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खेलों का सबसे बड़ा पुरस्कार पाने वाले मनु भाकर, गुकेश डी, हरमनप्रीत सिंह और प्रवीण कुमार के बारे में जानिए
ओलंपिक में मेडल जीतने वाली मनु भाकर, शतरंज के वर्ल्ड चैंपियन गुकेश डी, भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह और पैरालंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले प्रवीण कुमार चर्चा में हैं. लेकिन, क्यों?
दरअसल, गुरुवार को भारत सरकार के युवा मामले और खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2024 की घोषणा की. इनमें इन चारों खिलाड़ियों का नाम शामिल है.
इन सभी खिलाड़ियों को 17 जनवरी, 2025 को सुबह 11 बजे राष्ट्रपति भवन में भारत के राष्ट्रपति द्वारा मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार 2024 प्रदान किया जाएगा.
यह भारत का सबसे बड़ा खेल पुरस्कार है. पिछले चार साल के दौरान खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर दिया जाता है. आज बात इन खिलाड़ियों की, जिन्हें मिलेगा यह पुरस्कार.
मनु भाकर
भारतीय निशानेबाज़ मनु भाकर पेरिस ओलंपिक 2024 में 10 मीटर एयर पिस्टल शूटिंग के महिला वर्ग के फ़ाइनल में तीसरे स्थान पर रही थीं. उन्होंने कांस्य पदक जीता था.
इसके अलावा पेरिस ओलंपिक के 10 मीटर मिक्स्ड एयर पिस्टल इवेंट में भी मनु ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था.
इससे पहले, साल 2021 में मनु भाकर ने 'बीबीसी इमर्जिंग इंडियन स्पोर्ट्सवुमेन ऑफ़ द ईयर 2020' अवॉर्ड जीता था.
'बीबीसी इंडियन स्पोर्टसवुमन ऑफ़ द ईयर' के तहत उभरती महिला खिलाड़ी का सम्मान किया जाता है.
इसका मकसद भारतीय महिला खिलाड़ियों और उनकी उपलब्धियों को सम्मानित करना, महिला खिलाड़ियों की चुनौतियों पर चर्चा करना और उनकी सुनी-अनसुनी कहानियों को दुनिया के सामने लेकर आना है.
मनु भाकर हरियाणा के झज्जर ज़िले के गोरिया गांव की रहने वाली हैं. उनकी मां स्कूल में पढ़ाती हैं, जबकि पिता मरीन इंजीनियर रहे हैं.
मनु भाकर ने भारत के लिए साल 2018 में मेक्सिको में इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन (आईएसएसफ़) में दो गोल्ड मेडल जीते थे.
पहला गोल्ड मेडल मनु भाकर ने 10 मीटर एयर पिस्टल (महिला) कैटेगरी में जीता था और दूसरा गोल्ड 10 मीटर एयर पिस्टल (मिक्स इवेंट) में जीता था.
एक दिन में शूटिंग इवेंट में दो गोल्ड मेडल जीत कर 16 साल की मनु भाकर ने नया रिकॉर्ड बनाया था. ऐसा करने वाली वो सबसे कम उम्र की महिला खिलाड़ी थीं.
गुकेश डी
भारत के गुकेश दोम्माराजू दिसंबर 2024 में शतरंज की वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए.
गुकेश डी चेन्नई के रहने वाले हैं. उनकी उम्र 18 साल है. उन्होंने सिंगापुर में खेले गए मैच में चीन के ग्रैंड मास्टर डिंग लिझेन को हरा कर वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती थी.
गुकेश ने पहली बार वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती है. वो सबसे कम उम्र के वर्ल्ड चैंपियन हैं. नॉर्वे के मैगनस कार्लसन ने 22 साल की उम्र में वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती थी.
उन्होंने साल 2015 में गोवा में शतरंज की नेशनल स्कूल चैंपियनशिप जीती थी. साल 2019 में वो ग्रैंडमास्टर बन गए. वो सबसे कम उम्र के भारतीय ग्रैंडमास्टर थे. दुनिया में वो तीसरे सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर थे.
साल 2016 में उन्होंने कॉमनवेल्थ चेस चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था. इसके बाद स्पेन में आयोजित अंडर-12 वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती थी.
साल 2021 में उन्होंने यूरोपियन चेस क्लब कप जीता, जहां उनका मुक़ाबला मैगनस कार्लसन से था.
वो दस ओपन टाइटल जीत चुके हैं, जिनमें फ्रांस में आयोजन साल 2020 का केन्स ओपन शामिल है.
इसके अलावा वो साल 2021 का नॉर्वेजियन मास्टर्स, साल 2022 में स्पेन में आयोजित साल 2022 का मेनोर्का ओपन और साल 2023 में नॉर्वे गेम्स का टाइटल जीत चुके हैं.
हरमनप्रीत सिंह
हरमनप्रीत सिंह भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हैं. वो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ्लिकरों में शुमार हैं.
हरमनप्रीत इकलौते भारतीय खिलाड़ी हैं, जो दो बार एफआईएच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बन चुके हैं.
कप्तान हरमनप्रीत के नेतृत्व में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने पेरिस 2024 ओलंपिक में कांस्य पदक जीता.
हरमनप्रीत सिंह के करियर की सफलताओं में 2020 के टोक्यो ओलंपिक में भारत को 41 साल बाद कांस्य के रूप में कोई पदक दिलाना सबसे अहम माना जाता है.
हरमनप्रीत सिंह अमृतसर के जंडियाला गुरु बस्ती गांव में किसान परिवार में जन्मे हैं. उनके ड्रैग फ्लिकर बनने की कहानी भी दिलचस्प है.
वह बचपन में अपने घर वालों के साथ खेती-बाड़ी में हाथ बंटाते थे. करीब दस साल की उम्र तक पहुंचते उन्हें खेतों पर मौजूद हेवी व्हीकल्स को चलाने का शौक लगा.
वह पिता की देखरेख में गाड़ी चलाया करते थे. इन गाड़ियों के सख्त गियर लगातार लगाने से उनके हाथों में मजबूती आती गई, जिसका इस्तेमाल उन्होंने ड्रैग फ्लिकर बनने में किया.
हरमनप्रीत जब 15 साल के हुए तो पिता ने उनको जालंधर स्थित सुरजीत हॉकी अकादमी में भर्ती करा दिया था.
इस अकादमी में कोच गगनप्रीत सिंह और सुखजीत सिंह भी पेनल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ रहे थे. उन्होंने हरमनप्रीत सिंह की ताकत का इस्तेमाल उनको बेहतर ड्रैग फ्लिकर बनाने में किया और हरमनप्रीत ने इतिहास रच दिया.
प्रवीण कुमार
प्रवीण कुमार ने पैरा-एथलेटिक्स में पेरिस 2024 पैरालंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता था.
उन्होंने पुरुषों के हाई जंप टी64 वर्ग में एशियाई रिकॉर्ड के साथ यह जीत दर्ज की थी और भारत को छठा गोल्ड मेडल जिताया था.
यह प्रवीण कुमार का दूसरा पैरालंपिक पदक था. इसके लिए उन्होंने इवेंट के फाइनल मुकाबले में 2.08 मीटर की जंप लगाई थी.
भारतीय पैरा-एथलीट प्रवीण कुमार इससे पहले टोक्यो 2020 पैरालंपिक में भारत के लिए रजत पदक जीत चुके हैं. उन्होंने उस समय 2.07 मीटर की हाई जंप लगाई थी, जो उस वक़्त एशियन रिकॉर्ड था.
प्रवीण कुमार का एक पैर जन्म से ही छोटा है. इसके बाद उन्होंने वॉलीबॉल में करियर बनाना शुरू किया था.
मगर, फिर बाद में उन्होंने हाई जंप के लिए प्रैक्टिस करना शुरू की. और जूनियर इवेंट में बाकी प्रतिस्पर्धियों को कड़ी टक्कर दी.
प्रवीण कुमार साल 2021 में टोक्यो 2020 पैरालंपिक में पदक जीतने वाले भारत के सबसे कम उम्र के पैरा-एथलीट थे. वह अपने करियर में एशियाई पैरा गेम्स में गोल्ड मेडल और वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैम्पियनशिप 2023 में कांस्य पदक जीत चुके हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.