सुनीता विलियम्स को ड्रैगन कैप्सूल से निकालकर स्ट्रेचर पर क्यों ले जाया गया?

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, नंदिनी वेल्लास्वामी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपनी वेबसाइट पर वैज्ञानिक विक्टर ग्लोवर से बातचीत प्रकाशित किया है. ग्लोवर एक एस्ट्रोनॉट भी हैं.
उस बातचीत में विक्टर की बेटी उनसे पूछती है, "पृथ्वी पर लौटने के बाद आपको सबसे पहले कौन-सी गंध महसूस हुई?"
विक्टर ने बताया कि जब अंतरिक्ष यान समुद्र में उतरा तो सबसे पहले उन्हें समुद्र की गंध महसूस हुई.
उन्होंने कहा, "वो गंध और हवा अद्भुत थी."
ग्लोवर आगे बताते हैं कि धरती पर आने के बाद उन्हें किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या या परेशानी का अनुभव नहीं हुआ.
पर क्या सारे अंतरिक्ष यात्री ऐसा ही महसूस करते हैं?
भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर 286 दिन बिताने के बाद पृथ्वी पर लौट आई हैं. 19 मार्च, बुधवार को भारतीय समयानुसार सुबह करीब 3:27 बजे स्पेसएक्स का ड्रैगन अंतरिक्ष यान उन्हें अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य के निकट समुद्र में ले आया.
सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर और आईएसएस चालक दल के अन्य सदस्यों अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री निक हेग और रूसी अंतरिक्ष यात्री अलेक्जेंडर कोरबुनोव के साथ पृथ्वी पर लौटीं हैं.
ड्रैगन कैप्सूल से स्प्लैशडाउन के बाद नासा के बचाव दल ने सुनीता को स्ट्रेचर पर बाहर निकाला.
अंतरिक्ष में कैसा बदलता है शरीर

इमेज स्रोत, Getty Images
अंतरिक्ष में नौ महीने से अधिक समय बिताने के बाद सुनीता विलियम्स के शरीर में क्या परिवर्तन आए होंगे?
जिस तरह पृथ्वी पर वापस लौटना एक कठिन और चुनौतीपूर्ण यात्रा है, ठीक उसी तरह अंतरिक्ष में लंबा वक़्त बिताने के बाद पृथ्वी पर लौटने पर अंतरिक्ष यात्रियों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
वैज्ञानिकों के अनुसार, अंतरिक्ष में लंबा समय बिताने के बाद आने वाले यात्री अक्सर सामान्य रूप से खड़े होने या चलने में असमर्थ होते हैं.
इसलिए पृथ्वी पर आने के तुरंत बाद वे अपने परिजनों से मिलने घर भी नहीं जा सकते. शारीरिक दिक्कतों के अलावा उन्हें मानसिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है.
अंतरिक्ष से पृथ्वी पर लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर में क्या परिवर्तन होते हैं? वे इससे कैसे उबरते हैं? इसमें कितना समय लगता है?
हर 90 मिनट में सूर्योदय

इमेज स्रोत, NASA
अंतरिक्ष यात्री शून्य गुरुत्वाकर्षण में अंतरिक्ष में रहते हैं. वे हर 90 मिनट में सूर्योदय देखते हैं. इसका मतलब यह है कि अंतराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन हर 90 मिनट में पृथ्वी की एक परिक्रमा करता है.
इसलिए जब यह पृथ्वी के रात्रि पक्ष से गुजरता है तो रात दिखाई देती है और जब दिन वाले हिस्से से गुजरता है तो दिन दिखाई देता है.
ये सुनने में तो दिलचस्प है लेकिन इससे अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर में गड़बड़ी पैदा होती है.
अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस स्टेशन पर रहने के दीर्घकालिक प्रभावों से उबरने में कई दिन, सप्ताह या महीने भी लग सकते हैं.
उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.
नासा के अंतरिक्ष यात्री स्कॉट केली और क्रिस्टीना कोच स्पेस स्टेशन पर लगभग एक वर्ष बिताने वाले पहले अमेरिकी हैं.
अंतरिक्ष में बिताए समय के दौरान शरीर में होने वाले परिवर्तनों की जांच करने के लिए स्कॉट केली और उनके जुड़वां भाई और सेवानिवृत्त वैज्ञानिक मार्क केली पर 'ट्विन स्टडी' नामक एक अध्ययन किया गया था जिससे कई नई जानकारियां मिली थीं.
हड्डियों से लेकर आँखों तक में दिक्कत

इमेज स्रोत, NASA
अंतरिक्ष में लम्बा समय बिताने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को मुख्य रूप से हड्डियों के कमज़ोर होने की समस्या का सामना करना पड़ता है.
ऐसा इसलिए है क्योंकि अंतरिक्ष के शून्य-गुरुत्वाकर्षण के कारण रीढ़ और कूल्हों का उतना इस्तेमाल नहीं होता जितना पृथ्वी पर होता है. पृथ्वी पर शरीर का वज़न सहन करने के लिए शरीर के ये दो अंग महत्वूर्ण होते हैं.
इसलिए जैसे-जैसे दिन बीतते हैं, हड्डियों का घनत्व हर महीने एक से डेढ़ प्रतिशत कम होता जाता है.
पृथ्वी पर काम करने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं लेकिन अंतरिक्ष में हम उतना शारीरिक काम नहीं कर सकते. इसलिए मांसपेशियों का ढीला पड़ना भी एक बड़ी समस्या है.
अंतरिक्ष यात्रियों को अपनी मांसपेशियों और हड्डियों को कमजोर होने से बचाने के लिए ट्रेडमिल पर व्यायाम करना पड़ता है.
अगर अंतरिक्ष यात्री व्यायाम न करें तो क्या होगा?

इमेज स्रोत, NASA
अंतरिक्ष में तैरने और पृथ्वी पर वापस आने के बाद, अंतरिक्ष यात्री खड़े नहीं हो सकते, यहां तक कि चल भी नहीं सकते.
गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण शरीर में तरल पदार्थ सिर की ओर ऊपर की ओर बढ़ता है. इससे आंखों में दबाव और दृष्टि संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.
नासा के अनुसार, लंबी अवधि की अंतरिक्ष यात्रा से वज़न कम होता है. इसके अलावा, तंत्रिका संबंधी परिवर्तन, दृष्टि संबंधी समस्याएं और त्वचा संबंधी समस्याएं भी होती हैं.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पूर्व निदेशक डॉ. एस पांडियन कहते हैं, "जब हम अंतरिक्ष में होते हैं तो हमारी लंबाई बढ़ती है. उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति की लंबाई 150 सेंटीमीटर है तो उसकी लंबाई तीन-चार सेंटीमीटर बढ़ जाती है. पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण रीढ़ की हड्डी की डिस्क को नीचे की ओर खींचता है. चूंकि अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं है, इसलिए डिस्क ऊपर की ओर खिंच जाती हैं. इसके कारण लंबाई बढ़ जाती है."
नासा ने अपनी वेबसाइट पर बताया है कि अगर सावधानी नहीं बरती जाए तो शरीर में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के कारण गुर्दे में पथरी होने की संभावना रहती है.
चलने-फिरने में दिक्कत

इमेज स्रोत, NASA
नासा के अनुसार, धरती पर लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को सिर-आँख और हाथ-आँख के समन्वय में भी परेशानी होती है. इससे चलते फिरते समय शरीर का बैलेंस बनाए रखने में भी दिक्कत होती है.
नासा के मुताबिक कुछ अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर लौटने के बाद भी ऐसा महसूस कर सकते हैं कि जैसे वो अंतरिक्ष में तैर रहे हैं, जबकि वो धरती पर होते हैं.
इसके अलावा यह भी संभव है कि कान के पर्दे पर दबाव पड़ने से 'न्यूरल ट्यूब दोष' पैदा हो सकता है.
इसरो के डॉ. पांडियन कहते हैं, "कान का पर्दा भी हमारे शरीर के संतुलन में भूमिका निभाता है. अगर इसमें कोई समस्या हो तो खड़े होने में दिक्कत हो सकती है."
अंतरिक्ष से लौटने वाले लोगों को चक्कर आने और बेहोशी महसूस होने की अधिक संभावना रहती है. पृथ्वी पर सीधे खड़े होने के कारण वे अपने रक्तचाप को ठीक से नियंत्रित नहीं कर पाते हैं.
डॉ. पांडियन कहते हैं कि लंबी स्पेस यात्रा के बाद अंतरिक्ष यात्री सीधे खड़े नहीं हो पाते इसलिए उन्हें स्ट्रेचर पर ले जाना पड़ता है.
अंतरिक्ष यात्रियों को क्या उपचार और प्रशिक्षण दिया जाता है?

इमेज स्रोत, NASA
अंतरिक्ष यात्रियों को नासा के केंद्र में लगभग 45 दिनों तक रखा जाता है. उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होने के लिए ट्रेनिंग दी जाती है.
डॉ. पांडियन कहते हैं, "जिस तरह दुर्घटना से उबरने वाले लोग तुरंत अपनी सभी सामान्य गतिविधियां नहीं कर पाते, उसी तरह अंतरिक्ष यात्रियों की हालत भी ख़राब होती है. वे तुरंत खड़े या चल नहीं सकते. अक्सर वे बेहोश हो जाते हैं."
वह आगे कहते हैं, "अंतरिक्ष यात्रियों को चार चरणों में अलग-अलग तरह का प्रशिक्षण दिया जाता है. पहला चरण है वार्म-अप. इसके बाद उन्हें स्ट्रेचिंग करवाई जाती है. फिर कार्डियोवैस्कुलर व्यायाम की ट्रेनिंग दी जाती है. इसके बाद यात्री वही सब एक्सरसाइज़ करते हैं जो वे स्पेस स्टेशन पर करते आए हैं.
मसलन ट्रेडमिल पर दौड़ना है एक्सरसाइज़ वाली साइकिल चलाना."
लेकिन अंतरिक्ष यात्री यह सब अकेले नहीं कर सकते. यह सब चिकित्सा विशेषज्ञों की एक टीम की देखरेख में होता है.
इसके लिए नासा के दिशानिर्देश भी हैं.
विशेषज्ञों की टीम अंतरिक्ष यात्रियों की हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम और मालिश वगैरह करवाती है.
डॉ. पांडियन कहते हैं, "अंतरिक्ष यात्रियों को पूरी तरह से ठीक होने में लगभग छह महीने लगते हैं क्योंकि हड्डियों को हुए तमाम नुकसान की मरम्मत एक दिन में नहीं की जा सकती. धीरे-धीरे सब कुछ सामान्य होता है."
हालाँकि, नासा के अनुसार, स्पेस में रहने के कारण हड्डियों को हुए नुकसान की पूरी तरह से भरपाई संभव नहीं है और फ्रैक्चर का खतरा हमेशा बना रहता है.
डॉ. पांडियन कहते हैं, "अंतरिक्ष यात्री हमेशा की तरह खाना नहीं खा पाएंगे. उन्हें मेडिकल टीम की निगरानी में सब्ज़ियों और फलों का संतुलित आहार दिया जाएगा. उनके शरीर में किसी अन्य बदलाव या समस्या की जांच की जाएगी और उसके अनुसार ज़रूरी उपचार दिया जाएगा."
दिमागी सेहत पर असर
मानसिक स्वास्थ्य की बात करें तो अंतरिक्ष में कई वजहों से शरीर के हार्मोन्स का स्तर बढ़ जाता है. इसकी वजह से अंतरिक्ष में मानसिक थकान होती है.
लम्बे समय तक अपने परिवार से दूर रहना और अपने परिजनों के साथ जज़्बाती लम्हों में शामिल न होना भी अंतरिक्ष यात्रियों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकता है.
नासा के अनुसार, इससे मनोवैज्ञानिक समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं.
अंतरिक्ष यात्रियों को बिना किसी मनोरंजन के अंतरिक्ष में रहने के लिए भी प्रशिक्षित किया जाता है.
तो पृथ्वी पर लौटने के बाद मानसिक रूप से सामान्य होने में समय लगता है.
इसके लिए नासा भी चिकित्सकों की टीम का इस्तेमाल करती है.
डॉ पांडियन कहते हैं कि मानसिक दिक्कतों से उबरने में सबसे अहम भूमिका परिवार की होती है.

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












