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टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी की उप-राष्ट्रपति पर टिप्पणी का वीडियो वायरल, किसने जताई आपत्ति, किसने किया बचाव
भारतीय संसद से सोमवार को विपक्ष के 78 सांसदों के निलंबन से उठा तूफ़ान थमने का नाम नहीं ले रहा है. इनमें लोकसभा के 33 सांसद और राज्यसभा के 45 सांसद शामिल हैं.
निलंबित सांसदों में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल, रणदीप सुरजेवाला, तृणमल कांग्रेस के सौगत राय, डीएमके के टीआर बालू, और दयानिधि मारन जैसे बड़े नेता शामिल हैं.
संसद के अंदर शुरू हुआ ये विवाद मंगलवार को संसद भवन के बाहर विपक्षी सांसदों की ओर से किए जा रहे विरोध प्रदर्शन के रूप में जारी है.
लेकिन इस दौरान टीएमसी के एक सांसद ने कुछ ऐसा किया जिसकी वजह से उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने विपक्षी सांसदों को एक बार फिर फटकार लगाई है.
आख़िर क्या है मामला?
उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राज्यसभा में कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह को संबोधित करते हुए कहा कि ‘दिग्विजय सिंह जी, एक बात सुनना मेरी ध्यान से...मैंने कुछ देर पहले एक टीवी चैनल पर देखा है. गिरावट की कोई हद नहीं है...’
धनखड़ की ओर से दी गई इस प्रतिक्रिया की वजह टीएमसी सांसद की ओर से संसद भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान उनकी नकल उतारा जाना है.
टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी एक वीडियो के दौरान उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की नकल उतारते दिख रहे हैं. इस मौके पर विपक्षी दलों के तमाम सांसद भी मौजूद हैं.
इसके साथ ही वीडियो में राहुल गांधी इस घटना को अपने फोन में रिकॉर्ड करते देखे जा सकते हैं.
आख़िर क्या बोले जगदीप धनखड़?
इस वीडियो पर आपत्ति जताते हुए राज्य सभा के सभापति उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को संबोधित करते हुए अपनी बात रखी.
उन्होंने कहा, “गिरावट की कोई हद नहीं है. आपकी पार्टी के एक बड़े नेता एक सांसद के असंसदीय व्यवहार का वीडियो बना रहे थे. वो आपसे भी बहुत बड़े नेता हैं. मैं तो यही कह सकता हूं कि सद्बुद्धि आए. कुछ तो सीमा होती होगी. कुछ जगह तो बख़्शो.”
इसके बाद सदन में ही कुछ सांसदों की ओर से टिप्पणी किए जाने पर उप-राष्ट्रपति धनखड़ ने अपनी आपत्ति की वजह बताने की कोशिश की.
उन्होंने कहा कि ‘ये बात इसलिए समस्याजनक है क्योंकि सभापति और स्पीकर के पद का एक अलग मतलब होता है. राजनीतिक दलों के बीच टकराव होगा. उनके बीच बयानों की अदला-बदली होगी. लेकिन कल्पना करिए जब कोई नेता चेयरमैन की मिमिक्री कर रहे थे तब आपकी पार्टी के एक शीर्ष नेता उनकी वीडियोग्राफ़ी कर रहे थे. ये कितना हास्यास्पद है? कितना शर्मनाक है? कितना अस्वीकार्य है.”
कौन हैं कल्याण बनर्जी?
पश्चिम बंगाल की सेरामपुर सीट से सांसद कल्याण बनर्जी ने पहली बार साल 2009 में संसद में कदम रखा था. इससे पहले 2001 से 2006 तक पश्चिम बंगाल विधानसभा के सदस्य रहे. और 2007 से 2009 के बीच वह टीएमसी के उपाध्यक्ष रहे.
इसके बाद उन्होंने लोकसभा की ओर कदम बढ़ाया और चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. लेकिन अपने बयानों को लेकर वह पहले भी विवादों में रहे हैं.
इससे पहले साल 2017 में उन्होंने पीएम मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी जिसे यहां दोहराया नहीं जा सकता.
किस-किसने किया विरोध
इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद से बीजेपी और उसके नेताओं की ओर से विपक्षी सांसदों को घेरा जाना शुरू हो गया है.
बीजेपी ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट लिखा है – “अगर देश को लग रहा था कि विपक्षी सांसदों को क्यों निलंबित किया गया था तो ये उसकी एक वजह है. टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने माननीय उप-राष्ट्रपति का मजाक बनाया और इस दौरान राहुल गांधी उनकी हौसला अफ़जाई करते रहे हैं.”
केंद्रीय मंत्री किरेण रिजिजू ने लिखा है, “इंसान किस हद तक गिर सकता है? सांसद हमारे देश के उप-राष्ट्रपति का मजाक उड़ा रहे हैं और राहुल गांधी उन्हें चियर करते हुए इस निंदनीय कृत्य का वीडियो बना रहे हैं.”
बीजेपी नेता गिरिराज सिंह ने लिखा है – “जाट और किसान परिवार से आने वाले माननीय उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ जी का जिस तरह राहुल गांधी के निर्देशन में अपमान किया जा रहा है, वह असहनीय है. भारत इसका बदला जरूर लेगा और जिस तरह से वे आज कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं, कल वे कैमरों से अपना चेहरा छिपाएंगे.”
बीजेपी सांसद राकेश सिन्हा ने इस मुद्दे पर विपक्षी सांसदों को निशाने पर लेते हुए कहा, “विपक्ष किस तरह संसदीय जनतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था को तार-तार कर रहा है, ये उसका एक उदाहरण है. संसद परिसर में टीएमसी के नेता कल्याण बनर्जी माननीय उप-राष्ट्रपति जी का मजाक उड़ा रहे हैं. और राहुल गांधी उसे स्वीकार करते उसका वीडियो बना रहे हैं. इससे बड़ा दुर्भाग्य कुछ भी नहीं हो सकता.”
यही नहीं, कांग्रेस के नेता रहे आचार्य प्रमोद कृष्ण ने इस मामले में कल्याण बनर्जी के इस कदम पर आपत्ति जताई है.
उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया है – “संसद को “सड़क छाप” बनाने वालों को देश माफ़ नहीं करेगा, उपराष्ट्रपति का “मखौल” उड़ाना बेहद “दुर्भाग्यपूर्ण” और “लोकतंत्र” का मज़ाक़ है.”
बीजेपी सांसद दिनेश शर्मा ने कहा है कि ‘लोकतंत्र में विपक्ष की ओर से किसी मसले पर विरोध किया जाना, विपक्षी दलों का लोकतांत्रिक अधिकार है. लेकिन उपसभापति की मिमिक्री के मसले पर विपक्ष को क्षमा मांगनी चाहिए.’
इस मामले में जहां एक ओर सरकार और विपक्ष के बीच तीख़ी बहस शुरू हो गयी है. वहीं, दोनों ही पक्षों की ओर से अपने आपको सही साबित करने के लिए सोशल मीडिया पर कोशिशें शुरू हो गयी हैं.
इस प्रक्रिया में कुछ अकाउंट्स से उप-राष्ट्रपति धनखड़ के पुराने वीडियोज़ साझा किए जा रहे हैं जिनके ज़रिए उन पर सरकार का समर्थन करने का आरोप लगाया जा रहा है.
वहीं, कुछ अन्य अकाउंट्स से टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के पुराने वीडियोज़ साझा किए जा रहे हैं जिनके ज़रिए एक नेता के रूप में उनकी छवि पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.
क्या बोले विपक्षी सांसद
इस मामले में राहुल गांधी और विपक्ष के बचाव में उतरी कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस मुद्दे पर ट्वीट करके बचाव किया है.
उन्होंने लिखा, “संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों ने जब सभी नियम-कायदों को तोड़ दिया, तब आप तब चुप रहे. आपने निष्पक्षता का परिचय नहीं दिया. और संसदीय लोकतंत्र के संरक्षक होने की जगह आपने सक्रिय रूप से इस पर हमला किया. ऐसे में कृपया चुप रहें और बैठ जाएं.”
शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “जिस तरह से आज चेयरमैन कह रहे थे कि उनको पीड़ा होती है. संसद की सीढ़ियों पर उनकी नकल की जाती है. पीड़ा हमें भी होती है. राज्य सभा के सदस्य के रूप में जब हमारे चेयरमैन के बारे में हो रहा है तो पीड़ा हमें भी हुई.”
लेकिन इसके बाद चतुर्वेदी ने सत्ता पक्ष पर हमला बोलते हुए अपनी बात रखी.
उन्होंने कहा, “लोकतंत्र के मंदिर पर एक बड़ा हमला हुआ है. उस हमले की चर्चा और ज़िम्मेदारी के विषय को दरकिनार किया जा रहा है. गृह मंत्री और प्रधानमंत्री जी का अहंकार लोकतंत्र के मंदिर, लोकतंत्र की जननी से ऊपर बढ़ चुका है. आपने पूरी संसदीय कार्यवाही को मदर ऑफ़ हिप्पोक्रेसी बना डाला है."
"पीड़ा इस बात की होती है कि जो हमारे सांसद ये मुद्दा उठाते हैं, उन्हें निलंबित कर दिया जाता है. पीड़ा इस बात की है कि आप पिक एंड चूज़ कर रहे हैं कि किसे निलंबित करना है और किसे विशेषाधिकार समिति के पास भेजना है. और किसे सदन में रखना है."
"पीड़ा इस बात की होती है कि आज हम सिर्फ तीन महिला सांसद पूरा समय ये बोलते रहे कि हमें बोलने का मौका दिया जाए. अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए. पर चेयरमैन उसे दरकिनार कर देते हैं."
"पीड़ा इन्ही चीज़ों की है. मैं मानती हूं कि इतनी सारी चीज़ें जहां संसदीय लोकतंत्र के ख़िलाफ़ हैं. तो हमारी भी पीड़ा सुनने के लिए चेयरमैन को तैयार रहना चाहिए.”
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