श्रेयस अय्यर ने क्या दूर की नंबर चार पर बैटिंग की समस्या

श्रेयस अय्यर

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    • Author, विधांशु कमार
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

अगर किसी टीम में एक ऐसा बल्लेबाज़ है जो क्लासिकल बैटिंग में माहिर हो और साथ ही ऐसा ज़बरदस्त प्रहार के साथ शॉट्स खेलता हो कि गेंद 100 मीटर दूर जाकर गिरे तो वो बल्लेबाज़ उस टीम का स्टार बैटर ही कहलाएगा.

सितारों से सजी भारतीय टीम में एक से बढ़कर एक स्टार्स रहे, लेकिन उनके बीच एक ऐसे बल्लेबाज़ का पदार्पण हो चुका है जो इस वर्ल्ड कप के बाद अपनी साख दुनिया के गिने-चुने बल्लेबाज़ों में गिनवाएगा.

हम बात कर रहे हैं श्रेयस अय्यर की जो स्टार्स से सजे भारतीय टीम में अपना अलग ही मकाम बना रहे हैं.

इस वर्ल्ड कप में ऐसी बैटिंग कर रहे हैं जिसकी तारीफ राहुल द्रविड़, रिकी पोंटिंग से लेकर वसीम अकरम तक सभी कर रहे हैं.

रविवार को नीदलैंड्स के खिलाफ़ अय्यर ने नाबाद 128 रनों की पारी खेली और वर्ल्ड कप में अपना पहला शतक लगाया.

वर्ल्ड कप में नंबर चार पर शतक लगाने वाले वो सचिन तेंदुलकर और युवराज सिंह के बाद भारत के तीसरे बल्लेबाज़ बनें. आखिरी बार इस पोजीशन पर वर्ल्ड कप में शतक युवराज सिहं ने 2011 में लगाया था.

क्रिकेट जगत में चर्चा सिर्फ़ उनके रनों की नहीं हो रही बल्कि जिस परिपक्व अंदाज में उन्होंने अपनी पारी की संवारा उसने उनपर लगी उम्मीदों को कई गुणा बढ़ा दिया है.

इंटरनेशनल डेब्यू

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श्रेयस अय्यर आज भारतीय क्रिकेट के सबसे रोमांचक युवा बल्लेबाजों में से एक हैं. रणजी ट्रॉफी और आईपीएल में शानदार प्रदर्शन की मदद से उन्होंने 2017 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया, लेकिन उनकी यात्रा बेहद आसान नहीं रही. उन्हें कई बार चोटों और असफलताओं से गुज़रना पड़ा है, लेकिन हर बार वो मजबूत होकर ही वापस आए.

अय्यर ने दिसंबर 2017 में श्रीलंका के खिलाफ एकदिवसीय फॉरमैट में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया. उन्होंने अपने दूसरे मैच में अर्धशतक बनाया और उन्होंने जल्द ही ख़ुद को भारतीय टीम के नियमित सदस्य के रूप में स्थापित कर लिया.

कुछ महीने बाद उन्होंने अपना टी20आई डेब्यू किया. उन्हें 2019 क्रिकेट विश्व कप के लिए भारतीय टीम के लिए भी चुना गया. हालाँकि, कंधे की चोट के कारण वह टूर्नामेंट से चूक गए.

उन्होंने 2020 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ अपना पहला वनडे शतक बनाया और इसके बाद 2021 में उसी टीम के ख़िलाफ़ अपने टेस्ट डेब्यू में एक शतक और एक अर्धशतक लगाया.

लगातार चोटे की समस्या

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लेकिन अय्यर को अपने पूरे करियर में कई बार चोटों का सामना करना पड़ा है. कंधे की चोट के अलावा, जिसके कारण वह 2019 विश्व कप से बाहर हो गए, वह पीठ और हैमस्ट्रिंग की चोटों के कारण भी मैच नहीं खेल पाए.

इन चोटों ने उनकी लय बिगाड़ दी है और उनके लिए निरंतरता बनाए रखना मुश्किल हो गया है.

मौजूदा विश्व कप से पहले भी वो महीनों तक सर्जरी की वजह भारतीय टीम से बाहर रहे. उन्होंने लंबा समय एनसीए में रिकवरी में बिताया. एनसीए में उन्होंने कड़ी मेहनत की और फिटनेस टेस्ट पास कर वर्ल्ड कप से ठीक पहले वो भारतीय टीम में आ गए. हालांकि एशिया कप में एक बार फिर उन्हें स्प्रेन की वजह से वर्ल्ड कप में उनका खेलना मुश्किल समझा जाने लगा लेकिन अय्यर समय रहते भारतीय टीम में वापस आ गए.

शॉर्ट बॉल पर हुई समस्या

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चोटों के अलावा मीडिया ने कुछ पूर्व एकस्पर्ट्स ने अय्यर की एक और गलती पकड़ी जिसे मानने से उन्होंने इनकार कर दिया. दरअसल श्रेयश अय्यर को छोटी गेंद पर आउट होने की समस्या सामने आने लगी.

वो एक कंपल्सिव पुलर हैं और शॉट बॉल मिलने पर वो पुल या हुक करने पर मजबूर हो जाते हैं.

टीमों ने उनकी इस तथाकथित कमजोरी का फायदा उठाया ओर मिडविकेट बाउंड्री पर उन्हें कई बार कैच आउट करवाया. खुद श्रेयस अय्यर इसे अपनी कमज़ोरी नहीं मानते बल्कि वो कहते हैं कि वो कभी कभार शॉट खेलते हुए आउट हो जाते हैं क्योंकि वो एक नेचुरल स्ट्रोक प्लेयर हैं.

उनका मानना है कि अगर पुल शॉट्स से उनके रनों और चौकों को गिना जाए तो वो उनके आउट होने से कहीं ज्यादा है.

वैसे अगर श्रेयश अय्यर के लगभग 50 की औसत को देखें तो ये मानना मुश्किल हो जाता है कि उनकी बैटिंग में कोई बड़ी खामी है.

इस वर्ल्ड कप में भी अय्यर कुछ शॉट बॉल पर आउट हुए लेकिन उन्होंने बाद में बड़े स्कोर्स कर उनकी भरपाई कर दी.

अगर उनकी पिछली पांच पारियों को देखें तो एक चीज़ जो उन्होंने अपनी बैटिंग स्टाइल में बदली है वो है शुरुआती बैटिंग में रिस्क कम करना. कोलकाता में साउथ अफ्रीका के खिलाफ़ अपनी बैटिंग में उन्होंने इसका बेहतरीन उदाहरण दिया.

एक मुश्किल पिच पर बैटिंग करते हुए उन्होंने सिंगल्स और डबल्स पर ज़ोर दिया और हवाई शॉट्स कम खेलें. जब उनकी नजरें पूरी तरह से जम गईं तब उन्होंने हवा में बड़े शॉट्स खेले. ऐसी ही बैटिंग उन्होंने नीदरलैंड्स के खिलाफ़ भी दिखाई.

शुरू में आराम से खेलें और बाद में चौकों और छक्कों की बरसात लगा दी. उनका ये बैटिंग अप्रोच उन्हें एक महान खिलाड़ी बना सकता है क्योंकि उनके टैलेंट पर किसी को शक नहीं, बस ये देखना है कि उनका टेंपरामेंट किस तरह चैंपियन खिलाड़ियों की तरह आकार लेता है.

विश्व कप में कारनामे

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2023 क्रिकेट विश्व कप में, अय्यर भारत के सबसे सफल बल्लेबाजों में से एक रहे हैं. उन्होंने टूर्नामेंट में 400 से अधिक रन बनाए हैं, जिसमें नीदरलैंड्स के खिलाफ एक शतक भी शामिल है. उन्होंने मध्यक्रम में भी कुछ महत्वपूर्ण पारियां खेली हैं, जिससे भारत को महत्वपूर्ण मैच जीतने में मदद मिली है.

इस वर्ल्ड कप में अबतक 9 पारियों में उन्होंने 70 की औसत से 421 रन बनाए हैं जिसमें एक शतक और 3 अर्धशतक शामिल है. इस वर्ल्ड कप में सबसे रन बनाने की सूची में वो अभी आठवें स्थान पर हैं. भारतीय खिलाड़ियों में सिर्फ विराट कोहली और रोहित शर्मा ने उनसे ज्यादा रन बनाए हैं.

उनकी कोलकाता की पारी के बाद कमेंटेटर हर्षा भोगले ने कहा कि ये पारी उनके करियर की शायद सबसे बेहतरीन पारी है क्योंकि ये मुश्किल वक्त पर मुश्किल कंडीशंस में लगाया गया था.

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वो ऐसे बल्लेबाज़ हैं जो बैटिंग में अपना गियर बदलना जानते हैं. सर्कल में 5 फील्डर रहने के बावजूद वो सिंगल निकाल सकते हैं और दबाव बढ़ने पर हवा मे खेलकर बाउंड्रीज भी निकाल सकते हैं.
संजय मांजरेकर
पूर्व भारतीय क्रिकेटर

वहीं नीदरलैंड्स की पारी के बाद संजय मांजरेकर ने उनकी जमकर तारीफ की और कहा, ''वो ऐसे बल्लेबाज़ हैं जो बैटिंग में अपना गियर बदलना जानते हैं. सर्कल में 5 फील्डर रहने के बावजूद वो सिंगल निकाल सकते हैं और दबाव बढ़ने पर हवा मे खेलकर बाउंड्रीज भी निकाल सकते हैं.''

इससे पहले मांजरेकर ने श्रेयश की फिटनेस और छोटी गेंद पर आउट होने की आदत को जमकर लताड़ा भी था लेकनि अब वो भी अय्यर की खेल का मुरीद हो चुके हैं.

भारतीय कोच राहुल द्रविड़ भी श्रेयस अय्यर को एक स्पेशल प्लेयर मानते हैं जो दबाव में और बेहतर खेलता है.

द्रविड़ अय्यर को उनकी डेब्यू मैच से देख रहे हैं वो भी अय्यर की बल्लेबाजी कौशल और उनके स्वभाव के दीवाने हैं.

द्रविड़ मानते हैं कि अय्यर बहुत समझदार क्रिकेटर हैं और उन्हें खेल पर अच्छी पकड़ है जिसकी वजह से वो अलग-अलग परिस्थितियों में आसानी से ढल जाते हैं.

हालांकि, सभी पूर्व क्रिकेटर अय्यर को लेकर सकारात्मक नहीं रहे हैं. कुछ खिलाड़ियों ने उनकी कंसिसटेंसी की कमी और सॉफ्ट तरीकों से आउट होने की प्रवृत्ति के लिए उनकी आलोचना की है.

वर्ल्ड कप के पहले चार मैचों के बाद सुनील गावस्कर ने कहा कि अय्यर को 100 कैसे बनाना है सीखना होगा. वो ऐसी आसान पिचों पर और कमज़ोर गेंदबाज़ी के खिलाफ. अपना विकेट आसानी से गंवा नहीं सकते.

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान मिस्बाह उल हक ने भी उनकी फुटवर्क की निंदा की थी.

नंबर चार के शहंशाह

श्रेयस अय्यर और विराट कोहली

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लेकिन इन सब के बावजूद श्रेयस अय्यर एक वर्क इन प्रोग्रेस खिलाड़ी हैं, जो इस वर्ल्ड कप के बाद कंप्लीट पैकेज के रूप में उभर सकता है.

अय्यर ने भारतीय क्रिकेट की कई वर्षों से चल रही एक और बड़ी समस्या का निदान किया है और वो है वन डे मे नम्बर चार पर बैटिंग. युवराज सिंह के रिटायर होने के बाद भारतीय टीम को इस पोज़ीशन पर कोई भी ऐसा बल्लेबाज नहीं मिला जो लंबे समय तक खेल ओर सफलता से रन बनाए.

वनडे में नंबर चार की पोजिशन को सचिन तेन्दुलकर, राहुल द्रविड़, मोहम्मद अजहरुद्दीन ओर युवराज सिंह जैसे बल्लेबाज़ों अपनी बैटिंग से सजाया है. लेकिन युवी के रिटायर होने के बाद इस पोज़ीशन पर सुरेश रैना, धोनी, विजयशंकर, मनीष पांडे, केएल राहुल, केदार जाधव आजिंक्य रहाणे जैसे कई बल्लेबाजों को आजमाया गया लेकिन कोई भी इस पोजिशन पर सफल नहीं हो सका.

नंबर चार की समस्या भारतीय टीम को लगभग 10 साल से परेशान करती आई तभी श्रेयस अय्यर को इस पोजिशन पर मौका मिला.

श्रेयश ने इस पोज़ीशन को अपना बनाने में ज़रा भी देरी नहीं की. उन्होंने अबतक नंबर 4 पर खेलते हुए 31 पारियों में 52 की औसत से 1288 रन बनाए हैं जिसमें 3 शतक और 8 अर्धशतक शामिल है. सभी मैचों को मिलाकर उन्होंने 51 पारियों 49.38 की औसत से 2222 रन बनाए हैं जिनमें 4 शतक और 17 अर्धशतक शामिल है.

कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू के बाद से श्रेयस अय्यर का सफर मिश्रित रहा है. उन्होंने अपनी प्रतिभा की झलक तो दिखाई है, लेकिन वह असफल भी रहे हैं. हालाँकि, वह अभी भी एक युवा खिलाड़ी है और उनमें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक बनने की क्षमता है.

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