Obstructive Sleep Apnoea (OSA): क्या है नींद की वो बीमारी जिससे बप्पी लाहिड़ी की हुई मौत

मशहूर फ़िल्म संगीतकार बप्पी लाहिड़ी का 69 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. उनकी मौत की वजह ओएसए (ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया) बताई गई है जो नींद से जुड़ी एक बीमारी है.

बप्पी लाहिड़ी ने मुंबई के क्रिटिकेयर अस्पताल में मंगलवार रात 11:45 पर आख़िरी साँस ली. अस्पताल के निदेशक डॉक्टर दीपक नामजोशी ने इसके बारे में एक बयान जारी किया.

डॉक्टर दीपक नामजोशी ने कहा, ''बप्पी लाहिड़ी ओएसए (ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया और सीने में संक्रमण से ग्रस्त थे. वे इसकी वजह से जुहू स्थित क्रिटिकेयर अस्पताल में 29 दिन भर्ती रहे थे. उनकी तबीयत ठीक हो गई थी और 15 फ़रवरी को उन्हें डिस्चार्ज किया गया. मगर एक दिन बाद उनकी सेहत फिर बिगड़ गई और उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल वापस लाया गया जहाँ इस बीमारी से रात लगभग 11:45 बजे उनका देहांत हो गया."

बयान में आगे ये भी कहा गया, "वो पिछले वर्ष कोविड से संक्रमित हुए थे. उन्हें पिछले एक साल से ओएसए था. इससे पहले वो कई बार इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हुए थे और हर बार उनकी सेहत में सुधार हुआ था."

क्या है ओएसए

ब्रिटेन की संस्था ब्रिटिश लंग फ़ाउंडेशन (बीएलएफ़) के अनुसार, ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया या ओएसए साँस से जुड़ी एक समस्या है जो सोते वक़्त होती है.

ये समस्या किसी को भी हो सकती है - बड़ों को भी और बच्चों को भी.

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क्या होता है इसमें

बीएलएफ़ के अनुसार हम जब सोते हैं तो हमारे गले की माँसपेशियों का तनाव कम होता है और हवा हमारे फेफड़ों में जाती है.

लेकिन, यदि ओएसए हो तो गला पूरी तरह बंद हो जाता है और हवा का प्रवाह रुक जाता है. ऐसे में थोड़ी देर के लिए साँस बंद हो जाती है.

यदि ये 10 सेकंड या उससे ज़्यादा समय के लिए होता है तो इसे एप्निया कहा जाता है.

ऐसा होने पर ख़ून में ऑक्सीजन का स्तर गिर सकता है.

क्या होता है इसका असर

ये बीमारी होने पर साँस थोड़ी देर के लिए रुक जाती है तो मस्तिष्क फिर से आपकी साँस शुरू कर देता है.

अक्सर एक गहरी साँस या हिलने-डुलने के बाद दोबारा साँस शुरू होती है.

इसके बाद व्यक्ति सो जाता है, आराम करता है और थोड़ी देर बाद फिर यही सिलसिला शुरू हो जाता है.

कुछ लोग कुछ देर के लिए जाग जाते हैं, मगर बहुत सारे लोगों को समझ नहीं आता कि उनके साथ क्या हो रहा है.

यदि ये बीमारी गंभीर स्तर तक पहुँच जाती है तो ऐसा एक रात में सैकड़ों बार हो सकता है.

इसकी वजह से नींद बार-बार बाधित होती है जिससे व्यक्ति दिन में उनींदा महसूस करता रहता है.

इसका यदि इलाज नहीं करवाया जाए तो सेहत और ज़िंदगी पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है.

किनको होने की ज़्यादा आशंका?

ब्रिटिश लंग फ़ाउंडेशन के मुताबिक़ इन ख़ास परिस्थितियों में ओएसए होने का ख़तरा ज़्यादा होता है:-

  • यदि आप पुरुष हैं और मध्य वयस्क हैं
  • यदि आप महिला हैं और मेनॉपॉज़ के दौर से गुज़र चुकी हैं
  • यदि आप गर्भावस्था के अंतिम चरण में हैं
  • यदि आपका वज़न ज़्यादा है या आप मोटापे का शिकार हैं
  • यदि आपके गले का आकार ज़्यादा है
  • डाउन्स सिन्ड्रोम जैसी ख़ास तरह की मेडिकल परिस्थितियों में ख़तरा हो सकता है
  • यदि आपको टाइप-2 डायबिटीज़ है
  • यदि आपको दिल की बीमारी है
  • सिगरेट और शराब का सेवन करने और नींद की गोलियाँ खाने से भी ख़तरा हो सकता है

ओएसए के लक्षण क्या हैं

बीएफ़ए के अनुसार इसके कुछ लक्षण सोते समय प्रकट होते हैं और कुछ जागी हुई हालत में.

सोई हुई अवस्था में लक्षण:-

  • तेज़ ख़र्राटे
  • साँस रुकना या साँस लेने में तकलीफ़ होना
  • गला बँधना या तेज़ी से झटके में साँस लेना
  • बार-बार हिलना-डुलना
  • अचानक से शरीर में झटका
  • रात में कई बार जागना

जागी हुई अवस्था में इसके लक्षण:-

  • उनींदी हालत में रहना, तरोताज़ा महसूस नहीं करना
  • जागते समय सिरदर्द
  • ध्यान देने में कठिनाई होना
  • कमज़ोर याददाश्त
  • दुखी या चिड़चिड़ा महसूस करना
  • समन्वय की कमी
  • यौनेच्छा में कमी

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