांग्लादेश एशिया में सबसे ज़्यादा निर्यात भारत में करता है. बांग्लादेश ने वित्त वर्ष 2022-23 में भारत में दो अरब डॉलर का निर्यात किया था. वित्त वर्ष 2022-23 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 15.9 अरब डॉलर का था.

बांग्लादेश

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, शेख़ हसीना के कार्यकाल में भारत के साथ रिश्ते मज़बूत हुए हैं लेकिन मौजूदा समय में हसीना को बांग्लादेश में किसी विलेन के रूप में देखा जा रहा है.

द्विपक्षीय व्यापार

2021 में बांग्लादेश में भारत का निर्यात 14 अरब डॉलर का था जो कि 2022 में 13.8 अरब डॉलर था. 2023 में यह घटकर 11.3 अरब डॉलर हो गया. बांग्लादेश में भारत के निर्यात कम होने के पीछे की मुख्य वजह मांगों में आई कमी थी. जानकार बताते हैं कि मांग में ये कमी रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग से सप्लाई चेन में आई बाधा के कारण हुई.

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था कोविड महामारी के पहले वाले दौर में अब भी नहीं आ पाई है. इसी बीच शेख़ हसीना को सत्ता से बाहर होना पड़ा. भारत के साथ ख़राब होते संबंधों के कारण बांग्लादेश को आर्थिक मोर्चे पर एक और चोट लग सकती है.

भारत ने पिछले आठ सालों में बांग्लादेश को आठ अरब डॉलर की मदद की है. ये मदद भारत ने बांग्लादेश में विकास परियोजनाओं को लेकर की है.

इनमें रोड, रेल, शिपिंग और पोर्ट्स के निर्माण शामिल हैं. शेख़ हसीना के कार्यकाल में बांग्लादेश की आर्थिक तरक़्क़ी की काफ़ी तारीफ़ होती रही है.

शेख़ हसीना के कार्यकाल 2009 से जुलाई 2024 के बीच बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था 6.3 प्रतिशत की दर से बढ़ी. जीडीपी का आकार 123 अरब डॉलर से बढ़कर 455 अरब डॉलर हो गया. 2009 में बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी भी 841 डॉलर से बढ़कर 2024 में 2,650 डॉलर हो गई.

भारत के लिए हमेशा से चिंता की बात रही है कि बांग्लादेश कहीं चीन के ज़्यादा क़रीब न चला जाए. शेख़ हसीना जब तक प्रधानमंत्री रहीं तब तक चीन और भारत से संबंधों में संतुलन बनाकर रहीं लेकिन अब भारत की चिंता ज़्यादा गहरी हो गई है. अब बांग्लादेश की क़रीबी चीन के साथ ही नहीं बल्कि पाकिस्तान के साथ भी बढ़ती दिख रही है.

बांग्लादेश

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, शेख़ हसीना के कार्यकाल में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को जो बढ़त मिली थी, उसे झट लगने की आशंका

क्या भारत की जगह कोई और ले सकता है?

पिछले महीने ही पाकिस्तान का एक मालवाहक पोत कराची से बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित चटगांव बंदरगाह पर पहुँचा था.

1971 में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के बाद से दोनों देशों के बीच यह पहला समुद्री संपर्क हुआ था. इससे पहले दोनों देशों के बीच समुद्री व्यापार सिंगापुर या कोलंबो के ज़रिए होता था. यह पाकिस्तान के साथ क़रीबी बढ़ने की ठोस शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है.

बांग्लादेश में निवेश का चीन सबसे बड़ा स्रोत है. बांग्लादेश चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का हिस्सा है. चीन ने बांग्लादेश में सात अरब डॉलर का निवेश किया है और 2023 में चीन ने बांग्लादेश में 22 अरब डॉलर का निर्यात किया था.

किंग्स कॉलेज लंदन में अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रोफ़ेसर हर्ष पंत कहते हैं कि पिछले डेढ़ दशक में बांग्लादेश ने आर्थिक प्रगति की जो राह पकड़ी थी, वो राह भारत से ख़राब होते संबंधों के कारण अड़चनों से भरती दिख रही है.

प्रोफ़ेसर पंत कहते हैं, ''भारत के एक बड़ा मुल्क है. किसी छोटे देश से संबंध बिगड़ता है तो बड़े पर असर कम पड़ता है. पाकिस्तान से पिछले सात सालों से भारत के राजनयिक संबंध नहीं हैं लेकिन इसका असर भारत पर नहीं पड़ा. पाकिस्तान पर ज़रूर पड़ा है. अगर बांग्लादेश ने तय ही कर लिया है कि भारत से संबंध ख़राब करने की हर क़ीमत चुकाने के लिए तैयार है, तो उसे कौन रोक देगा.''

वीडियो कैप्शन, बांग्लादेश में इस्कॉन के चिन्मय कृष्ण दास को गिरफ़्तार करने का पूरा मामला क्या है?

प्रोफ़ेसर पंत कहते हैं, ''भारत से जो सामान जिस क़ीमत में बांग्लादेश पहुँचता है, उस क़ीमत में कोई भी देश नहीं दे सकता है. भारत से बांग्लादेश सामान जाने में परिवहन का खर्च कम होता है लेकिन वही सामान चीन से आएगा या दूसरे देशों से तो ज़्यादा महंगा हो जाएगा. अगर बांग्लादेश को ये बर्दाश्त है तो ठीक है. बांग्लादेश के लिए भारत जो मायने रखता है, उसकी भरपाई चीन नहीं कर सकता है. कई लोग कहते हैं कि शेख़ हसीना भारत का पक्ष लेती थीं लेकिन लोग ये भूल जाते हैं कि हसीना के कार्यकाल में ही चीन बांग्लादेश का सबसे बड़ा डिफेंस पार्टनर था.''

प्रोफ़ेसर पंत कहते हैं, ''बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग भी भारत के कच्चे माल पर निर्भर है. बांग्लादेश की जीडीपी में वहाँ की टेक्स्टाइल इंडस्ट्री का योगदान 11 प्रतिशत है. भारत अगर चाह ले तो बांग्लादेश को कई मोर्चों पर चोट दे सकता है लेकिन मुझे नहीं लगता है कि चीज़ें इस हद तक ख़राब होंगी.''

बांग्लादेश भारतीय कॉटन का सबसे बड़ा बाज़ार है. भारतीय कॉटन के कुल वैश्विक निर्यात में क़रीब 35 प्रतिशत हिस्सेदारी बांग्लादेश की है. ज़ाहिर है इसका असर भारत पर भी पड़ेगा लेकिन कई लोग मानते हैं कि इससे भारत के भीतर कॉटन की क़ीमत में कमी आएगी और घरेलू टेक्स्टाइल इंडस्ट्री के लिए अच्छा रहेगा.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)