मुख्य चुनाव आयुक्त बोले- ‘एक देश, एक चुनाव’ के लिए हम तैयार, आख़िरी फ़ैसला सरकार के हाथ- प्रेस रिव्यू

मुख्य चुनाव आयुक्त

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इमेज कैप्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा है कि भारत का चुनाव आयोग पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए तैयार है लेकिन इस मामले पर आख़िरी फ़ैसला संसद के हाथ में है.

अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया के सवाल पर चुनाव आयुक्त ने ये प्रतिक्रिया दी. आज प्रेस रिव्यू में सबसे पहले ये ख़बर.

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, “एक देश एक चुनाव व्यवस्था के तहत निश्चित रूप से एक बहुत बड़े तंत्र की ज़रूरत है लेकिन ये एक ऐसा मुद्दा है जिसपर संसद को फ़ैसला करना होगा. संसदीय और विधानसभा चुनाव एक साथ कराना चुनाव आयोग के क्षेत्राधिकार में नहीं आता. हालांकि, हमने सरकार को ये बता दिया है कि एक साथ चुनाव के प्रबंधन के लिए चुनाव आयोग पूरी तरह तैयार है.”

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार बुधवार को पुणे में चुनाव आयोग के विषेश अभियान की शुरुआत करने के लिए पहुंचे थे.

इस दौरान उन्होंने कहा, “मेट्रो शहरों में चुनाव के लिए लोगों की उदासीनता सबसे बड़ी चुनौती है और इससे लोगों की भागीदारी बढ़ाकर ही निपटा जा सकता है.”

लोकसभा और विधानसभाओं के एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था लागू कराना आसान नहीं होगा.

इसके लिए संविधान में संशोधन करना होगा, दल-बदल क़ानून में संशोधन करना होगा. इसके अलावा जनप्रतिनिधि क़ानून और संसदीय प्रक्रिया से जुड़े अन्य क़ानूनों में भी बदलाव करने होंगे.

चुनाव आयुक्त ने ये भी बताया कि देश में 100 साल से अधिक उम्र वाले 2.49 लाख मतदाता हैं और करीब 1.8 करोड़ वोटर 80 साल से अधिक उम्र के हैं. चुनाव आयोग अब उन युवाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो 18 साल के होने जा रहे हैं.

टीवी चैनलों पर ‘देशहित’ में कार्यक्रम चलाना होगा ज़रूरी

अनुराग ठाकुर

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इमेज कैप्शन, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर

केंद्रीय कैबिनेट ने ‘भारत में टेलिविज़न चैनलों के लिए अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग के लिए नए दिशानिर्देशों’ को मंज़ूरी दे दी है. इसके तहत अब हर चैनल के लिए रोज़ाना राष्ट्र और समाज के हित में कार्यक्रम चलाना अनिवार्य हो जाएगा.

अंग्रेज़ी अख़बार ‘द इंडियन एक्स्प्रेस’ की ख़बर के अनुसार, नए दिशानिर्देश 9 नवंबर से ही लागू हो गए हैं. हालांकि, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि चैनलों को इस तरह का कंटेंट सोचने और बनाने के लिए समय दिया जाएगा.

अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हर चैनल को ‘समाज सेवा और देशहित’ से जुड़ा कार्यक्रम रोज़ कम से कम 30 मिनट तक चलाना होगा. ये कार्यक्रम कैसा होगा, इसके लिए चैनलों को आठ थीम दी गई हैं. सरकार के अनुसार ये क़दम इसलिए उठाया गया है क्योंकि एयरवेव्स सार्वजनिक संपत्ति है और इसका इस्तेमाल समाज के हित में होना चाहिए.

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नए दिशानिर्देशों के अनुसार, “चूंकि एयरवेव्स/फ़्रीक्वेंसी सार्वजनिक संपत्ति है और इसका इस्तेमाल समाज की बेहतरी के लिए होना चाहिए, इसलिए जिन कंपनियों के पास चैनल अपलिंक करने और भारत में इसे डाउनलिंक करने की मंज़ूरी है उन्हें एक दिन में कम से कम 30 मिनट के लिए राष्ट्री महत्व और समाज से जुड़े मुद्दे पर कार्यक्रम दिखाने होंगे." “ये कार्यक्रम शिक्षा और साक्षरता का प्रसार, कृषि और ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, विज्ञान एवं तकनीकी, महिला कल्याण, समाज के कमज़ोर वर्गों के कल्याण, पर्यावरण और सांस्कृति धरोहरों के संरक्षण और राष्ट्रीय अखंडता से जुड़े होने चाहिए.”

अख़बार ने सूचना एवं प्रसारण सचिव अपूर्व चंद्र के हवाले से बताया है कि प्रसारकों और अन्य संबंधित इकाइयों से चर्चा के बाद जल्द ही इस कार्यक्रम के लिए टाइम स्लॉट और लागू करने की तारीख भी जारी कर दी जाएगी.

उन्होंने कहा मंत्रालय चैनल पर चलने वाले कंटेंट की निगरानी करेगा और अगर कोई नियमों की अनदेखी करता पाया गया तो उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा. 

मंत्रालय ने कहा कि वाइल्डलाइफ़ और विदेशी चैनलों को नियमों से छूट मिल सकती है. वहीं, स्पोर्ट्स चैनल को लाइव टेलीकास्ट के दौरान नियमों से छूट मिलेगी. 

 नए दिशानिर्देशों में समाचार एजेंसियों के लिए पाँच साल की मंज़ूरी पाने का भी प्रावधान किया गया है, जबकि ये अभी एक साल के लिए मिलता है.

गुजरात: चुनावी दौड़ से विजय रुपाणी और नितिन पटेल का बाहर होना क्या बीजेपी की रणनीति?

विजय रुपाणी

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इमेज कैप्शन, विजय रुपाणी (फ़ाइल फ़ोटो)

विधानसभा चुनाव से पहले गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी, उनकी सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे नितिन पटेल सहित अन्य पूर्व कैबिनेट मंत्रियों ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया है.

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने ये क़दम ऐसे समय उठाया है जब बीजेपी के राष्ट्रीय संसदीय बोर्ड ने बुधवार से ही चुनाव के उम्मीदवारों के चयन के लिए अहम बैठकें शुरू कर दी हैं.

अंग्रेज़ी अख़बार ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के अनुसार विजय रुपाणी ने अपने निर्णय का एलान राजकोट में किया, तो वहीं नितिन पटेल ने प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल को आगामी चुनाव न लड़ने के अपने फ़ैसले के बारे में चिट्ठी लिखकर जानकारी दी है.

 इसके साथ ही पूर्व मंत्री कौशिक पटेल, सौरभ पटेल, आरसी फ़ल्दू, भूपेंद्र सिंह चुडास्मा और प्रदीप सिंह जाडेजा ने भी चुनावी दौड़ से बाहर होने का फ़ैसला किया है.

 इनमें से अधिकतर नेता नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान उनकी सरकार का हिस्सा रह चुके हैं. इसके बाद ये नेता आनंदीबेन पटेल और 2016-21 तक रुपाणी सरकार में भी शामिल रह चुके हैं.

गुजरात चुनाव

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इमेज कैप्शन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विजय रुपाणी(दाएं) और नितिन पटेल (फ़ाइल तस्वीर)

पार्टी सूत्रों के हवाले से अख़बार ने लिखा है कि माना जा रहा था कि विजय रुपाणी की सरकार में रहने वाले अधिकतर नेताओं को इस बार उम्मीदवारों की सूची में जगह नहीं मिलेगी. बीते साल बीजेपी आलाकमान ने गुजरात में विजय रुपाणी की बजाय भूपेंद्र पटेल को सीएम बनाया था और पूरी कैबिनेट बदल दी थी.

विजय रुपाणी ने कहा, “मैंने सबके सहयोग से पाँच साल तक मुख्यमंत्री पद संभाला. इस चुनाव में, नए कार्यकर्ताओं को ज़िम्मेदारी दी जानी चाहिए. मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा, मैंने शीर्ष नेताओं को चिट्ठी लिखी है और दिल्ली भी सूचना पहुंचा दी है. हम चुने हुए उम्मीदवारों को जिताने के लिए मिलकर काम करेंगे.”

पार्टी के सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में लिखा गया है कि ये बीजेपी की सोची-समझी नीति के तहत हो रहा है क्योंकि पार्टी लगातार सातवीं बार जीत हासिल करने के लिए नए चेहरों को मैदान में उतारना चाहती है. बीजेपी ने 1995 में गुजरात का चुनाव जीता था, इसके बाद से राज्य में किसी और पार्टी की सरकार नहीं बनी है. 

माना जा रहा है कि राज्य में सरकार विरोधी भावनाओं को दबाने के लिए भी ये कदम रणनीति के तहत उठाया गया है.

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