You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
पेरिस ओलंपिक से पहले महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोपों पर आई रिपोर्ट में क्या है?
- Author, जान्हवी मूले
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
शनिवार को पेरिस में ओलंपिक खेलों की शुरुआत से पहले ही भारतीय कुश्ती पहलवानों के साथ यौन उत्पीड़न को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई. इसके बाद भारतीय कुश्ती महासंघ एक बार फिर चर्चा में है.
एनजीओ और विश्व स्तर पर खेलों में समानता के अधिकार के लिए काम करने वाले संगठनों के एक वैश्विक समूह स्पोर्ट्स एंड राइट्स अलायंस ने 23 जुलाई 2024 को एक रिपोर्ट जारी की है.
इस समूह ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमिटी (आईओसी) से गुज़ारिश की है कि वो भारतीय कुश्ती महासंघ पर लगे आरोपों की जांच करे.
बीते साल विनेश फोगाट और साक्षी मलिक जैसी महिला पहलवान समेत कई अन्य लोगों ने इस मुद्दे पर जांच की मांग करते हुए राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर महीनों तक धरना दिया था.
उनकी मांग थी कि संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला चलाया जाए. महिला पहलवानों ने कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे.
बीबीसी और अन्य मीडिया चैनलों से बात करते बृजभूषण शरण सिंह खुद पर लगे सभी तरह के आरोपों को ख़ारिज किया है.
रिपोर्ट में क्या है?
अपनी रिपोर्ट के लिए स्पोर्ट्स एंड राइट्स अलायंस (एसआरए) ने विस्तार से बृजभूषण शरण सिंह पर आरोप लगाने वाली उन महिला पहलवानों के बयान दर्ज किए हैं, जो उनके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों में शामिल थीं.
इन महिला पहलवानों ने अध्यक्ष के तौर पर बृजभूषण शरण सिंह के कुश्ती महासंघ में 12 साल के कार्यकाल के दौरान खिलाड़ियों के साथ हुए उत्पीड़न का ब्योरा दिया है.
साल 2023 में कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पर आरोप सामने आने के बाद भारतीय खेल मंत्रालय ने इसे लेकर एक जांच पैनल भी बनाया था. लेकिन एसआरए का कहना है कि इस पैनल की रिपोर्ट को अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है. एसआरए ने इस रिपोर्ट को जल्द से जल्द सार्वजनिक किए जाने की मांग भी की है.
दिल्ली की एक अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण और महिलाओं का पीछा करने संबंधी आरोप तय किए. वहीं बृजभूषण ने इस मामले में खुद को निर्दोष बताया है. उनके ख़िलाफ़ जल्द ही मुक़दमा शुरू होने वाला है.
इस बीच भारतीय कुश्ती महासंघ को निलंबित कर दिया गया और नए चुनाव कराने के आदेश दिए गए. विरोध प्रदर्शनों के लगभग एक साल बाद चुनाव करवाए गए जिनमें संजय सिंह जीते. संजय को बृजभूषण शरण सिंह का क़रीबी माना जाता है.
ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाली भारत की एकमात्र महिला पहलवान साक्षी मलिक ने इसका विरोध किया और उन्होंने कुश्ती को अलविदा कह दिया.
एसआरए का दावा है कि ओलंपिक खेलों की सर्वोच्च संस्था अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमिटी को और अधिक काम करने की ज़रूरत है.
अलायंस ने कहा है कि कमिटी महिला पहलवानों के मामले की स्वतंत्र रूप से जांच करने में नाकाम रही, जबकि महिला पहलवानों को सड़क पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए एक साल से अधिक हो चुका है.
अब तक न तो आईओसी और न ही भारतीय कुश्ती महासंघ ने इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी है. इस रिपोर्ट में कई सिफारिशें भी की गई हैं.
रिपोर्ट में मांग की गई है कि आईओसी उन एथलीटों के लिए अपनी हॉटलाइन (हेल्पडेस्क) को मज़बूत करे जो यौन उत्पीड़न जैसे मामलों की शिकायत करना चाहते हैं.
रिपोर्ट में ये भी मांग की गई है कि ओलंपिक खेलों के आयोजन के लिए बोली लगाने से पहले भारत को एथलीटों की सुरक्षा के लिए और अधिक कोशिशें करने की ज़रूरत है. पिछले साल भारत ने औपचारिक रूप से 2036 में खेलों की मेज़बानी करने में इच्छा जताई थी.
रिपोर्ट के लिए किन-किन से की गई बात?
एसआरए, नौ एनजीओ और विश्व स्तर पर खेलों में समानता के अधिकार के लिए काम करने वाले संगठनों का एक वैश्विक समूह है. ये समूह खेलों की दुनिया में भ्रष्टाचार ख़त्म करने और कमज़ोर खिलाड़ियों के मानवाधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए काम करती है.
एसआरए ने मामले से जुड़े 18 लोगों का इंटरव्यू किया है. इनमें एथलीटों के अलावा उनके कोच, माता-पिता, चश्मदीद, पत्रकार और समर्थक शामिल हैं.
इस रिपोर्ट में बृजभूषण शरण सिंह के कार्यकाल के दौरान महिला पहलवानों के साथ हुए यौन उत्पीड़न में पैटर्न मिलने का ज़िक्र किया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है, "कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष के तौर पर बृजभूषण शरण सिंह के दुर्व्यवहार की शुरुआत दस साल पहले हुई थी, जब वह पहली बार अध्यक्ष बने थे."
"पीड़िता आम तौर पर वो युवा महिला एथलीट होती थीं जो अपने कंपीटीटिव करियर के शुरुआती दौर में हैं और कई पीड़िताओं के साथ ये दुर्व्यवहार कई सालों तक होता रहा."
रिपोर्ट में दिए गए बयानों से पता चलता है कि पहलवानों पर किस तरह हमला किया गया, कैसे उन्हें परेशान किया गया, धमकाया गया और मना करने पर कैसे उन्हें बृजभूषण शरण सिंह के बदले का सामना भी करना पड़ा.
रिपोर्ट के अनुसार, "महिला खिलाड़ियों के साथ यौन उत्पीड़न कुश्ती महासंघ के दफ्तर में, भारत और दुनियाभर में आयोजित प्रतियोगिताओं के दौरान और ट्रेनिंग सेशन्स के दौरान हुआ. उत्पीड़न की इन घटनाओं को खेल जगत से जुड़े कई लोगों ने देखा और जाना, जिनमें खिलाड़ियों के कोच, उनके ट्रेनर और कुश्ती महासंघ के अधिकारी भी शामिल हैं."
पेरिस ओलंपिक से जुड़ी और कहानियां यहां पढ़िए:
जांच को लेकर चिंता
महिला पहलवानों के बृजभूषण पर आरोप लगाने के बाद मामले की जांच के लिए एक कमिटी बनाई गई.
लेकिन एसआरए की रिपोर्ट के अनुसार खिलाड़ियों का मानना है कि बृजभूषण पर लगाए गए आरोपों को लेकर कमिटी को "शक़" था. इस मामले में कमिटी केवल बयान नहीं सुन रही थी बल्कि उसने घटना के ऑडियो और वीडियो सबूत भी मांगे.
जांच कमिटी ने अप्रैल 2023 तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी, लेकिन भारत सरकार ने अब तक इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है.
रिपोर्ट के अनुसार "कमिटी ने बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ किसी तरह के कार्रवाई की सिफ़ारिश नहीं की, हालांकि कमिटी ने पाया कि कुश्ती महासंघ ने कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के अनुसार महासंघ में शिकायतों की सुनवाई के लिए कोई इन्टर्नल कमिटी नहीं बनाई थी."
रिपोर्ट में भारत के खेल एवं युवा मंत्रालय से कहा गया कि वो कमिटी की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करे.
आख़िर में भारतीय कुश्ती महासंघ के चुनाव और महिला पहलवानों के इसका विरोध करने के बाद खेल मंत्रालय ने कुश्ती महासंघ के नए अध्यक्ष संजय सिंह को निलंबित कर दिया.
आईओसी और यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने खिलाड़ियों को किया निराश
मई 2023 में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमिटी (आईओसी) ने महिला पहलवानों के समर्थन में एक बयान जारी किया. कमिटी ने पहलवानों पर पुलिस के हमले और उन्हें हिरासत में लेने की निंदा की.
लेकिन एसआरए की रिपोर्ट में कहा गया है कि आईओसी ने ज़्यादा कुछ नहीं किया.
रिपोर्ट के अनुसार, "जून 2023 में एसआरए ने सार्वजनिक रूप से आईओसी से महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न की शिकायतों की सही मायने में स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने की अपील की. इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक आईओसी ने ऐसा नहीं किया है."
एसआरए को दिए अपने साक्षात्कार में एथलीटों ने ज़िक्र किया कि वो खुद को यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग से "धोखा खाया हुआ" महसूस करते हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें "उम्मीद थी कि वो खुद मामले की जांच करेंगे और भारतीय कुश्ती महासंघ को ज़िम्मेदार ठहराएंगे."
महिला पहलवानों के बृजभूषण शरण सिंह पर आरोप लगाने के बाद यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने उनकी आलोचना की और चुनाव कराने में देरी के लिए भारतीय कुश्ती महासंघ को निलंबित कर दिया.
लेकिन नए अध्यक्ष संजय सिंह के नेतृत्व में बनी कुश्ती महासंघ की टीम को बृजभूषण का समर्थन मिलने से जुड़े पहलवानों के आरोप के बाद भी, 2024 में चुनावों के बाद बनी महासंघ की टीम को यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने स्वीकार कर लिया.
एथलीटों के लिए हेल्पलाइन
स्पोर्ट्स एंड राइट्स अलायंस ने अपनी रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमिटी, यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग और भारत सरकार के लिए सिफ़ारिशें भी बताई हैं.
रिपोर्ट ने मांग की है कि ओलंपिक खिलाड़ियों के लिए उत्पीड़न के मामलों की शिकायत के लिए मौजूद हॉटलाइन में बदलाव किए जाएं.
एसआरए का कहना है कि खिलाड़ी को एक सुरक्षित जगह दी जानी चाहिए ताकि वो शारीरिक, यौन या मानसिक हिंसा की शिकायत बेख़ौफ कर सकें. ख़ास कर तब जब राष्ट्रीय संस्थाएं इन मामलों में प्रभावी कार्रवाई करने में संकोच कर रही हों या न कर पाएं, या फिर जब मामला हितों के टकराव का हो.
डॉक्टर पयोशनी मित्रा ह्यूमन्स ऑफ़ स्पोर्ट्स की कार्यकारी निदेशिका हैं. वह इस रिपोर्ट की मुख्य शोधकर्ता भी हैं.
वह कहती हैं, "एथलीटों को एक हॉटलाइन चाहिए जो उनकी भलाई को प्राथमिकता दे. शिकायतों के लिए आईओसी मौजूदा प्रक्रिया में बेस्ट प्रैक्टिस शामिल करने में नाकाम रहा है. कभी-कभी वो खिलाड़ियों को वापस राष्ट्रीय संस्थान के पास ही भेज देता है, जिससे खिलाड़ियों के ख़िलाफ और उत्पीड़न होने और उनसे बदला लेने की आशंका बढ़ जाती है."
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में रीजनल स्तर पर एक 'सेफ़गार्डिंग हब' यानी सुरक्षा केंद्र बनाया जाए जो पीड़ितों को इस तरह के मामलों में 'स्वतंत्र रूप से मनोवैज्ञानिक, क़ानूनी और अन्य तरह की मदद के लिए सलाह दे और उनका मार्गदर्शन करे.'
रिपोर्ट में कहा गया है कि आईओसी को अपनी तरफ़ से ओलंपिक खेलों के आयोजन की गुज़ारिश करने वाले मुल्कों में खिलाड़ियों के मानवाधिकारों और सुरक्षा को लेकर जांच करनी चाहिए.
भारत की सड़कों पर महिला पहलवानों का विरोध प्रदर्शन महिला हक़ों के लिए चलाए गए 'मी टू मूवमेन्ट' जैसा था, जिसने भारतीय खेलों में यौन उत्पीड़न और भेदभाव की समस्या पर पड़ा पर्दा हटा दिया.
इसके एक साल बाद पांच भारतीय खिलाड़ी ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. इनमें एक हैं विनेश फोगाट, जिन्हें सालभर पहले दिल्ली की सड़कों पर न्याय के लिए आवाज़ उठाते देखा गया था.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)