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ग़ज़ाला हाशमी ने रचा इतिहास, चुनी गईं वर्जीनिया की पहली मुस्लिम लेफ्टिनेंट गवर्नर
सुर्ख़ियों में भले ही न्यूयॉर्क के मेयर पद के उम्मीदवार ज़ोहरान ममदानी की हैरान कर देने वाली जीत हो लेकिन वो अकेले ऐसे राजनेता नहीं है जिन्होंने मंगलवार रात को इतिहास रचा.
उनकी साथी डेमोक्रेट नेता ग़ज़ाला हाशमी भी वर्जीनिया की लेफ़्टिनेंट गवर्नर निर्वाचित हुई हैं.
वो पहली मुस्लिम महिला बन गई हैं जो अमेरिका के किसी राज्य स्तरीय राजनीतिक पद पर पहुंची हैं.
अपने विजय भाषण में ग़ज़ाला हाशमी ने कहा, "ये इस देश में मिले मौक़ों की वजह से मुमकिन हो सका है."
ग़ज़ाला हाशमी ने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार जॉन रीड को हराया.
रीड एक पूर्व कंज़रवेटिव टॉक शो होस्ट हैं और राज्य के पहले ऐसे उम्मीदवार भी हैं जो खुले तौर पर समलैंगिक हैं.
प्रोफ़ेसर से राजनेता तक
भारत के हैदराबाद शहर में 1964 में पैदा हुई ग़ज़ाला हाशमी सिर्फ़ चार साल की थीं जब वो अपनी मां और बड़े भाई के साथ अमेरिका पहुंची थीं.
वो जॉर्जिया में पहले से रह रहे अपने पिता के साथ रहने आई थीं. उनके पिता जॉर्जिया सदर्न यूनिवर्सिटी में पढ़ा रहे थे.
ग़ज़ाला हाशमी ऐसे समय में बड़ी हो रहीं थीं जब नस्लीय भेदभाव स्कूलों से धीरे-धीरे ख़त्म हो ही रहा था.
हाई स्कूल में उन्होंने अच्छे नंबर हासिल किए. इसके बाद उन्होंने आगे की शिक्षा जॉर्जिया सदर्न यूनिवर्सिटी और अटलांटा की ईमोरी यूनिवर्सिटी से हासिल की.
वर्जीनिया के कई कॉलेजों में उन्होंने तीस सालों तक साहित्य की प्रोफ़ेसर और प्रशासक के रूप में काम किया. साल 2019 में जब राष्ट्रपति ट्रंप ने 'मुसलमानों पर प्रतिबंध' लागू किया तब उन्होंने ख़ुद राजनीति में उतरने का फ़ैसला किया.
'संकट की घड़ी'
ग़ज़ाला हाशमी मानती हैं कि एक अमेरिकी मुसलमान होने के नाते राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का पहला कार्यकाल उनके लिए 'संकट का समय' था.
साल 2020 में दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, "मुझे ये महसूस हुआ कि इन मुद्दों से निबटने के लिए मुझे सार्वजनिक रूप से और अधिक दिखना होगा और बात करनी होगी."
साल 2019 में उन्होंने प्रांतीय सीनेट सीट के लिए उम्मीदवारी पेश की और रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार को हराकर जीत हासिल की. इस जीत के साथ उन्होंने कई साल बाद डेमोक्रेट पार्टी को सदन पर नियंत्रण करने में मदद की.
उस साल भी उन्होंने इतिहास दर्ज किया था. वो वर्जीनिया प्रांत की सीनेट के लिए चुनी जाने वाली पहली मुसलमान महिला बनी थीं.
इस साल उन्होंने गर्भपात के अधिकारों की रक्षा, सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को मज़बूत करना, सरकार से वित्तपोषित स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करने जैसे मुद्दों को अपने चुनावी अभियान का केंद्र बनाया और वो सफल भी रहीं.
चुनाव जीतने के बाद मंगलवार को उन्होंने राजनीति में आने के अपने फ़ैसले का ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा, "कमज़ोर समुदायों को निशाना बनाए जाने और बलि का बकरा बनाए जाने को ख़ामोश देखते रहने की जगह मैंने आवाज़ उठाने का फ़ैसला किया."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.