तेज प्रताप यादव महुआ में तीसरे नंबर पर क्यों रहे, जानिए अहम कारण

तेज प्रताप यादव क्यों हारे

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लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को महुआ में न केवल हार मिली बल्कि तीसरे नंबर पर रहे. इसी साल मई महीने में तेज प्रताप को राष्ट्रीय जनता दल से बाहर कर दिया गया था.

तेज प्रताप 2015 में पहली दफ़ा महुआ से चुनाव लड़े और जीते भी थे.

आरजेडी से निकाले जाने के बाद अपनी अलग पार्टी जनशक्ति जनता दल बनाया और फिर से चुनाव लड़ने के लिए महुआ को ही चुना.

14 नवंबर को जब नतीजे आए तो लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के उम्मीदवार संजय कुमार सिंह ने बाज़ी मार ली.

नतीजा इसलिए भी चौंकाने वाला रहा क्योंकि मतगणना के दौरान ऐसा एक भी मौक़ा नहीं आया जब तेज प्रताप यादव ने संजय सिंह को कड़ी टक्कर दी हो.

तेज प्रताप यादव तीसरे नंबर पर रहे. आरजेडी के उम्मीदवार मुकेश कुमार रौशन दूसरे नंबर पर रहे.

क्या एआईएमआईएम है वजह?

तेज प्रताप यादव ने साल 2015 में महुआ से 28 हज़ार से अधिक वोटों से जीत हासिल की थी.

इस बार एलजेपी (आर) के उम्मीदवार से तेज प्रताप को 51 हज़ार 938 वोट कम मिले. वहीं, महुआ के मौजूदा विधायक और आरजेडी के मुकेश कुमार रौशन 44 हज़ार 997 वोटों से हारे.

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लेकिन एक अहम फ़ैक्टर यहां ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का उम्मीदवार उतारना भी रहा. एआईएमआईएम ने इस साल बिहार की जिन 25 सीटों पर चुनाव लड़ा, उनमें से एक महुआ थी.

यहां पार्टी के उम्मीदवार अमित कुमार को भी 15 हज़ार 783 वोट मिले हैं.

महुआ में तेज प्रताप के चुनावी कैंपेन को देख रहे सत्येंद्र राय का मानना है कि तेज प्रताप यादव पर लोगों ने भरोसा किया लेकिन यहां वोट दो हिस्सों में बँट गया. उनकी हार में एक बड़ी वजह यही रही कि महुआ में मुसलमान और यादव के वोटों का बँटवारा हो गया.

तेज प्रताप यादव ने महुआ सीट से ही अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी. 2015 के चुनाव में उन्हें 66 हज़ार 927 वोट मिले थे. इस जीत के बाद उन्हें राज्य का स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया था.

साल 2020 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी ने तेज प्रताप यादव को हसनपुर सीट से उम्मीदवार बनाया था. तेज प्रताप हसनपुर नहीं जाना चाहते थे लेकिन उन्हें पार्टी के दबाव में जाना पड़ा था.

उनकी जगह मुकेश रौशन महुआ से चुनाव लड़े थे. रौशन को पिछले चुनाव में 62 हज़ार 747 वोट मिले थे.

तेज प्रताप यादव और मुकेश रौशन को पड़े वोटों को जोड़ दिया जाए तो भी यह एलजेपी (आर) के उम्मीदवार को मिले मत से कम हैं.

हालांकि, एआईएमआईएम के कैंडिडेट के वोट जोड़े जाएं तो फिर हार-जीत की ये तस्वीर बदल सकती थी.

नई पार्टी और पुरानी सीट

लालू यादव ने तेज प्रताप यादव को पार्टी से छह साल के लिए बाहर निकाला था

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तेज प्रताप यादव उस महुआ सीट से लड़े जहां यादवों और मुसलमानों के वोट एक लाख से ज़्यादा हैं. ज़ाहिर है कि इस बार तेज प्रताप आरजेडी के उम्मीदवार नहीं थे. लेकिन उन्हें उम्मीद आरजेडी के वोट बैंक से ही थी.

यादव और मुस्लिम ही आरजेडी के कोर वोटर माने जाते हैं.

लेकिन यहां पर अनुसूचित जाति की भी करीब 21 फ़ीसदी आबादी है, जिसमें पासवान और रविदास समाज की बहुलता है.

तेज प्रताप यादव के पास अपना अलग से कोई वोटबैंक नहीं है यानी वह उन्हीं वोटरों के बीच लोकप्रिय थे, जो आरजेडी को वोट करते रहे हैं.

इसलिए ये पहले से ही माना जा रहा था कि तेज प्रताप यादव अगर इस सीट पर निर्दलीय या फिर किसी दूसरे दल के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे तो, इससे आरजेडी के कोर वोट बैंक में बँटवारा होगा, जिसका फ़ायदा किसी तीसरे दल को हो सकता है.

इसके अलावा इतने आनन-फ़ानन में पार्टी के गठन की वजह से तेज प्रताप यादव के पास कोई ज़मीनी कार्यकर्ता नहीं था न तो संगठनात्मक ताकत. वह पार्टी के एकमात्र चेहरा थे.

लेकिन सत्येंद्र राय की मानें तो तेज प्रताप यादव क्षेत्र की जनता से वह संपर्क नहीं बना पाए, जैसा उन्हें करना चाहिए था.

उन्होंने बताया, "तेज प्रताप यादव महुआ की सिर्फ़ नौ पंचायतों में चुनावी कैंपेन करने पहुंचे थे. जबकि यहां 36 पंचायतें हैं. उनकी कैंपेनिंग सही नहीं रही. आम जनता से न मिलने के कारण भी यह हार हुई है."

पिछले दो सालों में तेज प्रताप यादव की छवि उनके विधानसभा क्षेत्र में किए काम से ज़्यादा दूसरे विवादों से घिरी रही.

काम नहीं आई इमोशनल अपील

तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव

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इमेज कैप्शन, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप दोनों ने एक दूसरे के ख़िलाफ़ चुनाव प्रचार किया था

आरजेडी के साथ तेज प्रताप यादव के रिश्ते ऐसे बिगड़े कि छोटे भाई तेजस्वी यादव ने महुआ सीट पर मुकेश रौशन के लिए प्रचार किया.

बदले में तेज प्रताप यादव भी तेजस्वी के विधानसभा क्षेत्र राघोपुर में अपने प्रत्याशी प्रेम कुमार यादव के लिए वोट मांगने पहुंचे थे.

तेजस्वी यादव ने वोटरों से परिवार की बजाय पार्टी के प्रति वफ़ादार रहने की थी. वहीं तेज प्रताप यादव मतदाताओं के सामने इमोशनल अपील कर रहे थे. वह खुद को एक ऐसे बड़े भाई के तौर पर पेश कर रहे थे, जिसके साथ ग़लत हुआ है और जिसे बड़ी सज़ा मिल रही है.

सत्येंद्र राय कहते हैं, "तेजस्वी ने कहा कि पार्टी बड़ी है परिवार नहीं. अगर तेजस्वी यहां (महुआ) नहीं आते तो शायद कुछ और हुआ होता."

तेजस्वी यादव के महुआ में प्रचार पर तेज प्रताप यादव ने कहा था, "वह अभी बच्चा है. चुनाव के बाद हम उन्हें झुनझुना थमा देंगे. अगर वह हमारे इलाक़े में जाएगा, तो हम भी उनके इलाके में जाएंगे. हम भी राघोपुर जाएंगे."

तेज प्रताप यादव राघोपुर गए और अपने उम्मीदवार प्रेम कुमार यादव के लिए प्रचार भी किया. हालांकि, प्रेम कुमार को महज़ 709 वोट मिले.

सत्येंद्र राय भी यह मानते हैं कि भविष्य में तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव को एक हो जाना है और इसी में दोनों का भविष्य है.

बिहार में कुल 43 सीटों पर अपने तेज प्रताप ने उम्मीदवार उतारे थे. इनमें से ज़्यादातर सीटें यादव बहुल थीं और आरजेडी यहाँ से जीतती रही थी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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