एक सेक्स वर्कर की कहानी- 'मेरे पहुंचने से पहले वो ड्रग्स ले रहे थे, मुझे लगा मैं बच नहीं पाऊंगी'
- Author, हेले कॉम्पटन
- पदनाम, बीबीसी इंन्वेस्टिगेशन्स, ईस्ट मिडलैंड्स

ऐतिहासिक रूप से सेक्स वर्कर्स के ख़िलाफ़ अपराध के मामले कम ही रिपोर्ट किए जाते हैं, लेकिन अब यौन कर्मी, शोधकर्ता और एक चैरिटी इसे बदलने की कोशिश करने के लिए एक साथ आए हैं.
जब अलाना हमारे साथ इंटरव्यू के लिए आईं तो वो अपने साथ एक बैग लेकर आई थीं, उसमें लैस वाली अंडरवियर, घुटने तक की लंबाई के जूते और चमड़े का एक चाबुक रखा था.
शुरुआत में अलाना थोड़ी घबराई हुई थीं, लेकिन जब हमने उनसे उनकी नौकरी के बारे में बात करना शुरू किया, तो वह सहज होने लगीं.
अलाना उनका असली नाम नहीं है, उन्होंने ख़ुद ही अपना ये नाम रख लिया है. इस नाम के ज़रिए वो अपने काम और अपनी निजी ज़िंदगी को अलग-अलग रखती हैं. अपनी निजी ज़िंदगी में वो एक मां हैं.
उन्होंने कहा, "दिन ढल जाने के बाद हम अपना मेकअप उतार देते हैं और ख़रीदारी करने या बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए निकल जाते हैं."
यूनाइटेड किंगडम के डर्बीशायर की अलाना ने ब्रितानी सरकार की स्वास्थ्य सेवा एनएचएस और मनोरंजन इंडस्ट्री में नौकरियां की हैं. लेकिन अब वो एक सेक्स वर्कर के रूप में काम करती हैं और यही उनकी कमाई का ज़रिया है.
हालांकि अलाना स्वीकार करती हैं कि इस तरह का काम उन्हें और उन जैसी दूसरी महिलाओं को असुरक्षित महसूस करा सकता है, ख़ासकर उन सेक्सकर्मियों को जिसके पास समान विकल्प नहीं होते.
अलाना मानती हैं कि उनका नसीब अच्छा है क्योंकि बीते तीन सालों में उनपर केवल एक बार हमला हुआ है. उस वक्त एक ग्राहक ने उनकी सहमति के बिना उनके शरीर में नशीला पदार्थ डालने की कोशिश की थी.

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हादसे के दिन क्या हुआ?

उन्हें जो बुकिंग मिली थी वो उनके घर जाने के रास्ते पर थी इसलिए आसान थी. हालांकि अलाना ने कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा था कि कुछ ठीक नहीं है.
अलाना ने कहा कि वो सामान्य दिखने वाला अधेड़ उम्र का एक व्यक्ति था जो उनके पहुंचने से पहले ही नशीले पदार्थ ले रहा था.
उन्होंने कहा, "वो अधिक आक्रामक हो रहे थे. उन्होंने ज़बर्दस्ती मेरा सिर पकड़ कर खुद की तरफ खींच लिया."
अलाना ने बताया कि वो व्यक्ति सेक्स के लिए आक्रामक हो रहे थे, लेकिन अलाना के अनुसार उस दिन वो बुकिंग की पूरी अवधि यानी एक घंटे तक वहां रुकी रहीं ताकि उस व्यक्ति को गुस्सा न आए.
वो कहती हैं, "यह ऐसी स्थिति नहीं थी, जहां से उनके पास सुरक्षित निकलने का कोई रास्ता था."
इस हमले के बाद अलाना को इलाज कराने की ज़रूरत पड़ गई, लेकिन सेक्स कर्मियों से जुड़े अन्य अपराधों की तरह अलाना ने इसकी शिकायत पुलिस में नहीं दर्ज कराई.
वो कहती हैं, "मुझे नहीं लगता कि पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद कोई कार्रवाई होती."
अलाना कहती हैं कि वो जो काम करती हैं उसके साथ बदनामी जुड़ी हुई है और इस घटना के बारे में जानने पर लोग इस स्थिति में आने के लिए उन्हें ही ज़िम्मेदार ठहराएंगे.
अलाना कहती हैं कि उस दिन की घटना का असर उनपर लंबे वक्त तक रहा. वो कहती हैं, "मुझे लगा जैसे मुझसे कुछ छीन लिया गया है."
ये कहानी अकेले अलाना की नहीं है.
जोखिम भरी ज़िंदगी
शोध से पता चलता है कि आम लोगों की तुलना में सेक्स वर्कर्स के ख़िलाफ़ अपराध, ख़ासकर हिंसक अपराध करने की संभावना अधिक होती है.
2016 में सेक्स वर्कर्स के साथ ऑनलाइन किए एक सर्वे के अनुसार 47 फ़ीसदी कर्मियों ने बताया कि उन्होंने किसी न किसी प्रकार के अपराध का अनुभव किया है. उन अपराधों में उत्पीड़न, बलात्कार, शारीरिक हमले, डकैती और अगवा करने की कोशिशें शामिल हैं.
साल 1999 में 'रिस्की बिज़नेस: हेल्थ एंड सेफ्टी इन सेक्स इंडस्ट्री' नाम से एक स्टडी हुई थी. इसमें नौ साल की अवधि में 402 सेक्स वर्कर्स का सर्वे किया गया. शोध में ये पाया गया कि सेक्स वर्कर्स की मृत्यु दर उसी उम्र की दूसरी महिलाओं की तुलना में 12 गुना अधिक थी.
अलाना कहती हैं, "हमारे पेशे को कलंक की तरह देखा जाता है और इस वजह से हम हिंसा का शिकार होते हैं."
हालांकि, अब अलाना इन स्थितियों को बदलने की कोशिश में जुट गई हैं.
वो उन चुनिंदा सेक्स कर्मियों में से एक हैं जिन्हें सेक्स वर्कर्स की सुरक्षा में सुधार लाने के उद्देश्य से हो रहे रिसर्च से जुड़े सलाहकार पैनल में नियुक्त किया गया है.

नॉटिंघम विश्वविद्यालय एक ऐसा रिपोर्टिंग सिस्टम बनाने की कोशिश कर रहा है जिसका इस्तेमाल सेक्स वर्कर्स यौन उत्पीड़न या हिंसा के वक्त कर सकते हैं.
ये रिपोर्टिंग सिस्टम अब अपने आख़िरी चरण में है और उम्मीद की जा रही है कि इस साल के आख़िर तक पुलिस समेत दूसरी एजेंसियां इसका फायदा उठा सकेंगी.
क्रिमिनोलॉजी (अपराध विज्ञान) की सहायक प्रोफे़सर डॉ. लैरिसा सैंडी इस रिसर्च का नेतृत्व कर रही हैं.
ऑस्ट्रेलिया मूल की लैरिसा ने ऑस्ट्रेलिया में सेक्स वर्क को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की भी मांग की थी.
जर्मनी और न्यूजीलैंड जैसे देशों ने सेक्स वर्क से जुड़े नियमों में ढील दी है. हालांकि, इसके लिए उनकी आलोचना भी की गई. ये कहा गया कि इससे सेक्स पर्यटन और मानव तस्करी में बढ़ोतरी हुई है.
डॉ. लैरिसा सैंडी कहती हैं, "क़ानून लागू करना पुलिस का काम है, इसलिए अगर आप सेक्स वर्क को अपराध की श्रेणी से हटा देते हैं तो इससे सेक्स वर्कर्स को अपने ख़िलाफ़ अपराधों की रिपोर्ट करने से पहले सोचना नहीं पड़ेगा, उन्हें सुरक्षा मिल सकेगी."
वो कहती हैं कि इस तरह के अपराधों के बारे में कम शिकायत दर्ज कराने का एक कारण इससे जुड़े भ्रामक क़ानून हैं.
'लोगों के बारे में राय बनाई जाती है'

मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अनुसार, उत्तरी आयरलैंड को छोड़ दिया जाए तो यूके में पैसों के बदले सेक्स सेवाएं देना क़ानूनी है. उत्तरी आयरलैंड में सेक्स के लिए पैसों का भुगतान करना ग़ैरक़ानूनी है.
हालांकि, ब्रिटेन में यौन-संबंधी अन्य गतिविधियां ग़ैरक़ानूनी हैं, जैसे यौन सेवाओं के लिए विज्ञापन देना और वैश्यालय चलाना.
यहां की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) का कहना है कि उनका उद्देश्य सेक्स वर्कर्स को परेशान करना या उन्हें सज़ा देना नहीं है बल्कि उनके साथ ज़बरदस्ती करने वालों और उनका शोषण करने वालों को सज़ा दिलाना है.
सीपीएस का ये भी कहना है कि कई बार अपराधी जानबूझकर सेक्स वर्कर्स को निशाना बनाते हैं क्योंकि "वो ये मानते हैं कि सैक्सकर्मी अपराध की शिकायत नहीं करेंगी और अगर वो ऐसा कर भी दें तो उन्हें समर्थन नहीं मिलेगा."
हालांकि अलाना कहती हैं कि इससे सेक्स वर्करों को शर्मिंदगी महसूस होती है.
वो कहती हैं, "ज़्यादातर लोग सेक्स करते हैं, तो फिर जब लोग इसके लिए पैसे देते हैं तो उन्हें अलग नज़र से क्यों देखा जाता है?"
'सेक्सवर्क हमारे लिए नौकरी की तरह है'

जेसिका ब्रेनन नॉटिंघम में प्रॉस्टिट्यूशन आउटरीच सर्विस (पीएडब्ल्यू) चलाती हैं. वो कहती हैं, "सेक्स वर्क गै़रक़ानूनी नहीं है, लेकिन इसे आमतौर पर अनैतिक माना जाता है."
वे कहती हैं कि इस कारण से सेक्स वर्कर खुद के ख़िलाफ़ हो रहे अपराध की रिपोर्ट नहीं करते. इसके अलावा उन्हें ये डर भी होता है कि उन्हें ही सज़ा दी जाएगी और लोग उन पर भरोसा नहीं करेंगे. शिकायत दर्ज करने में वो शर्मिंदगी महसूस करते हैं.
प्रॉस्टिट्यूशन आउटरीच सर्विस 1990 से सड़क पर काम करने वाली और अन्य ऐसी महिलाओं के साथ काम कर रहा है. लेकिन अपराध के कुछ मामलों में दोषियों को सज़ा दिलाने में उन्हें दिक़्क़त का सामना करना पड़ा है.
जेसिका ब्रेनन कहती हैं, "एक सप्ताह भी ऐसा नहीं गुज़रता जब हम जिन महिलाओं और पुरुषों का समर्थन कर रहे हैं उन पर हमला न होता हो. लेकिन कोई भी मामला अदालत तक नहीं पहुंच सका है."
वो कहती हैं, "हम सेक्सवर्क को एक सामान्य काम और मेहनत वाले काम के रूप में देखते हैं. हम चाहते हैं कि हमारे ग्राहक अपने अनुभव के बारे में हमें ईमानदारी से बताएं."
अलाना इस बात से इत्तेफ़ाक रखती हैं. वो कहती हैं कि वो चाहती हैं कि समाज उन्हें एक मूल्यवान कामग़ार की तरह देखे. वो कहती हैं कि समाज को सेक्स कर्मियों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए.
वो कहती हैं, "मैं टैक्स और राष्ट्रीय बीमा का भुगतान करती हूं."
"सेक्स वर्कर्स फेंक दिए गए लोग नहीं हैं. अच्छा होगा कि उनके साथ वैसा ही व्यवहार किया जाए जैसा एक सामान्य नौकरी करने वाले के साथ किया जाता है. यही बेहतर होगा."
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