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भारतीय महिला बैडमिंटन टीम ने यंग ब्रिगेड के सहारे रचा इतिहास, 'दिलेर' अनमोल की दिलचस्प कहानी
- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत ने बैडमिंटन एशिया टीम चैंपियनशिप में महिला वर्ग का ख़िताब जीतकर इतिहास रच दिया है. भारत की इस सफलता मे युवा खिलाड़ियों की भूमिका अहम रही है और इन युवा खिलाड़ियों में 17 वर्षीय अनमोल खरब की जितनी भी तारीफ़ की जाए, वह कम है.
पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेल रहीं अनमोल खरब मलेशिया के शाह आलम स्टेडियम में जब थाईलैंड के ख़िलाफ़ फ़ाइनल में खेलने उतरीं, तो उस समय दो-दो की बराबरी थी और ख़िताब जिताने का दारोमदार इस युवा खिलाड़ी के प्रदर्शन पर निर्भर था. पर खरब जब अपने से क़रीब 400 रैंकिंग ऊंची खिलाड़ी पोर्नपिचा के ख़िलाफ़ खेलने उतरीं तो उनके चेहरे पर तनाव के बजाय मुस्कान थी.
अनमोल ने एक बार फिर उम्मीदों पर खरे उतरकर 21-14, 21-9 से विजय पाकर भारतीय तिरंगे को फहरा दिया.
भारतीय बैडमिंटन की यहां तक बात है तो पुरुष टीम ही दो बार 2020 और 2016 में कांस्य पदक जीत सकी थी.पर भारतीय महिला टीम ने पहली बार पदक जीता है और वह भी स्वर्ण के साथ शुरुआत की है.
अनमोल के लिए इस चैंपियनशिप में यह कोई नई जिम्मेदारी नहीं थी. वह इसी तरह की जिम्मेदारी चीन के ख़िलाफ़ और सेमीफाइनल में जापान के ख़िलाफ़ उठा चुकीं थीं. उन्होंने सेमीफाइनल में जापान के ख़िलाफ़ निर्णायक मुकाबले में विश्व में 29वीं रैंकिंग की नात्सुकी निदेरा को 21-14. 21-18 से फतह किया था.
भारतीय जीत में विश्व चैंपियन पीवी सिंधु ने सिंगल्स और त्रिशा जौली व गायत्री गोपीनाथ की जोड़ी ने अपने मुक़ाबले जीतकर अहम भूमिका निभाई. अश्मिता चालिहा को सिंगल्स और प्रिया व श्रुति मिश्रा की जोड़ी को डबल्स में हार का सामना करना पड़ा.
अनमोल चीन के ख़िलाफ़ आई सुर्खियों में
अनमोल खरब को इस चैंपियनशिप के दौरान सही मायनों में सुर्खियां चीन के ख़िलाफ़ मुकाबले में मिलीं. भारत दो-दो की बराबरी पर था और मुकाबले का सारा दारोमदार आखिरी सिंगल्स मुकाबले पर था. भारत ने अनमोल खरब पर भरोसा किया, क्योंकि वह पूरे ठंडे दिमाग से खेलती हैं और अपने ऊपर तनाव को हावी नहीं होने देती हैं.
अनमोल ने भारतीय कोचों द्वारा उनसे लगाई उम्मीदों पर खरे उतरते हुए चीन की वू लुयो यू को 22-20, 14-21, 21-18 से हराकर आगे की राह पर बढ़ा दिया. इस हरियाणवी खिलाड़ी के बारे में कहा जाता है कि यह भी सायना नेहवाल की तरह पक्के इरादे वाली है.
मां राजबाला से आई है दिलेरी
भारतीय कोच पुलेला गोपीचंद ने अनमोल के बिना डरे, दिलेरी के साथ खेलने की तारीफ़ की थी. पिता देवेंद्र खरब कहते हैं कि अनमोल में यह दिलेरी अपनी मां राजबाला से आई है. राजबाला हरियाणा राज्य स्तर की धावक रहीं हैं और वह घड़ों में पानी भरकर सिर पर रखकर लातीं थीं.
फरीदाबाद की रहने वाली अनमोल बैडमिंटन की ट्रेनिंग नोएडा में लेती थी, इसलिए मां प्रतिदिन 80 किलोमीटर गाड़ी चलाकर लाती थीं. वह बेटी के लिए गाड़ी में लस्सी, छाछ आदि रखा करतीं थीं.
अनमोल की यह खूबी भी है कि उसका पूरा फोकस बैडमिंटन खेल पर रहा है.
यह कहा जाता है कि दिवाली के दिन भी उसने अपने कोच से कहा था कि पूजा और आतिशबाजी शाम को होते हैं तो सुबह की ट्रेनिंग रखी जा सकती है. इसी तरह रक्षाबंधन के बारे में वह कहती थी कि वह अपनी रक्षा खुद करने में सक्षम है, इसलिए उसे राखी बंधवाने की ज़रूरत नहीं है.
मां राजबाला ने अनमोल की फिटनेस के लिए उसे बॉक्सर जयभगवान के भाई गोदरा सर की अकादमी में ट्रेनिंग दिलाई है. इसमें खिलाड़ियों को कमांडो ट्रेनिंग कराई जाती है. इसके लिए वह ऱोज सुबह पांच बजे जागकर जाती थीं.
अश्मिता का भी रहा अहम योगदान
युवा शटलर अश्मिता चालिहा भले ही फ़ाइनल में मुक़ाबला हार गईं. पर उन्होंने जापान के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल में पूर्व विश्व चैंपियन नाओमी ओकुहारा को फतह करके भारत को फ़ाइनल में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई.
उन्होंने बैक कोर्ट से अच्छा प्रदर्शन किया और कॉर्नरों पर खुलकर स्मैश लगाए और ओकुहारा को मैच में संघर्ष करने का मौका ही नहीं दिया.
चालिहा के इस प्रदर्शन पर गोपीचंद का कहना था कि "मैंने इससे पहले उसे इतना अच्छा खेलते कभी नहीं देखा. उसे अपना खेल अनुशासित रखने की ज़रूरत है और वह बेहतरीन खिलाड़ी है."
वो कहते हैं, "चालिहा के मुक़ाबलों में मेरे लगातार पीछे बैठकर उसे गाइड करने का भी यह नतीजा है. मुझे उसका यह प्रदर्शन देखकर बहुत खुशी हुई है."
पर चालिहा अपने इस प्रदर्शन को फ़ाइनल में थाइलैंड की खिलाड़ी से संघर्ष करने के बाद भी हार गईं.
गायत्री और त्रिशा जौली भी लगातार झंडे गाड़े
गायत्री गोपीचंद और त्रिशा जौली की जोड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पैठ बनाने में सफल रही है.
इस जोड़ी ने फ़ाइनल में तीन गेमों तक संघर्ष करके जोंगकोलफान और रविंदा को 21-16, 18-21, 21-16 से हराया. इससे पहले सेमीफ़ाइनल में इस जोड़ी ने विश्व की नंबर छह जोड़ी नामी मत्सुयामा और चिहारू को फतह किया था.
सही मायनों में गायत्री और त्रिशा की जोड़ी इस चैंपियनशिप में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करती रही है.
इस जीत की ख़ास बात यह थी कि भारतीय जोड़ी इससे पहले दो बार जापानी जोड़ी से हार चुकी थी.
गायत्री और त्रिशा इस समय 23वीं रैंकिंग पर हैं.
वे पिछले सीजन में चोट की समस्या से नहीं खेल सकीं. पर अब उनके लिए टॉप-16 में आकर पेरिस ओलंपिक में भाग लेने की पात्रता हासिल करने का मौका है.
सिंधु के लिए सीजन से पहले परख का रहा अच्छा मौका
पीवी सिंधु चोट की समस्या की वजह से क़रीब चार माह बाद प्रतियोगात्मक बैडमिंटन में लौटीं हैं, उनके लिए अगले माह सीजन शुरू होने से पहले अपनी तैयारियों को परखने का अच्छा मौका था.
वह फ़ाइनल में सुपनेदा केटथोंग को फतह करके भारत की जीत में योगदान करने के साथ सीजन से पहले अपना मनोबल ऊंचा करने में सफल रहीं हैं.
सिंधु वैसे तो अभी 11वीं रैंकिंग पर हैं पर उन्होंने पेरिस ओलंपिक में भाग लेने के लिए सीजन की शुरुआत में अच्छे प्रदर्शन करने होंगे.
इस चैंपियनशिप में भले ही ज़्यादातर प्रमुख देशों ने अपने टॉप खिलाड़ियों को नहीं उतारा और युवाओं को मौका दिया.
सिंधु ने इसमें जीत हासिल करके अपना मनोबल तो ऊंचा किया है. पर उन्हें अपने खेल को पहले की तरह एक जुट करने के लिए थोड़ी और मेहनत करने की ज़रूरत पड़ेगी.
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