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लमीन यमाल: वो स्टार फुटबॉलर जिसके लिए तीन देशों के बीच है 'मुक़ाबला'
- Author, पियर्स एडवर्ड्स
- पदनाम, बीबीसी स्पोर्ट
अफ्रीका में स्थित देश इक्वेटोरियल गिनी के फुटबॉल महासंघ का कहना है कि जिस तरह का प्रदर्शन लमीन यमाल ने यूरोपियन चैंपियनशिप में किया है, उससे उनके देश में इस खेल को बढ़ावा मिलेगा .
यूरो कप टूर्नामेंट में 16 साल के लमीन यमाल ने अपने प्रदर्शन से दुनियाभर को हैरान कर दिया है.
यमाल की मां इक्वेटोरियल गिनी की हैं और पिता मोरक्को से हैं, बावजूद इसके वो स्पेन से खेलते हैं.
वो बार्सिलोना में पैदा हुए, पले-बढ़े और ला मासिया एकेडमी में उनकी ट्रेनिंग हुई, जिसके साथ वो हाल ही में एक सत्र पूरा कर चुके हैं.
इक्वेटोरियल गिनी के फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष वेनेसियो टॉमस डॉन्ग मीचा ने बीबीसी स्पोर्ट्स से बातचीत में कहा, ''भले ही लमीन इक्वेटोरियल गिनी के लिए नहीं खेल रहे हैं लेकिन हमारे दिल के वो बहुत क़रीब हैं और हमें लगता है कि वो इक्वेटोरियल गिनी के फुटबॉल के लिए बहुत कुछ करेंगे.''
वो कहते हैं, ''हम यूरो कप में उनके बेहतरीन प्रदर्शन और एफसी बार्सिलोना के साथ शानदार सीज़न का आनंद ले रहे हैं, उनकी जड़ें हमारे देश से हैं और ये दिखाता है कि हमारा देश अच्छे फुटबॉलरों का देश है.''
कम उम्र के बावजूद अपने ऑलराउंड प्रदर्शन से वो सबको चौंका रहे हैं. फ्रांस के ख़िलाफ़ गोल और क्रोएशिया, जॉर्जिया, जर्मनी के ख़िलाफ़ गोल करने में सहायता कर यमाल ने अपनी क्षमताओं को साबित किया है.
वो रविवार को इंग्लैंड के ख़िलाफ़ फ़ाइनल खेलेंगे और एक दिन के बाद वो 17 साल के हो जाएंगे. इससे यमाल यूरो कप या वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन जाएंगे.
फ़िलहाल, पेले वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं. साल 1958 में जब फ़ाइनल मुक़ाबले में ब्राज़ील ने स्वीडन को 5-2 से हराया था, उस वक्त पेले 17 साल और 249 दिन के थे. इस मैच में पेले ने दो गोल किए थे.
वैसे, 16 साल और 361 दिन की उम्र में यमाल, यूरो कप के इतिहास के सबसे कम उम्र के गोल स्कोर करने वाले खिलाड़ी बन चुके हैं.
इसी के साथ वो बार्सिलोना के साथ लीग गेम शुरू करने वाले सबसे कम उम्र (16 साल 38 दिन) के खिलाड़ी हैं, ला लीगा में वो इतिहास के सबसे कम उम्र (16 साल 87) के स्कोरर हैं.
इन सभी रिकॉर्ड को तोड़ना किसी के लिए भी बेहद मुश्किल होगा.
'वो अपनी जड़ों को नहीं भूलेंगे'
इक्विटोरियल गिनी दो भागों में बंटा हुआ देश है. इसकी राजधानी मालाबो द्वीप वाले क्षेत्र में स्थित हैं. वहीं इसके अफ़्रीका मेनलैंड हिस्से का सबसे बड़ा शहर बाटा है, जहां पर यमाल की मां का जन्म हुआ था.
बाद में वो स्पेन चली गईं और वेटरेस के तौर पर काम करने लगीं. यहां उनकी मुलाकात यमाल के पिता से हुई, जिनसे अब वो अलग हो चुकी हैं.
यमाल की मां और उनकी नानी बार्सिलोना में रहती हैं लेकिन उनकी मां के परिवार के दूसरे सदस्य अब भी इक्विटोरियल गिनी में ही रहते हैं.
छोटे आकार का देश होने के बावजूद इक्विटोरियल गिनी, पिछले दो अफ्रीका कप ऑफ नेशंस के नॉक आउट चरण में पहुंच चुका है.
तीन साल पहले, इक्वेटोरियल गिनी के फुटबॉल फेडरेशन ने यमाल की सेवाएं हासिल करने की कोशिश की थी, लेकिन वो स्पेन से बहुत पीछे थे.
इक्वेटोरियल गिनी फीफा की रैंकिंग में 89वें स्थान पर है, वहीं स्पेन रविवार को यूरोपियन चैंपियनशिप का फ़ाइनल खेलने जा रहा है.
डॉन्ग मीचा कहते हैं, ''हमने साल 2021 में उनके परिवार से बातचीत करने की कोशिश की थी लेकिन स्पेनिश फुटबॉल महासंघ के साथ उनके रिश्ते बहुत गहरे थे.''
''लेकिन हमने कोशिश की, क्योंकि मैं परिवार का अच्छा दोस्त था, ख़ासकर उनके नाना का और पूरा परिवार बच्चे के बारे में बातें करता था.''
वो आगे कहते हैं, ''इसके बाद मोरक्को वाले भी उनके पीछे पड़े लेकिन स्पेन ने हम सबको पीछे छोड़ दिया.''
मोरक्को फुटबॉल फेडरेशन के अध्यक्ष फॉउजी लेक्जा ने बताा कि कैसे पिछले साल यमाल को हासिल करने की उनकी कोशिशें नाकाम हो गईं.
इसके बावजूद ये दोनों ही अफ्रीकी देश यमाल के दिल के बेहद क़रीब हैं. ऐसा उनके फुटबॉल बूट को देखकर भी समझा जा सकता है, जहां दोनों ही देशों के राष्ट्रीय झंडे को जगह दी गई है.
डॉन्ग मीचा कहते हैं, ''ये दिखाता है कि भले ही वो स्पेन की तरफ़ से खेल रहे हैं लेकिन वो अपनी इक्वेटोरियल गिनी की जड़ों को भूले नहीं हैं.
'इक्वेटोरियल गिनी को वैश्विक स्तर पर ला रहे हैं यमाल'
डॉन्ग मीचा का मानना है कि यमाल अपनी मां के देश को मजबूती से वैश्विक स्तर पर ला रहे हैं. वो कहते हैं कि यमाल का ये कारनामा अंसु फाती की कम उम्र में मिली सफलता की याद दिलाता है, जब उनके प्रदर्शन की वजह से उनके देश गिनी बिसाऊ के बारे में पता चला.
डॉन्ग मीचा कहते हैं, ''उनके प्रदर्शन से पता चलता है कि इक्वेटोरियल गिनी के खिलाड़ियों के खेलने का तरीका ज़्यादातर अफ़्रीकी देशों से असाधारण रूप से अलग है.''
''उनकी प्रतिभा और उनकी जड़ों को देखते हुए ऐसा लगता है कि यमाल जैसे और भी खिलाड़ी होंगे.''
यमाल इस साल सुर्खियों में रहने वाले इक्वेटोरियल गिनी मूल के स्पेन के पहले खिलाड़ी नहीं हैं. इससे पहले एमिलियो न्सू ने 34 साल की उम्र में इस साल अफ्रीका कप ऑफ नेशंस में टॉप स्कोरर बनकर चौंका दिया था.
डॉन्ग मीचा कहते हैं, ''हमें अच्छी तैयारी जारी रखनी होगी.'' वो आगे कहते हैं, ''सरकार जल्द ही फ़ुटबॉल अकादमियों में निवेश करेगी ताकि हम भविष्य में और अधिक यमाल और एमिलियो जैसे खिलाड़ियों को ढूंढ सकें.''
''मेरे आने से पहले, हमने कभी भी अपनी योग्यता के आधार पर नेशंस कप के लिए क्वालीफाई नहीं किया था. लेकिन अब दो बार एफकॉन के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं (2021 और 2023).''
''खेल के स्तर पर, हम फीफा, कंफेडरेशन ऑफ अफ्रीकन फुटबॉल और अपनी सरकार के साथ मिलकर फुटबॉल को आगे बढ़ाएंगे, जिससे इक्वेटोरियल गिनी बड़े देशों को हराने वाले छोटे देश के तौर पर मॉडल बन जाए.''
अगर डॉन्ग मीचा अपने रास्ते पर आगे बढ़ते हैं और ये छोटा मध्य अफ्रीकी देश वर्ल्ड कप के लिए कभी क्वालीफ़ाई कर पाता है तो वो वक्त भी आएगा जब यमाल एक बड़े मंच पर अपनी मां के देश का सामना कर सकते हैं.
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