वर्ल्ड कप सेमीफ़ाइनल: भारत को न्यूज़ीलैंड से ख़तरा क्यों है?

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- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई से
मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में होने वाले वर्ल्ड कप सेमीफ़ाइनल में एक बड़ा रिकॉर्ड टूटना तय है.
न्यूज़ीलैंड ने अलग-अलग फ़ॉर्मेट्स में भारत को पिछले चार नॉकआउट मैचों में लगातार हराया है.
जबकि खुद न्यूज़ीलैंड पिछले तीन वनडे वर्ल्ड कप को आयोजित करने वाले देशों से लगातार तीन बार हारकर टूर्नामेंट से बाहर भी हुई है.
बुधवार की दोपहर जब भारत और न्यूज़ीलैंड की टीमें आमने-सामने होंगी तो उनके ज़हन में ये बातें ज़रूर होंगी की अब एक नया रिकॉर्ड तो बनना ही है, चाहे जिसके हक़ में हो.
एकदिवसीय विश्व कप के इतिहास को देखिएगा तो न्यूज़ीलैंड टीम की स्थिरता का अंदाज़ा आसानी से हो जाएगा. 2007 से इस टीम ने हर वर्ल्ड कप के सेमीफ़ाइनल में जगह बनाई है.
जिसमें से 2015 और 2019 में न्यूज़ीलैंड फ़ाइनल तक पहुँची और 2019 के फ़ाइनल में तो बेहद रोमांचक मुक़ाबले के बाद हारी. 2021 में इसी टीम ने भारत को वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप के फ़ाइनल में भी मात दी थी.
मौजूदा टूर्नामेंट में कमेंट्री कर रहे न्यूज़ीलैंड के पूर्व विकटकीपर-बैट्समैन इयान स्मिथ ने बीबीसी को बताया, “न्यूज़ीलैंड की मौजूदा और पिछली कई टीमों में एक खूबी रही है. टीम एक या दो या तीन स्टार प्लेयर्स के इर्द-गिर्द नहीं खेलती. टीम ऑल-राउंड परफ़ॉर्मेंस में यक़ीन रखती है जो खिलाड़ी के मौजूदा फ़ॉर्म पर निर्भर होता है”.
2019 की खट्टी यादें

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पिछले विश्व कप के सेमीफ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड से मिली खट्टी हार की यादें आज भी ताज़ा है और उस टीम के ज़्यादातर खिलाड़ी इस प्लेइंग इलेवन में भी हैं. मैनचेस्टर में खेले गए उस मैच में न्यूज़ीलैंड के 239 रनों का पीछा करते हुए भारतीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज़ों के स्कोर कुछ ऐसे थे:
केएल राहुल – 1 रन
रोहित शर्मा – 1 रन
विराट कोहली- 1 रन
दिनेश कार्तिक- 6 रन
ऋषभ पंत और हार्दिक पंड्या ने 32-32 रनों की पारी खेली थी और धोनी बड़ी मुश्किल से धीमी पारी खेल कर 50 रन बना पाए थे और अपने प्राइम फ़ॉर्म में नहीं थे.
सिर्फ़ रवींद्र जाडेजा ने तेज़ी से खेलते हुए महज़ 59 गेंदों में 77 रन जोड़े थे लेकिन वो काफ़ी नहीं थे.
न्यूज़ीलैंड की वापसी

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2023 विश्व कप में न्यूज़ीलैंड ने ज़बरदस्त शुरुआत की थी अपने पहले चारों मैच जीत कर जिसमें मौजूदा चैम्पियन इंग्लैंड को पहले मैच में दी गई करारी शिकस्त शामिल थी.
प्रतियोगिता में उनका विजय रथ भारत ने ही रोका था धर्मशाला में चार विकेट से हराकर.
इसके बाद न्यूज़ीलैंड को ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ़्रीका और पाकिस्तान ने हराकर अंक तालिका में ख़ासा नीचे धकेल दिया था और अपना आख़िरी मैच जीत कर ही वे सेमीफ़ाइनल में पहुँच सके हैं.
लेकिन याद रखना ज़रूरी है कि 400+ रनों का स्कोर खड़ा करने के बावजूद वे पाकिस्तान से बारिश की वजह से बाधित हुए मैच में हारे जबकि भारत और ऑस्ट्रेलिया वाले मैचों में हार का मार्जिन कम रहा और नतीजा किसी ओर जा सकता था.
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन को लगता है कि, “न्यूज़ीलैंड को टूर्नामेंट के बीच में जो झटके लगे उससे वो अब सबक़ भी ले चुकी होगी और उबर भी चुकी होगी. अब सिर्फ़ दो मैच की बात और है और उनकी बल्लेबाज़ी, गेंदबाज़ी और फ़ील्डिंग तक की पूरी टेस्टिंग हो चुकी है, अच्छी भी और बुरी भी”.
भारत को ख़तरा

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न्यूज़ीलैंड की बल्लेबाज़ी इस टूर्नामेंट के शुरुआत से ही कमाल दिखा रही है. रचिन रविंद्र के बल्ले से रनों की बौछार हो रही है तो कप्तान केन विलियम्सन चोट से वापसी के बाद तगड़े फ़ॉर्म में दिखे हैं.
हालाँकि डेवन कॉनवे अपने असली फ़ॉर्म से थोड़ा दूर हैं लेकिन डेरिल मिचेल लगातार बड़े स्कोर कर रहे हैं और तेज गेंदबाज़ों को अच्छा खेल रहे है.
अगर कप्तान विलियम्सन और रचिन भारतीय पेस अटैक का कामयाबी से सामना कर लेते हैं तो मध्य ओवरों में उन्हें रन बनाने से रोकना मुश्किल हो सकता है.
लेकिन भारतीय बल्लेबाज़ी को जिनसे ख़तरा हो सकता है उनके नाम है ट्रेंट बोल्ट, टिम साउथी और लॉकी फ़र्ग्यूसन. वानखेड़े की पिच पर शाम के बाद गेंद अच्छी स्विंग करती है और पिछले कई मैचों में ये साफ़ दिखा है.
भारतीय टीम ने ही श्रीलंका को महज़ 55 रनों पर ऑलआउट कर दिया था और अफ़ग़ानिस्तान के तेज गेंदबाज़ों ने 50 रनों के स्कोर के भीतर ही ऑस्ट्रेलिया के चार विकेट उड़ा दिए थे.
वैसे अगर भारत ने दूसरी पारी में गेंदबाज़ी की तो इसका फ़ायदा बुमराह, शमी और सिराज को भी मिलेगा.
उधर न्यूज़ीलैंड के सलामी बल्लेबाज़ डेवन कॉनवे कह चुके हैं कि, “भारत को हराने के लिए टीम अपने सीनियर खिलाड़ियों के तजुर्बे पर भी भरोसा करेगी”.
न्यूज़ीलैंड क्रिकेट बोर्ड से जारी हुए एक वीडियो में कॉनवे ने कहा, “हम सभी को पता है इंडिया कितनी अच्छी टीम है. वे मज़बूत स्क्वॉड होने के साथ ही अच्छे मोमेंटम के साथ खेल रहे हैं लेकिन हम भी इस चुनौती का इंतज़ार कर रहे हैं”.
भारतीय तैयारी

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भारतीय टीम ने पिछले नौ मैचों में जिस तरह की क्रिकेट खेली है वो किसी ड्रीम रन से कम नहीं है.
द गार्डियन अख़बार के क्रिकेट समीक्षक अली मार्टिन के मुताबिक़, “भारतीय टीम को भी टूर्नामेंट शुरू होने से पहले नौ मैचों में 18 अंक पाने की उम्मीद नहीं रही होगी. लेकिन हर मैच के बाद उनका मनोबल बढ़ता गया और टीम ने पुरानी ग़लतियों से सबक़ भी लिया है.”
सबसे ज़्यादा फ़र्क़ दिखा है भारत की तेज गेंदबाज़ी में क्योंकि बुमराह, सिराज और शमी की गेंदों ने विपक्षी बल्लेबाज़ों के होश उड़ा कर रखे हैं. टूर्नामेंट में शमी के पास पांच मैचों में से 16 विकेट हैं, बुमराह के पास नौ मैचों में 17 और सिराज ने नौ मैचों में 12 विकेट झटके हैं.
यानी तीनों मिलकर अब तक 45 विकेट ले चुके हैं जिसमें हर टीम का टॉप ऑर्डर शामिल है.
भारतीय बल्लेबाज़ी ने अपनी प्रतिभा के अनुसार पूरे टूर्नामेंट में प्रदर्शन किया है जिसमें रोहित शर्मा और गिल की आक्रामक शुरुआत, विराट कोहली का मध्यक्रम में लंबे स्कोर बनाने का सिलसिला, श्रेयस अय्यर का लगातार बेहतर होता प्रदर्शन, और केएल राहुल का सपोर्ट शामिल है.
भारत को इस मैच में मज़बूती के लिए शुरुआती 10 ओवर बिना विकेट गंवाए खेलना होगा ख़ासतौर पर अगर टॉस हारने की स्थिति में उसे न्यूज़ीलैंड के स्कोर का पीछा करना पड़ा तो.
इसीलिए वानखेड़े में टॉस की भूमिका अहम रहने वाली है क्योंकि जो भी टीम इसे जीतेगी वो पहले बल्लेबाज़ी करना चाहेगी.
साथ ही भारत की उम्मीद रहेगी कि उसके तेज गेंदबाज़ भी जल्दी असरदार साबित हों क्योंकि हार्दिक पंड्या की ग़ैर-मौजूदगी में जडेजा और कुलदीप पर दबाव बढ़ जाएगा.
याद रखना ज़रूरी है कि धर्मशाला में जब दोनों टीमें भिड़ी थीं तब जडेजा को अपने 10 ओवर में एक भी विकेट नहीं मिल सका था.
भारतीय कोच राहुल द्रविड़ ने सेमीफ़ाइनल से पहले स्टार स्पोर्ट्स से बात करते हुए कहा, “मैं ग़लत रहूँगा ये कहते हुए कि सेमीफ़ाइनल के पहले कोई दबाव नहीं है. क्रिकेट के खेल में किसी गेम को जीतने की कोई गारंटी नहीं होती. आप यही कर सकते हैं कि अच्छे तरीक़े से तैयारी करें और हम यही करते रहे हैं”.
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