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पेरिस ओलंपिक से भारत लौटीं पहलवान विनेश फोगाट, पोस्ट की थी भावनात्मक चिट्ठी
भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट पेरिस ओलंपिक से भारत वापस लौट चुकी हैं. दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही उनका ज़ोरदार स्वागत हुआ.
पेरिस ओलंपिक के फ़ाइनल में पहुंचकर, खेल से पहले अयोग्य करार दी गई विनेश फोगाट जब शनिवार सुबह दिल्ली एयरपोर्ट से बाहर निकलीं तो उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे.
एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही विनेश अपनी मां से लिपटकर रोने लगीं. ओलंपिक मेडल विजेता पहलवान साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया भी उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट पर मौजूद थे.
विनेश जब साक्षी मलिक के गले लगीं उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे. मीडिया के माइक बार-बार विनेश की तरफ आगे बढ़े लेकिन विनेश भावुक थीं और वो कुछ बोल नहीं सकीं. उनकी आंखों से बस आंसू ही गिरते रहे.
दिल्ली में ज़ोरदार स्वागत
विनेश फोगाट के स्वागत में कांग्रेस नेता दीपेंद्र हु्ड्डा भी दिखे. खुली मर्सडीज़ कार की छत पर विनेश फोगाट के साथ दीपेंद्र हुड्डा सबसे आगे नज़र आए.
जाट संगठनों के अलावा किसान संगठनों के कार्यकर्ता भी उनके स्वागत के लिए मौजूद रहे.
वहीं विनेश फोगाट का स्वागत करने पहुंचे बजरंग पुनिया ने कहा, "विनेश चैंपियन हैं इसीलिए उनका चैंपियन जैसा स्वागत हो रहा है. मेडल मिलना, ना मिलना भाग्य की बात है. लेकिन उन्होंने जो सड़क से पोडियम तक का सफ़र तय किया है वो पूरे देश ने देखा है."
विनेश का स्वागत करने पहुंचीं पहलवान साक्षी मलिक ने कहा, "आज बहुत बड़ा दिन है. विनेश ने जो भारत के लिए किया है, जो महिलाओं के लिए किया है वो बहतरीन है."
उन्होंने कहा, "मैं बस ये उम्मीद करती हूं कि आप लोग उसे प्यार और सम्मान देंगे. उसने एक ऐसे पहलवान को हराया है जो कभी हारी ना हो. वो हमारे लिए चैंपियन है. ये कोई राजनीतिक यात्रा नहीं है बल्कि ये एक पहलवान और चैंपियन का स्वागत है."
'महिलाओं की रक्षा के लिए विरोध'
विनेश फोगाट ने पेरिस ओलंपिक में मिली निराशा के बाद शुक्रवार को एक लंबा बयान जारी किया है.
चार पन्नों के अपने बयान में विनेश ने अपने करियर से जुड़े कई लोगों का धन्यवाद किया है.
उन्होंने लिखा "अगर हालात कुछ और होते तो मैं शायद 2032 तक कुश्ती करती रहतीं."
हाल ही में पेरिस में ख़त्म हुए ओलंपिक खेलों में विनेश फोगाट को 50 किलोग्राम महिलाओं की फ्रीस्टाइल कुश्ती फ़ाइनल में प्रतिस्पर्धा से पहले अयोग्य घोषित कर दिया गया था.
गोल्ड मेडल के मैच से पहले विनेश का वज़न 50 किलोग्राम से थोड़ा अधिक था, जिससे उन्हें ओलंपिक से बाहर कर दिया गया.
सिल्वर मेडल की मांग वाली उनकी अपील को कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन ऑफ़ स्पोर्ट्स ने बुधवार को ख़ारिज़ कर दिया था.
भारतीय कुश्ती संघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ महिला पहलवानों के आंदोलन का चेहरा रहीं विनेश फोगाट पेरिस ओलंपिक के फ़ाइनल मुक़ाबले में पहुंची थीं.
विनेश ने लिखा है, "पिछले डेढ़-दो साल में मेरे जीवन में कई मोड़ आए. ऐसा लगा जैसे जीवन हमेशा के लिए रुक गया है. हम जिस खाई में थे उससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था.
"मैं 28 मई 2023 की भारतीय झंडे के साथ अपनी तस्वीरें देखती हूं, तो यह मुझे परेशान कर देता है. पहलवानों के विरोध के दौरान मैं भारत में महिलाओं की पवित्रता, हमारे भारतीय झंडे की पवित्रता और मूल्यों की रक्षा के लिए कड़ी मेहनत कर रही थी."
पिता को किया याद
महिला पहलवान विनेश फोगाट ने अपनी चिट्ठी में अपने पिता को याद किया है. उन्होंने एक लड़की के सपने और उन सपनों से टूट जाने के दर्द को भी साझा किया है.
विनेश ने अपने करियर और अपनी लड़ाई में साथ देने के लिए अपने पति सोमवीर का भी धन्यवाद दिया है.
विनेश ने लिखा है-
- मैं एक छोटी लड़की के रूप में लंबे बाल, हाथ में मोबाइल फ़ोन दिखाना और सपनों में वो सब देखती हूँ जो आमतौर पर कोई भी युवा लड़की सपने में देखती है.
- मेरे पिता एक साधारण बस चालक थे. वो ख़ुद सड़क पर गाड़ी चलाते हुए मुझे विमान में ऊंची उड़ान भरते हुए देखना चाहते थे. मां के लिए आज़ाद होना और बच्चों का अपने पैरों पर खड़ा होते हुए देखना एक सपना था.
- मेरे पिता की मृत्यु के कुछ महीने बाद ही मां को स्टेज 3 कैंसर का पता चला था. यहां से उनके तीन बच्चों का सामना हक़ीकत से हुआ, जो अपनी अकेली मां के लिए अपना बचपन खो देने वाले थे.
- माँ हमेशा कहती थीं कि भगवान अच्छे लोगों के साथ कभी बुरा नहीं होने देंगे. मुझे इस पर उस वक़्त और भी अधिक विश्वास हुआ जब मेरी मुलाक़ात सोमवीर से हुई. सोमवीर ने अपने सहयोग से मेरे जीवन में अपनी जगह बनाई है और हर भूमिका में मेरा साथ दिया.
- अपने काम और भारतीय खेलों के प्रति डॉ दिनशॉ पारदीवाला और उनकी पूरी टीम के काम और समर्पण के लिए हमेशा आभारी हूं.
विनेश फोगाट ने अपनी चिट्ठी में लिखा है, "हमने आत्मसमर्पण नहीं किया, लेकिन घड़ी रुक गई और समय ठीक नहीं था. मैं यह नहीं जानती कि भविष्य में क्या होगा, लेकिन मुझे यकीन है कि मैं सच के लिए हमेशा लड़ना जारी रखूंगी."
"बहुत कुछ है, लेकिन इसके लिए शब्द कभी भी पर्याप्त नहीं होंगे. शायद जब समय सही लगेगा तब मैं दोबारा बोलूंगी. मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि हमने हार नहीं मानी, हमारे प्रयास नहीं रुके हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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