बाढ़ पर राजनीति को लेकर दिल्ली के मंत्री का आरोप, 'हम लड़ नहीं रहे, हमें पीटा जा रहा है'

- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दिल्ली के जल संसाधन और बाढ़ नियंत्रण मंत्री सौरभ भारद्वाज ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि हरियाणा की भाजपा सरकार ने साज़िश के तहत दिल्ली को बाढ़ के पानी में डुबोया है.
सौरभ भारद्वाज और आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने बीजेपी पर यमुना में पानी छोड़कर ‘दिल्ली के लोगों को परेशान’ करने के आरोप लगाए हैं.
दूसरी तरफ केंद्र और हरियाणा में सरकार चला रही बीजेपी ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी काम करने के बजाए बहाने बना रही है. पार्टी ने सौरभ भारद्वाज पर भी निशाना साधा है.
दिल्ली में 1978 के बाद से यमुना का जलस्तर उच्चतम स्तर पर है. यमुना के आसपास बने कई इलाक़ों में बाढ़ की स्थिति है और हज़ारों लोग सड़कों पर रहने के लिए मजबूर हैं.
यमुना ने कई सालों बाद लाल किले की दहलीज़ को छुआ है और उन इलाक़ों को अपने आगोश में ले लिया है, जहां से कभी उसका पानी गुज़रता था और जहां अब इमारतें, कॉलोनियां और अन्य निर्माण हैं.
बीबीसी ने दिल्ली में बाढ़ के हालात पर सौरभ भारद्वाज से बात की.

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केंद्र के साथ मिलकर काम क्यों नहीं करती दिल्ली सरकार?
दिल्ली के आम आदमी पार्टी कार्यालय से क़रीब दो किलोमीटर दूर स्थित दिल्ली सचिवालय पहुंचने के लिए हमें 20 किलोमीटर से अधिक का सफ़र करना पड़ा, क्योंकि पानी भरे होने की वजह से यहां सीधे पहुंचने वाले रास्ते बंद थे.
सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली के ऐसे हालात के लिए बीजेपी शासित हरियाणा को ज़िम्मेदार बताया. पार्टी के कई अन्य नेता भी इसी तरह के बयान लगातार दे रहे हैं.
लेकिन क्या प्राकृतिक आपदा के इस समय में दिल्ली सरकार लोगों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम नहीं कर सकती?
इस सवाल के जवाब में सौरभ भारद्वाज पिछले कुछ दिनों की बारिश और हाल के दशकों में दिल्ली में यमुना के जलस्तर का हवाला देते हुए कहते हैं, “8 जुलाई को दिल्ली में 153 एमएम बारिश हुई, फिर 9 जुलाई को थोड़ी बारिश हुई. लेकिन इसके अगले छह दिनों में दिल्ली में बारिश नहीं हुई है. लेकिन पिछले चार-पांच दिनों से दिल्ली में यमुना का स्तर लगातार बढ़ा है."
"ये मामूली बढ़ोतरी नहीं है बल्कि यमुना ख़तरे के निशान को पार कर गई है. 1978 की विनाशकारी बाढ़ के समय के जलस्तर को भी यमुना पार कर गई है. 208.60 मीटर तक यमुना पहुंची. जब दिल्ली में बारिश नहीं हुई तो इतना पानी कहां से आया?”
बीजेपी सरकार पर आरोप लगाते हुए भारद्वाज कहते हैं, “पिछले 43 साल में यमुना में इतना पानी नहीं आया जितना इस बार आया है. ये पानी ग़लती से नहीं छोड़ा गया है. उन्हें पता था कि जितना पानी वो छोड़ रहे हैं उससे दिल्ली में बाढ़ आयेगी.”
हरियाणा के यमुनानगर ज़िले के हथिनी कुंड बराज में यमुना का पानी ठहरता है. जब यहां से पानी छोड़ा जाता है तो दिल्ली में यमुना उफ़न जाती है. ऐसा हर साल होता है.
क्या इस बार दिल्ली को इस पानी को छोड़े जाने के बारे में जानकारी नहीं दी गई, इस सवाल पर भारद्वाज कहते हैं, “दिल्ली सरकार को बताया गया कि हम पानी छोड़ रहे हैं, लेकिन ये नहीं बताया गया कि जलस्तर 208 मीटर को पार कर जाएगा. हमें पहले बताया गया कि 205 मीटर तक रहेगा, फिर तीन घंटे बाद कहा गया कि 206 मीटर हो जाएगा. हमें सटीक जानकारी नहीं दी गई. तीन घंटे में किसी राज्य में क्या तैयारी हो सकती है? इसलिए ही ये पानी छोड़ा जाना एक षडयंत्र है.”

'दिल्ली को डुबो दिया गया'
भारद्वाज कहते हैं, “हथिनी कुंड बैराज पर दो नहरें भी हैं. एक पूर्व में और एक पश्चिम में. 9 जुलाई से पूर्वी नहर में पानी इसलिए नहीं छोड़ा कि कहीं यूपी और हरियाणा में बाढ़ न आ जाए. लेकिन सारा पानी दिल्ली की तरफ़ छोड़कर दिल्ली को डुबो दिया. जब हमने ये मुद्दा उठाया तो पूर्वी नहर में भी पानी छोड़ दिया गया और अब दिल्ली में जलस्तर गिर रहा है. सवाल ये है कि जो नहर पांच दिन से सूखी थी अब उसमें पानी क्यों छोड़ा गया?”
दिल्ली में हज़ारों लोग बाढ़ के पानी में फंसे हैं. लाखों लोगों का काम और दैनिक जीवन बाढ़ के हालात की वजह से प्रभावित हुआ है. लेकिन ऐसे समय में भी दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार के मंत्री और भाजपा के नेता एक दूसरे पर बयानबाज़ी कर रहे हैं.
क्या इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाए अगर दोनों सरकारें मिलकर काम करती, तों लोगों के लिए हालात कुछ बेहतर नहीं हो जाते?
इस सवाल पर सौरभ भारद्वाज कहते हैं, “दिल्ली सराकर को बदनाम करने के लिए दिल्ली के लोगों को परेशान करने की साज़िश रची जाती है, इसमें हमारा क्या दोष है. हमें बीच चौराहे पर पीटा भी जा रहा है और फिर कहते हैं कि आप लड़ क्यों रहे थे. हम लड़ कहां रहे हैं, हम तो इनसे पिट रहे हैं. दिल्ली के लोगों को ज़बरदस्ती परेशान किया जा रहा है.”
यमुना में पानी बढ़ जाने की वजह से दिल्ली का वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट भी बंद है और कई इलाक़ों में पीने के पानी की क़िल्लत है. दिल्ली के अस्पतालों में पानी की आपूर्ति न होने की वजह से उनका कामकाज और सामान्य ऑपरेशन भी प्रभावित हुआ है.
यमुना को दिल्ली की लाइफ़लाइन माना जाता है. लेकिन हाल के दशकों में यमुना में प्रदूषण और मानवीय गतिविधियां और निर्माण बढ़े हैं.
क्या दिल्ली सरकार मौजूदा हालात से सबक लेगी और यमुना में अतिक्रमण रोकने के लिए ठोस क़दम उठाएगी?
इस सवाल पर भारद्वाज कहते हैं, “दिल्ली के कचरे और नालों के पानी को यमुना में जाने से रोकना है. दिल्ली में 1,700 कॉलोनी ऐसी हैं, जहां का कचरा सीधे यमुना में जाता है. लगभग हर कॉलोनी में सीवेज ट्रीटमेंट की व्यवस्था की जा रही है. सीवेज ट्रीटमेंट की क्षमता को अगले छह महीनों में दोगुना कर लिया जाएगा. यमुना में औद्योगिक कचरे को फेंके जाने से रोकने के लिए भी काम किया जा रहा है. हम यमुना को बचाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं.”

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बांध क्यों नहीं बनाए?
यमुना जब अपने प्राकृतिक रूप में आई तो यमुना के दामन में आ रहे कई हज़ार लोगों को सड़क पर आना पड़ा. इनमें से अधिकतर यूपी और अन्य राज्यों से आये हुए प्रवासी मज़दूर हैं जो यमुना की ज़मीन पर खेती करते हैं. दिल्ली विकास प्राधिकरण पहले से ही इन लोगों को यमुना के फ्लड-प्लेन से बाहर निकालने की कोशिशें कर रहा है.
अब जब यमुना ने स्वयं इन लोगों को बाहर निकाल दिया है तो क्या दिल्ली सरकार इन्हें फिर से यमुना में बसने से रोकेगी?
इस सवाल पर भारद्वाज कहते हैं, “फ्लड-प्लेन को पुनर्जीवित करना हर सरकार की प्राथमिकता है. सरकार की ज़िम्मेदारी इन लोगों को उजाड़े बिना इन्हें विस्थापित करना भी है. जब तक इनके लिए ज़मीन और मकान की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक ये अमानवीय होगा. इनके रोज़गार को बचाना भी सरकार की ज़िम्मेदारी है. सरकार इन्हें सीधे इस ज़मीन से नहीं उखाड़ सकती. जब तक इनके बसने की व्यवस्था नहीं होती, तब तक इन्हें उजाड़ना संतुलित बिठाना नहीं होगा.”
लेकिन दिल्ली सरकार के पास ऐसी ज़मीनें अब नहीं बची हैं, जहां और लोगों को बसाया जा सके. सरकार के सामने इन लोगों का पुनर्वास एक बड़ी चुनौती हो सकती है.
इसे स्वीकार करते हुए भारद्वाज कहते हैं, “ये काम केंद्र के अधीन डीडीए (दिल्ली विकास प्राधिकरण) के पास है. पिछले दिनों तुग़लकाबाद, महरौली और कई अन्य जगहों से 40 हज़ार के क़रीब लोगों को उजाड़ दिया गया. हमने यही सवाल उठाया है कि इन्हें उजाड़ तो दिया गया है, लेकिन बसाया कहां जाएगा?"
"क्या ये दिल्ली शहर के फ्लाइओवरों के नीचे बैठेंगे? इनकी जवान बेटियां कहां नहायेंगी, कहां पढ़ने जाएंगी, ये नहीं सोचा गया. यही सोचना सरकार का काम है. सरकार में ये संवेदनशीलता ज़रूर होनी चाहिए कि लोगों को कहां पुनर्वास करना है. जी-20 आ रहा है, सिर्फ़ इसलिए इन्हें उखाड़ कर नहीं फेंका जा सकता है.”
यमुना में बाढ़ के बाद एक बड़ी आबादी फ्लाईओवरों के नीचे रह रही है. ये हालात दुनिया के सामने ग्लोबल लीडर बनने की कोशिश कर रहे और दो दिन पहले ही चांद पर अंतरिक्ष मिशन चंद्रयान भेजने वाले भारत की छवि पर सवाल उठाते हैं.
क्या भारत एक राष्ट्र के रूप में संवेदनशील और संतुलित विकास कर पा रहा है, इस पर सवाल पर भारद्वाज कहते हैं, “आज चकाचौंध का ज़माना है. आप चंद्रयान दिखाइये, आप बड़े देशों के आने वाले नेताओं को सुंदर जगहों पर ले जाइए, गरीबी को छुपा लीजिए. ये चकाचौंध और फ़रेब का ज़माना है. जब आपको पता है कि हम इन ग़रीबों को छुपा ही देंगे तो फिर इन्हें अमीर करने की ज़रूरत ही क्या है?"
"पिछले नौ साल से बीजेपी सरकार है. क्या सरकार ने पर्याप्त काम किया है? सूखे में किसान परेशान रहते हैं, मॉनसून में बाढ़ आ जाती है. क्या सरकार के लिए बांध बनाना इतना बढ़ा काम है? चंद्रयान तो न भी भेजा जा सकता था, पहले सरकार हिमाचल या उत्तराखंड में बांध बनाने पर ध्यान दिया जाता, तो आज हज़ारों ज़िंदगियां बेहतर हो सकती थीं. ”
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बीजेपी का 'आप' पर बहानेबाजी करने का आरोप
हालांकि सौरभ भारद्वाज के आरोपों को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने सिरे से नकार दिया है.
पार्टी के दिल्ली स्थित कार्यालय में आयोजित एक प्रेस काॅन्फ्रेंन्स में गौरव भाटिया ने कहा, ‘‘दिल्ली में जल संकट आया है और आप के नेता और मंत्री बता रहे हैं कि गलती हरियाणा सरकार की है.’’
उन्होंने कहा, ‘‘(मंत्री) कह रहे हैं कि साढ़े तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, इससे बाढ़ आ गई. तो ये सवाल पूछा जाएगा कि 2013 और 2019 में आठ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, लेकिन बाढ़ नहीं आई.’’
उनके अनुसार, बाढ़ इसलिए आई क्योंकि दिल्ली के मुख्यमंत्री की प्राथमिकता काम करना नहीं, बल्कि केवल बहानेबाज़ी करना है.’’
उन्होंने आम आदमी पार्टी के पहले लगाए गए विभिन्न आरोपों पर तंज़ कसते हुए कहा, ‘‘प्रदूषण पर पंजाब और हरियाणा सरकार, कोविड के प्रबंधन में समस्या आने पर बिहार की जनता और उत्तर प्रदेश के मज़दूरों को ज़िम्मेदार बता दिया गया.’’
उन्होंने सौरभ भारद्वाज पर निशाना साधते हुए सवाल किया, ‘‘भारतीय सेना और एनडीआरएफ जो दिन रात जनता की सेवा में लगी है, क्या वे षड्यंत्र कर रही हैं’’
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले नौ साल में यमुना की सफ़ाई में 6800 करोड़ रुपये खर्च हुए, केजरीवाल जी आपके सिंचाई मंत्रालय ने क्या काम किया.
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