सोना तस्करी मामला: रान्या राव का आरोप 'हिरासत में थप्पड़ मारे'; सरकार ने सौतेले पिता पर की ये कार्रवाई

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से बीबीसी हिंदी के लिए
कर्नाटक सरकार ने सोना तस्करी मामले में गिरफ्तार अभिनेत्री रान्या राव के सौतेले पिता डीजीपी डॉक्टर के रामचंद्र राव को अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया है.
कर्नाटक के मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के अधीन आने वाले कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से शनिवार, 15 मार्च को एक अधिसूचना जारी की गई.
इसमें कहा गया है कि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) भर्ती केवी शरत चंद्र तत्काल प्रभाव से कर्नाटक राज्य पुलिस आवास एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) का कार्यभार संभालेंगे और अगले आदेश तक वे अनिवार्य अवकाश पर भेजे गए डॉ के रामचंद्र राव की जगह काम करेंगे.
यह आदेश ऐसे समय में आया है जब हर्षवर्धनी रान्या उर्फ रान्या राव ने राजस्व खुफिया निदेशालय के अतिरिक्त महानिदेशक को लिखे खत में आरोप लगाया है कि उनके साथ 'दुर्व्यवहार किया गया, उन्हें थप्पड़ मारे गए और यह स्वीकार करने के लिए मजबूर किया गया कि उन्होंने दुबई से '14 किलोग्राम से अधिक' सोने की तस्करी की है.

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डीआरआई के दावे और रान्या का खत

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रान्या की गिरफ्तारी के एक दिन बाद डॉ. रामचंद्र राव ने मीडिया से कहा था कि उनका अपनी सौतेली बेटी से 'कोई लेना-देना नहीं है' और जतिन विजयकुमार हुक्केरी से शादी करने के बाद वह चार महीने से अपनी मां से मिलने भी नहीं गई हैं.
रान्या का खत बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनकी गिरफ्तारी के तीन दिन बाद 6 मार्च को लिखा गया था. यह खत 7 मार्च को केंद्रीय कारागार, जहां वह अभी बंद हैं, के शीर्ष अधिकारी के माध्यम से राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के अतिरिक्त महानिदेशक को भेजा गया था.
उनका खत डीआरआई की ओर से अदालत में किए गए उस दावे का खंडन करता है, जिसके मुताबिक 'रान्या ने कमर और पैरों पर 14 किलो सोना बांधकर लाने की बात स्वीकार की थी'. इस सोने की कीमत 12.56 करोड़ रुपये आंकी गई. वहीं इसके बाद रान्या के घर पर की गई छापेमारी में 2.1 करोड़ रुपये के सोने के आभूषण और 2.67 करोड़ रुपये की नकदी बरामद हुई.
33 वर्षीय अभिनेत्री रान्या ने 2015-2017 के दौरान दो कन्नड़ फिल्मों और तमिल फिल्मों में नायिका की भूमिका निभाई थी. उनकी गिरफ्तारी के तुरंत बाद, डीआरआई ने केंद्रीय जांच ब्यूरो से इस मामले की जांच करने को कहा क्योंकि डीआरआई के मुताबिक यह मामला दुबई से संचालित एक समन्वित तस्करी सिंडिकेट के साथ संभावित सांठगांठ की ओर इशारा करता है.
"इसका राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा असर हो सकता है. इस तरह के समन्वित नेटवर्क के साथ भारत सरकार के अज्ञात लोक सेवकों और अज्ञात अन्य लोगों की संलिप्तता की संभावना की जांच की जानी चाहिए."
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जांच शुरू कर दी है. कर्नाटक सरकार ने अपनी ओर से डॉ. रामचंद्र राव की भूमिका और एयरपोर्ट पर प्रोटोकॉल सुविधाओं के कथित दुरुपयोग की जांच के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव गौरव गुप्ता को नियुक्त किया है. गुप्ता को सप्ताह के मध्य तक अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है.
रान्या राव ने अपने बचाव में क्या कहा?

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रान्या राव ने बेंगलुरु में डीआरआई के शीर्ष अधिकारी को बताया है, "मुझे मारा गया. मुझे 10-15 थप्पड़ मारे गए. जिस अधिकारी ने मुझे मारा, मैं उसे पहचान सकती हूं. बार-बार मुझे मारे जाने के बावजूद मैंने उनके द्वारा तैयार किए गए बयान पर दस्तख़त करने से इनकार कर दिया. अधिकारियों में से एक ने कहा कि 'अगर तुम कागज़ात पर दस्तख़त नहीं करोगी तो हम तुम्हारे पिता की पहचान उजागर कर देंगे, जबकि हम जानते हैं कि उनका इसमें कोई हाथ नहीं है'."
रान्या ने आरोप लगाया है, "अत्यधिक तनाव और शारीरिक हमले के कारण मैंने डीआरआई अधिकारियों के दबाव में आकर 50-60 टाइप किए हुए पन्नों और लगभग 40 खाली सफेद कागजों पर दस्तख़त किए हैं. 03.03.25 को शाम 6.45 बजे से लेकर 04.03.25 को शाम 7.50 बजे तक (जब रान्या को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया) मुझे ठीक से सोने और खाने भी नहीं दिया गया."
रान्या ने अपने खत में ये भी कहा है, "मैं आपको सूचित करना चाहती हूं कि मैं निर्दोष हूं और मुझे झूठा फंसाया गया है. जैसा कि कहा जा रहा है, न तो कभी कोई महजर (ऐसा दस्तावेज है जिसमें किसी बात को औपचारिक रूप से घोषित या लिखा जाता है) निकाला गया और न ही मेरी तलाशी ली गई."
उन्होंने कहा, "जज के पास जाते समय (4 मार्च की शाम को अदालत में) मुझे धमकी दी गई कि अगर मैंने जज से 'हमले' के बारे में कुछ कहा तो 'हम तुम्हारे पिता का नाम उजागर कर देंगे और उनकी पहचान का इस्तेमाल तुम्हारे खिलाफ करेंगे'."
रान्या ने खत के अंत में लिखा, "इसलिए मैं कहती हूं कि मेरी गिरफ्तारी से लेकर मुझे अदालत में पेश किए जाने तक के दौरान दर्ज़ किए गए किसी भी बयान पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए."

रान्या को मजिस्ट्रेट ने न्यायिक हिरासत में भेजा था और कुछ दिनों बाद डीआरआई ने पूछताछ के लिए उनकी हिरासत मांगी. अदालत में पेश किए जाने के बाद मजिस्ट्रेट की ओर से उनसे पूछा गया कि उन्हें किसी तरह के शारीरिक यातना तो नहीं दी गई, इस पर रान्या अदालत में ही रो पड़ीं.
रान्या ने कहा कि उन्हें शारीरिक रूप से चोट नहीं पहुंचाई गई, लेकिन मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उनसे उनके कथित अपराध को स्वीकार करने के लिए बार-बार सवाल पूछे गए. डीआरआई अधिकारी ने अदालत को बताया कि निदेशालय उनकी बात का खंडन करने के लिए सभी पूछताछ की वीडियो रिकॉर्डिंग पेश कर सकता है. रान्या को 15 दिनों के लिए बेंगलुरु सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
डीआरआई ने क्या बताया?

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डीआरआई ने रान्या की रिमांड के लिए दिए गए आवेदन में बताया है कि निदेशालय ने दुबई से बेंगलुरु आने वाली फ्लाइट में महिला यात्री के बारे में विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई की थी, जो तीन मार्च को शाम 6.20 बजे पहुंची थी. इस महिला यात्री को डीआरआई ने रोका और एक तरफ जाने को कहा.
रान्या राव के साथ बेंगलुरु सिटी पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल बसवराज भी थे, जो प्रोटोकॉल विभाग से जुड़े हुए हैं. रान्य और बसवराज ने डीआरआई अधिकारियों को बताया कि रान्या ने उन्हें (बसवराज को) खुद को इमिग्रेशन क्षेत्र से बाहर निकालने के लिए बुलाया था.
बसवराज ने अधिकारियों को बताया कि डीजीपी रामचंद्र राव ने उन्हें बहुत पहले ही रान्या की मदद करने के लिए कहा था. तब से, रान्या उन्हें सीधे फोन कर रही थीं. उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि रान्या कोई प्रतिबंधित सामान लेकर आई हैं.
रान्या को डीआरआई की महिला अधिकारियों द्वारा सीमा शुल्क आगमन क्षेत्र में एक प्राइवेट कमरे में ले जाया गया और 'जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने अपने शरीर पर या उसके अंदर कोई प्रतिबंधित वस्तु छिपाई है, तो उक्त यात्री ने सोने को बार के रूप में छिपाने की बात स्वीकार की'.

डीआरआई का दावा है कि रान्या के पैरों और कमर पर टिश्यू के साथ सोने के बार टेप के जरिए बंधे थे. साथ ही, उनकी जींस के आगे की दोनों जेबों और जूतों के तले में भी सोने के बार छिपाए गए थे.
महजर (घोषणा पत्र) लिए जाने के बाद, उन्होंने जब्ती के बारे में पढ़ा, महजर पर दस्तख़त किए और वो उसमें लिखी बातों से सहमत हुईं. डीआरआई की ओर से कहा गया, "उन्होंने (रान्या राव ने) स्वीकार किया कि उनके कब्जे से सोने के 17 टुकड़े बरामद किए गए."
डीआरआई ने अदालत को ये भी बताया कि दुबई की यात्रा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि दुबई से अवैध रूप से सोना लाने के लिए यह उनकी पहली यात्रा थी. वो एक व्यक्ति के फोन पर वहां गई थीं, जिससे वो एयरपोर्ट पर मिली थीं. रान्या ने बताया कि वह व्यक्ति "अच्छी कद-काठी वाला, लगभग छह फीट या उससे अधिक लंबा और गेहुंआ रंग का सफेद गाउन पहने हुए था. मुलाकात के दौरान वह व्यक्ति उन्हें एक तरफ ले गया और उसने उन्हें सोना सौंप दिया."
रिमांड के आवेदन में अदालत को बताया गया, "रान्या ने बताया कि उन्हें तस्करी किए गए सोने के बार एक ऑटोरिक्शा में रखने थे, जो हवाई अड्डे के टोलगेट से बाहर निकलने के बाद सर्विस रोड पर उनका इंतजार रहा था."
आर्थिक अपराधों के लिए विशेष अदालत, बेंगलुरु के पीठासीन अधिकारी विश्वनाथ सी गौदर ने यह कहते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी कि अभियुक्त साक्ष्यों और गवाहों के साथ छेड़छाड़ करने में सक्षम है, जिससे मामले की सुनवाई में बाधा आ सकती है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित















