जोकोविच के फ़्रेंच ओपन के दौरान दिए सियासी संदेश पर क्यों मचा घमासान?

नोवाक जोकोविच

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चर्चित टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं.

सर्बिया के नोवाक जोकोविच पहले भी अपने अंदाज़ और बयानों के कारण चर्चा में रहे हैं. लेकिन इस बार मामला थोड़ा राजनीतिक हैं.

इस समय फ़्रेंच ओपन चैंपियनशिप चल रही है.

सोमवार को 36 वर्षीय जोकोविच ने पहले राउंड के मैच के बाद कैमरे के लेंस पर लिखा- 'कोसोवो सर्बिया का दिल है. हिंसा रोको.'

लेकिन फ़्रेंच ओपन के दौरान जोकोविच के इस तरह के सार्वजनिक संदेश पर सवाल उठ रहे हैं.

फ़्रांस की खेल मंत्री ने तो यहां तक कह दिया कि जोकोविच ने जो किया वो उचित नहीं था और ऐसा फिर नहीं होना चाहिए.

दूसरी ओर नोवाक जोकोविच ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि वे जानते हैं कि कोसोवो के बारे में एक राजनीतिक संदेश लिखने के कारण लोग उनसे सहमत नहीं होंगे, लेकिन ये एक ऐसा मुद्दा है, जिसके लिए वे खड़े रहेंगे.

हालांकि दूसरे दौर का मैच जीतने के बाद जोकोविच ने कैमरे के लेंस पर अपने हस्ताक्षर किए, जो टेनिस खिलाड़ी हमेशा से करते आए हैं.

नोवाक जोकोविच

बयान को लेकर उठा विवाद

मैच के बाद पत्रकारों से बातचीत में जोकोविच ने इस विवाद को टालने की कोशिश की. लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें पता है कि कई लोग उनसे सहमत नहीं होंगे. लेकिन जो है, वो ऐसा ही है.

अंतरराष्ट्रीय टेनिस फ़ेडरेशन ने इस मामले पर कहा है "जोकोविच ने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया है क्योंकि ग्रैंड स्लैम के नियम में राजनीतिक बयानों पर पाबंदी की बात नहीं है."

कोसोवो के ओलंपिक अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) से जोकोविच के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है.

कोसोवो के अधिकारियों ने जोकोविच पर राजनीतिक तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया है.

वहीं फ़्रांस की खेल मंत्री एमिली ओडिया कैस्टेरा ने भी कहा है कि खेल के मैदान पर निष्पक्षता की आवश्यकता होती है.

उन्होंने ये भी कहा कि रूस के हमले के बाद यूक्रेन के लिए उनके समर्थन वाले संदेश को अलग तरीक़े से देखना चाहिए.

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रविवार को यूक्रेन की खिलाड़ी मार्ता कोस्तयुक ने बेलारूस की खिलाड़ी एरिना सबालेंका से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया था. इसके बाद दर्शकों ने यूक्रेन की खिलाड़ी की हूटिंग की. लेकिन फ़्रांस की खेल मंत्री ने यूक्रेन की खिलाड़ी का समर्थन किया.

बेलारूस रूस का पड़ोसी है और सहयोगी देश है. यूक्रेन पर हमले के लिए बेलारूस ने रूस को अपनी ज़मीन का इस्तेमाल करने दिया था.

मार्ता कोस्तयुक

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जोकोविच का कोसोवो से पुराना नाता

जोकोविच के पिता का जन्म कोसोवो में हुआ था.

हाल ही में जोकोविच ने कहा था कि वे युद्ध, हिंसा और किसी तरह के संघर्ष के ख़िलाफ़ हैं, लेकिन कोसोवो की स्थिति अंतरराष्ट्रीय क़ानून के उल्लंघन की एक मिसाल है.

जोकोविच ने कहा था, "ख़ासकर उस व्यक्ति के बेटे के तौर पर, जिसके पिता का जन्म कोसोवो में हुआ. मुझे लगता है कि मुझे अपने लोगों और पूरी सर्बिया को समर्थन देना चाहिए."

जोकोविच ने कहा था, "कोसोवो हमारा गढ़ है, हमारे देश की कई महत्वपूर्ण चीज़ों का केंद्र है. मैंने कैमरे पर जो संदेश लिखा था, उसके कई कारण हैं."

उन्होंने कहा कि कोसोवो में जो हो रहा है, सर्बिया का नागरिक होने के नाते उन्हें इसका काफ़ी दुख है.

जोकोविच ने कहा, "हमारे लोगों को म्युनिसिपल दफ़्तरों से निकाला जा रहा है. इसलिए कम से कम इतना तो मैं कर ही सकता हूँ."

कोसोवो में क्या चल रहा है?

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कोसोवो ने साल 2008 में सर्बिया से आज़ादी का ऐलान कर दिया था. हालांकि सर्बिया ने कभी भी कोसोवो की आज़ादी को मान्यता नहीं दी.

हाल के दिनों में कोसोवो में हिंसा हुई है. सर्ब प्रदर्शनकारियों की पुलिस और नेटो सेना से झड़प भी हुई है.

मामला देश के उत्तरी इलाक़े में अल्बानिया मूल के महापौरों की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है.

हिंसा के बाद नेटो ने वहां और सैनिकों को तैनात किया है, क्योंकि हिंसा में इसके 30 शांतिरक्षक जवान घायल हो गए थे.

कोसोवो को मान्यता न देने वाले कई देश हैं. सर्बिया भी कोसोवो को मान्यता न देने की अपनी नीति पर क़ायम है.

कोसोवो में अभी अल्बानियाई मूल के लोगों की सरकार है. लेकिन सर्ब लोगों का मानना है कि ये उनका देश का दिल है. सर्बियाई ऑर्थोडॉक्स चर्च के कई महत्वपूर्ण प्रार्थनास्थल कोसोवो में हैं, इस लिहाज़ से भी ये सर्बिया के लिए महत्वपूर्ण है.

लेकिन कोसोवो में रहने वाले 18 लाख लोगों में 92 प्रतिशत अल्बानियाई है और सिर्फ़ छह प्रतिशत ही सर्बियाई हैं.

कोसोवो की सीमा उत्तर और पूर्व में सर्बिया और मॉन्टेनेग्रो, पश्चिम में अल्बानिया और दक्षिण में उत्तरी मेसिडोनिया से जुड़ी हुई है.

नोवाक जोकोविच

कोसोवो को कैसे मिली आज़ादी?

1990 के दशक में यूगोस्लाविया से अलग होने के बाद कोसोवो ने स्वायतत्ता और आज़ादी की मांग की.

सर्बिया ने आज़ादी की मांग कर रहे अल्बानियाई मूल के लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की. ये कार्रवाई 1999 में ख़त्म हुई, जब मार्च और जून के बीच नेटो ने यहां बमबारी की.

सर्बियाई सेना कोसोवो से पीछे हट गई. लेकिन कोसोवो के कई अल्बानियाई और सर्ब लोगों के लिए संघर्ष का समाधान नहीं निकला.

नेटो की अगुआई वाली कोसोवो फ़ोर्स अब भी कोसोवो में है. फ़िलहाल इनकी संख्या 3762 है.

2008 में कोसोवो ने आज़ादी की घोषणा कर दी.

संयुक्त राष्ट्र में शामिल 193 देशों में से 84 देश कोसोवो की आज़ादी को मान्यता देते हैं. इनमें अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के 27 में से 22 देश हैं.

लेकिन रूस और चीन ने कोसोवो की संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता को रोक दिया.

पहले भी विवादों में रहे हैं जोकोविच

लंबे समय तक नंबर वन टेनिस खिलाड़ी रहे नोवाक जोकोविच कई बार विवादों में रहे हैं.

सबसे बड़ा विवाद साल 2022 में ऑस्ट्रेलियन ओपन के दौरान हुआ था.

उस समय ऑस्ट्रेलियन ओपन में हिस्सा लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया जाने से पहले उनके लिए कोरोना वैक्सीन लेना ज़रूरी था.

जोकोविच कोरोना वैक्सीन के विरोधी रहे हैं, ऐसे में उन्होंने वैक्सीन लेने से इनकार कर दिया. मेलबर्न पहुंचने पर जोकोविच का वीज़ा रद्द कर दिया गया और उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा गया.

इसे लेकर काफ़ी हंगामा हुआ. मामला अदालत तक गया और आख़िरकार ऑस्ट्रेलिया की एक अदालत ने वीज़ा रद्द करने के फ़ैसले को ख़ारिज करते हुए जोकोविच की रिहाई का आदेश दिया.

लेकिन वे ऑस्ट्रेलियन ओपन में नहीं खेल पाए और उन्हें वापस लौटना पड़ा.

वीडियो कैप्शन, नोवाक जोकोविच: वाक्सीन लगवाने के बजाय ख़िताबों का त्याग करने को तैयार

कोविड के शुरुआती दौर में जोकोविच ने बाल्कन देशों में टेनिस के कई मैच आयोजित कराए थे, जिसे एड्रिया टुअर कहा जाता है.

इसमें कई खिलाड़ी शामिल भी हुए. लेकिन दूसरे हफ़्ते में कई खिलाड़ी कोविड पॉज़िटिव हो गए.

इसके बाद जोकोविच की काफ़ी आलोचना हुई. कई लोगों ने उनके फ़ैसले को मुर्खतापूर्ण कहा.

साल 2020 में यूएस ओपन के दौरान हताशा में जोकोविच ने टेनिस गेंद लाइन जज को मार दी थी.

गेंद लाइन जज की गर्दन पर जाकर लगी थी. इसके बाद जोकोविच को उस साल यूएस ओपन से डिस्क्वालिफ़ाई कर दिया गया था.

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