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हाफ़िज़ सईद के प्रत्यर्पण की भारत की मांग पर पाकिस्तान क्या बोला?
भारत ने लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफ़िज़ सईद को प्रत्यर्पित करने के लिए पाकिस्तान से औपचारिक तौर पर गुज़ारिश की है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की है कि भारत ने कुछ दिन पहले इस संबंध में पाकिस्तान को चिट्ठी भेजी है.
पाकिस्तान ने भारत की गुज़ारिश मिलने की बात को स्वीकार किया है और कहा है कि 'दोनों मुल्कों के बीच प्रत्यर्पण से जुड़ा कोई करार नहीं है.'
भारतीय विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
गुरुवार को ख़बर आई कि भारत ने हाफ़िज़ सईद को भारत प्रत्यर्पित करने के लिए पाकिस्तान से औपचारिक तौर पर गुज़ारिश की है.
शुक्रवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने इसकी पुष्टि की और संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि कुछ दस्तावेज़ों के साथ हाफ़िज़ सईद को भारत प्रत्यर्पित करने के लिए सरकार ने कुछ दिन पहले पाकिस्तान सरकार को चिट्ठी भेजी है.
उन्होंने कहा, "वो भारत में कई मामलों में वॉन्टेड हैं. इस संबंध में, हमने पाकिस्तान सरकार से संबंधित साक्ष्यों के साथ एक विशेष मामले में सुनवाई के लिए हाफ़िज़ सईद को भारत को प्रत्यर्पित करने की अपील की है."
उन्होंने कहा, "जिस मामले में वो वॉन्टेड हैं उसे लेकर हम समय-समय पर मुद्दा उठाते रहे हैं. यह अपील अभी हाल ही में की गई है."
हाफ़िज़ के बेटे को लेकर क्या कहा?
संवाददाता सम्मेलन के दौरान अरिंदम बागची ने ये भी कहा कि मंत्रालय ने हाफ़िज़ सईद के बेटे तल्हा सईद के पाकिस्तान से चुनाव लड़ने से जुड़ी ख़बरों पर भी ग़ौर किया है.
उन्होंने कहा, "हम अन्य देशों के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करते हैं. लेकिन पाकिस्तान हमारा पड़ोसी है और वहां के कट्टरपंथी आतंकी संगठनों का इस तरह से मुख्यधारा में आना कोई नई बात नहीं है और यह लंबे समय से उनकी राज्य नीति का हिस्सा रहा है. इस तरह की गतिविधियों का हमारे क्षेत्र की सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ता है."
"हम इस तरह की सभी गतिविधियों पर नज़र रखना जारी रखेंगे जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर किसी तरह से प्रभाव डाल सकते हैं."
2022 में जारी भारत सरकार के नोटिफ़िकेशन के अनुसार भारत में लश्कर के हमलों के लिए आतंकियों को नियुक्त करना, उनके लिए पैसों की व्यवस्था करना और हमलों की योजना बनाना तल्हा सईद की ज़िम्मेदारी है.
डॉन में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान मरकाज़ी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) ने 2024 में होने वाले चुनावों में हर चुनाव क्षेत्र से अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं. माना जाता है कि इस पार्टी को हाफ़िज़ सईद के समर्थन मिला हुआ है.
इस पार्टी के बैनर तले तल्हा सईद राष्ट्रीय असेंबली चुनावों में लाहौर से एनए-127 क्षेत्र में बतौर उम्मीदवार खड़े हुए हैं.
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान से छपने वाले अख़बार डॉन ने इस पर प्रतिक्रिया के लिए पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय से संपर्क किया था.
शुक्रवार को मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज़ ज़हरा बलोच ने इस बात की पुष्टि की है और कहा कि भारत की तरफ से "कथित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में" हाफ़िज़ सईद को प्रत्यर्पित करने की रिक्वेस्ट उन्हें मिली है.
हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच प्रत्यर्पण को लेकर कोई करार नहीं हुआ है.
उन्होंने कहा, "ये जानना भी ज़रूरी है कि भारत और पाकिस्तान के बीच इस तरह का कोई द्विपक्षीय समझौता नहीं हुआ है."
कौन है हाफ़िज़ सईद?
भारत मानता है कि 2008 में हुए मुंबई बम धमाकों के पीछे मास्टरमाइंड हाफ़िज़ सईद ही थे. आतंक से जुड़े कई मामलों में भारत में सुरक्षा एजेंसियों को उनकी तलाश है संयुक्त राष्ट्र 2008 में हाफ़िज़ सईद को आंतकवादी घोषित कर चुका है, वहीं इंटरपोल ने भी हाफ़िज़ सईद के लिए नोटिस जारी किया है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवादियों की लिस्ट के अनुसार पंजाब पाकिस्तान में 1950 में जन्मे हाफ़िज़ सईद लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हैं और लाहौर में रहते हैं.
हाफ़िज़ सईद पाकिस्तान के प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा (लश्कर-ए-तैयबा की चैरिटी शाखा) के नेता हैं, जिसे भारत एक चरमपंथी संगठन मानता है.
हाफ़िज़ सईद ने 1990 में लश्कर-ए-तैयबा बनाया. जब इस संगठन को बैन कर दिया गया तो उन्होंने जमात-उद-दावा वल-इर्शाद नाम के एक पुराने संगठन को फिर से खड़ा किया. 2002 में इसका नाम बदलकर जमात-उद-दावा कर दिया गया.
जमात-उद-दावा का दावा है कि वो चैरिटी संगठन है और राहत का काम करती है, हालांकि अमेरिका कहता है कि ये इसके चेहरे के पीछे चरमपंथी गतिविधियां चलाई जाती हैं.
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार हाल के सालों में मीडिया में हाफ़िज़ सईद की मौजूदगी कम ही देखी गई है.
बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते 2017 की शुरुआत में पाकिस्तान सरकार ने उनके संगठन की फंडिंग रोकने को लेकर कई कदम उठाए और हाफ़िज़ सईद को नज़रबंद भी किया.
हालांकि बाद में इसी साल लाहौर हाई कोर्ट ने उन्हें नज़रबंदी में रखने की सरकारी की गुज़ारिश ठुकरा दी जिसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया.
पिछले साल पाकिस्तान की एक अदालत ने आतंक के वित्तपोषण के लिए हाफ़िज़ सईद को 31 साल कै़द की सज़ा सुनाई थी.
पाकिस्तान के इस कदम का उद्देश्य फ़ाइनेन्शियल एक्शन टास्क फोर्स (एफ़एटीएफ़) की मॉनिटरिंग लिस्ट से बाहर निकलने की कोशिश था. हाफ़िज़ सईद 2019 से लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद हैं.
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