चेतेश्वर पुजारा का टेस्ट करियर क्या ख़त्म हो गया है?

संजय किशोर

वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

चेतेश्वर पुजारा

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ज़िंदगी में कामयाबी सिर्फ़ आपके हुनर पर निर्भर नहीं करती. आपकी सफलता में आपकी शख़्सियत भी अहम भूमिका निभाती है.

दुनिया आपकी नहीं, आपकी छवि की दीवानी होती है. यह छवि या परसेप्शन आपकी क़ाबिलियत और व्यक्तित्व दोनों से बनती है.

शख़्सियत में एक्स फ़ैक्टर हो तो छवि एक छक्के से भी बन सकती है और न हो तो शतकीय पारी खेलने के बाद भी नहीं बन पाती.

35 साल के शांत और सौम्य चेतेश्वर अरविंद पुजारा के व्यक्तित्व और खेल ने भी उनके लिए एक छवि गढ़ी-क्लासिक क्रिकेटर की.

मगर आक्रामक और फटाफट क्रिकेट के ज़माने में उनकी छवि ही उनके लिए घातक साबित हुई. वो 13 साल तक बीते जमाने का क्रिकेट खेलते रहे जबकि रक्षात्मक और धैर्य पूर्वक बल्लेबाज़ी का समय जा चुका है.

पुजारा के बल्ले से ‘टक’ की जगह ‘टुक’ की आवाज़ आती रही और ‘टैटू’ वाले आगे निकलते चले गए. गेंद उनके बल्ले से टकरा कर हवा की बजाए घास को चूमती हुई बाउंड्री के पार जाती रही है.

चेतेश्वर

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टीम इंडिया की नई दीवार बने पुजारा

चेतेश्वर के 19 टेस्ट शतक लंबी पारियों के बाद बने जिसके क़द्रदान आज की पीढ़ी में बहुत कम हैं.

आप इसी से अंदाज़ा लगा सकते हैं कि विश्व क्रिकेट में चंद ही क्रिकेटर हैं जो सिर्फ़ टेस्ट क्रिकेट खेलते हैं. वो दुनिया की सबसे लोकप्रिय क्रिकेट लीग-आईपीएल में कभी भी पैर नहीं जमा पाए.

पिता और कोच अरविंद पुजारा रणजी ट्रॉफ़ी के पूर्व खिलाड़ी रहे हैं. शुरू से ही चेतेश्वर लंबी पारी और धीरज के लिए जाने जाते रहे हैं.

अंडर-14 में तिहरा शतक इंग्लैंड के विरुद्ध और अंडर-19 में दोहरा शतक जमाया था. आप शायद हैरान हों कि 2010 में टेस्ट कैप मिलने के बाद पुजारा ने बड़ी पारियों की बदौलत सबसे तेज़ 1000 रन बनाने का संयुक्त रिकॉर्ड अपने नाम लिख लिया. क्या आप जानते हैं कि उन्हें नंबर-3 की जगह किस खिलाड़ी ने दी.

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पहले टेस्ट में पुजारा ने छठे नंबर पर बल्लेबाज़ी की और चार रन बना पाए. दूसरी पारी में उन्हें कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने नंबर 3 पर बल्लेबाज़ी करने के लिए भेजा.

बेंगलुरु की मुश्किल पिच पर युवा पुजारा ने 72 रन बना कर भारत को सीरीज़ जिताई. हालाँकि अगले ही साल उन्हें घुटने का ऑपरेशन करवाना पड़ा. 2012 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ शतक लगाकर पुजारा ने ज़बरदस्त वापसी की.

उसी साल इंग्लैंड के गेंदबाज़ों के सामने भारतीय बल्लेबाज़ों ने घुटने टेक दिये तो पुजारा ने उसी सीरीज़ में एक शतक और एक दोहरा शतक लगाया.

चेतेश्वर पुजारा

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2013 आते-आते नंबर-3 पर पुजारा का क़ब्ज़ा हो चुका था. ऑस्ट्रेलिया के साथ घरेलू सीरीज़ में 7 पारियों में 84 की औसत से 419 रन बनाए. दक्षिण अफ़्रीका के दौरे पर जोहानिसबर्ग की मुश्किल पिच और हालात में 153 रन की पारी लाजवाब कही जा सकती है.

सामने डेल स्टेन, वेरॉन फिलेंडर, मॉर्नी मॉर्कल और जैक कैलिस जैसे गेंदबाज़ थे.

चेतेश्वर पुजारा का करियर बुलंदियों पर था. मगर 2014 में उन्हें दूसरे घुटने की सर्जरी करानी पड़ी. घुटने के दूसरे ऑपरेशन के बाद 2014 में ही वनडे करियर ख़त्म हो गया था.

पुजारा टेस्ट खिलाड़ी बन कर रह गए. बहरहाल राहुल द्रविड़ से मिली नंबर 3 की विरासत को चेतेश्वर पुजारा ने बख़ूबी आगे बढ़ाया. 103 टेस्ट में 43.60 की औसत से 7195 रन जिनमें 19 शतक और 35 अर्धशतक शामिल हैं जो उनके बेहतरीन सफ़र की कहानी बयान कर रहे हैं.

एक दिलचस्प बात है कि पुजारा का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन विराट कोहली के दौर में आया. कोहली आक्रामक ब्रांड क्रिकेट खेलते रहे हैं और टीम से भी धमाकेदार बल्लेबाज़ी की उम्मीद रखते थे. लगा कि टीम में पुजारा की जगह नहीं बचेगी. मगर 2016 से 2019 के बीच पुजारा के करियर का स्वर्णिम काल था. इस दौरान उन्होंने 11 शतक जमाए.

आपको याद है ऑस्ट्रेलिया की ज़मीन पर पहली टेस्ट सीरीज़ जीत?

2018-19 में भारत ने ऑस्ट्रेलिया में 4 टेस्ट की सीरीज़ जीती. इस ऐतिहासिक जीत में पुजारा ने 1258 गेंदें खेली और 3 शतक लगाए थे. पुजारा मैन ऑफ़ द सीरीज़ भी रहे. एक बड़ा सच है कि टेस्ट क्रिकेट में पुजारा जैसे खिलाड़ी को आज भी ख़ारिज नहीं किया जा सकता.

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पुजारा का दमखम

2018 में दक्षिण अफ़्रीका में एक दिलचस्प वाक़या हुआ.

जेहानिसबर्ग के वॉन्डरर्स पिच पर चेतेश्वर पुजारा 53वीं गेंद पर अपना खाता खोल पाए. दर्शकों ने तालियों बजाकर उन पर फब्ती भी कसी. पुजारा 179 गेंद पर 50 रन की पारी खेलकर आउट हुए. उनके धीमे खेल की जमकर आलोचना हुई. मगर भारत टेस्ट जीतने में कामयाब रहा. भारत सीरीज़ 1-2 से हार गया लेकिन क्लीन स्वीप से बच गया.

तो अब ऐसा क्या हो गया कि बीसीसीआई चयनकर्ताओं ने उन्हें वेस्टइंडीज़ दौरे पर 2 टेस्ट सीरीज़ से बाहर कर दिया है.

तात्कालिक कारण ये माना जा रहा है कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फ़ाइनल में पुजारा नाकाम रहे. ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 14 और 27 रनों की पारी खेली थी. हास्यास्पद है कि बाक़ी बल्लेबाज़ भी तो फ़्लॉप रहे. रोहित शर्मा ने 15 और 43 और विराट कोहली ने 14 और 49 रनों की पारी खेली.

वैसे चेतेश्वर पुजारा पिछले तीन साल से ख़राब दौर से गुजर रहे हैं.साल 2020 के बाद से सिर्फ़ एक शतक बना पाए हैं. पिछले 28 टेस्ट में उनका औसत 30 से कम का रहा है. 45 से 50 के बीच रहने वाला उनका करियर औसत 43.60 तक जा गिरा है. लेकिन क्या यही एक वजह है जिसके कारण उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है.

अगर आँकड़ों पर गौर फ़रमाएँ तो पिछले तीन साल में विराट कोहली और पुजारा के टेस्ट औसत में बहुत ज़्यादा फ़र्क़ नहीं है. पिछले तीन साल में सबसे ज़्यादा रन रोहित शर्मा ने बनाए हैं. 18 टेस्ट में 43.20 की औसत से तीन शतक और चार अर्धशतक सहित 1296 रन. केएल राहुल ने 11 मैचों में 30.28 की औसत से 636 रन बनाए, जिनमें दो शतक शामिल रहे.

शुभमन गिल ने 16 टेस्ट में 32 की औसत से 2 शतक सहित 921 रन. विराट कोहली ने 25 टेस्ट में की 29.69 की औसत से 1277 रन बनाए हैं जिसमें 1 शतक और 6 अर्धशतक शामिल हैं. वहीं चेतेश्वर ने 28 मैचों में 29.69 की औसत से 1455 रन बनाए हैं. इस दौरान एक शतक के अलावा 11 अर्धशतक बनाए.

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क्या भविष्य पर है नज़र

चेतेश्वर पुजारा के लिए उल्टी गिनती शुरू हो चुकी थी. इससे पहले साल 2022 के साउथ अफ्रीका दौरे के बाद भी टेस्ट टीम से बाहर कर दिया गया था. हालांकि काउंटी चैम्पियनशिप में सफलता के लिए शानदार प्रदर्शन के बाद वह फिर से भारतीय टीम में लौट आए थे. इस बार भी काउंटी में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा था. हालाँकि कई विशेषज्ञों का कहना है कि काउंटी में औसत गेंदबाज़ खेल रहे हैं.

वेस्टइंडीज़ दौरे के लिए चयनकर्ताओं में पुजारा की जगह दो युवा बल्लेबाजों को आजमाने का फ़ैसला किया है-यशस्वी जायसवाल और ऋतुराज गायकवाड़.

घरेलू क्रिकेट के अलावा दोनों ने हाल ही में आईपीएल में सबको प्रभावित किया था. यशस्वी बाएँ हाथ के बल्लेबाज़ हैं जो उनके पक्ष में जा सकता है. कहा जा रहा है कि भविष्य की टीम तैयार की जा रही है. भारत और वेस्टइंडीज़ के बीच पहला टेस्ट मैच 12 जुलाई से खेला जाएगा.

चेतेश्वर पुजारा अभी 35 साल के ही हैं. पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सुनील गावस्कर का मानना है कि बाक़ी प्लेयर्स की तरह उनके लाखों फॉलोअर्स नहीं हैं, जो उनके पक्ष में शोर मचा सकें. तो बात घुम फिर छवि पर आ जाती है, जिसकी चर्चा जिसकी चर्चा हमने शुरू में की थी. शॉर्ट लेग और नंबर 3 के इस बेहतरीन खिलाड़ी की पारी थोड़ी जल्दी ख़त्म होती हुई नज़र आ रही है.

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