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क्या है नींद में जान लेने वाली वाली ये ख़तरनाक बीमारी, जिसकी शिकार हुईं अभिनेत्री कैरी फ़िशर
मशहूर अमरीकी फ़िल्म सीरीज़ 'स्टार वॉर्स' की अभिनेत्री कैरी फ़िशर की मौत की प्रमुख वजह 'स्लीप एपनिया' थी. डॉक्टरों ने इसकी पुष्टि की है.
'स्लीप एपनिया' नींद में सांस उखड़ने को कहते हैं. सोते हुए कई बार कुछ सेकेंड के लिए सांस टूट जाती है.
60 वर्षीय कैरी फ़िशर की पिछले साल 27 दिसंबर को मौत हो गई थी. जनवरी में जारी किए गए मौत के प्रमाण पत्र में उन्हें दिल का दौरा पड़ने की बात लिखी थी, लेकिन डॉक्टर उनकी मौत की सही वजह का पता नहीं लगा पाए थे.
अब लॉस एंजेलिस कंट्री के डॉक्टर ने स्लीप एपनिया के साथ दिल की बीमारी और ड्रग्स के इस्तेमाल को उनकी मौत की वजह बताया गया है.
क्या होता है नींद में सांस का उखड़ना?
यह एक आम समस्या है जब सोने के बाद गले की मांसपेशियां और सॉफ्ट टिशूज़ आराम की मुद्रा में आकर सिकुड़ जाते हैं और सांस पूरी तरह रुक जाती है. जब ऐसा 10 सेकेंड या ज़्यादा के लिए हो तो उसे एपनिया कहते हैं.
इससे बार-बार नींद टूटने जैसी समस्या आम है, जिससे कई दूसरी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. लेकिन अगर ज़्यादा समय के लिए- कहिए कि एक मिनट के लिए- सांस उखड़ जाए तो यह अपने आप में जानलेवा हो सकती है.
कुछ मामलों में यह दिमाग से भी जुड़ा होता है, जब सोते वक़्त दिमाग सांस लेने में इस्तेमाल होने वाली मांसपेशियों को सिग्नल देना रोक देता है.
जो बगल में सोता है, वो करे पहचान
स्लीप एपनिया की मार से दिमाग में ऑक्सीजन कम हो जाती है और दिमाग आपको गहरी नींद से जगा देता है. कई बार आप पूरी तरह जग जाते हैं. लेकिन कई बार हल्की नींद में रहते हैं और आपको पता ही नहीं लगता.
इसलिए इस समस्या को सबसे पहले वह पहचान सकता है जो आपके बगल में सोता हो. सोते समय खर्राटे आना, नींद में आवाज़ वाली और बहुत कोशिश के बाद सांस आना और बार-बार नींद में हांफना या खर्राटों से सांस का टूटना, इसके शुरुआती लक्षण हैं.
रात में पसीना आना और बार-बार पेशाब आना भी इसका एक लक्षण है. अगर आप हांफते हुए नींद से उठें और यह समस्या बार-बार हो रही हो तो डॉक्टर से मिलने में देर न लगाएं.
क्या आपको है ख़तरा?
नींद के दौरान गले की मांसपेशियों और सॉफ्ट टिशूज़ का आराम की मुद्रा में आना आम बात है. ऐसा सबके साथ हो सकता है, लेकिन सबके लिए यह समस्या पैदा नहीं करता.
जिन लोगों को यह समस्या होती है, उसकी ये वजह हो सकती हैं-
- मोटापा: ज़्यादा वज़न से गले में सॉफ्ट टिशूज़ बहुत ज़्यादा हो जाते हैं. इसलिए उनके शिथिल पड़ जाने से सांस का रास्ता रुक जाता है. पेट पर ज़्यादा चर्बी हो तब भी सांस की दिक्कत हो सकती है.
- पुरुष: महिलाओं के मुक़ाबले पुरुषों में इसका ख़तरा ज़्यादा होता है. इसकी सही वजह अभी तक पता नहीं लग पाई है, लेकिन इसका रिश्ता शरीर में चर्बी के वितरण से हो सकता है.
- 40 से ज़्यादा उम्र के लोगों के इसके चपेट में आने की आशंका ज़्यादा होती है.
- लंबी गर्दन वाले पुरुषों, बल्कि 17 इंच से ज़्यादा कॉलर साइज़ वाले लोगों में इसका ख़तरा ज़्यादा है.
- नींद की गोली लेने वालों, धूम्रपान करने वालों और शराब पीने वालों को भी ख़तरा होता है.
काबू करना आसान, पर अनदेखी ख़तरनाक
कुछ लाइफस्टाइल में बदलाव और कुछ डॉक्टरी इलाज, इस समस्या पर काबू आसानी से संभव है. लेकिन दिक्कत तब हो जाती है, जब इसे अनदेखा छोड़ दिया जाए और एक दिन यह बड़ी समस्या के तौर पर सामने आ जाए.
अनदेखा किया गया स्लीप एपनिया आपके काम-काज और जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है. साथ ही यह हाई ब्लड प्रेशर, दिल के दौरे, अनियिमित धड़कन और टाइप-2 डायबिटीज़ का ख़तरा भी पैदा कर सकता है.
एक शोध के मुताबिक, स्लीप एपनिया की वजह से उनींदे शख़्स के कार हादसे का शिकार होने की आशंका 12 गुना ज़्यादा होती है. स्लीप एपनिया से जूझ रहे लोगों के लिए गाड़ी चलाना ख़तरनाक है.
'पीपल' मैगज़ीन को जारी बयान में कैरी फ़िशर की बेटी लुअर्ड ने कहा, 'मेरी मां अपनी सारी ज़िंदग़ी ड्रग्स की लत और मानसिक बीमारियों से जूझती रहीं और अंत में उसी ने उनकी जान ले ली.'
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