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परिवार बनाम पेशा: ग़ज़ा में बरसते बमों के बीच बीबीसी संवाददाता की कश्मकश और आँखों देखी
- Author, अदनान एल-बुर्श
- पदनाम, बीबीसी अरबी, ख़ान यूनिस, ग़ज़ा से
ग़ज़ा के ख़ान यूनिस शहर में मौजूद नासिर अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में जींस पहने नौजवानों की भीड़ जमा है.
लोगों के पैरों में चप्पलें हैं. देखने पर लगता है जैसे ये लोग किसी के अंतिम संस्कार में शामिल होने आए हैं.
इसराइल ने जब से दक्षिणी ग़ज़ा में हमले तेज़ किए है, यहां सैकड़ों लोग मारे गए हैं और हज़ारों घायल हैं.
अस्पताल के बाहर खड़े लोग चुपचाप हैं. अस्पताल के बाहर और इमरजेंसी में तनाव महसूस किया जा सकता है.
हताहतों के आने की उम्मीद में यहां स्वास्थ्यकर्मी पहले से तैयार खड़े हैं. जब भी कोई आवाज़ आती है लोग जमा हो जाते हैं.
लेकिन यहां की सार्वजनिक व्यवस्था अब टूट रही है. लोग सदमे में हैं और थक गए हैं.
सायरन की आवाज़ और रोशनी के साथ अस्पताल के बाहर एक कार आकर रुकती है. एक घायल नौजवान को बाहर निकालकर स्ट्रेचर पर डाला जाता है. उसे तेज़ी से अस्पताल के अंदर ले जाया जाता है.
मिनटों बाद धूल से ढंकी हुई एक और कार यहां पहुंचती है. इसमें से एक बच्चे को बाहर निकाला जाता है. महज़ चार या पांच साल का ये बच्चा चल सकता है.
मरीज़ों से पटे पड़े हैं अस्पताल
अगले दिन शहर के समा इलवान में छह बच्चों की एक मां मदद की गुहार लगाती दिखती हैं.
वो कहती हैं, "मैं पुरी दुनिया और अरब जगत को एक संदेश भेजना चाहती हूं. मैं दुनिया को बताना चाहती हूं कि हम निर्दोष हैं. हमने कुछ भी ग़लत नहीं किया."
वो हवा में पानी की दो खाली बोतलों को लहराते हुए कहती हैं कि मेरी पांच बेटियां और एक बेटा है. वो प्यासे हैं.
वो कहती हैं, "हमारी ज़िंदगी कुत्ते-बिल्ली जैसी हो गई है. शायद बिल्लियों और कुत्तों को भी कहीं पनाह मिल जाए. लेकिन हमारे पास सिर छिपाने की जगह नहीं है. हम सड़कों पर भटक रहे हैं."
कोई भी जगह सुरक्षित नहीं बची
सात अक्तूबर को हमास के लड़ाकों में इसराइल की सीमा में घुसकर हमला किया. तब से ग़ज़ा में रहने वालों की ज़िंदगियां तबाह हो चुकी है.
हमास के हमले में क़रीब 1200 इसराइली नागरिक मारे गए. हमास के लड़ाके अपने साथ क़रीब 240 लोगों को बंधक बनाकर ले गए थे. इनमें से काफी लोगों को दोनों तरफ से बीते दिनों छोड़ा गया.
अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने हमास को चरमपंथी संगठन घोषित किया हुआ है.
अपनी जवाबी कार्रवाई में इसराइल ने हफ़्तों तक ग़ज़ा पर भारी बमबारी करने के बाद उत्तरी ग़ज़ा में ज़मीनी अभियान शुरू किया.
ग़ज़ा में हमास के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि सात दिसंबर से अब तक इसराइल के हमलों में मरने वालों की संख्या 16 हज़ार से ज़्यादा हो गई है.
बीते दिनों हमास और इसराइल के बीच अस्थायी युद्धविराम हुआ जो सात दिन तक लागू रहा. इस दौरान फ़लस्तीनी कैदियों के बदले हमास ने कुछ बंधकों की रिहाई की.
लेकिन फिर इसराइल ने कहते हुए एक बार ग़ज़ा पर हमले शुरू कर दिए कि उसने युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन किया है. बीते सप्ताह से इसराइल ने ग़ज़ा के दक्षिणी हिस्सों पर हवाई हमले बढ़ा दिए हैं.
इसके बाद से ग़ज़ा पट्टी के दूसरे सबसे बड़े शहर ख़ान यूनिस के अस्पतालों में मरीज़ों की संख्या में तेज़ी से इज़ाफा हुआ है. अस्पताल में क्षमता से कहीं अधिक मरीज़ पहुंच रहे हैं.
इसराइली टैंक और सेना फिलहाल ख़ान यूनिस शहर के भीतर दाखिल हो चुकी है. यहां हवाई हमलों के साथ-साथ ज़मीनी हमले भी तेज़ हुए हैं.
युद्ध फिर से शुरू हो गया है. मैं ख़ान यूनिस में अकेला हूं, जबकि मेरा परिवार सेंट्रल ग़ज़ा में है.
कुछ दिन पहले तक यह ओवी वैन के लिए बहुत सुरक्षित जगह थी, यहां अच्छा सिग्नल भी आ रहा था.
एक पत्रकार होने पर मुझे हमेशा से अपने काम पर गर्व रहा है. लेकिन मेरे विकल्प तेज़ी से सिमट रहे हैं और मौत लगातार मेरे क़रीब आ रही है.
मैं अपने परिवार को देखने के लिए कुछ दिनों के अंतराल पर सेंट्रल ग़ज़ा की यात्रा कर लेता था. लेकिन अब इसराइली सैनिकों ने वहां जाने वाली एक सड़क बंद कर दी है. वहां तक पहुंचने वाली दूसरी सड़क तो है लेकिन वो बहुत ख़तरनाक़ बन चुकी है.
'किसी के साथ ऐसा न हो'
मैं उत्तरी ग़ज़ा का रहने वाला हूं लेकिन जब इसराइली सेना ने उत्तर में ग़ज़ा शहर में घुसने से पहले लोगों को दक्षिण की ओर जाने का आदेश दिया, उसका कहना था कि दक्षिण ग़ज़ा ‘सुरक्षित जगह’ है.
उस वक्त मैं परिवार के साथ दक्षिण ग़ज़ा की ओर चला आया.
अब इसराइल हमें ख़ान यूनिस में ख़तरनाक ज़मीनी अभियान चलाने की चेतावनी दे रहे. वो कह रहे हैं कि हमें अब और दक्षिण में रफ़ाह की ओर जाना होगा, बिल्कुल मिस्र की सीमा से पास.
युद्ध शुरू होने के साथ ही मेरे और मेरे परिवार के साथ जो कुछ भी हुआ उसके बावजूद, यह पहली बार है जब मैं पूरी तरह हताश महसूस कर रहा हूं. मेरी इच्छाशक्ति और संयम टूट चुका है.
मुझे अपने परिवार को एक योजना के साथ सुरक्षित रखने की आदत है. अब मैं खुद कश्मकश की स्थिति से जूझ रहा हूं और टूट गया हूं.
मेरे मन में सवाल उठ रहे हैं, क्या मुझे काम जारी रखते हुए रफ़ाह की ओर जाना चाहिए और उम्मीद करनी चाहिए कि मेरा परिवार ठीक होगा? क्या मुझे अपनी रिपोर्टिंग बंद कर अपने परिवार से मिलने की कोशिश करनी चाहिए? अगर कुछ बुरा होता है तो कम से कम ये भरोसा रहेगा कि हम साथ मर सकेंगे.
मैं उम्मीद करता हूं कि किसी व्यक्ति को इस तरह की भयानक स्थिति का सामना न करना पड़े, जहां उसके सामने कोई रास्ता ही न बचा हो.
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