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नक़ली शराब से हुई मौतों ने कैसे उजागर की दुनिया के इस हिस्से में मेथनॉल की समस्या
- Author, फ्रांसेस माओ
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ संवाददाता
पिछले दो हफ्तों में लाओस के एक कस्बे में ज़हरीली शराब पीने से छह पर्यटकों ने अपनी जान गंवा दी. कथित तौर पर उन्होंने जो पिया उसमें मेथनॉल नामक ज़हरीला पदार्थ मिला हुआ था.
इस घटना में एक ब्रितानी महिला, एक ऑस्ट्रेलियाई महिला, एक अमेरिकी व्यक्ति और दो डेनमार्क के नागरिकों की मौत हुई. वहीं, एक अन्य ऑस्ट्रेलियाई महिला अस्पताल में गंभीर रूप से बीमार हैं.
पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. लेकिन रिपोर्ट बताती है कि इन पर्यटकों की मौत मेथनॉल युक्त पेय पदार्थ पीने से हुई होगी.
यह एक बहुत ही ख़तरनाक पदार्थ है, जो अक्सर अवैध रूप से बनाई जाने वाली शराब में पाया जाता है.
शराब में मेथनॉल का इस्तेमाल, लंबे समय से दक्षिण पूर्वी एशिया में बड़ा मुद्दा रहा है. ख़ासकर ऐसे मामले मेकांग नदी के किनारे मौजूद ग़रीब देशों में पाए जाते हैं.
हालांकि, दूसरे देशों की सरकारों ने लोगों को इन जगहों पर शराब पीने के ख़तरों के बारे में चेतावनी दी है. लेकिन इसके बावजूद लोगों के बीच इसको लेकर बहुत कम जागरूकता है.
चूंकि, मेथनॉल का कोई स्वाद और रंग नहीं होता है, इसलिए शराब में इसको पहचानना मुश्किल होता है. इसी कारण लोग आसानी से इसका शिकार हो जाते हैं और लक्षणों को पहचान नहीं पाते.
लाओस एशिया के ग़रीब और कम विकसित देशों में शामिल है. यहां पुलिस और प्रशासन भी बहुत सक्रिय नहीं है. इसी बात का फायदा उठाकर सप्लायर्स गै़र-क़ानूनी तरीके से शराब बेचते हैं.
यहां खाने-पीने की चीज़ों को लेकर भी कोई सख्त क़ानून मौजूद नहीं है.
मेथनॉल पॉइज़निंग क्या है?
मेथनॉल यानी मिथाइल अल्कोहल एक ज़हरीली शराब है, जिसका इस्तेमाल इंडस्ट्रीयल और घरेलू प्रॉडक्ट जैसे पेंट थिनर, एंटीफ्रीज़, वॉर्निश और फ़ेटोकॉपियर में इस्तेमाल होने वाले फ्लूइड में किया जाता है.
इसका अपना कोई रंग नहीं होता और इसकी महक भी शराब में पाए जाने वाले केमिकल, इथाइल अल्कोहल (इथनॉल) की तरह होती है.
मेथनॉल इंसानों के लिए ख़तरनाक होता है. इसकी महज़ 25 मिलीलीटर मात्रा भी इंसान की जान लेने के लिए काफी हो सकती है.
मेथनॉल पीने वाले लोगों में बीमारी के लक्षण दिखने और महसूस करने में एक दिन तक का समय लग सकता है.
सबसे पहले उन्हें जी मचलाना, उल्टी और पेट में दर्द महसूस होता है, जो आगे बढ़कर हाइपरवेंटिलेशन (तेज़ी से सांस लेना) और सांस लेने में समस्या का रूप ले सकता है.
इंटरनेशनल मेडिकल चैरिटी मेडिसां सौं फ्रंतिए (एमएसएफ़) के मुताबिक़, अगर इस समस्या का इलाज न किया जाए तो इसमें जान जाने का ख़तरा 20 से 40 प्रतिशत तक हो सकता है.
लेकिन, यह इस बात पर निर्भर करता है कि मेथनॉल की कितनी मात्रा शराब में थी और इंसान ने उसका कितना सेवन किया.
वहीं, अगर इसका इलाज पहले 30 घंटों के भीतर कर लिया जाए, तो इसके दुष्प्रभाव को कुछ हद तक कम करके बीमार व्यक्ति की ज़िंदगी को बचाया जा सकता है.
दक्षिण पूर्वी एशिया में ये समस्या कितनी आम?
एमएसएफ़ के आंकड़ों के मुताबिक़, दुनियाभर में मेथनॉल पॉइज़निंग के सबसे ज़्यादा मामले एशिया में पाए जाते हैं.
यह समस्या ज़्यादातर इंडोनेशिया, भारत, कंबोडिया, वियतनाम और फ़िलीपींस जैसे देशों में पाई जाती है.
एमएसएफ़ का कहना है कि पिछले 20 सालों में इंडोनेशिया में मेथनॉल पॉइज़निंग के सबसे ज़्यादा मामले सामने आए हैं. ऐसा इसलिए है, क्योंकि वहां कई लोग अवैध शराब का उत्पादन और सेवन करते हैं.
लाओस का वांग-विएंग शहर, जहां हाल के दिनों में ज़हरीली शराब पीने से मौतें हुईं, दक्षिण-पूर्व एशिया में यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह एक लोकप्रिय जगह है. शहर की अर्थव्यवस्था पर्यटकों पर निर्भर है, जहां उनके लिए कई बार, रेस्तरां और हॉस्टल है.
लेकिन, लाओस में क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं. वहीं, खाने और शराब के उत्पादन को लेकर नियमों की भी कमी है.
इसके अलावा, लाओस में घर में शराब बनाने की भी इंडस्ट्री है, जिसमें कभी-कभी लोग शराब में मेथनॉल मिला देते हैं और पॉइज़निंग का शिकार हो जाते हैं.
स्थानीय पर्यवेक्षकों ने यह भी देखा है कि कई बार शराब उत्पादक इथनॉल की जगह पर मेथनॉल से नक़ली शराब बनाते हैं, क्योंकि यह सस्ता होता है.
इस इलाक़े के मौजूद एक पश्चिमी राजनयिक ने बीबीसी को बताया, "कुछ उत्पादक अपनी शराब में मेथनॉल का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि यह सस्ता होता है."
"वे ऐसा शराब को ज़्यादा असरदार बनाने या ख़राब क्वालिटी वाली शराब का स्वाद बेहतर बनाने के लिए करते हैं."
उन्होंने कहा कि इलाक़े के दूतावासों में अक्सर मेथनॉल पॉइज़निंग के मामलों की शिकायतें आती रहती हैं.
यह जानना मुश्किल है कि वास्तव में ज़हरीली शराब में कितनी मात्रा में मेथनॉल है या वह शराब कहां से आती है, क्योंकि इस बारे में पर्याप्त आंकड़े मौजूद नहीं हैं.
राजनयिक बताते हैं, "मुझे नहीं लगता कि बार के मालिक जानबूझकर पर्यटकों को ज़हर देंगे, क्योंकि ऐसा करने से उनका और इंडस्ट्री का ही नुक़सान होगा."
"यह समस्या ज़्यादातर शराब का उत्पादन करने वालों की तरफ से हैं. यहां शिक्षा का स्तर कम है, नियमों की कमी है और लोग फायदा बनाने की कोशिश करते हैं."
समस्या का क्या है हल?
कुछ लोगों ने पहले भी इससे जुड़े ख़तरों के बारे में लोगों को जागरूक करने की कोशिश की है.
ऑस्ट्रेलिया के रहने वाले एक व्यक्ति कोलिन अहर्न 'डोंट ड्रिंक स्पिरिट्स इन बाली' नाम से एक फे़सबुक पेज चलाते हैं. यहां वो शराब की खुली बोतलों से बनाए जाने वाले मिक्स्ड ड्रिंक्स और कॉकटेल्स पीने के ख़तरों के बारे में चेतावनी देते हैं.
उन्होंने इस हफ्ते की शुरुआत में ऑस्ट्रेलियाई मीडिया को बताया कि उन्हें हफ्ते में एक बार अपने फे़सबुक पेज पर दक्षिण पूर्व एशिया में मेथनॉल पॉइज़निंग के बारे में शिकायतें मिलती थीं.
वहीं पश्चिमी राजनयिक कहते हैं कि अवैध शराब के ख़तरों के बारे में पर्यटन संचालकों और दूतावासों को अच्छी तरह से जानकारी है, लेकिन पर्यटकों में इसे लेकर जागरूकता पैदा करने के लिए बड़े अभियान की ज़रूरत है.
उन्होंने कहा, "हाल में हुई दर्दनाक घटनाओं से लोगों के बीच इसे लेकर जागरूकता बढ़ेगी, लेकिन इससे समस्या की असली वजह का समाधान नहीं होगा."
कई पश्चिमी देशों की सरकारों ने इस हफ्ते अपने दूतावासों और ट्रेवल वेबसाइट पर एडवाइज़री को बदला है, ताकि दक्षिण पूर्व एशिया में अवैध शराब के ख़तरों के बारे में लोगों को सावधान किया जा सके.
इस मामले पर पश्चिमी राजनयिक ने बीबीसी को बताया कि पर्यटकों के लिए मेथनॉल पॉइज़निंग से ख़ुद को बचाना मुश्किल है, क्योंकि उनके लिए हर बोतल की जांच करना मुमकिन नहीं है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित