तेहरान छोड़ते वो ईरानी लोग जो शेयर कर रहे हैं अपने घर की 'आख़िरी तस्वीरें'

इसराइल ईरान संघर्ष

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इमेज कैप्शन, तेहरान छोड़ने वाले लोगों ने सोशल मीडिया पर अपने घर की 'आख़िरी तस्वीरें' पोस्ट की हैं क्योंकि उन्हें डर है कि वे लौट पाएंगे भी या नहीं
    • Author, तारानेह फ़तालियान
    • पदनाम, बीबीसी फ़ारसी

सोफ़ा ख़ाली पड़ा है और उसके सामने सूटकेस में बंधा हुआ सामान रखा है. पर्दे गिरा दिए गए हैं और उनके पास रखे घरेलू पौधों के गमले, सजावटी सामान और कुशन बहुत करीने से लगा दिए गए हैं.

सोशल मीडिया पर फ़ारसी भाषी लोगों के बीच एक ट्रेंड देखा जा रहा है जिसमें मार्मिक तस्वीरें साझा की जा रही हैं जिनका शीर्षक है- 'द लास्ट फ़ोटो ऑफ़ होम.'

जो लोग अपने घरों में ताला लगा कर शहर छोड़ रहे हैं, वे ऐसी तस्वीरें साझा कर रहे हैं.

इसराइल ने ईरान पर बमबारी जारी रखी है और राजधानी तेहरान के कई निवासियों ने शहर से बाहर जाने के लिए भारी जाम और पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी क़तार का सामना करने का विकल्प चुना है.

हालांकि वे असमंजस में हैं कि जब वे लौटेंगे तो उनका घर उसी हालत में मिलेगा या नहीं.

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शहर छोड़ रहे लोग क्या कह रहे हैं?

इसराइल ईरान संघर्ष

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इमेज कैप्शन, शुक्रवार को तेहरान की एक इमारत पर हुए इसराइली हवाई हमले में एक अपार्टमेंट का ड्रॉइंग रूम क्षतिग्रस्त हो गया

ऐसे ही एक शख़्स ने लिखा, "मैंने अपने प्रियजनों और ज़रूरत की चीज़ों को पैक किया, अपने पौधों को पानी दिया और सड़क पर आ गया. घर छोड़ना तब और कठिन हो जाता है जब आपको पता नहीं कि आप लौट भी पाएंगे या नहीं."

एक दूसरे यूज़र ने लिखा, "मेरे घर में ऐसा दुखद वाक़या कभी नहीं हुआ. मुझे नहीं पता कि हम कभी लौट पाएंगे या नहीं."

एक तीसरे यूज़र ने अपने काम करने की जगह की तस्वीर डाली, जहां कंप्यूटर और हेडफ़ोन रखा है और लिखा, "मैंने जिन चीज़ों को पाने के लिए इतनी मेहनत की थी, उन्हें गुड बाय बोल दिया, ये ऐसी चीज़ें थीं जिनके लिए मेरी रातों की नींद चली गई थी और मेरे बाल सफे़द होने लगे थे. आशा करता हूं कि जब मैं लौटूं, ये वैसी ही बनी रहें."

क़रीब एक करोड़ आबादी वाले इस शहर के एक अन्य निवासी ने लिखा कि वह इस शहर में 'यूनिवर्सिटी और काम के सपने' लेकर आया था.

उस शख़्स ने आगे लिखा, "मैंने अपने घर में बड़े प्यार और कोशिशों से चीज़ों को ख़रीदा और सजाया. मैंने इन्हें ख़ामोशी से गुड बाय कहा, इस उम्मीद में कि अपनी ख़ूबसूरत और सुरक्षित जन्नत में एक दिन फिर लौटूंगा."

इसराइल ने तेहरान छोड़ने को कहा

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इमेज कैप्शन, तेहरान शहर से बाहर जाने वालों के लिए लंबे ट्रैफ़िक जाम ने और मुश्किलें खड़ी कर दी हैं

जिन लोगों ने तस्वीरें शेयर की हैं, उन्होंने सोमवार को शहर ख़ाली करने के इसराइली आदेश से पहले ही शहर छोड़ने का फ़ैसला कर लिया था.

इसराइली सेना ने कहा था कि निवासियों को उत्तरी तेहरान के एक बड़े इलाक़े को 'तुरंत' ख़ाली कर देना चाहिए और नक़्शे पर शहर के कुछ हिस्सों को चिह्नित कर दिया.

यह आदेश ईरान पर इसराइल के चौथे दिन जारी हवाई हमलों के बाद आया है, जिनमें अभी तक 224 लोग मारे जा चुके हैं.

जबकि इसराइल पर तेहरान के जवाबी मिसाइल हमले में कम से कम 24 लोग मारे गए हैं. शुरू में इसराइली हमले परमाणु और सैन्य ठिकानों और शीर्ष अधिकारियों पर केंद्रित थे.

अब इसराइल का हमला और विस्तारित हो गया है. राजधानी पर कई बार हमले हुए हैं, जिनमें रिहायशी इलाक़े भी निशाने पर आए हैं, जिससे निवासियों में डर पैदा हो गया है.

बीबीसी पत्रकार ईरान के अंदर रिपोर्ट नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है लेकिन कुछ ईरानी लोगों ने बीबीसी फ़ारसी से संपर्क किए जाने पर अपने अनुभव साझा किए.

वीडियो कैप्शन, ईरान के ख़िलाफ़ इसराइल ने क्यों उठाया ऐसा क़दम?

जिन्होंने रुकने का फ़ैसला किया

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कुछ निवासियों ने कहा कि बुज़ुर्ग माता-पिता, बच्चों और इलाज की ज़रूरतों या कोई और विकल्प न होने की वजह से उन्होंने रुकने का फ़ैसला किया है.

एक महिला ने बीबीसी फ़ारसी को बताया कि वह प्रेग्नेंट हैं और उनकी एक छोटी बेटी है, "इस ट्रैफ़िक से मैं कैसे निकल पाऊंगी? सब कुछ मैंने यहीं बनाया है... मैं कहां जाऊंगी?"

एक दूसरी महिला ने कहा कि वह सिंगल हैं और 800 किलोमीटर दूर शिराज़ में रह रहे अपने परिवार के यहां जाने में उन्हें जोखिम लगता है. उस महिला ने कहा, "हालांकि मेरे पास कार है, लेकिन तेहरान को छोड़ने को लेकर मेरा सबसे बड़ा डर दूरी, ईंधन की कमी और रास्ते में कार का ख़राब होना है."

उस महिला ने बताया कि उसके जिन दोस्तों ने शहर छोड़ा था वे घंटों तक ट्रैफ़िक जाम में फंस गए थे, "10 से 12 घंटे की दूरी तय करने में उन्हें 20 घंटे लग गए. बस टिकट भी नहीं मिल रहा है."

दो बच्चों वाली 40 साल की महिला ने बीबीसी को बताया कि वह "कहीं नहीं जा रही."

महिला ने कहा, "सच कहूं तो शहर छोड़कर जाने और लौट कर अपनी पूरी ज़िंदगी तबाह पाने के बारे में सोच-सोच कर थक गई हूं. मैंने इन सालों में काफ़ी कड़ी मेहनत की है, चाहे कोविड हो, महंगाई हो या बाकी कुछ. आज जहां मैं हूं वहां तक पहुंचने के लिए बहुत संघर्ष किया है. अगर सबकुछ बर्बाद होने जा रहा है तो मैं बच्चों और घर के साथ हूं, क्योंकि अब फिर से ज़िंदगी शुरू करने की हिम्मत नहीं बची है."

लेकिन यह उहापोह की स्थिति, ईरान के बाहर रहने वाले लाखों ईरानी लोगों की भी है क्योंकि वे बहुत कमज़ोर इंटरनेट कनेक्शन के ज़रिए अपने प्रियजनों से संपर्क बनाने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें लेकर चिंतित हैं.

एक इंस्टाग्राम यूज़र ने लिखा, "बाहर जाने में हमें होम सिकनेस सबसे मुश्किल समस्या लगती थी. लेकिन अब जंग है और हमें पता चल रहा है कि दूर रहने की चिंता असल में क्या होती है."

कुछ प्रवासी ईरानियों ने बताया कि उनके रिश्तेदारों ने उनकी सलाह के बावजूद शहर छोड़ने से इनकार कर दिया है.

इस तरह के संदेशों के जवाब में तेहरान के एक निवासी ने लिखा, "कुछ के पास धन नहीं है. कुछ के पास कहीं जाने की जगह नहीं है. अब हमें ये न बताएं कि शहर छोड़ देना चाहिए."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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