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खाने में इस्तेमाल होने वाला तेल आपकी सेहत पर क्या असर डालता है?
- Author, साजिद हुसैन
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
एक वक्त था जब मोटापे को सिर्फ पश्चिमी देशों की समस्या माना जाता था लेकिन हाल के सालों में ये भारत जैसे मध्यम आय वाले देशों की भी समस्या बन गया है.
इससे निपटने के लिए भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोटापे के ख़िलाफ़ एक देशव्यापी अभियान शुरुआत करने की बात कही है.
उन्होंने 23 फरवरी को अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में लोगों से खाने के तेल में 10 प्रतिशत की कमी लाने की अपील की है. इसे मोटापा कम करने की दिशा में अहम कदम बताया है.
इस कार्यक्रम में उन्होंने यह भी कहा, "एक स्वस्थ देश बनने के लिए हमें मोटापे की समस्या से निपटना ही होगा. अधिक वज़न और मोटापा कई तरह की परेशानियों और बीमारियों को जन्म देता है".
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'मन की बात' कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा, "एक स्टडी के मुताबिक, आज हर आठ में से एक व्यक्ति मोटापे की समस्या से परेशान है. बीते सालों में मोटापे के मामले दोगुने हो गए है"
उन्होंने कहा, "बच्चों में भी मोटापे की समस्या चार गुना बढ़ गई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े बताते हैं कि 2022 में दुनियाभर में करीब 250 करोड़ लोग ओवरवेट थे यानी उनमें जरूरत से भी ज़्यादा वज़न था".
साल 2024 में द लैंसेट ने एक शोध किया. जिसके मुताबिक, देश में पांच से उन्नीस साल की आयु के 1 करोड़ 25 लाख बच्चे 2022 में काफी ओवरवेट थे.
इनमें 73 लाख लड़के थे, वहीं 52 लाख लड़कियां थी. 1990 में यह संख्या महज़ 4 लाख ही थी. बच्चों के साथ-साथ मोटापा वयस्कों के बीच भी चिंता का विषय है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में भारत में 20 वर्ष से ज़्यादा उम्र की 4.4 करोड़ महिलाएं और 2.6 करोड़ पुरुष मोटापे की समस्या से ग्रस्त थे. यह आंकड़ा 1990 में 24 लाख महिलाएं और 11 लाख पुरुष था.
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) भी भारत के इस मोटापे की समस्या के बारे में बताता है. इसके मुताबिक, भारत में 15 से 49 वर्ष की बीच के लगभग 23 प्रतिशत पुरुष और 24 प्रतिशत महिलाएं मोटापे की समस्या का सामना कर रही हैं.
वहीं 2015-16 में 20.6 प्रतिशत महिलाएं और 18.9 प्रतिशत पुरुष इस समस्या से परेशान थे.
जब हम मोटापे को बढ़ाने वाले कारणों की बात करते हैं, तब जंक फूड और सुस्त लाइफस्टाइल की बहुत आलोचना की जाती है. लेकिन मोटापे को बढ़ाने में हमारे दिन-भर में इस्तेमाल किए जाने वाले एडिबल ऑयल की भूमिका को नज़रअंदाज किया जाता है.
ऑल इंडिया एसोसिएशन फॉर एडवांसिंग रिसर्च एंड ओबेस्टी के अध्यक्ष डॉ महेंद्र नरवारिया कहते हैं, "हमारे भारतीय खान-पान में कार्बोहाइड्रेट्स और ऑयल ज़्यादा मात्रा में होता है. किसी भी खाने को स्वादिष्ट बनाने के लिए ऑयल और घी जैसी चीज़ों का इस्तेमाल किया जाता है. इसके कारण हमारे शरीर में फैट की मात्रा बढ़ जाती है. इस फैट का हम इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं क्योंकि हम उतना व्यायाम करते नहीं है"
"वहीं हमारे खाने में कार्बोहाइड्रेट भी होता है, जो हमारे शरीर में जाने के बाद फैट में बदल जाता है. साथ ही फैट भी शरीर में जाने के बाद फैट में डिपोज़िट हो जाता है. जिसके कारण मोटापा बढ़ने का ख़तरा ज़्यादा रहता है".
वह कहते हैं, "हमारे शरीर की बनावट में फैट की मात्रा हमेशा ज़्यादा रहती है. अगर कोई आदमी पतला भी दिखाई देता है, तो उसके शरीर में भी 30 से 40 प्रतिशत की मात्रा में फैट होता है, जो कि बेहद ज़्यादा है. वहीं एक एथलीट और स्पोर्ट्सपर्सन के शरीर में फैट की मात्रा करीब 7 से 8 प्रतिशत तक होती है."
"हमारे शरीर में फैट का प्रतिशत अगर ज़्यादा होता है, तो इसकी वजह से हमारा मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाएगा. जिससे हमारा वज़न बढ़ेगा और हमारा मोटापा बढ़ता ही चला जाएगा".
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, नई दिल्ली में चीफ़ डाइटिशियन डॉक्टर परमीत कौर कहती हैं, "अगर हम ऑयल का सेवन निर्धारित मात्रा से ज़्यादा करते हैं, तो हमारे शरीर का मेटाबॉलिज्म स्लो हो सकता है. इससे हमारे शरीर में फैट की मात्रा बढ़ने लगेगी और हमारा मोटापा बढ़ता जाएगा. साथ ही, इससे केवल हमें एक्सट्रा कैलोरी मिलेगी, फाइबर, ज़रूरी विटामिन और मिनरल्स नहीं मिल पाएंगे"
मुंबई के वॉकहार्ट हॉस्पिटल में बैरिएट्रिक सर्जन, डॉक्टर रमन गोयल कहते हैं, "तेल में आमतौर पर फैट की मात्रा ज़्यादा होती है. हमारे शरीर को सबसे ज़्यादा कैलोरी फैट से ही मिलती है. प्रोटीन से अगर चार कैलोरी मिलती है, तो फैट से 9 कैलोरी मिलती है. इसलिए हम जो भी चीज़ ज़्यादा कैलोरी की खाते हैं, उससे मोटापा बढ़ ही सकता है और खासकर जिन लोगों में मोटापे की बीमारी है"
डॉक्टर महेंद्र नरवारिया के मुताबिक, तेल के कम इस्तेमाल से मोटापे पर नियंत्रण पाया जा सकता है. लोग एडिबल ऑयल का ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं. ज़्यादा तेल खाने से हमारे शरीर में फैट की मात्रा बढ़ती है.
डॉक्टर परमीत कौर कहती हैं, "फैट हमारे शरीर को फैट सॉल्यूबल विटामिन जैसे ए,डी,ई और के को पचाने में मदद करते हैं. इसलिए हमारे शरीर को एक निश्चित मात्रा में फैट की ज़रूरत होती है".
वह कहती हैं, "लोगों को उनकी उम्र के हिसाब से तेल का सेवन करना चाहिए. लेकिन एक ज़्यादा एक्टिव नहीं रहने वाले व्यक्ति को एक दिन में लगभग 4 से 5 चम्मच यानी 20-25 ग्राम तेल की ज़रूरत होती है. इतनी मात्रा में तेल का सेवन एक इंसान के लिए बहुत होता है".
हालांकि, मोटापा बढ़ाने में तेल ही एकमात्र कारण नहीं है. डॉ रमन गोयल कहते हैं, "मोटापे के पीछे और भी कई कारण है. हम जानते हैं कि भारत में मिठाई कितनी खाई जाती है? मिठाई से भी मोटापा बढ़ता है".
डॉक्टर परमीत कौर कहती हैं, " हमें भारत के क्षेत्रीय इलाक़ो में मिलने वाले तेल का इस्तेमाल अदल-बदल करके और कॉम्बिनेशन में करना चाहिए. जैसे कि दक्षिणी भारत में मिलने वाला तिल का तेल, राइस ब्रान ऑयल, गुजरात में मूंगफली का तेल और कई प्रदेशों में सरसों का तेल भी उपलब्ध होता है.
उनके मुताबिक, हमें डीप फ्राई होने वाले तेल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जिसका बार-बार इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा, हमें पार्शियली हाइड्रोजेनेटिड वेजिटेबल ऑयल से बनने वाली चीज़ों से भी बचना चाहिए.
इसके अलावा, तेल की गुणवत्ता भी मायने रखती है. अगर हम खाना पकाने वाले तेल को ज़्यादा गर्म करते हैं, तो यह हमारी सेहत के लिए अच्छा नहीं होता.
एफएसएसआई के मुताबिक, हमें तेल के बार-बार इस्तेमाल से बचना चाहिए. तेल के बार-बार इस्तेमाल से उसमें ट्रांस फैट्स का प्रतिशत बढ़ जाता है.
हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की वेबसाइट के मुताबिक, ट्रांस फैट्स, शरीर के लिए खराब फ़ैट है.
ट्रांस फैट्स बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल को बढ़ाते हैं और गुड कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल को कम करते हैं . इससे शरीर में सूजन हो सकती हैं और हृदय रोग, स्ट्रोक, टाइप 2 डायबिटीज़, इन्सुलिन रेज़िस्टेंस, इम्युनिटी पर असर हो सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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