38 लाख जोड़े खाएंगे शादी का लड्डू, कितने करोड़ होंगे खर्च?

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    • Author, अमिताभ भट्टासाली
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ बांग्ला, कोलकाता

भारत में शादियों का सीज़न शुरू हो गया है. देश के विभिन्न शहरों से मिले आंकड़ों के मुताबिक अगले कुछ दिनों के दौरान कम से कम 38 लाख शादियां होंगी और इन पर कम से कम 4.74 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे.

व्यापारियों के एक राष्ट्रीय संगठन ने यह आंकड़ा जारी किया है. इनमें 50 हज़ार ऐसी शादियां भी हैं जिनमें हर शादी का खर्च एक करोड़ से ज़्यादा होगा.

इसके अलावा सात लाख शादियों का खर्च तीन-तीन लाख से कम रहेगा जबकि अन्य 50 हज़ार शादियों में 50-50 लाख रुपये खर्च होंगे.

कोलकाता का एक बंगाली परिवार इस सीजन में अपनी इकलौती लड़की की शादी में क़रीब 20 लाख रुपये खर्च कर रहा है. इसके उलट ऐसे अभिभावक भी हैं जो लड़की की शादी में एक लाख रुपए से भी कम खर्च कर रहे हैं.

व्यापारिक संगठन का कहना है कि सिर्फ़ दिल्ली में ही चार लाख शादियां होंगी और उन पर सवा लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे.

संगठन ने दिल्ली, मुंबई और कोलकाता समेत देश के 30 शहरों के व्यापारियों से आंकड़े जुटाए हैं.

बीते साल शादी के इसी सीजन में देश में हुई 32 लाख शादियों पर क़रीब पौने चार लाख करोड़ रुपये खर्च हुए थे.

शादी में रिकॉर्ड खर्च

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व्यवसायियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने बीबीसी से कहा कि केंद्र सरकार और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को कुछ महीने पहले ही बोनस और इंसेंटिव मिला है. ऐसे में लोगों के पास लड़के और लड़कियों की शादी में खर्च करने के लिए पर्याप्त रकम है.

उनका कहना है, "कोविड के कारण कुछ साल तक लोग शादियों में धूमधाम नहीं कर सके थे. इस साल लोगों ने जिस तरह निडर होकर दिवाली पर रिकॉर्ड रक़म खर्च की है, उसी तरह सर्दियों में शादी के इस सीजन में एक नया रिकॉर्ड बनेगा. दीवाली पर पूरे देश में 3.75 लाख करोड़ का कारोबार हुआ है. शादी के मौसम में यह रिकॉर्ड टूट जाएगा."

किस मद में कितना खर्च

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भारत में काफी धूमधाम से होने वाली शादी समाराहों को 'द बिग फैट इंडियन वेडिंग' कहा जाता है.

खंडेलवाल का कहना था कि भारतीय शादी की ख़रीदारी में साड़ी और लहंगा जैसी चीज़ों पर कुल खर्च का 10 फ़ीसद रक़म खर्च करते हैं. इसके अलावा आभूषणों पर 15 प्रतिशत और विद्युत उपकरणों पर पांच प्रतिशत खर्च करते हैं.

एक शादी में होने वाले कुल खर्च में से आधा ख़रीदारी पर होता है और बाकी विभिन्न सेवाओं पर. शादी समारोह के आयोजन में इन सबकी प्लानिंग के लिए अब वेडिंग प्लानर का प्रचलन भी बढ़ा है.

दिल्ली के इवेंट मैनेजर और वेडिंग प्लानर सीरत गिल ने इस सीज़न की शुरुआत में ही एक शादी समारोह की योजना तैयार की है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "शादी के दिन होने वाले खर्च में से करीब 50 प्रतिशत आयोजन स्थल के किराए और कैटरिंग पर खर्च होता है. इसके अलावा साज-सज्जा पर 15 प्रतिशत, वीडियोग्राफ़ी पर 10 प्रतिशत, शराब पर सात प्रतिशत, मनोरंजन पर पांच प्रतिशत और लड़की और परिजनों के मेकअप पर तीन प्रतिशत रक़म खर्च होती है. इसके अलावा विभिन्न सेवाओं पर 10 प्रतिशत रकम खर्च होती है. इसी में हमारे जैसे वेडिंग प्लानरों की फ़ीस भी शामिल है."

एक जैसे शादी समारोह

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ज़्यादातर लड़के और लड़कियां भारतीय सिनेमा और धारावाहिकों में आयोजित होने वाले शादी समारोहों की तर्ज पर ही अपनी शादी का समारोह आयोजित करना चाहते हैं.

यही वजह है कि अधिकतर भारतीय शादियां एक जैसी नज़र आती हैं. ज़्यादातर मामलों में यह पहचानना मुश्किल है कि कौन सा समारोह किसकी शादी का है.

वेडिंग प्लानर सीरत गिल कहते हैं, "शादी करने वाले युगल ख़ासकर लड़कियां सेलिब्रिटी और सोशल मीडिया पर ट्रेंड होने वाले शादी समारोह को देखकर ही अपनी शादी के समारोह की योजना बनाते हैं."

वे कहते हैं, "ज़्यादातर लड़कियां उस सीज़न में ट्रेंड करने वाले समारोहों की तर्ज पर ही अपनी शादी की योजना बनाती हैं. इसी वजह से देश में होने वाली तमाम शादियां लगभग एक जैसी ही नज़र आती हैं."

"कई भावी वर-वधू भव्य समारोह की ओर आकर्षित होते हैं, वहीं कोविड के बाद ऐसी शादियों की तादाद भी बढ़ रही हैं जिनमें वर-वधू ज़्यादा खर्च किए बिना एकदम व्यक्तिगत स्तर पर शादी समारोह आयोजित कर रहे हैं."

बंगालियों का शादी समारोह

बंगाली शादी

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आजकल अधिकतर बंगाली परिवारों में भी उत्तर भारतीय रीति-रिवाजों की तर्ज पर मेहंदी और संगीत शादियों का अभिन्न हिस्सा बन गया है.

शादी के आयोजन स्थल की साज-सज्जा भी ज़्यादातर मामलों में उत्तर भारत में होने वाली शादियों की तर्ज पर ही की जाती है.

लेकिन ऐसे मामलों की तादाद भी कम नहीं हैं जहां बंगाली परिवारों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के मुताबिक ही शादियां हो रही हैं.

कोलकाता की रहने वाली चैताली चटर्जी इसी पारंपरिक रीति-रिवाज के मुताबिक 28 नवंबर को अपनी लड़की की शादी करेंगी.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "हम अपने पुराने घर को बिजली की बत्तियों और झालरों से सजा रहे हैं. कई रिश्तेदार लगातार कुछ दिनों तक यहां रहेंगे. शादी और बहूभात (स्वागत समारोह) छोड़ कर रोज़ाना क़रीब दो सौ लोगों के खाने-पीने का इंतजाम किया जा रहा है."

वे कहती हैं, "हमारे घर में वेडिंग प्लानर से काम नहीं चलेगा. हम उसी तरह लड़की की शादी करेंगी जैसी अपने परिवार में देखते आए हैं. नाच-गाना भी होगा. लेकिन वह घर की लड़कियों तक ही सीमित रहेगा."

उनका यह भी कहना था कि, "मेरी लड़की ने भी सोशल मीडिया पर भव्य शादी समारोह देखा है. लेकिन वह एकदम पारंपरिक रीति-रिवाजों से ही शादी करना चाहती है. उसी तरह इसका आयोजन किया जा रहा है."

खर्च दोगुना बढ़ा

दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की शादी

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व्यावसायिक संगठन का कहना है कि लोगों के हाथों में पैसा आया है. इसलिए लड़के-लड़की की शादी में वो हाथ खोल कर खर्च कर रहे हैं.

बीबीसी ने बेहद कम बजट में शादी करने वाले एक अभिभावक से भी बात की है.

उन्होंने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, "लड़के की शादी में लगभग 70-80 हज़ार रुपये खर्च हो जाएंगे. क़रीब दस साल पहले मैंने अपने साले की शादी की थी. आप चाहें सोना कहें या दूसरी कोई चीज़, सबकी कीमत दोगुनी बढ़ गई है. लेकिन करना तो पड़ेगी ही, आखिर एक ही लड़का है."

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