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भारत बनाम इंग्लैंड: जडेजा-जायसवाल ने दिलाई टेस्ट की सबसे बड़ी जीत, सरफ़राज़ की तारीफ़ में रोहित बोले...
- Author, अभिजीत श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
राजकोट की धरती पर टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में भारत की सबसे बड़ी जीत का साक्षी बनते ही कप्तान रोहित शर्मा ने जहां सरफ़राज़ ख़ान को गले लगाया वहीं प्लेयर ऑफ़ द मैच रहे रवींद्र जडेजा ने गेंद को चूम लिया.
अपनी फिरकी के बूते इसी गेंद से अभी अभी उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में एक बार फिर पांच विकेट लेने का कारनाम किया था.
इस टेस्ट मैच के पहले ही दिन उन्होंने टीम के लिए पिच पर बल्ला भी ऐसे समय में थामा जब केवल 33 रन पर तीन टॉप बल्लेबाज़ पवेलियन लौट गए थे.
यहां से उन्होंने कप्तान रोहित शर्मा के साथ शतकीय साझेदारी निभाई तो अपना चौथा टेस्ट शतक भी जड़ा.
भारत की पहली पारी में 112 रन बनाने और दूसरी पारी में आधी इंग्लिश टीम को पवेलियन लौटाने वाले रवींद्र जडेजा को प्लेयर ऑफ़ द मैच चुना गया.
राजकोट टेस्ट में भारत ने लगातार चार दिनों तक दमदार प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड को 434 रनों के रिकॉर्ड अंतर से हराया और पांच टेस्ट मैचों की सिरीज़ में 2-1 की बढ़त ले ली है.
इंग्लैंड की टीम के सामने जीत के लिए भारत ने 557 रनों का विशाल लक्ष्य रखा था लेकिन मेहमान टीम केवल 122 रन बना कर ऑल आउट हो गई.
इंग्लैंड की ओर से दूसरी पारी में सबसे बड़ी 33 रनों की पारी मार्क वुड ने खेली. उनके अलावा कोई और बल्लेबाज़ 20 रन भी नहीं बना सके.
वहीं भारत की ओर से सबसे अधिक पांच विकेट रवींद्र जडेजा ने लिए. जडेजा के अलावा कुलदीप यादव ने दो जबकि जसप्रीत बुमराह और रविचंद्रन अश्विन ने एक-एक विकेट लिए.
शतक, विकेट का पंजा और 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' जड्डू क्या बोले?
मैच के बाद उनकी बल्लेबाज़ी पर पूछे गए एक सवाल पर जड्डू बोले, "हम मुश्किल परिस्थिति में थे और मैं केवल रोहित के साथ बड़ी साझेदारी करने की कोशिश में था. मुझे अपनी क्षमताओं पर यकीन करना था और थोड़ा अधिक सचेत रहते हुए शॉट्स खेलने थे. मैं गेंद को देर तक देख कर खेलने की कोशिश कर रहा था."
पिच के बारे में जडेजा ने कहा कि उन्हें पता था कि पिच कैसा खेलेगी. वे बोले, "इस पिच पर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए रन बनाने आसान होते हैं. तो धीरे धीरे यह स्पिन के लिए बेहतर होती जाती है."
वे बोले, "जब रोहित ने टॉस जीता तो हमें वो मिल गया जैसा कि हम चाह रहे थे. पहले बैटिंग और बाद में बॉलिंग. इस पिच पर विकेट आसानी से नहीं मिलते, इसके लिए मैदान में पसीने बहाने पड़ते हैं. आपको अपनी गेंद बेहतर पिच करनी होती है, कड़ी मेहनत कर के विकेट लेना होता है."
सरफ़राज़ से पहले जड्डू को क्यों भेजा गया?
भारत ने बेशक टॉस जीता लेकिन उसके शुरुआती तीन बल्लेबाज़ केवल 33 रन पर आउट हो चुके थे. ऐसे में रवींद्र जडेजा ने कप्तान रोहित शर्मा के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए 104 रन जोड़े.
रवींद्र जडेजा को बतौर बल्लेबाज़ अपने करियर का पहला टेस्ट मैच खेल रहे सरफ़राज़ ख़ान से पहले पिच पर भेजा गया था.
इसके पीछे निश्चित रूप से उनके अनुभव को वरीयता दी गई और साथ ही यह भी कि सरफ़राज़ को अपने पहले ही मैच में ऐसे दबाव की परिस्थिति में न उतरना पड़े. क्योंकि अभी अभी रजत पाटीदार अपने डेब्यू मैच में शून्य पर आउट हो कर पवेलियन लौटे थे.
मैच के बाद जब कप्तान रोहित शर्मा से इस बारे में पूछा गया तो वे बोले, "हमने जडेजा को पहले भेजा क्योंकि उनके पास बहुत अनुभव है, बहुत रन बनाए हैं और हम लेफ़्ट-राइट कॉम्बिनेशन भी चाहते थे. साथ ही ये भी कि सरफ़राज़ के पास पूरा वक़्त हो. मैच में हमें दिखा कि वो बल्ले से क्या कर सकते हैं.
क्या आगे भी ऐसा ही चलेगा? इस पर रोहित बोले, "ऐसा लंबे समय के लिए नहीं है. जिस दिन जैसी ज़रूरत होगी उस दिन, टीम और गेंदबाज़ी को देखते हुए हम आकलन करते हैं और फ़ैसला लेते हैं."
यशस्वी भव:
भारत की इस ऐतिहासिक जीत में यशस्वी जायसवाल की अहम भूमिका रही. उन्होंने भारत की दूसरी पारी में नाबाद 214 रन बनाए. अपनी इस पारी के दौरान उन्होंने कुछ ऐसे रिकॉर्ड अपने नाम किए जिसकी खूब चर्चा और तारीफ़ हो रही है.
युवा खब्बू बल्लेबाज़ यशस्वी जायसवाल की जितनी तारीफ़ की जाए वो कम है. बीते वर्ष जुलाई में भारतीय टीम के लिए पहला टेस्ट खेलने वाले यशस्वी का बल्ला लगातार रन बरसा रहा है.
यशस्वी ने अब तक केवल सात टेस्ट मैचों में 71.75 की औसत से 861 रन जुटा लिए हैं.
उन्होंने टेस्ट करियर की शुरुआत ही शतक के साथ की और अब लगातार दो टेस्ट में दोहरे शतक जड़ने का कारनाम किया है.
वे भारत के ऐसे पहले बल्लेबाज़ बन गए हैं जिन्होंने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ लगातार दो टेस्ट मैच में दोहरे शतक जमाए हैं.
वहीं लगातार दो टेस्ट में दोहरे शतक जमान वाले भी वे भारत के केवल तीसरे बल्लेबाज़ बने हैं.
यशस्वी ने अपनी इस पारी में 12 छक्के जड़े. यह टेस्ट क्रिकेट की किसी भी पारी में सर्वाधिक छक्के की बराबरी का रिकॉर्ड है.
यशस्वी के सभी तीन शतक 150 से अधिक के स्कोर हैं. पहले टेस्ट में 171 रन, छठे टेस्ट में 209 रन और सातवें टेस्ट में नाबाद 214 रन.
डबल सेंचुरी, छक्के का रिकॉर्ड बनाने वाले यशस्वी क्या बोले?
मैच के बाद वे बोले, "पहली पारी में जिस तरह रोहित भाई और जड्डू ने बल्लेबाज़ी की मुझे उससे बहुत प्रेरणा मिली. और जैसा कि मुझे सभी सीनियर्स ने कहा है कि जब तुम सेट हो जाओ तो इसे और आगे ले जाओ बड़ा बनाओ."
"तो मैं जब भी पिच पर सेट होता हूं तो बड़ी पारी खेलने की कोशिश करता हूं. टेस्ट क्रिकेट में आप ये नहीं जानते कि आगे क्या होने वाला है तो मेरी यह कोशिश होती है कि जब टिक गया हूं तो जितना लंबा हो सके खेलूं."
शुरू शुरू में यशस्वी ने कहीं अधिक गेंद खेल कर थोड़े से रन जुटाए थे, जब ये सवाल उनसे पूछा गया तो वे बोले, "शुरू में रन बनाने थोड़े मुश्किल दिख रहे थे. फिर मैंने एक एक सेशन और बॉलर पर फ़ोकस किया. जब मैं सेट हो गया तो फिर मेरे पास ये योजना थी कि कहां कहां शॉट लगातर रन बटोरूंगा."
रिटायर्ड हर्ट होने के बारे में उन्होंने कहा, "कुछ देर बल्लेबाज़ी करने के बाद मेरा पीठ ठीक नहीं लग रहा था. मैं बाहर नहीं जाना चाहता था लेकिन पीठ पर समस्या इतनी बड़ी थी कि मुझे जाना पड़ा. जब मैं लौटा तो मुझे पिच बैटिंग के लिए बेहतर लग रही थी और गेंद हार्ड थी."
सरफ़राज़ पर क्या बोले कप्तान रोहित?
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कप्तान रोहित शर्मा ने कहा, "मैंने सरफ़राज़ को बैटिंग करते हुए उतना नहीं देखा है लेकिन जितने भी लोगों से सुना है, मुंबई के जितने भी प्लेयर हैं उनसे सुना है कि उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में शानदार प्रदर्शन किए हैं. उन्होंने बड़े बड़े रन बनाए हैं."
"300, डबल हंड्रेड बनाए हैं. उनमें रन करने की भूख है. चार पांच साल से घरेलू क्रिकेट में रन बना रहे हैं. उनको खुला छोड़ोगे तो वो काम कर देंगे अपना."
"डेब्यू जब भी कोई करता है तो नर्वस रहता है, लेकिन मुझे लगा नहीं कि वो नर्वस थे. वो गेम में अपनी बैटिंग, फील्डिंग से अंतर लाना चाहते थे. देख कर अच्छा लगा."
सिरीज़ में बढ़त, जड्डू, जायसवाल पर क्या बोले रोहित?
मैच के बाद जब भारतीय रोहित से इस प्रदर्शन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, टेस्ट क्रिकेट दो या तीन दिनों का नहीं होता. हमें पांच दिनों तक खेलने की अहमियत समझते हैं. वो अच्छा खेले और हम पर दबाव था. हमारी गेंदबाज़ी ज़ोरदार है. मैसेज पूरी तरह शांत रहने का था, अगले दिन जिस तरह हमने वापसी की वो बहुत शानदार था. जब ऐसी चीज़ें होती हैं तो ख़ुशी होती है.
मैच के टर्निंग पॉइंट के बारे में रोहित ने कहा, "कई सारे थे. टॉस जीतना अच्छा था क्योंकि इसकी अहमियत हमें पता थी. गेंदबाज़ों ने ज़ोरदार वापसी कराई. दो युवा बल्लेबाज़ों की बदौलत हमारा आधा काम हो गया था, उन्होंने हमें वो लीड दिलाई जो हमें चाहिए था. निश्चित रूप से दूसरी पारी में जड्डू अपनी गेंदों से शानदार थे."
जायसवाल के बारे में कप्तान रोहित ने कहा, "मैंने यहां और विशाखापत्तनम में भी उनसे काफी बात की है. मैं उनके बारे में बहुत सी बातें नहीं करना चाहता हूं. उन्होंने अपने करियर की शानदार शुरुआत की, मैं चाहता हूं कि वो अच्छा खेलना जारी रखें. वो बहुत अच्छे क्रिकेटर दिखते हैं."
सिरीज़ जीतना चाहेंगेः बेन स्टोक्स
इंग्लैंड की टीम भले ही सिरीज़ में 1-2 से पिछड़ गई है पर कप्तान बेन स्टोक्स का कहना है कि उनकी टीम न केवल वापसी करना चाहेगी बल्कि सिरीज़ भी जीतना चाहेगी.
सिरीज़ में 1-2 से पिछड़ने के बाद इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स बोले, "बेन डकेट ने एक अद्भुत पारी खेली. हम पूरी पारी के दौरान वैसा ही खेलना चाहते थे. हम भारत के स्कोर के क़रीब पहुंचना चाहते थे. कभी कभी गेमप्लान काम नहीं करता है और यहां वैसी ही स्थिति थी."
स्टोक्स ने कहा कि उनकी टीम यहां से वापसी करना चाहेगी और यह सिरीज़ भी जीतना चाहेगी.
वे बोले, "अब हम 1-2 से सिरीज़ में पीछे हैं और हमारे सामने वापसी करने और सिरीज़ जीते के शानदार मौक़ा है. हमें सिरीज़ जीतने के लिए अगले दो मैच जीतने होंगे और हम ऐसा ही करना चाहेंगे."
रिकॉर्ड बुकः भारत की सबसे बड़ी जीत
भारत ने 434 रनों के विशाल अंतर से टेस्ट जीता. यह रनों के अंतर से टेस्ट क्रिकेट इतिहास में भारत की सबसे बड़ी जीत है.
इससे पहले रनों के अंतर के मामले में भारत की सबसे बड़ी जीत 2021 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ (372 रनों से) हुई थी.
वहीं यह इंग्लैंड के लिए रनों के अंतर से दूसरी सबसे बड़ी हार है. साथ ही यह टेस्ट इतिहास में रनों के अंतर से आठवीं सबसे बड़ी जीत भी है.
यशस्वी जायसवाल ने अपनी पारी के दौरान 12 छक्के जड़े. उन्होंने टेस्ट क्रिकेट की एक पारी में सर्वाधिक छक्के जमाने के रिकॉर्ड की बराबरी की है.
वसीम अकरम ने 1996 में ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ अपनी 257 रनों की पारी के दौरान भी इतने ही (12) छक्के जड़े थे.
वहीं भारत के लिए यह रिकॉर्ड पहले नवजोत सिंह सिद्धू (आठ छक्के) के नाम था.
रविचंद्रन अश्विन ने इस मैच में दौरान अपने टेस्ट करियर का 500 विकेट लिया. ऐसा करने वाले वे केवल दूसरे भारतीय और 9वें क्रिकेटर हैं.
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