काश पटेल की कहानी, जिन्हें ट्रंप ने एफ़बीआई डायरेक्टर बनाने का एलान किया

काश पटेल

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    • Author, अभिनव गोयल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

अमेरिका में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय मूल के कश्यप उर्फ़ काश पटेल को फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन यानी एफ़बीआई के डायरेक्टर पद पर नियुक्त करने का एलान किया है.

भारतीय समयानुसार एक दिसंबर की सुबह पांच बजे के क़रीब ट्रंप ने अपने आधिकारिक ट्रूथ सोशल अकाउंट पर इस बारे में जानकारी दी.

ट्रंप ने लिखा, ''मुझे ये एलान करते हुए फ़ख़्र महसूस हो रहा है कि कश्यप 'काश' पटेल एफ़बीआई के अगले डायरेक्टर होंगे.''

ट्रंप ने लिखा, "काश एक बेहतरीन वकील, जांचकर्ता और अमेरिका फर्स्ट को मानने वाले योद्धा हैं. उन्होंने अपने करियर के दौरान भ्रष्टाचार को उजागर करने, न्याय की रक्षा करने और अमेरिकी लोगों का बचाव करने में समय बिताया है."

पटेल की तारीफ़ करते हुए ट्रंप ने लिखा- "काश ने मेरे पहले कार्यकाल के दौरान बेहतरीन काम किया."

काश पटेल से पहले ट्रंप ने भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी को भी एलन मस्क के साथ डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएन्सी की ज़िम्मेदारी दी थी.

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अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक नियुक्तियां करनी शुरू कर दी थीं. काश पटेल की नियुक्ति भी इसी का हिस्सा है.

अमेरिका में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति करीब 4 हजार राजनीतिक नियुक्तियां करता है, जिसमें कई महीनों का वक़्त लगता है.

20 जनवरी, 2025 को ट्रंप का राष्ट्रपति पद के लिए शपथ ग्रहण समारोह होगा, जिसके बाद वो आधिकारिक रूप से राष्ट्रपति पद की शक्तियां हासिल कर पाएंगे.

पहली आधिकारिक नियुक्ति के रूप में ट्रंप ने सुसन समरॉल वाइल्स (सूजी वाइल्स) को अपना चीफ़ ऑफ स्टाफ़ बनाया था. ट्रंप के इस चुनावी अभियान में सुसन सह अध्यक्ष थीं.

इसके अलावा उन्होंने अमेरिकी सीमाओं की ज़िम्मेदारी के लिए टोम होमन, संयुक्त राष्ट्र में राजदूत के लिए एलिस स्टेफनिक और पर्यावरण संरक्षण एजेंसी प्रमुख के लिए ली जेल्डिन को चुना.

ट्रंप ने बीते महीने तुलसी गबार्ड को भी नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर के रूप में अपनी टीम में शामिल किया था.

तुलसी गबार्ड ख़ुद को हिन्दू बताती हैं, लेकिन वो भारतीय मूल की नहीं हैं.

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इमेज कैप्शन, ट्रंप की जीत के बाद से ही काश पटेल को अहम ज़िम्मेदार दिए जाने के अनुमान लगाए जा रहे थे.

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44 साल के काश पटेल को डोनाल्ड ट्रंप के सबसे वफ़ादार लोगों में गिना जाता है.

ट्रंप की जीत के बाद ऐसे अनुमान लगाए जा रहे थे कि काश पटेल को अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए का प्रमुख बनाया जा सकता है.

मगर ट्रंप ने जॉन रैटक्लिफ़ को सीआईए प्रमुख बनाने का एलान किया और अब काश पटेल को एफ़बीआई डायरेक्टर बनाने का फ़ैसला किया.

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक़, काश पटेल अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा मंत्री क्रिस्टोफर मिलर के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में काम कर चुके हैं.

इससे पहले पटेल नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में राष्ट्रपति के डिप्टी असिस्टेंट और आतंकवाद निरोधक विभाग के वरिष्ठ निदेशक रहे हैं.

रक्षा विभाग के मुताबिक ट्रंप कार्यकाल के दौरान पटेल ने कई बड़े अभियानों में अहम भूमिका निभाई थी.

काश पटेल के पद पर रहने के दौरान ही आईएसआईएस के मुखिया अल बगदादी, अल क़ायदा के कासिम अल रिमी को मारने के अलावा अमेरिकी बंधकों की सुरक्षित वापसी हुई थी.

काश पटेल नेशनल इंटेलिजेंस के कार्यवाहक निदेशक के प्रिंसिपल डिप्टी भी रहे. इस भूमिका में वे 17 खुफिया एजेंसियों के संचालन की देखरेख करते थे और हर रोज राष्ट्रपति को ब्रीफिंग देते थे.

नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में शामिल होने से पहले पटेल ने खुफिया मामलों पर स्थायी चयन समिति के लिए वरिष्ठ वकील के तौर पर काम किया था.

यहां उन्होंने 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर रूसी अभियान की जांच का नेतृत्व किया था.

काश पटेल ने इंटेलिजेंस कम्युनिटी और यूएस स्पेशल ऑपरेशन फोर्स के लिए संवेदनशील कार्यक्रमों की देखरेख की है.

उन्होंने दुनिया भर में इंटेलिजेंस और काउंटर टेररिज्म को अरबों डॉलर फंड करने वाले क़ानून को बनाने में भी मदद की थी.

खुफिया मामलों पर स्थायी चयन समिति के लिए काम करने से पहले पटेल ने अमेरिका के न्याय विभाग में आतंकवाद अभियोजक के रूप में काम किया.

उन्होंने अपना करियर एक वकील के रूप में शुरू किया, जहां उन्होंने हत्या, ड्रग्स से लेकर पेचीदा वित्तीय अपराधों के मामलों में अदालतों में जिरह की.

काश पटेल भारतीय प्रवासी के बेटे हैं.

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काश पटेल का निजी जीवन

काश पटेल भारतीय प्रवासी के बेटे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका जन्म एक गुजराती परिवार में हुआ था और उनके पिता एक अमेरिकी एविएशन कंपनी में काम करते थे.

अमेरिका के रक्षा विभाग के मुताबिक पटेल न्यूयॉर्क के मूल निवासी हैं. उन्होंने रिचमंड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की है. इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क वापस आकर कानून की डिग्री हासिल की.

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून में ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से सर्टिफिकेट भी लिया है. वे आइस हॉकी खेलना बहुत पसंद है.

काश पटेल त्रिशूल नाम से एक कंपनी चलाते हैं. साल 2023 में इस कंपनी ने ट्रंप की वेबसाइट ट्रूथ सोशल से कंसल्टिंग फीस के रूप में करीब एक करोड़ रुपये लिए थे.

त्रिशूल ने ट्रंप समर्थक सेव अमेरिका इकाई को भी परामर्श देने का काम किया है और यहां से भी पिछले दो सालों में एक करोड़ रुपये से ज्यादा लिए हैं.

अपनी किताब 'गवर्नमेंट गैंगस्टर' में काश पटेल लिखते हैं कि उनकी परवरिश अमेरिका के क्वींस और लॉन्ग आइलैंड में हुई.

वे लिखते हैं कि उनके माता पिता बहुत अमीर नहीं थे. उनके माता-पिता भारत से आए प्रवासी थे और बचपन में डिज्नी वर्ल्ड जाना उन्हें आज भी याद आता है.

वे लिखते हैं, “बहुत सारे माता-पिता की ही तरह मेरी मां और पिता ने भी मुझे पढ़ाई पर ध्यान देने और अपने धर्म और विरासत को लेकर सचेत रहने को कहा. यही वजह है कि भारत के साथ मेरा बहुत गहरा रिश्ता रहा है."

काश लिखते हैं, "चूंकि मेरा पालन-पोषण हिंदू परिवार में हुआ, इसलिए मेरा परिवार मंदिर जाता था और घर में बने मंदिर में पूजा करता था."

उनका कहना है कि वे दिवाली और नवरात्रों को बहुत अच्छे से मनाते थे.

वे लिखते हैं, "बचपन में मुझे भारतीय शादियों में जाना याद है, जो दूसरी पार्टियों से अलग होती थीं. वहां 500 लोगों का एक हफ्ते तक जश्न मनाना एक छोटी बात मानी जाती थी."

काश लिखते हैं, ''मां घर में मांस नहीं लाने देती थीं और शाकाहारी खाना परोसती थीं, जिसकी वजह से मुझे और मेरे पिता को कभी-कभी बाहर जाकर खाना पड़ता था.''

काश कहते हैं कि जब भी उन्हें बटर चिकन खाना होता था तो वे बाहर जाते थे, लेकिन इस बात का पता उनकी मां को चल जाता था.

काश फाउंडेशन

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इमेज कैप्शन, काश पटेल एक एनजीओ भी चलाते हैं

काश फाउंडेशन

काश पटेल, काश फाउंडेशन नाम से एक एनजीओ भी चलाते हैं. यह एनजीओ सैन्य कर्मियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को वित्तीय मदद करती है.

अमेरिकी बच्चों को पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप और व्हिसलब्लोअर्स की मदद के लिए भी यह एनजीओ पैसा खर्च करती है.

एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था यह एनजीओ उन लोगों की भी मदद कर रही है जिन पर साल 2021 में हुए कैपिटल हिल में हुए दंगे के आरोप हैं.

नवंबर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे पलट देने का आह्वान करते हुए ट्रंप के समर्थकों ने कैपिटल हिल पर चढ़ाई कर दी थी.

भीड़ उस सीनेट कक्ष तक भी पहुंच गई थी जहां कुछ मिनट पहले ही चुनाव परिणाम प्रमाणित किए गए थे.

(नोट: ये स्टोरी सबसे पहले 12 नवंबर को छपी थी. इस रिपोर्ट को अपडेट के साथ फिर से प्रकाशित किया गया है.)

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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