नोवाक जोकोविच कोरोना वैक्सीन के विरोधी क्यों हैं?

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दुनिया के पहले नंबर के सर्बियाई टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में हैं.
मामला वैक्सीन से जुड़ा है जिसे लेकर उनकी ऑस्ट्रेलिया सरकार से ठन गई जिसने जोकोविच के एयरपोर्ट पर पहुँचने के बाद उनका वीज़ा रद्द कर दिया और उन्हें एक डिटेंशन सेंटर में रोक लिया गया.
मामला अदालत तक गया और आख़िरकार इस सप्ताह ऑस्ट्रेलिया की एक अदालत ने वीज़ा रद्द करने के फ़ैसले को ख़ारिज करते हुए जोकोविच की रिहाई का आदेश दिया.
इसके बाद अब मौजूदा ऑस्ट्रेलियाई ओपन चैंपियन जोकोविच 17 जनवरी से शुरू होनेवाले साल के पहले ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट में खेल सकेंगे.
मगर इस सारे विवाद के मूल में है कोरोना वैक्सीन. आख़िर जोकोविच ने वैक्सीन क्यों नहीं ली है? इसके पीछे क्या है उनकी सोच?
दुनिया के दिग्गज टेनिस स्टार 34 वर्षीय नोवाक जोकोविच ने आधिकारिक तौर पर नहीं कहा है कि उन्होंने कोरोना की वैक्सीन ली है या नहीं. मगर पूर्व में वो खुलकर टीकों का विरोध करते रहते हैं.
वर्ष 2020 के अप्रैल महीने में जोकोविच ने कहा था कि वो वैक्सीन दिए जाने का विरोध करते हैं.
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जोकोविच ने ये बात उस समय कही थी जब दुनिया में कोरोना की पहली लहर थी, और तब टीके आए भी नहीं थे.
बाद में उन्होंने ये कहते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की कि उनका आशय ये था कि वो कोई "विशेषज्ञ" नहीं हैं, और वो बंद दिमाग़ नहीं हैं लेकिन चाहते हैं कि "उनके शरीर के लिए क्या अच्छा है इसका फ़ैसला करने का विकल्प उनके ही पास हो".
जोकोविच ने एक फ़ेसबुक लाइव कार्यक्रम में बताया कि वो ये नहीं चाहते कि "यात्रा करने या प्रतियोगिताओं में शामिल होने के लिए कोई उनपर टीका लगवाने के लिए दबाव डाले".
उन्होंने साथ ही ये भी जोड़ा कि वो "सेहत को लेकर सजग हैं और जानना चाहते हैं कि कैसे हम अपने शरीर को मज़बूत बनाएँ ताकि हम कोविड-19 जैसे हमलों से बच सकें".
जोकोविच यूरोप के जिस देश सर्बिया के नागरिक हैं, वहाँ तब सरकार के महामारी विशेषज्ञ प्रेडराग कोन ने उनकी आलोचना की थी और आरोप लगाया था कि जोकोविच लोगों के मन में "ग़लत सोच" डाल रहे हैं.

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विज्ञान पर संदेह
जोकोविच पहले भी विज्ञान से जुड़ी बातों पर संदेह जताते रहे हैं.
अपनी किताब "सर्व टू विन" में जोकोविच ने लिखा है कि कैसे 2010 में वो एक न्यूट्रिशनिस्ट से मिले जिसने उनसे कहा कि वो अपने बाएँ हाथ से एक ब्रेड का टुकड़ा पकड़े और दाएँ हाथ को दबाए.
जोकोविच ने दावा किया कि उन्हें ऐसा करते हुए बहुत कमज़ोरी लगी और इससे इस बात का सुबूत मिला कि वो ग्लुटेन को नहीं सहन कर सकते.
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ऐसे ही एक इंस्टाग्राम लाइव में, जोकोविच ने दावा किया कि सकारात्मक सोच से संक्रमित पानी साफ़ हो सकता है, और ये भी कहा कि वैज्ञानिकों ने ये दिखाया है कि "कैसे पानी के अणु हमारी भावनाओं के अनुसार प्रतिक्रिया करते हैं".
ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के सेंटर फ़ॉर एविडेंस-बेस्ड मेडिसीन के रिसर्चर डॉक्टर डेविड नुनान के अनुसार "इस बात की संभावना बहुत कम है कि उनके इन बयानों में कोई सच्चाई हो, कम से कम अभी जो सिद्धांत हैं उनके मुताबिक़".
इसके पहले कोरोना महामारी के ही दौर में, जोकोविच की पत्नी ने इंस्टाग्राम पर 5G की कॉन्सपिरेसी थ्योरी को शेयर किया था. इसे सोशल नेटवर्क पर डिसइन्फ़ॉर्मेशन क़रार दिया गया.

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वैक्सीन विरोधी कार्यकर्ता
जोकोविच को लेकर अभी ऑस्ट्रेलियाई ओपन के दौरान हुए विवाद से वैक्सीन विरोधी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है. हालाँकि, जोकोविच ने कभी भी खुलकर उनका समर्थन नहीं किया है.
सोशल नेटवर्क टेलीग्राम पर वैक्सीन विरोधी लोग उन्हें एक नायक की तरह पेश कर रहे हैं और अपनी पसंद चुनने की आज़ादी का प्रतीक ठहरा रहे हैं.
ट्विटर पर उनके समर्थन में हैशटैग भी चले और ऑस्ट्रेलियाई ओपन का बहिष्कार तक करने की माँग उठी.
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