श्रेयस अय्यर और ईशान किशन के धमाके में उड़ गया दक्षिण अफ्रीका

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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

09 अक्तूबर, 2022
भारत बनाम दक्षिण अफ़्रीका, रांची.
दक्षिण अफ़्रीका: 278/7, मार्करम - 79, हैंड्रिक्स - 74
भारत: 282/3, श्रेयस अय्यर - 113, ईशान किशन - 93

श्रेयस अय्यर के शतक और ईशान किशन की आक्रामक बल्लेबाज़ी के दम पर भारत ने रांची में खेले गए दूसरे वनडे में दक्षिण अफ़्रीका को सात विकेट से हराकर तीन मैचों की सीरीज में एक-एक की बराबरी कर ली है.
अब इस सीरीज का फैसला दिल्ली में खेले जाने वाले तीसरे वनडे मैच से होगा.
श्रेयस अय्यर ने लखनऊ में खेले गए पहले मैच में भी शानदार पारी खेली थी, पर वह जल्दबाजी करने की वजह से टीम को जीत तक नहीं पहुंचा सके थे. लेकिन उन्होंने रांची में अपनी इस गलती को सुधारा और मैच विनर की भूमिका निभाकर टीम को जीत तक पहुंचाया.
भारत के पहले दो विकेट कप्तान शिखर धवन (13) और शुभमन गिल (28) के जल्दी निकल जाने पर ईशान किशन भी थोड़े दवाब में दिख रहे थे. पर श्रेयस ने आते ही खुलकर खेलकर जल्द गेंदबाजों के दवाब को हटाया. इससे ईशान किशन को भी अपने मैदान पर खुलकर खेलने की प्रेरणा मिली. ईशान के एक बार मोर्चा संभाल लेने के बाद वह साझेदारी में जल्दी ही बड़े भाई की भूमिका में आ गए.
ईशान में दिखा धोनी वाला माइंड सेट

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ईशान किशन ने अपने वनडे क्रिकेट के पहले शतक से मात्र सात रन से दूर रह जाने पर मैच के बाद अफसोस जाहिर किया. पर साथ ही भविष्य में भारत को और जीतें दिलाने में अहम भूमिका निभाने की बात कही.
यह माइंड सेट महेंद्र सिंह धोनी के शहर रांची के खिलाड़ी में ही मिल सकता है. ईशान किशन भले ही शतक लगाने से चूक गए और पर वह अपने घरेलू दर्शकों का अपने बल्लेबाजी के कमाल से दिल जीतने में जरूर सफल रहे.
ईशान किशन ने एक बार अपनी बल्लेबाजी कर गियर बदला तो उन्हें थामना दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों के वश में नजर नहीं आया. इस बात को उनकी 84 गेंद की 93 रनों वाली पारी से समझा जा सकता है. इसमें उन्होंने सात छक्के और चार चौके लगाए. उन्होंने नॉर्किया के एक ओवर में दो छक्के और एक चौका लगाकर दक्षिण अफ्रीका की मैच पर से पकड़ एकदम से खत्म कर दी.
यह सही है कि ईशान को आउट होने से पहले 86 रन के स्कोर पर एक जीवनदान भी मिला. रबाडा अपनी ही गेंद पर आए उनके कैच को पकड़ने में सफल नहीं हो सके. रबाडा इससे पहले शुभमन गिल का इससे कहीं मुश्किल कैच पकड़ चुके थे. लेकिन ईशान इस समय तक भारतीय टीम को जीत की राह पर बढ़ाकर अपनी जिम्मेदारी को एक हद तक निभा चुके थे.
मैच विनर की भूमिका में श्रेयस अय्यर

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श्रेयस अय्यर एक समय भारत की तीनों फॉर्मेट की टीमों में खेलने लगे थे. लेकिन वह कुछ महत्वपूर्ण मौकों पर अच्छी पारियां नहीं खेल पाने की वजह से विश्व कप की टीम में भले ही स्थान नहीं बना सके हैं पर सुरक्षित खिलाड़ियों में शामिल हैं.
उनका यह प्रदर्शन विश्व कप में भाग लेने वाली टीम के प्रबंधन का भरोसा तो बढ़ाएगा ही, क्योंकि कोई जरूरत पड़ने पर वह तैयार हैं. साथ ही अगले साल घर में होने वाले विश्व कप के लिए अपनी दावेदारी को मजबूत किया है.
श्रेयस ने अपने वनडे कॅरियर का दूसरा शतक ही नहीं लगाया, बल्कि वनडे कॅरियर का सबसे बड़ा स्कोर 113 रन बनाया है.
इससे पहले उनका सबसे ज्यादा स्कोर 103 रन था, जिसे उन्होंने 2020 में न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाया था. इस पारी की खूबी यह थी कि उन्होंने संयम बरतते हुए छक्के लगाने से रोके रखा. उन्होंने इस पारी में 15 चौके लगाए. इसके बावजूद वह 101.80 की स्ट्राइक रेट से रन बनाने में सफल रहे.
श्रेयस और ईशान ने साझेदारी पर दिया जोर

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भारत को पहले दो झटके जल्दी लग जाने पर श्रेयस और ईशान किशन ने रनों की रफ्तार के चक्कर में पड़ने के बजाय साझेदारी बनाने पर जोर दिया.
दोनों ही बल्लेबाजों ने दौड़कर रन लेने के मौके बर्बाद नहीं किए. दोनों के ही करीब-करीब एक साथ अर्धशतक पूरा करने में सफल रहे. पर इसके बाद ईशान ने आक्रामक रुख अपनाकर पहल को अपने हाथों में ले लिया.
ईशान किशन और श्रेयस ने तीसरे विकेट की साझेदारी में 161 रन की साझेदारी से भारत को जीत की राह पर बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई. इस दौरान ईशान ने कुछ बेहतरीन छक्कों को लगाकर दर्शकों का मन मोह लिया. यह वह दौर था, जब सारा स्टेडियम ईशान के नारों से गूंज रहा था.
ईशान किशन के आउट होने के बाद एक समय ऐसा भी आया, जब भारत मुश्किल में नजर आया.
इस दौरान टीम के 220 रन के स्कोर पर श्रेयस को फॉर्टेन की गेंद पर एलबीडब्ल्यू की अपील पर अंपायर के आउट नहीं देना बचा गया, क्योंकि इस मौके पर डीआरएस लेने पर आधी गेंद ही स्टंप पर लग रही थी.
इस मौके पर यदि वह आउट हो जाते तो भारत मुश्किल में पड़ सकता था. पर इसके बाद कप्तान संजू सैमसन और श्रेयस की जोड़ी ने टीम को जीत तक पहुंचा दिया.
सिराज और शार्दुल की उम्दा गेंदबाजी

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मोहम्मद सिराज और शार्दुल ठाकुर ने इस मुक़ाबले में बेहतरीन गेंदबाजी का प्रदर्शन किया. लखनऊ के विकेट की तरह यहां का विकेट साफ्ट नहीं था. इस कारण विकेट में ज्यादा उछाल नहीं होने से पेस गेंदबाजों के सफल होना मुश्किल हो रहा था. लेकिन दोनों ने गेंदों की गति में बदलाव लाकर और सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करके बल्लेबाजों को परेशान किए रखा.
दक्षिण अफ्रीका ने 40 ओवरों में 221 रन बना लिए थे और वह आखिरी 10 ओवरों में 300 रन के करीब पहुंच सकती थी. लेकिन सिराज और शार्दुल ने इन 10 ओवरों में सिफ 57 रन बनाने दिया और इससे ही लक्ष्य भारत की पहुंच में बना रहा.
एडन मार्करम (79) और रीज़ा हैंड्रिक्स (74) ने 129 रन की साझेदारी बनाकर दक्षिण अफ्रीका को मजबूती की तरफ बढ़ाया. लेकिन सिराज ने हैंड्रिक्स का आउट करके पहले भारत को दिलाई. इससे पहले खतरनाक खिलाड़ी क्विंटन डिकॉक को बोल्ड करके शुरुआत में ही झटका दिया. केशव महाराज उनके तीसरे शिकार बने.
शार्दुल ठाकुर ने भी अहम मौके पर पार्नेल का विकेट निकालकर रन गति पर लगाम लगाने में अहम भूमिका निभाई. बवुमा तेम्बा की अनुपस्थिति में कप्तानी कर रहे केशव महाराज टॉस जीतने के बाद सही फैसला नहीं ले सके.
उन्होंने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का गलत फैसला करके भारत को एक तरह से बढ़त दिला दी. उन्हें लगा होगा कि लखनऊ की तरह ही यहां भी बाद में गेंदबाजी करने पर ओस नहीं पड़ेगी. लखनऊ में बादल छाए रहने के कारण ओस नहीं पड़ी थी लेकिन यहां ओस पड़ने की वजह से बाद में गेंदबाजी करना गलत फैसला हो गया, क्योंकि गेंद गीले होने का गेंदबाजों को नुकसान हुआ.
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