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इसराइल-हमास युद्ध: ग़ज़ा के अल-नासेर अस्पताल में मिली सामूहिक कब्रों की हक़ीक़त क्या है
- Author, डेविड ग्रिटेन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार एजेंसी के प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा है कि इसराइली हमलों के बाद ग़ज़ा के नासेर और अल-शिफ़ा अस्पतालों की बर्बादी और वहां मिली सामूहिक कब्रों से जुड़ी रिपोर्टों से वे 'डरे हुए' हैं.
वोल्कर तुर्क ने इन मौतों की स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग की है. फ़लस्तीनी अधिकारियों ने बताया है कि उन्होंने नासेर में खुदाई के बाद 283 शव निकाले हैं. निकाले गए शवों में कुछ के हाथ बंधे हुए थे.
अभी ये साफ़ नहीं है कि इन लोगों की मौत कैसे हुई या उन्हें कब दफ़्न किया गया. इसराइली सेना ने कहा है कि ये दावे 'बेबुनियाद' हैं कि उसने उन शवों को वहां पर दफ़्न किया था.
हालांकि इसराइल ने ये ज़रूर कहा है कि फ़रवरी में ख़ान यूनिस शहर के इस अस्पताल में जब उसने दो हफ़्तों तक अपना ऑपरेशन चलाया था तो उसके सैनिकों ने फ़लस्तीनियों द्वारा दफ़्न किए गए शवों की 'जांच' की थी.
इसराइल का कहना है कि ये शव उन जगहों पर मिले थे जहां खुफिया जानकारी के मुताबिक़ बंधकों को रखे जाने की संभावना जताई गई थी. हमास की क़ैद से रिहा किए गए दस बंधकों ने कहा है कि उन्हें नासेर अस्पताल में लंबे समय तक बंधक बनाकर रखा गया था.
हमास का हमला
नासेर में इसराइली कार्रवाई से पहले अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया था कि उन्हें अस्पताल के अहाते में ही शवों को दफ़्न करने के लिए मजबूर किया गया था क्योंकि आस-पास के इलाकों में चल रही लड़ाई की वजह से वे कब्रिस्तान नहीं जा सकते थे.
नवंबर में अल शिफ़ा अस्पताल पर इसराइल की पहली कार्रवाई से पहले भी ऐसी ही रिपोर्टें मिली थीं.
इसराइल की मिलिट्री ने कहा है कि युद्ध के दौरान उसके सैनिकों ने ग़ज़ा के कई अस्पतालों पर छापेमारी की थी क्योंकि हमास के लड़ाके उन अस्पतालों के अंदर से हमले कर रहे थे.
हमास और इन अस्पतालों के मेडिकल अधिकारियों ने इन दावों से इनकार किया है.
इसराइल और हमास की ये लड़ाई उस वक़्त शुरू हुई जब सात अक्टूबर को हमास के लड़ाकों ने अभूतपूर्व तरीके से दक्षिणी इसराइल में सीमा पार कर हमला बोला.
हमास के इस हमले में लगभग 1200 लोग मारे गए जिनमें ज़्यादातर आम नागरिक थे. इस हमले में हमास अपने साथ 253 लोगों को बंधक बनाकर ग़ज़ा लेकर गया था.
संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार एजेंसी ने क्या कहा
फ़लस्तीन में हमास द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि सात अक्टूबर के बाद शुरू हुई इसराइल की जवाबी कार्रवाई में ग़ज़ा में अब तक 34,180 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं जिनमें अधिकतर महिलाएं और बच्चे थे.
संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार एजेंसी की प्रवक्ता ने कहा है कि उनका संगठन नासेर अस्पताल में 283 शवों की बरामदगी को लेकर फ़लस्तीनी अधिकारियों से मिल रही रिपोर्टों की पुष्टि करने की कोशिश कर रहा है. इनमें से 42 शवों की पहचान की जा चुकी है.
रवीना शमदसानी ने जिनेवा में पत्रकारों से कहा, "कहा जा रहा है कि मरने वालों को ज़मीन गहरा खोदकर दफनाया गया और उसे मलबे से ढंक दिया गया. मरने वालों में कथित तौर पर बुजुर्ग लोग, महिलाएं और जख़्मी लोग थे. जबकि अन्य.... उनके हाथ बंधे हुए थे और उनके शरीर पर कपड़े नहीं थे."
वोल्कर तुर्क ने इन सामूहिक कब्रों के मामले में स्वतंत्र, प्रभावशाली और निष्पक्ष जांच की मांग की है. उन्होंने कहा, "जिस तरह का माहौल है, उसे देखते हुए इस जांच में अंतरराष्ट्रीय जाचंकर्ताओं को भी शामिल किया जाना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानूनों के तहत अस्पतालों को विशेष सुरक्षा के हक़दार हैं और आम नागरिकों, बंधकों और जंग से तटस्थ रह रहे लोगों की जानबूझकर हत्या करना एक युद्ध अपराध है."
हमास की सिविल डिफेंस फोर्स के आरोप
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी अल नासेर अस्पताल में मिली सामूहिक कब्रों पर कहा है कि ये रिपोर्टें 'आश्चर्यजनक रूप से परेशान करने' वाली हैं.
हमास द्वारा संचालित सिविल डिफेंस फोर्स के एक प्रवक्ता महमूद बसाल ने सोमवार को बीबीसी की अरबी सेवा को बताया कि स्थानीय लोगों ने इसके बारे में जानकारी दी थी. स्थानीय लोगों ने फ़ोर्स को बताया था कि युद्ध के दौरान मारे गए और अस्पताल के अहाते में एक अस्थायी कब्रिस्तान में दफनाए गए 'बड़ी संख्या में' लोगों के शवों को इसराइली हमले के दौरान दूसरे स्थान पर ले जाया गया था.
महमूद बसाल ने कहा, "जांच-पड़ताल के बाद हमने ये पाया कि इसराइली मिलिट्री ने वहां एक सामूहिक कब्र खोदी थी. इसराइली फौज ने अल नासेर अस्पताल में रखे शवों को उस सामूहिक कब्र में दफ़्न कर दिया था."
बीबीसी की अरबी सेवा ने एक और शख़्स से बात की जिनका कहना था कि वो अपने दो पुरुष रिश्तेदारों के शव खोज रहे थे. उनका आरोप था कि इसराइली फौज ने ख़ान यूनुस में अपनी सैनिक कार्रवाई के दौरान उनके शव अपने नियंत्रण में ले लिए थे.
उन्होंने कहा, "मैंने अपने रिश्तेदारों के शव एक अपार्टमेंट में दफ़्न कर दिए थे लेकिन इसराइली आए और उन्होंने वहां से उनके शव हटा दिए. हम हर रोज़ उनके शव खोजते हैं लेकिन इसमें हमें कामयाबी नहीं मिल रही है."
आईडीएफ़ की सफ़ाई
हमास का आरोप है कि अल नासेर अस्पताल परिसर में मिले शवों में वे लोग भी शामिल हैं जिनकी इसराइली सुरक्षा बलों ने बिना किसी सबूत के 'निर्मम हत्या' की थी.
इसराइली डिफेंस फोर्स (आईडीएफ़) ने मंगलवार को एक बयान में कहा, "ये दावे कि आईडीएफ़ ने फ़लस्तीनी लोगों के शव दफ़्न कर दिए थे, पूरी तरह से बेबुनियाद हैं."
"नासेर अस्पताल के इलाके में आईडीएफ़ के ऑपरेशन के दौरान जब बंधकों और गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए कोशिश की जा रही थी तो उस इलाके में फ़लस्तीनी लोगों द्वारा दफनाए गए शवों की जांच की गई थी."
"ये जांच-पड़ताल बेहद सावधानी से की गई थी और उन्हीं जगहों पर की गई थी जिनको लेकर ये खुफिया जानकारी मिली थी कि वहां बंधक मौजूद हो सकते हैं. ये जांच-पड़ताल मृतकों की गरिमा को बरकरार रखते हुए की गई थी. शवों की जांच की गई और ये पाया गया कि वे इसराइली बंधकों के शव नहीं थे. उन्हें वापस वहीं पर दफ़्न कर दिया गया है."
आईडीएफ़ का कहना है कि उसने अस्पताल में अपनी छापेमारी के दौरान लगभग 200 चरमपंथियों को अपनी हिरासत में लिया था. इस कार्रवाई में अस्पताल परिसर से गोला-बारूद और इसराइली बंधकों को देने के लिए रखी गई दवाएं भी बरामद हुई थीं.
ग़ज़ा में काम कर रहे मेडिकल स्टाफ़ ने क्या बताया
आईडीएफ़ ने ये बात ज़ोर देकर कही है कि रेड की कार्रवाई को इस तरह से अंज़ाम दिया गया था कि अस्पताल, उसके मरीज़ों और मेडिकल स्टाफ़ को कोई नुक़सान न पहुंचे.
हालांकि वहां अल नासेर अस्पताल में काम करने वाले तीन मेडिकल स्टाफ़ ने पिछले महीने बीबीसी को बताया था कि इसराइली सुरक्षा बलों ने रेड के दौरान उनके साथ ख़राब बर्ताव किया था. उन्हें जलील किया गया, उनके साथ मार-पीट की गई और हिरासत के दौरान घंटों घुटनों पर बैठे रहने के लिए मजबूर किया गया.
इसराइल द्वारा नासेर अस्पताल का नियंत्रण अपने हाथ में लेने के बाद वहां ड्यूटी पर बने मेडिकल स्टाफ़ ने बताया था कि वे मरीज़ों की देखभाल नहीं कर पा रहे थे. वहां पानी, बिजली और अन्य ज़रूरी चीज़ों की किल्लत थी. वहां ऐसे हालात बने जिसकी वजह से 13 मरीज़ों की मौत हो गई.
पहली अप्रैल को ग़ज़ा शहर में स्थित अल शिफ़ा अस्पताल से इसराइली सुरक्षा बल बाहर निकल पाए. वे वहां इस खुफिया जानकारी के बाद गए थे कि हमास के लड़ाके वहां इकट्ठा हो रहे हैं.
उस वक़्त आईडीएफ़ ने कहा था कि अस्पताल के आस-पास के इलाके में दो हफ़्ते तल चली सैनिक कार्रवाई में दो सौ चरमपंथी मारे गए थे. वहां 500 से अधिक लोग हिरासत में लिए गए थे. पूरे अस्पताल परिसर से हथियारों की बरामदगी की गई थी.
विश्व स्वास्थ्य संगठन का बयान
इसके पांच दिनों के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम जब वहां पहुंची तो उसने कहा कि अल शिफ़ा अस्पताल एक खाली छर्रे की तरह लग रहा है जिसकी ज़्यादातर इमारतें ज़मींदोज़ हो गई हैं और अस्पताल की अधिकतर मशीने इस्तेमाल के लायक नहीं रह गई हैं.
डब्ल्यूएचओ के बयान में ये भी कहा गया कि अस्पताल के इमर्जेंसी, प्रशासनिक और सर्जिकल बिल्डिंग के बाहर ऐसी कब्रें मिलीं जो ज़्यादा गहरी नहीं थीं. उन कब्रों में शवों को इस तरह से दफ़्न किया गया था कि उनके शरीर बाहर से दिख रहे थे.
सेना ने कहा है कि उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों को नुकसान न पहुँचान का प्रयास किया है. लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अस्पताल के कार्यकारी निदेशक के हवाले से कहा है कि सैन्य कार्रवाई के दौरान मरीज़ों को दयनीय स्थिति में रखा गया था. इस दौरान चिकित्सीय सुविधाओं के अभाव में कम से कम 20 मरीज़ों की मौत हुई थी.
प्रवक्ता रवीना शमदसानी बताती हैं कि सुयंक्त राष्ट्र के मुताबिक कुल 30 शव दो कब्रों में दफ़्न थे. उनमें से अब तक 12 की शिनाख़्त की जा चुकी है. रवीना शमदसानी कहती हैं, "ऐसी ख़बरें हैं कि इनमें कुछ शवों के हाथ बंधे हुए थे."
रवीना शमदसानी कहती हैं कि इसराइली सेना ने 200 लोगों की मौत की बात की है लेकिन ये संख्या इससे अधिक भी हो सकती है.
ग़ज़ा के सिविल डिफ़ेंस के प्रवक्ता ने सीएनएन को नौ अप्रैल को बताया था कि अब तक अल-शिफ़ा अस्पताल के आस-पास से कुल 381 शव बरामद किए जा चुके हैं. इनमें वे शव शामिल नहीं थे जो अस्पताल के अहाते में दफ़्न किए गए थे.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन के प्रमुख ने बीते कुछ दिनों में रफ़ाह पर इसराइली बमबारी की आलोचना की है जिनमें अधिकतर बच्चों और महिलाओं की मौत हुई है.
वोल्कर तुर्क ने रफ़ाह पर इसराइली हमले के बारे में चेतावनी दी है. रफ़ाह में 15 लाख विस्थापित लोग रहते हैं.
जवाब में इसराइली सेना ने कहा है कि वे हमास के सैन्य और प्रशासनिक ढांचे को तबाह करने के लिए कार्रवाई कर रही है.
सेना ने कहा, "हमास ने इसराइली पुरुषों, महिलाओं और बच्चों पर जानबूझ कर हमले किए हैं लेकिन सेना अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हुए आम लोगों को बचाने की पूरी कोशिश करती है."
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