हिट एंड रन क़ानून के ख़िलाफ़ ड्राइवरों का चक्का जाम, क्यों ख़फा हैं देश भर के ट्रांसपोर्टर

    • Author, दीपक मंडल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

'हिट एंड रन' मामले में सज़ा के नए प्रावधानों के ख़िलाफ़ ट्रक, टैक्सी और बस ऑपरेटरों के संगठनों ने देश भर में हड़ताल शुरू कर दी है.

संसद में हाल में लाए गए भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक मामलों में सज़ा के नए प्रावधान किए गए हैं.

कानून के तहत 'हिट एंड रन' केस में ड्राइवरों को दस साल की कैद और सात लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है.

अभी तक ट्रक या डंपर से कुचलकर किसी की मौत हो जाती थी तो लापरवाही से गाड़ी चलाने का आरोप लगता था और ड्राइवर को जमानत मिल जाती थी.

हालांकि इस कानून के तहत दो साल की सजा का प्रावधान है लेकिन अब नया कानून काफी सख्त हो गया है और इससे ड्राइवर और ट्रक, टैक्सी, बस ऑपरेटर भड़के हुए हैं.

चक्का जाम

नया कानून अभी लागू नहीं हुआ है, लेकिन ड्राइवरों में इसका काफी खौफ़ है. उन्हें लग रहा है कि नया कानून लागू होने के बाद उनके लिए गाड़ी चलाना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि दस साल की कैद और सात लाख जुर्माने की सजा काफी कड़ी है.

भोपाल के बाहरी इलाके में हड़ताल कर रहे टैंकरों के ड्राइवरों ने बीबीसी से कहा कि एक तो उन्हें इतना पैसा नहीं मिलता कि वे इतना भारी जुर्माना दे सकें. दूसरा, उन्हें नए कानून से भारी प्रताड़ना का डर है. दस साल की कैद की सजा काफी ज्यादा है.

नए कानून के ख़िलाफ़ ट्रक, टैक्सी और बस ऑपरेटरों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखने लगा है. पूरे देश में एक कोने से दूसरे कोने तक ट्रक और बस चालकों ने चक्का जाम कर दिया है.

इससे देश के कई प्रमुख राजमार्गों पर रुके हुए ट्रकों की कतार देखी जा रही है. महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और बिहार समेत देश के लगभग सभी राज्यों में हड़ताल का असर दिख रहा है.

सोमवार को मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) के लगभग 1.20 लाख ट्रक, टैंपो और कंटेनर सड़कों पर नहीं उतरे.

अगर यहां के ट्रांसपोर्ट एसोसिएशनों ने तीन दिन तक हड़ताल जारी रखी तो पेट्रोल-डीजल, फल, सब्जियों जैसे जरूरी सामानों की सप्लाई को भारी झटका लग सकता है. मुंबई महानगर क्षेत्र में ट्रकों के करीब डेढ़ लाख ड्राइवर हैं.

ट्रांसपोर्टरों के सबसे पुराने संगठन ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के मुताबिक़ देश में 35 फीसदी भारी वाहन पेट्रोल और एलपीजी समेत दूसरे जरूरी सामानों की ढुलाई में लगे हैं.

संगठन का कहना है कि सिर्फ एक दिन की हड़ताल से अकेले मुंबई महानगर क्षेत्र में 120 से 150 करोड़ रुपये तक का घाटा हो सकता है.

अफरातफरी का आलम

हड़ताल की वजह से सबसे ज्यादा अफरातफतरी पेट्रोल पंपों पर दिख रही है. मुंबई क्षेत्र में कई पेट्रोल-पंपों पर पेट्रोल डीजल खत्म हो गया है. देश के कई राज्यों में पेट्रोल पंपों पर लोगों की लंबी कतारें दिख रही हैं.

मध्य प्रदेश में कई राज्यों में पेट्रोल-पंपों पर गाड़ियों में पेट्रोल और डीजल भरवाने के लिए लोगों की लंबी लाइनें देखी गई.

मध्य प्रदेश में हड़ताल को कवर कर रहे बीबीसी संवाददाता सलमान रावी ने जब ट्रक ड्राइवरों से बातचीत की तो पता चला कि कई पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल नहीं है क्योंकि टैंकर वहां नहीं पहुंच रहे हैं.

उनका कहना था कि एक-दो दिन में सब्जियों और फलों के दाम बढ़ सकते हैं. हालांकि स्थानीय प्रशासन ने जरूरी सामानों की सप्लाई जारी रखने के लिए इंतजाम करने के आदेश दिए हैं, लेकिन हड़ताल लंबी चली तो काफी मुश्किल आ सकती है.

मध्य प्रदेश में आम लोगों को सफर करने में दिक्कत आ रही है. कई यात्रियों ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि ट्रकों, टैंकरों और बसों की हड़ताल की वजह से उनके लिए अपने-अपने ठिकानों पर पहुंचना मुश्किल हो गया है. ओला और उबर जैसी कैब सर्विस भी नहीं चल रही है.

मध्य प्रदेश ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने दावा किया कि सोमवार को लगभग दस हजार प्राइवेट बसें, ट्रक और टैक्सियां नहीं चलीं. हिमाचल प्रदेश में अभी टूरिस्ट सीजन चल रहा है.

हड़ताल से यहां पर्यटन कारोबार को काफी नुकसान पहुंचने की आशंका है. वैसे भी इस बार शिमला समेत राज्य के कई पर्यटन स्थलों में होटलों की बुकिंग काफी कम रही है.

हिन्दुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में इंडियन ऑयल के 800, बीपीसीएल के 300 और एचएपीसीएल के 350 टैंकर पेट्रोल और डीजल की सप्लाई ले जाते हैं, लेकिन कई ट्रक और टैंकर आज सड़कों पर नहीं उतरे.

ट्रक ड्राइवरों का क्या कहना है?

इस ख़बर के मुताबिक़ ऑल इंडिया पेट्रोल पंप ऑनर्स एसोसिएशन के चेतन मोदी का कहना है कि बड़े पेट्रोल-डीजल डीलर और पंप मालिकों के पास तीन-चार दिन का स्टॉक है.

लेकिन हड़ताल की वजह से कम से कम 50 से 60 फीसदी पेट्रोल पंपों पर सप्लाई प्रभावित होगी. अगर हड़ताल लंबी चली तो सप्लाई पर काफी बुरा असर पड़ेगा.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अखिल गुजरात ट्रक ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने सोमवार को हड़ताल की अपील पर अमल करते हुए लगभग 40 फीसदी कॉमर्शियल वाहन सड़कों पर नहीं उतरे.

भोपाल के बाहरी इलाके में बीबीसी संवाददाता सलमान रावी से एक टैंकर चालक ने कहा कि उनके पास जुर्माना देने के लिए सात लाख रुपये रखने की हैसियत होगी तो वो ट्रक ड्राइवरी क्यों करते.

कुछ ड्राइवरों ने कहा उन्हें छह-सात हजार रुपये वेतन मिलता है. वो कहां से इतना बड़ा जुर्माना दे पाएंगे. और फिर जेल हो गई है तो उनके बीवी-बच्चों का क्या होगा.

ड्राइवरों का कहना है कि पुलिस और सरकारी विभाग कहते हैं कि दुर्घटना के बाद ड्राइवर भाग जाते हैं. फोन कर इसकी सूचना नहीं देते हैं.

ड्राइवरों का कहना है कि अगर वो रुके तो उन्हें मॉब लिंचिंग से कौन बचाएगा.

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (नॉर्थ जोन) के उपाध्यक्ष जसपाल सिंह कहते हैं, ''दुर्घटना कोई जानबूझकर नहीं करता. सरकारी विभाग कहते हैं कि एक्सीडेंट होने पर ड्राइवर फोन नहीं करते. लेकिन हमें नहीं लगता कि वो फोन नहीं करते. आखिर सड़कों पर इतने कैमरे और टोल-नाके हैं, उनकी मदद क्यों नहीं ली जाती.''

'किसानों के कानून जैसा देरी न करें'

जसपाल सिंह कहते हैं, ''भारत में ड्राइवरों की सबसे ज्यादा मॉब लिंचिंग होती है. जिस शख्स को चोट लगती है लोग उस पर कोई ध्यान नहीं देते. ड्राइवरों को पीटना शुरू कर देते हैं."

"कई बार ड्राइवरों को पीट-पीट कर मार डाला गया है. उन्हें माल समेत जिंदा जला दिया जाता है. लेकिन ऐसा करने वालों पर कोई मुकदमा नहीं होता. ऐसे में ड्राइवरों की असुरक्षा और बढ़ जाती है.''

ट्रांसपोर्टर संगठनों ने अभी तक हड़ताल का औपचारिक आह्वान नहीं किया है. अभी हड़ताल अनौपचारिक तौर पर अलग-अलग ड्राइवर और ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन कर रहे हैं.

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के जसपाल सिंह ने बीबीसी हिंदी को बताया, ''गृह मंत्रालय ने आज रात ट्रांसपोर्टरों को सात बजे बैठक के लिए बुलाया है. इस पर होने वाली बातचीत पर ही हमारा अगला कदम निर्भर करेगा.''

नए कानून के बारे में जसपाल सिंह कहते हैं, ''कानून बगैर सोचे-समझे ट्रांसपोर्टरों की रजामंदी के बगैर लाया गया. जिन लोगों पर ये कानून लागू किया जाना है उनकी राय भी नहीं पूछी गई."

"जमीनी हालात कैसे हैं हमें पता है. हमें बताया होता तो हम मशविरा देते कि कैसे कानून लाए जाएं, जिससे ड्राइवर भी भयभीत न हो और यात्री भी सड़क पर सुरक्षित चलते, लेकिन एकतरफा फैसला लागू करेंगे तो इस तरह की समस्या तो होगी ही. ''

वो कहते हैं, "विदेश में ड्राइवरों की जीवनस्तर काफी अच्छा है. भारत में ड्राइवरों में पहले से हताशा है. ऐसे में ये डराने वाले कानून लाने पर वो अपना काम कैसे करेंगे ''

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने कहा है कि ड्राइवरों की हड़ताल से आयात-निर्यात रुका हुआ है.

संगठन ने कहा कि देश में एक करोड़ कमर्शियल गाड़ियां हैं. हर दिन हर गाड़ी पर साढ़े 3 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है. इसी से नुकसान का अंदाजा लगाया जा सकता है.

संगठन ने कहा कि इस कानून को लेकर किसानों के कानून के जैसी देरी न करें. उनका कहना है कि 20 करोड़ मजदूर इस उद्योग से जुड़े हैं. जितनी देरी होगी, इन लोगों को समझाना उतना ही मुश्किल होगा.

नए और पुराने कानून में क्या फर्क है?

लापरवाही से गाड़ी चलाने की वजह से हिट एंड रन केस जैसे सड़क हादसे और उनमें होने वाली मौतें लापरवाही से हत्या के कानून के तहत आती हैं.

आईपीसी कानून में बदलाव के बाद आई भारतीय न्याय संहिता में इस संबंध में दो प्रावधान हैं.

सेक्शन 104 के दो प्रावधानों में कहा गया है कि लापरवाही से गाड़ी चलाने की वजह से मौत होने पर सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है.

दूसरे प्रावधान में कहा गया है कि लापरवाही से होने वाली ड्राइविंग की वजह से दुर्घटना में होने वाली मौत के बाद घटनास्थल से भागने या फिर हादसे के बाद पुलिस अफसर या मैजिस्ट्रेट को न बताने पर दस साल तक जेल की सजा और सात लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है.

मौजूदा कानून के मुताबिक हिट एंड रन केस में दो साल की सजा का प्रावधान है. हालांकि ऐसे मामलों में ड्राइवरों को जमानत मिल जाती है.

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