सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर बिलकिस बानो के गाँव वाले क्या कह रहे हैं?

रणधीकपुर में तैनात पुलिस के जवान

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    • Author, रॉक्सी गागडेकर छारा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, गोधरा से देवगढ़ बारिया से

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिलकिस बानो के साथ गैंग रेप और उनके परिजनों की हत्या के 11 दोषियों की सज़ा में छूट देकर रिहा करने के फ़ैसले को रद्द कर दिया.

गुजरात सरकार ने 15 अगस्त 2022 को इन दोषियों को रिहा कर दिया था.

अदालत ने कहा कि गुजरात सरकार के पास सज़ा में छूट देने का अधिकार नहीं है. अदालत ने सभी दोषियों को दो हफ़्ते में जेल में हाज़िर होने का आदेश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट का जब यह फ़ैसला आया तो देवगढ़ बैरिया के कपाड़ी इलाक़े का मकान नंबर 45 और 46 वीरान नज़र आया.

इस इलाक़े के अधिकांश घर 2002 के गुजरात दंगों के बाद बनाए गए हैं. आसपास के गाँवों के मुसलमान यहाँ आकर बसे थे.

इस इलाक़े में कम से कम 74 घर रणधीकपुर गाँव के मुसलमान परिवारों के हैं. यह वही इलाक़ा है, जहाँ 2002 से पहले बिलकिल बानो अपने परिवार के साथ रहती थीं.

कोर्ट के फ़ैसले से ख़ुश हैं बिलकिस के पड़ोसी

देवगढ़ बारिया में बिलकिस बानों का घर, जिसमें अब कपड़े की दुकान चलती है

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पहली ही नज़र में लगा कि बानो का घर कई दिनों से बंद पड़ा है.

उनके पड़ोसियों ने बताया कि दो हफ़्ते पहले तक बानो, उनके पति याक़ूब पटेल और उनके बच्चे भी यहीं रहते थे लेकिन मीडिया से बचने के लिए वे किसी अज्ञात स्थान पर चले गए हैं.

बिलकिस के घर के पास कपाड़ी इलाक़े में ख़ुशी का माहौल था. युवा पटाखे फोड़ते नज़र आए तो महिलाएं छोटे-छोटे समूहों में इस मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर चर्चा करती नज़र आईं.

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से आई ख़ुशी उनके चेहरे पर साफ़ झलक रही थी. जैसे ही कोई व्यक्ति इस इलाक़े में प्रवेश करता, उसके लिए समूहों में जमा हुए लोगों, उनमें बाँटी जा रही चाय और इलाक़े की चकाचौंध के बीच ख़ुश चेहरों से नज़रें बचा पाना मुश्किल था.

बिलकिस बानो के रिश्तेदार और इस मामले के प्रमुख गवाह रज्जाक मंसूरी ने बीबीसी से कहा कि उन्हें यह जानकर ख़ुशी हुई कि न्याय के लिए संघर्ष ने उन्हें परिणाम दिया है.

उन्होंने कहा, “इस मामले के 11 दोषियों को सज़ा में छूट देने के गुजरात सरकार के आदेश के बाद हम टूट गए थे, लेकिन आज न्यायपालिका में हमारा विश्वास और विश्वास मज़बूत हुआ है.''

क्या गुजरात सरकार ने छीन लिया था न्याय?

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रज्जाक ने बीबीसी से आगे कहा, ''हमें न्याय के लिए बहुत कष्ट सहना पड़ा, सुनवाई के लिए हमें मुंबई जाना पड़ा. हमें न्याय पाने के लिए अपना कामकाज़ छोड़ने और अपनी जेब से पैसा खर्च करने के लिए मजबूर किया गया, लेकिन वह न्याय राज्य सरकार ने अपने आदेश से छीन लिया था. इसके बाद हमने वापस लड़ने का फ़ैसला किया और हमने (बिलकिस) याचिका दायर की.”

बीबीसी ने रणधीकपुर गाँव का दौरा किया. इस मामले के सभी 11 दोषी इसी गाँव के हैं.

अदालत का फ़ैसला आने से पहले सोमवार रणधीकपुर के लिए एक आम दिन था, सिवाय उन पुलिस अधिकारियों के इस मामले में फ़ैसला आने के बाद किसी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए वहाँ सुरक्षा प्रबंधन करने के लिए तैनात थे.

पहले जिस इलाक़े को 'जय श्री राम' लिखे भगवा झंडों से सजाया गया था, वहाँ सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद सन्नाटा पसर गया.

इस मामले के दोषियों में से कोई भी सदस्य या उनके परिवार का कोई सदस्य बात करने को तैयार नहीं हुआ.

हालांकि, इस इलाक़े के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इलाक़े में गश्त बढ़ा दी गई है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस को स्टैंड बाय मोड में रखा गया है.

किस बात की आशंका

बिलकिस बानो

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साल 2002 से पहले बिलकिस बानो अपने परिवार के साथ जिस मुस्लिम मोहल्ले में रहती थीं, वह पुलिस स्टेशन से कुछ मीटर की दूरी पर है. हालांकि यहाँ के कई लोग पहले ही अपने घरों को छोड़कर देवगढ़ बैरिया में रह रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनाए अपने फ़ैसले में गुजरात सरकार के आदेश को पलटते हुए कहा कि सज़ा में छूट देने की शक्तियां गुजरात सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं बल्कि महाराष्ट्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती हैं.

अदालत ने कहा कि चूंकि अदालत को ग़लत जानकारी प्रदान की गई थी, इसलिए मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से पारित आदेश रद्द कर दिया जाएगा, जिसमें कहा गया था कि सज़ा में छूट पर फ़ैसला गुजरात सरकार लेगी.

सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से मुस्लिम समुदाय के लोग ख़ुश हैं, लेकिन वे बहुसंख्यक समुदाय की ओर से किसी नकारात्मक प्रतिक्रिया को लेकर चिंतित भी हैं.

मुस्लिम समुदाय के एक सदस्य ने कहा, "दोषियों में से अधिकांश लोग राजनीतिक रूप से शक्तिशाली हैं और शीर्ष नेताओं से जुड़े हुए हैं. इसलिए हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जश्न नहीं मना रहे हैं.''

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