नेपोलियन की हिटलर से तुलना पर छिड़ी बहस, क्या है वजह?

    • Author, नील आर्म्सस्ट्रॉन्ग
    • पदनाम, बीबीसी कल्चर

हॉलीवुड के जाने-माने निर्देशक रिडली स्कॉट ने 19वीं सदी में फ्रांस के सम्राट रहे नेपोलियन के जीवन पर एक फ़िल्म बनाई है जो विवादों का शिकार हो गयी है.

फ़िल्म निर्देशक की ओर से नेपोलियन की तुलना हिटलर और स्टालिन से किया जाना लोगों की नाराज़गी की वजह बना हुआ है.

ये फ़िल्म आगामी नवंबर में रिलीज़ होनी है जिसमें नेपोलियन की भूमिका मशहूर एक्टर वाकिन फिनिक्स निभा रहे हैं.

फ़िल्म निर्देशक इस वक़्त फ़िल्म का प्रचार करने में व्यस्त हैं.

इस फ़िल्म को एक सम्राट के उदय की कहानी बताया जा रहा है जिसमें नेपोलियन के उनकी पत्नी जोज़फ़ीन से उतार-चढ़ाव भरे रिश्तों की दास्तान भी शामिल है. जोज़फ़ीन की भूमिका में वेनेसा किर्बी हैं.

हालांकि, फ़िल्म कैसी है ये जानने में अभी वक़्त लगेगा लेकिन इस बायोपिक के बारे में चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

इसकी शुरुआत रिडली स्कॉट के उस बयान से हुई जिसमें उन्होंने कहा कि, “मैं नेपोलियन की तुलना सिकंदर महान, अडोल्फ़ हिटलर और स्टालिन के साथ करता हूँ. सुनिए नेपोलियन में बहुत कुछ ख़राब भी था.”

रिडली स्कॉट नेपोलियन के किरदार को समझाने का प्रयास कर रहे थे. लेकिन फ़्रांस में लोगों ने प्रतिक्रिया देने में बिल्कुल देर नहीं की.

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तुलना से असहमत

इस तुलना से असहमत फ्रांसीसियों ने पलटवार करने में वक़्त नहीं लगाया.

फ़ाउंडेशन नेपोलियन से जुड़ी पियर ब्रांडा ने ब्रितानी अख़बार टेलिग्राफ़ को बताया, “हिटलर और स्टालिन ने किसी चीज़ का निर्माण नहीं किया. वे सिर्फ़ तबाही मचा कर गए.”

फ़ाउंडेशन नेपोलियन से जुड़े थियरी लेंट्स ने कहा, “नेपोलियन ने न तो फ़्रांस को तबाह किया और न ही यूरोप को. उनकी विरासत को संजोया गया और बाद में उसे विस्तार दिया गया.”

तो आख़िर सच्चाई क्या है? रिडली स्कॉट का नेपोलियन को हिटलर और स्टालिन से तुलना करना सही है या नहीं?

नेपोलियन एक प्रतिभाशाली सैन्य कमांडर थे जिन्होंने साल 1799 में फ्रांसीसी क्रांति के बाद फ्रांस में राजनीतिक अस्थिरता की अवधि के दौरान सत्ता हासिल की थी.

उनके प्रशंसकों का कहना है कि नेपोलियन ने क्रांति से पहले की व्यवस्था की तुलना में फ़्रांस को बराबरी वाला देश बनाया.

उन्होंने सरकार को केंद्रीकृत किया, बैंकिंग को पुनर्गठित किया, शिक्षा में सुधार किया और नेपोलियन कोड की स्थापना की. इस कोड ने कानूनी प्रणाली को बदल दिया.

ये कोड बाद में कई अन्य देशों के लिए एक मॉडल साबित हुआ.

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ब्रितानी संस्कृति और साहित्य में नेपोलियन का चित्रण

लेकिन उन्होंने यूरोप भर में कई ख़ूनी जंगें लड़ीं. जब नेपोलियन का साम्राज्य पूरे सबाब पर था तब उसका विस्तार स्पेन से लेकर मॉस्को तक था.

साल 1812 आते-आते सिर्फ़ ब्रिटेन, पुर्तगाल, स्वीडन और ऑटोमन साम्राज्य ही आज़ाद देश थे. बाक़ी सारा यूरोप उनके कब्ज़े में था.

नेपोलियन को 1815 में हार का सामना करना पड़ा. उन्होंने वाटरलू के विख्यात युद्ध में ब्रिटेन की अगुवाई वाले एक गठबंधन ने हराया था.

ब्रिटेन के लोगों के ज़हन में नेपोलियन और उनके द्वारा छेड़े गए युद्धों का साया उस ज़माने के बाद तक रहा.

ब्रिटेन में कार्टूनिस्ट तक नेपोलियन के बारे में काफ़ी तंज़ कसते रहते थे.

मशहूर ब्रितानी उपन्यासकार जेन ऑस्टन के उपन्यासों के केंद्र भी नेपोलियन के ज़माने की पृष्ठभूमि है.

साल 1843 में छपे उनके उपन्यास प्राइड और प्रिज्यूडिश में उस मिलिशिया का ज़िक्र है जो नेपोलियन के संभावित हमले का जवाब देने के लिए गठित किया गया था.

शार्लट ब्रोंटे के पास नेपोलियन के ताबूत का एक अंश था जो उन्हें ब्रसेल्स में उनके ट्यूटर ने दिया था.

शेरलक होम्स जैसे किरदार को गढ़ने वाले आर्थर कोनन डॉएल अपने खलनायक प्रोफ़ेसर मोरयार्टी को ‘अपराध का नेपोलियन’ कहकर पुकारते थे.

साल 1945 में प्रकाशित जॉर्ज ऑरवेल की कालजयी कृति ‘एनिमल फ़ार्म’ में जो सुअर तानाशाह बनता है उसका नाम भी नेपोलियन ही था.

लेकिन क्या नेपोलियन को तानाशाह कहना और उसकी तुलना बदनाम तानाशाहों से करना उचित है?

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नेपोलियन के बारे में अलग-अलग आंकलन

ऑस्ट्रेलिया की न्यू कासल यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफ़ेसर फ़िलिप डायर ने तीन वॉल्यूम में नेपोलियन की जीवनी लिखी है.

वे इस तुलना को सही नहीं मानते.

प्रोफ़ेसर डायर कहते हैं, “आप इस बारे में बहस कर सकते हैं कि नेपोलियन क्रूर था या नहीं. मैं शायद ये भी कहूं कि वह क्रूर ही था. पर वो हिटलर या स्टालिन तो बिल्कुल ही नहीं था. इन दोनों तानाशाहों ने अपने ही लोगों का क्रूरता से दमन किया था. और इसकी वजह से लाखों लोगों की जान गई थी.”

प्रोफ़ेसर डायर कहते हैं कि कई लोग नेपोलियन के राज को एक पुलिस स्टेट भी कहते थे क्योंकि उन्होंने मुख़बिरों का एक मकड़जाल सा बुन रखा था.

ये मुख़बिर जनता के बीच चल रही चर्चाओं से नेपोलियन को बाख़बर रखता था.

वे कहते हैं, “लेकिन कुछेक कुलीन वर्ग के लोगों या पत्रकारों के अलावा उन्होंने कभी किसी को फांसी नहीं चढ़ाया. जिनको मौत की सज़ा हुई भी उनके विरुद्ध राजद्रोह के केस थे. अगर मुझे नेपोलियन की किसी से तुलना करनी ही है तो मैं फ़्रांस के सम्राट लूई 14वें से करुँगा. वे एक ऐसे सम्राट थे जिन्होंने ग़ैर-ज़रूरी युद्ध लड़े जिनमें हज़ारों लोगों की जान गई.”

"नेपोलियन ने भी यही किया. पर ये बहस का विषय है कि उनके युद्ध ज़रूरी थे या नहीं. लेकिन उनकी लड़ाइयों के कारण लाखों जाने गईं. हालांकि इन युद्धों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कितने आम लोग मरे इसका सही अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है."

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तुलना बेमानी

फ़्रांसिसी पत्रकार और टेलीग्राफ़ में कॉलम लिखने वालीं एन-एलिसाबेथ मूते मानती हैं कि नेपोलियन की हिटलर या स्टालिन से तुलना बेमानी है.

वे कहती हैं, "नेपोलियन ने कॉन्सेंट्रेशन कैंप नहीं बनाए. उन्होंने अल्पसंख्यकों का जनसंहार नहीं किया. ये मानती हूं कि पुलिस का दख़ल बहुत अधिक था पर आम लोग अपना जीवन यापन करने के लिए स्वतंत्र थे."

वे कहती हैं कि फ़्रांस में नेपोलियन की इमेज एक सुधारक की है.

"नेपोलियन बहुत ही तेज़ दिमाग़ रखते थे. उनके द्वारा बनाए गए क़ानून और संस्थानों का आज भी फ़्रांस में पालन होता है.”

"हम ये मानकर चलते हैं कि फ़्रांस के लोग सामंती व्यवस्था की तुलना में नेपोलियन के राज से अधिक संतुष्ट थे."

'नेपोलियन के पास था विज़न'

लेकिन नेपोलियन पर कई किताबें लिख चुके लिवरपूल विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर चार्ल्स एसडेल इस बारे में कुछ अलग विचार रखते हैं.

वह कहते हैं, "मैं नेपोलियन को वॉर लॉर्ड की तरह देखता हूँ. एक ऐसा व्यक्ति जो निजी महत्वाकांक्षा से प्रेरित था. और जो क्रूर था. एक ऐसा व्यक्ति जिसके दिमाग़ में फ़्रांस और यूरोप को लेकर साफ़ विज़न था.

वो इस विज़न के ज़रिए अपनी वॉर मशीन को पोषित करना चाहता था. ये कहना कि वो किसी तरह से भविष्य की सोच रखने वाले थे, ग़लत है. ये सब नेपोलियन को एक लेजेंड बनाने की कवायद है.”

वे कहते हैं, “नेपोलियन ने प्रोपैगेंडा के सहारे अपने साम्राज्य और युद्धों में अपना पक्ष मज़बूती से रखा. ये कोई फ़्रांस का पक्ष नहीं था. हर कोई फ़्रांस में जंग लड़ रहा था. वही प्रोपैगेंडा आज भी काम कर रहा है. अपने कब्र से बाहर अब भी उनका पक्ष रखने वाले मौजूद हैं.”

लेकिन हिटलर और स्टालिन के साथ तुलना को तो प्रोफ़ेसर एलडेल भी ख़ारिज करते हैं.

"नेपोलियन में कई ख़ामियां थीं लेकिन जो नस्लवादी विचारधारा नाज़ी काल को परिभाषित करती है वो नेपोलियन में बिल्कुल नहीं थी. नेपोलियन जनसहांर के दोषी नहीं थे. नेपोलियन के पूरे कार्यकाल में राजनीतिक कैदियों की संख्या बहुत सीमित थी. उनकी तुलना हिटलर या स्टालिन से करना बेवकूफ़ी है."

ब्लेड रनर, ग्लेडियेटर, थेल्मा और लुईस जैसी फ़िल्मों के निर्देशक रिडली स्कॉट को फ़िल्मों को प्रमोट करने का हुनर बख़ूबी आता है.

इसकी पूरी संभावना है कि उनका अनुमान रहा होगा कि नेपोलियन की स्टालिन और हिटलर से तुलना करना ख़ासी पब्लिसिटी बटोर सकता है. और संभव है कि इसीलिए स्कॉट ने ये बात उछाली हो.

तो क्या प्रोफ़ेसर एसडेल नेपोलियन पर बनी इस फ़िल्म को देखने जाएंगे?

"मुझे फ़िल्म देखने जाना तो पड़ेगा, लेकिन रॉड स्टाइगर नेपोलियन का रोल नहीं कर रहे इसलिए ये इतनी अच्छी फ़िल्म तो नहीं ही होगी."

उनका इशारा 1970 में बनी फ़िल्म वाटरलू से है जिसमें नेपोलियन का रोल रॉड स्टाइगर ने किया था.

प्रोफ़ेसर एसडेल मुस्कराते हुए कहते हैं, “नेपोलियन के किरदार में स्टाइगर ने गजब का अभिनय किया था.”

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