अतीक़ और अशरफ़ अहमद की हत्या मामले में क्या कहती है यूपी सरकार की रिपोर्ट - प्रेस रिव्यू

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उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अतीक़ अहमद और अशरफ़ अहमद की हत्या के बाद प्रदेश में एनटाउंटर को लेकर हुई जांच में पाया गया कि "पुलिस की तरफ से कोई ग़लती नहीं हुई थी."
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि "अतीक़ और अशरफ़ की हत्या की निष्पक्ष जांच में पुलिस ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है."
इसी साल अप्रैल में पुलिस सुरक्षा में मेडिकल जांच के लिए ले जा रहे गैंगस्टर से राजनेता बने अतीक़ अहमद और उनके भाई अशरफ़ अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
दोनों की हत्या बेहद क़रीब से गोली मार कर की गई थी जिसके बाद उन्हें गोली मारने वाले हमलावरों ने पुलिस के आगे सरेंडर कर दिया था.
अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले सहित सात मामलों में जांच को लेकर स्टेटस रिपोर्ट फ़ाइल करने को कहा था.
कोर्ट ने दो याचिकाओं में उठाए गए सवालों को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था. इनमें से एक याचिका में उत्तर प्रदेश में पुलिस एनकाउंटर में हुई हत्याओं के बारे में पूछा गया था कि क्या सरकार ने इस संबंध में कोर्ट और अलग-अलग कमिशनों के सुझावों का पालन किया है.
वकील विशाल तिवारी की याचिका में अतीक़ अहमद, अशरफ़ अहमद, अतीक़ के बेटे असद अहमद, विकास दुबे और उसके गैंग के मोहम्मद ग़ुलाम की मुठभेड़ में हत्या पर सवाल उठाए गए हैं.
वहीं दूसरी याचिका अतीक़ की बहन आयशा नूरी की है जिसमें उन्होंने अतीक़ और अशरफ़ अहमद की हत्या की जांच कोर्ट की निगरानी में कराने की गुहार लगाई गई है.
अख़बार के अनुसार उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन पर लगे सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि कोर्ट के दिशानिर्देषों का पालन करते हुए सभी सात मामलों में प्रदेश सरकार ने विस्तृत जांच की है और पाया है कि पुलिस की तरफ से कोई ग़लती नहीं की गई है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने भी इस ख़बर को छापा है. अख़बार लिखता है कि विकास दुबे और उसके गैंग के सदस्यों की एनकाउंटर में मौत के बारे में यूपी सरकार ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में कहा है कि, "जस्टिस बीएस चौहान कमिशन की रिपोर्ट में इन मौतों में सरकार के कदमों में कोई ग़लती नहीं पाई गई थी, इन मामलों में क्रिमिनल जांच, न्यायिक जांच और मानवाधिकार कमिशन की जांच में भी राज्य सरकार की कोई ग़लती नहीं पाई गई है."
"इन मामलों में जो फ़ाइनल रिपोर्ट दाखिल की गई उनमें पाया गया कि पुलिस की कोई ग़लती नहीं थी, और ये रिपोर्ट कोर्ट ने भी स्वीकार की है. इन्हें लेकर न तो मारे गए व्यक्ति के परिजनों ने कोई आपत्ति दर्ज कराई और न ही किसी तीसरे पक्ष ने. याचिकाकर्ता जनहित के नाम पर बार-बार वही मुद्दा उठा रहे हैं और कोर्ट का वक्त बर्बाद कर रहे हैं."
असद अहमद और मोहम्मद ग़ुलाम की मौत के मामले में न्यायिक जांच में पुलिस की ग़लती नहीं पाई गई, इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस राजीव लोचन महरोत्रा की अध्यक्षता में दो सदस्यीय न्यायिक कमीशन की जांच हो रही है जो अभी ख़त्म नहीं हुई है.
अतीक़ अहमद और अशरफ अहमद की हत्या के मामले में एडिशनल डीसीपी की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की विशेष जांच टीम बनाई गई थी. इसकी निगरानी प्रयागराज ज़ोन के एडीजी की अध्यक्षता में तीन सदस्य समिति कर रही थी.

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राज्य सरकार ने कहा कि इस मामले में जांच के दौरान तीन लोगों को गिरफ्तार कर उनके ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर की गई है, ये जांच अभी जारी है और कुछ सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं.
इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस दिलीप बाबासाहेब भोंसले की अध्यक्षता में पांच सदस्यों की एक समिति भी इस मामले की निगरानी कर रही है.
राज्य सरकार ने कहा, "इस मामले की निष्पक्ष जांच में पुलिस कोई कसर नहीं छोड़ रही है. याचिका में पुलिस पर जो आरोप लगाए गए हैं वो बेबुनियाद और पूरी तरह से ग़लत हैं."
नवभारत टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार यूपी सरकार ने स्टेटस रिपोर्ट में कहा है कि "2017 के बाद से हुई सभी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए लोगों से संबंधित जानकारी और जांच, पूछताछ में सामने आई बातों को हर महीने एकत्र किया जाता है और पुलिस के बड़े अधिकारी उनकी पड़ताल करते हैं."

2000 रुपये के नोटों को लेकर आरबीआई का नया निर्देश
भारतीय रिज़र्ब बैंक ने 2000 रुपये के नोट बदलने की तारीख़ बढ़ा कर 7 अक्तूबर कर दी है. इससे पहले बैंक ने कहा था कि लोग 30 सितंबर तक 2000 रुपये के नोट बदल सकते हैं.
अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार 19 मई को आरबीआई ने 2000 के नोट के बैंक नोटों को वापस लेने की घोषणा की थी. बैंक ने इसके लिए 30 सितंबर तक का वक्त निर्धारित किया था और कहा था कि इसके 19 प्रांतीय दफ्तरों में नोट बदले जा सकते हैं.
आरबीआई के आंकड़ों के हवाले से अख़बार लिखता है कि 19 मई तक 3.56 लोख करोड़ मूल्य के 2000 रुपये के नोट बाज़ार में चलन में थे. 29 सितंबर तक 3.42 लाख करोड़ मूल्य के 2000 रुपये के नोट, यानी 96 फ़ीसदी बैंक में वापस जमा कर दिए गए हैं और 14 हज़ार करोड़ मूल्य के 2000 रुपये के नोट बाज़ार में हैं.

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'मिज़ोरम में म्यांमार से सटी सीमा की हो बाड़बंदी'
मणिपुर से बीजेपी विधायक राजकुमार इमो सिंह ने कहा कि म्यांमार से सटी भारत की सीमा पर बाड़ लगाई जानी चाहिए.
द इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार उन्होंने कहा है कि मणिपुर की तरह मिज़ोरम में पड़ने वाली भारत-म्यांमार सीमा की बाड़बंदी की जानी चाहिए ताकि म्यांमार से अवैध रूप से भारत आने वालों को रोका जा सके.
इमो सिंह मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के दामाद हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "मणिपुर में तनाव के मुख्य कारणों में से एक है म्यांमार से अवैध प्रवासियों के भारत की सीमा में आने का मुद्दा."
"मिज़ोरम ने कहा है कि वह क्षेत्र में अवैध प्रवासियों के ख़िलाफ़ सुरक्षा के लिए गृह मंत्रालय के दिए निर्देश को नज़रअंदाज़ करेगी, इससे देश के मूल निवासियों की रक्षा में मदद होगी. पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में इसके दूरगामी परिणाम होंगे, क्योंकि इससे पूरे क्षेत्र की जनसांख्यिकी में बदलाव हो सकता है."
"हम प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से गुज़ारिश करते हैं कि मिज़ोरम में पड़ने वाली भारत-म्यांमार की सीमा पर उसी तरह बाड़ लगाई जाए, जैसे मणिपुर की तरफ लगाई जाने वाली है. पूर्वोत्तर के सभी राज्यों के सीएम से भी मेरा अनुरोध है कि वो इस मामले को गंभीरता से लें और एकजुट होकर काम करें. मणिपुर पहले ही तनाव के दौर से गुज़र रहा है, इस पूरे क्षेत्र को बचाने के लिए हम सभी को साथ आना पड़ेगा."
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भारत और म्यांमार के बीच सीमा का क़रीब 400 किलोमीटर का हिस्सा मणिपुर में पड़ता है जबकि 510 मिज़ोरम में. दोनों मुल्कों के बीच की सीमा की बाड़बंदी नहीं की गई है.
हाल में मणिपुर के मुख्यमंत्री ने सीमा की बाड़बंदी की गुज़ारिश की थी और कहा था कि भारत और म्यांमार के बीच फ्री मूवमेन्ट रेजीम को रद्द किया जाए.
इस व्यवस्था के तहत दोनों मुल्कों के नागरिक बिना किसी दस्तावेज़ के 16 किलोमीटर तक एक दूसरे की सीमा के भीतर जा सकते हैं.
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