दांतों को ठीक से ब्रश करने का सही तरीका क्या है?

    • Author, बीबीसी फ़्यूचर

दांतों को अच्छे से ब्रश करने का फ़ायदा यह होता है कि इससे लंबे समय तक बनी रहने वाली बीमारियों के होने की आशंका कम हो जाती है.

इसके साथ-साथ आपके दांत और मसूड़े भी मज़बूत होते हैं. मगर, हम लोगों में से अधिकांश यह काम ग़लत ढंग से करते हैं. कम से कम दंत विशेषज्ञों का तो यही कहना है.

इस लेख में विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि आप दांतों को अच्छे से कैसे ब्रश करें?

स्वीडन में हुई एक स्टडी से पता चला है कि दस में से एक व्यक्ति ही दांतों को अच्छे से ब्रश करने की तकनीक का इस्तेमाल करता है.

ब्रिटिश हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी बुपा (बीयूपीए) ने ब्रिटेन में 2 हज़ार लोगों पर एक सर्वे किया.

इसमें यह बात सामने आई कि आधे से ज़्यादा लोगों को यह नहीं मालूम था कि अपने दांतों को अच्छे से ब्रश कैसे किया जाए.

यूके में यूनिवर्सिटी ऑफ़ बर्मिंघम में एसोसिएट प्रोफ़ेसर और रिस्टोरेटिव डेंटिस्ट्री में स्पेशलिस्ट जोसफ़िन हर्शफ़ेल्ड ने इस बारे में बात की है.

उन्होंने कहा, "इस बात की संभावना ज़्यादा है कि जिस किसी को भी उनके डेंटिस्ट की ओर से ब्रश करने का सही तरीका नहीं बताया गया है, वो ग़लत ढंग से ब्रश करता हो."

"मेरे अनुभव से किसी भी देश में आबादी का बड़ा हिस्सा ऐसे ही लोगों का होगा, जिन्हें ठीक से ब्रश करने के बारे में नहीं पता होगा."

वैसे यह हैरान करने वाली बात नहीं है, क्योंकि आपको अपने दांत कैसे ब्रश करना चाहिए, इस बारे में भी कई तरह की जानकारी उपलब्ध है.

यह बात भी एक स्टडी में ही सामने आई. इसके मुताबिक, विशेषज्ञों के हवाले से दांतों को अच्छे से ब्रश करने के कम से कम 66 तरीके बताए गए हैं.

यूके में ओरल हेल्थ फ़ाउंडेशन के चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव निगेल कार्टर इस बारे में कहते हैं, "मुझे लगता है कि ये उपभोक्ताओं के लिए यह बहुत ही भ्रमित करने वाली बात है."

"यह भ्रम बाज़ार में उपलब्ध डेंटल उत्पादों से और ज़्यादा बढ़ जाता है."

तो फिर हम लोगों में से ज़्यादातर लोग क्या ग़लत कर रहे हैं और हम अपनी दिनचर्या में क्या बदलाव करें कि हम अपने दांतों को अच्छे से ब्रश कर सकें?

दांतों को अच्छे से ब्रश करने का सही तरीका

हर्शफ़ेल्ड कहती हैं, "कई मरीज समझते हैं कि उनको दांतों में फंसे खाद्य पदार्थों के बचे अवशेष हटाने की ज़रूरत है. मगर, वो केवल आंशिक सच है. दरअसल, दांतों से जीवाणु निकालना ज़्यादा ज़रूरी है."

ये जीवाणु और अन्य सूक्ष्मजीव हर किसी के मुंह में लगातार बढ़ते रहते हैं, जिसे सामान्य भाषा में दांतों का मैल भी कहा जा सकता है.

यह लगभग 700 प्रकार के जीवाणुओं से मिलकर बना होता है.

हर्शफ़ेल्ड इस बारे में कहती हैं, "ये दांतों पर मैल की चिपचिपी परत के रूप में चिपके रहते हैं. ये आसानी से साफ़ नहीं होते हैं. इन्हें हाथ से साफ़ करने की ज़रूरत होती है."

इसलिए इन्हें (बैक्टीरिया) हटाने के लिए ज़्यादा ज़रूरी जगह दांत नहीं बल्कि मसूड़े होते हैं. यह वो जगह होती है, जहां जीवाणु आसानी से घुसपैठ करते हैं.

हर्शफ़ेल्ड बताती हैं, "यह कहना कि 'दांतों को ब्रश करना' एक ग़लत प्रयोग है. बजाए इसके, 'मसूड़ों को ब्रश करने के बारे में सोचें' कहना ज़्यादा सही है, क्योंकि ऐसा करने पर 'दांत अपने आप साफ़' हो जाएंगे."

तो फिर वास्तव में ऐसा करने का सर्वश्रेष्ठ तरीका क्या है?

बास तकनीक

संशोधित बास तकनीक में आपको ब्रश को दांतों के सामने 45 डिग्री के कोण पर रखना होता है. इसमें आप मसूड़ों के सामने और पीछे ब्रश को धीरे-धीरे घुमाते हैं.

स्टिलमैन तकनीक

संशोधित स्टिलमैन तकनीक कुछ-कुछ संशोधित बास तकनीक जैसी है. मगर, इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि ब्रश करने के दौरान मसूड़ों पर ज़्यादा दबाव ना पड़े.

फ़ोन्स तकनीक

फ़ोन्स तकनीक बच्चों और शारीरिक तौर पर निपुण लोगों के लिए है. फ़ोन्स तकनीक में आपको ब्रश को 90 डिग्री के कोण पर रखना होता है. इसमें आप दांतों और मसूड़ों पर ब्रश को गोल-गोल घुमाते हैं.

वैसे एसोसिएट प्रोफ़ेसर हर्शफ़ेल्ड कहती हैं कि ब्रश करने के दौरान मसूड़ों पर दबाव 150-400 ग्राम से ज़्यादा नहीं होना चाहिए. हालांकि, दबाव कितना होना चाहिए, यह अभी भी बहस का विषय है.

दरअसल, ज़्यादा दबाव डालकर ब्रश करना, मसूड़ों को नुकसान भी पहुंचा सकता है. खासतौर पर मज़बूत ब्रिसल वाले ब्रश से ऐसा करना मसूड़ों को चोट पहुंचा सकता है.

ज़्यादा दबाव डालकर किया जाने वाला ब्रश सॉफ्ट टिश्यू को चोट पहुंचा सकता है. ऐसे में मसूड़ों में दरार पड़ सकती है, जिनके ज़रिए जीवाणु ख़ून में प्रवेश कर सकते हैं.

कितनी देर तक ब्रश करना चाहिए?

वैसे दिन में एक बार में कम से कम दो मिनट तक ब्रश करना चाहिए.

अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन, एनएचएस, इंडियन डेंटल एसोसिएशन, ऑस्ट्रेलियन डेंटल एसोसिएशन समेत कई अन्य नेशनल हेल्थ ऑर्गनाइजेशंस तो दिन में दो बार ब्रश करने का सुझाव देती हैं.

मगर, परेशानी इस बात की भी है कि हम में से अधिकांश लोग यह अनुमान लगाने के मामले में बहुत बुरे हैं कि यह दो मिनट का इस्तेमाल हमें कैसे करना है.

केवल 25 फ़ीसदी लोग ऐसे हैं, जो अपने दांतों को सही समय तक, सही दबाव और तरीके से ब्रश करते हैं.

अच्छी बात यह है कि इसके कई आसान समाधान भी हैं. जैसे- आपके फ़ोन में एक ऐप या एक इलेक्ट्रिक टूथब्रश, जिसमें टाइमर लगा होता है.

हर्शफ़ेल्ड कहती हैं, "अहम बात यह है कि सभी दांतों को अच्छे से साफ़ किया जाए. साथ में उस जगह को भी अच्छे से साफ़ किया जाए, जहां ब्रश आसानी से नहीं पहुंच सकता है."

"ऐसा करने में आसानी से दो मिनट से ज़्यादा का समय लग सकता है."

हर्शफ़ेल्ड कहती हैं, "ब्रश करने का सही समय तो व्यक्ति विशेष के हालात पर निर्भर करता है."

"वास्तविक तौर पर इसे परिभाषित नहीं किया गया है, और ऐसा किया भी नहीं जा सकता है, क्योंकि हर व्यक्ति के दांतों और मुंह की स्थिति अलग-अलग होती है."

आपको कितनी बार ब्रश करना चाहिए?

अमेरिका, यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश दिन में दो बार सही ढंग से ब्रश करने की सलाह देते हैं.

जबकि इंडियन डेंटल एसोसिएशन दिन में तीन बार ब्रश करने की सलाह देता है, जो आपके लिए फ़ायदेमंद हो सकता है.

जिन लोगों को ओरल हेल्थ से संबंधित कोई बड़ी दिक्कत नहीं है, उनको इन दिशा-निर्देशों से आगे जाकर कोशिश करने से कोई विशेष फ़ायदा नहीं होने वाला है.

क्या ख़ाने से पहले और बाद में ब्रश करना चाहिए?

क्या ज़्यादा सही है, नाश्ता करने से पहले ब्रश करना या बाद में?

इस बारे में टूथपेस्ट निर्माताओं से लेकर डेंटल हॉस्पिटल तक, कई लोगों का यह मानना है कि नाश्ता करने से पहले ब्रश करना फ़ायदेमंद होता है, ना कि नाश्ता करने के बाद.

हालांकि, यह भी बहस का विषय है.

वैसे नाश्ता करने बाद ब्रश करें या उसके पहले, यह इस बात पर निर्भर है कि आप कब और क्या खाते हैं.

नाश्ता करने के बाद ब्रश करने का मुख्य नुकसान यह हो सकता है कि आपको खाने और ब्रश करने के बीच अंतराल रखना होता है.

अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन खाने के बाद ब्रश करने में 60 मिनट का अंतराल रखने की बात कहता है.

इस बारे में हर्शफ़ेल्ड बताती हैं, "खाने में मौजूद एसिड दांतों की ऊपरी परत को कुछ समय के लिए कमजोर कर देते हैं. इस दौरान, दांतों में कैल्शियम और फॉस्फेट की मात्रा कम हो जाती है."

"हालांकि, कुछ समय बाद लार में मौजूद खनिज इनकी जगह ले लेते हैं."

निगेल कार्टर कहते हैं, "आपकी लार दांतों के लिए प्राकृतिक सुरक्षाप्रणाली है. रात में इसका बहाव कम हो जाता है. ऐसे में ज़रूरी है कि आप सोने से पहले दांतों को ठीक से साफ़ कर लें."

कैसा टूथब्रश इस्तेमाल करना चाहिए?

वैसे वयस्कों के लिए मिडियम ब्रिसल वाले ब्रश अच्छे होते हैं और टूथपेस्ट वो, जिसमें घर्षण पैदा करने वाले छोटे कण न हों.

हर्शफ़ेल्ड कहती हैं कि छोटा ब्रश मुंह के अंदर दांतों को अच्छे से साफ़ करने में कारगर रहता है. यह भी ज़रूरी है कि आप ब्रश को ख़राब होने से पहले बदल लें.

अफ़्रीका, मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में दांतों को साफ़ करने के लिए पारंपरिक दातून का इस्तेमाल किया जाता है, जो दांतों को कैविटी से बचाने में प्रभावी हो सकती है.

लेकिन, अगर इसका इस्तेमाल ठीक ढंग से न किया जाए, तो इससे मसूड़ों को नुकसान भी पहुंच सकता है. वैसे दांतों को साफ़ करने में इलेक्ट्रिक ब्रश ज़्यादा प्रभावी है, लेकिन यह महंगा भी है.

कैसा टूथपेस्ट सर्वश्रेष्ठ होता है?

एक सामान्य टूथपेस्ट के पैकेट के पीछे इसमें इस्तेमाल की गई सामग्री की लंबी सूची होती है.

इसमें सबसे ज़्यादा ध्यान एक तत्व पर दिए जाने की ज़रूरत होती है. वो है फ्लोराइड.

हर्शफ़ेल्ड बताती हैं, "जब से टूथपेस्ट में फ्लोराइड का इस्तेमाल होना शुरू हुआ है, तब से दांतों में सड़न की समस्याएं कम हुई हैं. जहां-जहां भी टूथपेस्ट में फ्लोराइड का इस्तेमाल होता है, वहां-वहां ऐसा दिखा है."

दरअसल, अच्छे से ब्रश करना केवल दुर्गंध, पीले दांत और दांतों में सड़न से नहीं बचाता है, बल्कि यह टाइप 2 डायबिटिज़ और दिल की बीमारियों से बचाने में भी मदद करता है.

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