क्या है सोने का सही तरीक़ा?

    • Author, पायल भुयन
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पूरे दिन की थकान के बाद एक अच्छी नींद की ज़रूरत सब महसूस करते हैं. कई लोग करवट लेकर तो कई पीठ के बल सोना पसंद करते हैं लेकिन सोने का सही तरीक़ा क्या है.

क्या हमें याद रहता है कि जब हम सोने गए तो हम किस पोस्चर में लेटे थे और जब जागे तो किस ओर उठे. सोने के सही तरीक़े (पोस्चर) को जानने के लिए शोधकर्ताओं ने कई तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया.

उन्हेंने लोगों को सोते हुए फ़िल्माया, कई सेंसर लगाए, कई बैंड पहनाए जिससे सोते वक्त उनकी गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके.

हांगकांग में शोधकर्ता एक ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं जिसे 'ब्लैंकेट एकोमोडेटिव स्लीप पोस्चर क्लासिफ़िकेशन सिस्टम' कहते हैं.

इस तकनीक में इंफ्रारेड कैमरों का इस्तेमाल होता है. इस तकनीक के ज़रिए अगर व्यक्ति मोटा कंबल भी ओढ़ कर सो रहा होता है तो ये सिस्टम उसके अंदर जाकर भी नींद के पैटर्न का पता लगा सकती है. आमतौर पर ये देखा गया है कि जब हम छोटे होते हैं तो हम ज़्यादातर समय करवट लेकर, पीठ के बल पर या फिर सामने की ओर सोना पसंद करते हैं. लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं ज़्यादातर लोगों को करवट लेकर सोने की आदत हो जाती है.

सीनियर इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉक्टर स्वाति महेश्वरी कहती हैं, "जिस समय हम सो रहे होते हैं तब हमारा शरीर ख़ुद को रीस्टोर करता है इसलिए हमारे सोने का तरीक़ा अगर ठीक नहीं होगा तो हमारे शरीर को आराम नहीं मिलता."

वो कहती हैं, "हमारा 'स्लीपिंग पोस्चर' ऐसा होना चाहिए जो हमें इस पूरी प्रक्रिया में मदद कर सके. जीवन का एक तिहाई हिस्सा सोने में बीतता है इसलिए हमारी नींद की गुणवत्ता हमें तंदुरुस्त और ऊर्जावान रहने के लिए ज़रूरी है."

वहीं, सर गंगाराम अस्पताल में स्लीप मेडिसिन विभाग के चेयरमैन डॉक्टर संजय मनचंदा कहते हैं कि "आप ये कैसे तय कर सकते हैं कि आप किस तरह (पोज़ीशन) में सोएंगे."

वो कहते हैं, "प्राकृतिक रूप से आपके शरीर को जिस पोज़ीशन में आराम मिले वो ख़ुद-ब-ख़ुद उसमें सो जाएगा. आप देखें जिन लोगों को खर्राटे ज़्यादा आते हैं वो अमूमन पेट के बल सोना पसंद करते हैं ताकि उनकी जीभ थोड़ी बाहर की ओर रहे और सांस में रुकावट ना हो. अगर आप पोस्चर पर इतना ध्यान देंगे तो फिर सोएंगे कैसे. इसलिए ज़रूरी है कि आप ये पता लगाए कि समस्या कहां है और डॉक्टर की मदद से उसे ठीक करें."

सोने का सही तरीका क्या है

डेनमार्क में हुए एक शोध में शोधकर्ताओं ने सोने के पसंदीदा तरीक़े का पता लगाने के लिए कुछ लोगो पर स्लीप डिटेक्टर्स लगाए.

शोध में सामने आया कि इनमें से लगभग 50 प्रतिशत लोग करवट लेकर सोना पसंद करते हैं, 38 फ़ीसदी पीठ पर और महज़ 7 फ़ीसदी पेट के बल सोते हैं.

डॉक्टर स्वाति महेशवरी के मुताबिक़, "पेट के बल सोने के बजाए करवट लेकर या पीठ पर सोना हमारे लिए फ़ायदेमंद माना गया है. जिन लोगों को कमर दर्द की शिकायत हो, गर्भवती महिलाएं, बुज़ुर्ग जिनकी रीढ़ की हड्डी में लचीलेपन की दिक्कत है या फिर जिन्हें ज़्यादा ऐसिडिटी होती है, उनके लिए करवट लेकर सोना लाभदायक है."

"कुछ लोग अपने घुटने ज़्यादा मोड़ कर सोते हैं, कुछ लोग कम मोड़ते हैं. ये आपको अपने सहूलियत के हिसाब से देखना है. बुज़ुर्ग या फिर जिन्हें एसिड रिफ़्लक्स की दिक्कत है, उन लोगों को अपने घुटने बहुत ज़्यादा नहीं मोड़ने चाहिए. ऐसा करने से बुज़ुर्गों को जोड़ों में दर्द रह सकता है और ऐसिड रिफ़्ल्कस से परेशान लोगों को रिफ़्लक्स ज़्यादा होता है."

"जिन लोगों को बहुत ज़्यादा गर्दन में दर्द रहता है, कंधो में दर्द रहता है या चेहरे पर झुर्रियां एक समस्या है उन लोगों को हम सलाह देते हैं कि पीठ पर सोएं."

डॉक्टर स्वाति महेश्वरी कहती हैं, "करवट लेकर लंबे समय तक सोने पर कई लोगों को गर्दन में दिक्कत आती है. एक कंधा दबा रहने की वजह से कंधे में अकड़न आ सकती है. बहुत देर तक अगर हमारा आधा चेहरा तकिये या फिर गद्दे पर दबा रह जाए तो झुर्रियां पड़ने की परेशानी बढ़ जाती है."

"जिन्हें ज़ुकाम या साइनस की दिक्कत है या ऐसिड रिफ़्लक्स ज़्यादा होता है उन लोगों को तकिया थोड़ा उंचा कर के सोना चाहिए. आप चाहे साइड पर सोइए या पीठ के बल पर तकिया उंचा कर के सोइए. इन लोगों को करवट लेकर सोने से बेहतर नींद आती है. इसकी वजह है हमारी सांस की नली करवट लेकर सोने से अच्छी तरीक़े से खुली रहती है."

"जो लोग बहुत ज़्यादा खर्राटे लेते हैं उन्हें पीठ के बल पर या फिर पेट के बल सोने से परहेज़ करना चाहिए. इन लोगों के लिए बेहतर है कि वो करवट लेकर सोए."

कितनी देर सोना सही

अमेरिका की रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के मुताबिक़, एक 18 से 60 सल की उम्र के व्यस्क को दिन में 7 से 8 घंटे सोना चाहिए. वहीं 61 से 65 साल की उम्र के लोगों को दिन में करीब 7 से 9 घंटे की नींद लेनी चाहिए.

कितनी देर की नींद आपको तरोताज़ा कर सकती है इस सवाल पर डॉक्टर संजय मनचंदा कहते हैं, "आठ घंटे सोने का कोई जादुई आंकड़ा नहीं है. आपको कितने घंटे सोना है ये आपके शरीर पर और आपकी नींद की गुणवत्ता पर निर्भर करता है. अगर इन दोनों में संतुलन नहीं होगा तो आप दस घंटे भी सो लें आप तरोताज़ा महसूस नहीं करेंगे."

वो आगे बताते हैं, "अगर आपके सोने का पैटर्न ठीक नहीं है, मसलन गहरी नींद, नींद में सपने देखने की अवस्था, और हल्की नींद में संतुलन नहीं होगा तो आप थका हुआ महसूस करेंगे."

"नींद में देखे गए सपने आपके रिलैक्सिंग स्लीप और डीप स्लीप को कम कर देता है. लगातार ऐसे होता रहा तो आपको धीरे-धीरे थकान होने लगती है आपको गुस्सा ज़्यादा आने लगता है, आप चीज़े भूलने लगते हैं. इसलिए ज़रूरी है कि सोने के तीनों पैटर्न में संतुलन रहे."

कब लें डॉक्टर की सलाह

डॉक्टर संजय मनचंदा कहते हैं, "अगर आपको नींद नहीं आ रही है, नींद ख़राब आ रही है, जागने के बाद आप फ़्रेश महसूस नहीं करते, या फिर शरीर में थकान रहती है, दिन में सोने की प्रबल इच्छा होती है, आप बहुत ज़्यादा खर्राटे लेते हैं तो एक बार आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए."

"लोग ख़ुद ही नींद की दवा लेना शुरू कर देते हैं ऐसा करना आपके लिए बहुत ख़तरनाक हो सकता है. हमें पहले ये समझने की ज़रूरत है कि आपको क्या दिक्कत है. जिसके बाद उसका उपचार खोजने की ज़रूरत है."

डॉक्टर स्वाति महेश्वरी कहती हैं, "कई बार देखा गया है कि जो लोग हाथ दबा कर सोते हैं उन्हें नर्व इंजरी तक हो जाती है. गर्दन में ऐठन, कंधो का अकड़ना ऐसिड रिफ़्लक्स ये सब ग़लत पोस्चर का नतीजा है."

"स्लीप एपनीया की शिकायत में सांस थोड़े थोड़े अंतराल के बाद कुछ सेकेंड के लिए रुकती रहती है, जिससे उनकी नींद बार बार टूटती है ऐसे लोगों को फिर दिन में नींद आती हैं. अगर आपको ये सब दिक्कत है तो मैं कहूंगी कि आप डॉक्टर से मिल कर अपना इलाज करवाएं. स्लीप स्टडी आपकी मदद कर सकता है."

अच्छी नींद के लिए क्या करें

हावर्ड मेडिकल स्कूल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ बहुत लंबे समय तक अनिद्रा की समस्या हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारिक साबित हो सकती है. नींद की कमी से मूड स्विंग, मोटापा, हृदय रोग, टाइप-2 मधुमेह जैसी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है.

अच्छी और गहरी नींद के लिए डॉक्टर संजय मनचंदा कुछ चीज़े ध्यान में रखने की सलाह देते हैं, "पहला, बिस्तर पर तभी जाएं जब आपको नींद आने लगे उससे पहले से बिस्तर पर ना जा कर बैठें. अगर सिर्फ़ आप जागे हैं तो बहुत मुमकिन हैं कि आप लेटे लेटे ओवर थिंकिंग (ज़्यादा सोचने लगेंगे) करेंगे."

"दूसरा, एक समय तय करें कि आपको कब सोना है. इसमें आधा घंटा आगे पीछे तो हो सकता है पर उससे ज़्यादा नहीं. तीसरा ,अगर आपके कमरे में घड़ी है तो उसे हटा दें क्योंकि ये सामान्य आदत है कि अगर आपको नींद नहीं आती है तो हम बार घड़ी देखते हैं. इससे एक नेगेटिव फ़ीडबैक साइकल शुरू होता है जो आपको सोने नहीं देता है."

"चौथा, सोने से पहले अपने सारे इलेक्ट्रॉनिक सामान चाहे टीवी, टैबलेट या फिर मोबाइल हो उसे कम से कम 40 मिनट पहले बंद कर दें."

"पांचवा, शाम के छह बजे के बाद चाय/कॉफ़ी का सेवन ना करें क्योंकि ये स्टिम्युलेंट्स होते हैं, ये आपकी नींद को ख़राब कर सकते हैं. धूम्रपान से भी परहेज़ करें."

कई लोगों को लगता है कि शाम या रात में शराब पीने से नींद अच्छी आएगी लेकिन ये बहुत बड़ा झूठ है. इससे भले ही आपको नींद जल्द आ जाए लेकिन आपको इससे गहरी नींद नहीं आ सकती. अगर आप लंबे समय तक सोने से पहले शराब पीते हैं तो इससे आपको डरावने सपने आ सकते हैं और एक समय बाद आपको शराब की लत लग जाएगी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)