हनी सिंह: नशे की लत से जूझते सुपरस्टार ने कैसे की वापसी

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- Author, ज़ोया मतीन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
करीब 15 साल पहले साधारण पृष्ठभूमि से आए एक रैपर ने हिप-हॉप संगीत में प्रवेश किया और फिर इसे पूरी तरह से अपने रंग में रंग दिया.
उनके गाने शादियों से लेकर क्लबों में खूब बजते. ड्रग्स और महिलाओं को 'लुभाने' के उनके गीत सड़क किनारे चाय की टपरियों से लेकर बड़ी पार्टियों तक जोर-शोर से बजते थे. ये गीत सुनने वालों को दिमाग़ी सुकून देने के साथ आनंदित करते और उन्हें मंत्रमुग्ध सा कर देते.
लेकिन अपने करियर के शिखर पर रहते हुए वह अचानक ग़ायब हो गया. सात साल बाद- यो यो हनी सिंह संगीत की दुनिया में लौट आए हैं और एक नए एलबम के साथ टूर कर रहे हैं.
नशे की लत से लड़ते हुए और मानसिक सेहत से संघर्ष करते हुए अब वह खुद के बदलने का दावा भी कर रहे हैं.

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पत्नी ने लगाया घरेलू हिंसा का आरोप

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हनी सिंह पर बनी नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री 'यो यो हनी सिंह: फेमस' में संगीत पत्रकार भानुज कप्पल कहते हैं कि 41 वर्षीय गायक और निर्माता हनी सिंह कभी भारत के सबसे बड़े संगीत सितारों में से एक थे. एक ऐसा शख्स जिसने "हिप-हॉप संगीत के सांस्कृतिक प्रभाव को आगे बढ़ाया."
लेकिन वह जितने मशहूर थे, उतना ही ज़्यादा विवादों में भी रहे. हनी सिंह खुद मानते हैं कि वह एक "आक्रामक और लापरवाह व्यक्ति" थे, जिन पर अपने संगीत के माध्यम से अश्लीलता, व्याभिचार और हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप नियमित तौर पर लगते रहे.
कई लोगों ने उनके गीतों की खूब आलोचना की और कहा कि इनमें महिलाओं के साथ हिंसा और बलात्कार को दिखाया गया था.
मीडिया में उनकी छवि और दागदार हुई जब उनकी बचपन की प्रेमिका और पूर्व पत्नी ने तलाक की अर्जी दाखिल कर उन पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया. हालांकि सिंह ने इन आरोपों से इंकार कर दिया.
अब नहीं रहे हिटमेकर

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सात साल बाद अब यह गायक वैसा हिट मेकर नहीं रहा जो कभी पैर थिरकाने वाले अपने अपने उत्तेजक गानों के साथ म्यूजिक चार्ट्स पर राज किया करता था.
पिछले कुछ वर्षों में संगीत की दुनिया भी काफी कुछ बदली है, इसमें भारतीय हिप-हॉप भी शामिल है. यह अब और विकसित हुआ है. एक समय उनकी आवाज़ से प्रेरित होने वाले कलाकार अब उनसे आगे निकल गए हैं.
यो यो हनी सिंह का अंदाज़ भी अब बदला-बदला है. कभी खुद को "ब्रह्मांड का सर्वज्ञ गुरु" बताने वाले हनी सिंह अब अपनी पहचान ऐसे व्यक्ति के रूप में बताते हैं जो ईश्वर से डरता है. एक ऐसा शख्स जो ईश्वर में यकीन रखता है, जिसे जीवन के उतार-चढ़ाव पर भरोसा है और जो "वैज्ञानिक ज्योतिषियों" में विश्वास करता है.
वह दावा करते हैं कि उनका संगीत अब ज़्यादा सजग है, अब यह नशे को पीछे छोड़कर गहराई की ओर बढ़ा है. लेकिन उनके चाहने वालों की राय कुछ और ही है, उनका मानना है कि हनी सिंह में अब पहले जैसी बात नहीं रही और वह अपनी धार खो चुके हैं. उनके नए गानों में कोई दम नहीं है.
कप्पल कहते हैं, "उनके पास एक ऐसा मूल दर्शक वर्ग है जो हमेशा उनके साथ रहेगा, लेकिन उनका नज़रिया अब पुराना और प्रचलन से बाहर हो गया है."
हार मानने को तैयार नहीं सिंह

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लेकिन हनी सिंह अभी भी हार मानने को तैयार नहीं हैं.
अपनी प्रसिद्धि और नशे की लत के साथ अपने संघर्ष को हनी सिंह ना तो छिपा रहे हैं और ना ही इसका बचाव कर रहे हैं. बल्कि उन्होंने इसे ही अपनी वापसी को केंद्र बिंदु बना लिया है.
वह खुलेआम अपनी नशे की लत और उसके बाद मानसिक स्वास्थ्य के साथ किए गए संघर्ष को खुलकर स्वीकार करते हैं. उन्होंने एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म से कहा, "ड्रग्स ने मुझे पूरी तरह से बर्बाद कर दिया." "मैंने शोहरत, पैसे और महिलाओं के लिए खुद को तबाह कर दिया. मैं एक शैतान की तरह था, पूरी तरह से शैतान."
अपने साक्षात्कारों में वह मजाकिया और शांत दिखाई देते हैं. वह पीड़ित थे लेकिन अब हर बात स्पष्टता के साथ कह रहे हैं कि उन्होंने अपने आंतरिक दुर्गुणों से जूझने के बाद अब सत्यता को जान लिया है.
उन्होंने हाल ही में कहा, "आप जैसा करोगे, वैसा ही फल मिलता है. मैं जहां फंस गया था, वहां से निकलने में मुझे समय लगा, लेकिन अब मैं वापस आ गया हूं."
हृदेश सिंह से यो यो हनी सिंह का सफर

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यो यो हनी सिंह यानी हृदेश सिंह का जन्म पंजाब में हुआ. दिल्ली के एक तंग इलाके में वह पले-बढ़े. यहीं उन्होंने अपने संगीत को आकार दिया. शुरुआती साल कठिन रहे इसकी झलक आज भी उनके काम में देखने को मिलती है.
पंजाब राज्य में जन्में हृदेश सिंह दिल्ली के एक तंग इलाके में पले-बढ़े. उन कठिन शुरुआती सालों ने उनके संगीत को आकार दिया और आज भी उनके काम में इसकी झलक मिलती है.
वह अपनी बातचीत में अक्सर यह कहते हैं, "यह बस्ती मेरा घर थी, मेरा इलाका था और हमेशा रहेगा."
सिंह इस बात को लेकर पूरी तरह से स्पष्ट थे कि उन्हें अपना करियर संगीत में ही बनाना है. उन्होंने अपनी शुरुआत कॉलेज डीजे के तौर पर की और फिर वह पूरी तरह से संगीत निर्माण में चले गए. वे कहते हैं, "मैं गाना या लिखना नहीं चाहता था, मैं हमेशा बीट्स और संगीत पर काम करना चाहता था."
पंजाब में कई सालों तक छोटे-मोटे प्रोड्यूसर के तौर पर काम करने के बाद उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि इतना करना काफी नहीं होगा. वह कहते हैं, "मेरी आवाज़ उस जगह के हिसाब से बहुत शहरी थी. लोग इसे समझ नहीं पाते थे. इसके लिए मुझे पंजाब से बाहर निकलना पड़ा."
2011 में पहला 'ब्रेकआउट'

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हनी सिंह ने 2011 में अपना सोलो ब्रेकआउट एलबम 'द इंटरनेशनल विलेजर' रिलीज़ किया. पंजाबी ढोल और स्ट्रिंग की धुन को हिप-हॉप के साथ मिलाकर उन्होंने कुछ एकदम नया बनाया.
शुरुआती तीन महीनों में तो ऐसा लगा कि यह फॉर्मूला फेल हो गया. फिर अचानक ही सबकुछ बदल गया. रातों-रात गाने वायरल हो गए, चार्ट में सबसे ऊपर आ गए. पुरस्कार जीते और हनी सिंह को बॉलीवुड में जगह मिल गई.
ब्राउन रंग- एक भूरे आदमी की वैश्विक महत्वाकांक्षा को लेकर लिखा गया यह गीत 2012 में यूट्यूब का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला वीडियो बन गया. दुबई में एक मिलियन डॉलर के बजट पर दमदार बीट्स के साथ तेज कारें, ढीले कपड़े, रत्न-जड़ित घड़ियां और सोने की चेन के साथ फिल्माए गए इस गीत ने भारतीयों को हिप-हॉप की चमक से परिचित कराया.
महिला विरोधी गानों पर बढ़ती आलोचना के बावजूद सिंह ने अपने गानों से स्टेडियम को खचाखच भर दिया. एक के बाद एक हिट गाने दिए. बॉलीवुड में शाहरुख़ ख़ान और अक्षय कुमार जैसे सितारों के लिए भी गाने गाए.
एक डिजिटल प्लेटफॉर्म को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया, "कई बार मेरे गाने के बोल बेकार होते थे, मैं भी यह बात जानता था लेकिन लोग फिर भी इसे सुनते थे, क्योंकि संगीत बहुत अच्छा और ताज़ा था."
प्रसिद्धि के साथ पतन भी

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हनी सिंह की प्रसिद्धि के साथ उनका व्यक्तिगत पतन भी हुआ.
उन्होंने बताया, "मैं नशे और शराब में डूबा हुआ था, 12-15 जॉइंट पीता था और बोतलें पीता था. मैंने अपने परिवार को छोड़ दिया, मैंने अपना नियंत्रण खो दिया. एक बार तो मैं इतना नशे में था कि मैंने अपने एक दोस्त के पेट पर आठ बार काट लिया था."
सिंह 2017 में चल रहे टूर के बीच में ही टूट गए. एक पल ने उन्हें हिलाकर रख दिया. वह संगीत और नशीले पदार्थों का सेवन छोड़कर दिल्ली लौट आए. यहां विश्व स्तरीय चिकित्सकों की देखरेख में अपना उपचार कराने लगे.
सिंह कहते हैं, "मैंने अपने परिवार को बताया कि मैं मानसिक रूप से अस्वस्थ हूँ. जब तक मैं ठीक नहीं हो जाता, मैं कुछ नहीं कर सकता."
हनी सिंह का दावा है कि उन्होंने पिछले सात साल से शराब नहीं पी है, केवल कभी-कभार बीयर पीते हैं.
नेटफ्लिक्स डॉक्यूमेंट्री यो यो हनी सिंह : फेमस में वे कहते हैं, "मैं नर्क में जाकर अब वापस आ चुका हूं. अब भी, दवाओं की वजह से मैं सुबह उठते समय हेज़ी सा महसूस करता हूं."
ईमानदारी पर फिदा हैं प्रशंसक

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सिंह की ईमानदारी पर उनके प्रशंसक खुश हैं. वह उनकी आत्मघाती प्रवृतियों पर नियंत्रण पाने के प्रयास की सराहना करते हैं.
दिल्ली की छात्रा नंदिनी गुप्ता कहती हैं, "कोई भी व्यक्ति परिपूर्ण नहीं होता लेकिन कम से कम सिंह बेहतर बनने की कोशिश रहे हैं. वह संगीत जगत से भले ही कुछ समय के लिए चले गए थे लेकिन उनका संगीत थमा नहीं है."
कुछ अन्य लोग इस परिवर्तन को दिखावा मानते हैं. श्रोता बुशरा नेयाजी कहती हैं, "उनका संगीत थोड़ा कमज़ोर है. वे महिलाओं को वस्तु के रूप में देखते हैं और सिर्फ़ पैसे और शोहरत के बारे में बात करते हैं."
आप इसे किसी भी तरह देखें लेकिन हनी सिंह की वापसी उनके दर्शकों के लिए एक चुनौती की तरह है, जो उन्हें उनके परेशानियों भरे अतीत को स्वीकार करने और उनके संगीत को एक और मौका देने के लिए प्रेरित करता है.
उन्होंने हाल ही में कहा, "मैं सात साल तक दूर रहा लेकिन अगले सात साल में मैं फिर से सबको मंत्रमुग्ध कर दूंगा. मैं वापस आ गया हूं और मुझे वही प्यार चाहिए जो मुझे सात साल पहले मिला था."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
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